पीजीआई में ठेकेदारों की मनमानी, अनुबंध कर्मी परेशान

राकेश कुमार चंडीगढ़, 23 जून। पीजीआई  प्रबंधन ने अपना सफाई और अस्पताल अटेंडेंट और सुरक्षा का पूरा जिम्मा प्राइवेट सुरक्षा एजेंसियों और ठेकेदारों को सौंप रखा है। ठेकेदार अपनी मनमर्जी से कर्मचारियों को वेतन और अन्य भत्ते देते हैं, जिससे न तो इन कर्मचारियों के परिवार का पोषण ठीक प्रकार से हो पाता और न ही वह अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा पाते हैं। पीजीआई में  पिछले तीन माह में  तीन ठेकेदार बदल गए हैं। बार-बार ठेकेदारों को बदलने का खमियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि ठेकेदार के बदलने पर न तो उन्हें समय पर वेतन मिल रहा है और न ही उन्हें डीसी रेट के अनुसार वेतन दिया जा रहा है। पीजीआई प्रबंधन ने  जिन दो ठेकेदारों को ठेका दिया है, इनमें एक हेल्पलाइन और दूसरा स्काईलार्क है, जो पीजीआई में पिछले 10 सालों से कार्यरत कर्मी हैं उन्हें 3300 और 4100  रुपये मासिक वेतन दे रहा है।  मात्र 3300 रुपए वेतन देने के साथ उन्हें वर्दी लेने केलिए 1000 रुपए जमा करवाने केलिए कहा जा रहा है। इस पर संस्थान में कार्यरत 600 के करीब अस्पताल अटेंडेंट और 800 सफाई कर्मचारियों का कहना है कि अगर हम तीन ओर चार हजार रुपए में से हजार रुपए वर्दी के लिए दे देंगे तो परिवार का पेट कैसे भरेंगे। इस पर आज पीजीआई अनुबंध वर्कर यूनियन ने सेक्टर-25 धरना स्थल में रोष प्रदर्शन कर संस्थान प्रबंधन और ठेकेदारी प्रथा को कोसा। यूनियन के प्रधान गोपाल ने कहा कि संस्थान में इससे पहले रहे ठेकेदारों ने कर्मचारियों को इस प्रकार तंग नहीं किया जैसे अब किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  वर्ष 1995 से जो ड्रेस चली आ रही थी उसे अब बदला जा रहा है ओर नई ड्रेस लेने के लिए एक हजार रुपये जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है,जो सरासर अन्याय है। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी ठेकेदार ने कर्मचारियों के पहचान पत्र बनाने से पूर्व उनके दसवीं के असली  प्रमाण पत्र नहीं मांगे, लेकिन अब स्काईलार्क और हेल्पलाइन के ठेकेदार कर्मियों से असली प्रमाण पत्र देने की मांग कर रहे हैं। यूनियन के अन्य पदाधिकारियों ने कहाकि  संस्थान प्रबंधन इस बात को जानते हुए भी चुप्पी साधे हुए है।  कुछ कर्मचारियों ने कहा कि  सफाई कर्मचारियों से नर्सों का काम करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार  कर्मियों को धमकी देता है कि जो नई ड्रेस नहीं डालेगा उसे  नौकरी से  हाथ धोने पड़  सकते हैं। इस बारे स्काईलार्क के महाप्रबंधक नागी से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि कर्मचारियों से केवल पांच सौ रुपए ही वर्दी के लिए मांगे गए हैं और अगर वर्दी का पैसा पीजीआई प्रबंधन देता है तो वह भी नहीं लिए जाते, लेकिन संस्थान ने देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि कंपनी की पूरे देश में एक जैसी नीति ही चलेगी और कर्मियों से दसवीं के असली प्रमाण पत्र लेना मात्र सिक्योरिटी के लिए है, जिन्हें 15 दिन बाद वापस लौटा दिया जाता है।

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