केंद्र सरकार ने झाड़ा पल्ला

डॉ. जोगिंद्र सिंह ट्रिब्यून न्यूज सर्विस चंडीगढ़, 23 जून। यूजीसी की सिफारिशों के मुताबिक विश्वविद्यालय एवं कालेज शिक्षकों की रिटायरमेंट एज बढ़ाकर 65 साल किये जाने के मुद्दे पर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने पल्ला झाड़ लिया है। केंद्र सरकार के इस कदम से अब पंजाब विश्वविद्यालय के उन प्राध्यापकों को बड़ा धक्का लग सकता है जो रिटायर होने को हैं और उम्मीद पाले बैठे थे कि उनके रिटायर होने से पहले सेवानिवृत्ति आयु में बढ़ोतरी अवश्य हो जायेगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक में शिक्षा सुधारों पर चर्चा के दौरान जब सेवानिवृत्ति आयु 65 साल करने का मुद्दा रखा तो सभी राज्यों ने इस मुद्दे का कड़ा विरोध किया। कोई भी राज्य नहीं चाहता कि उनके खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़े। जब सभी राज्यों ने 65 साल के मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया तो केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को गेंद राज्यों के पाले में डालते हुए यह कह अपना पीछा छुड़ाना पड़ा कि यह राज्यों के ऊपर है कि वे अपने यहां शिक्षकों की रिटायरमेंट एज 65 साल करें या न करें। हालांकि सभी राज्यों से हटकर मध्य प्रदेश ने घोषणा की थी कि वे अपने  यहां प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति आयु 65 साल कर चुके हैं और इस पर डटे रहेंगे। ऐसे में पंजाब विश्वविद्यालय के लिए यह और भी दुविधा वाली बात है क्योंकि यह विश्वविद्यालय केंद्रीय भी नहीं है और राज्य सरकार के अधीन भी नहीं है। पीयू के कुलाधिपति उपराष्ट्रपति होते हैं। यह देश का एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है जिसके कुलाधिपति तो उपराष्ट्रपति हैं मगर प्रशासनिक हिस्सेदारी पंजाब की भी है। पंजाब विश्वविद्यालय को पंजाब सरकार 40 फीसदी अनुदान देती है हालांकि वह एक सीमित राशि ही देती है और वह भी नियमित तौर पर नहीं, फिर भी राज्य का दावा होने के कारण पंजाब सरकार को दरकिनार करके यहां शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 साल नहीं की जा सकती। केंद्र सरकार अगर अपनी रजामंदी दे भी देती है तो विश्वविद्यालय से संबंधित 180 कालेजों के शिक्षक भी यह मांग करेंगे और फिर जीएमडीयू, पंजाबी विश्वविद्यालय और पीटीयू भी हैं और बाकी के कालेज शिक्षक भी सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की मांग करेंगे। ऐसे में पंजाब सरकार किसी पचड़े में नहीं पडऩा चाहती।

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