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धनतेरस पर गुलज़ार रहे धातु नगरी के बाज़ार

जगाधरी, 9 नवंबर सोमवार को धनतेरस के मौके पर मेटल नगरी जगाधरी में खासी रौनक रही। लोगों ने धातु से बनी मनपसंद आइटमों की जमकर खरीदारी की। देवी-देवताओं की मूर्तियां, पूजा की थालियां, घंटियां, जोत, डेकोरेशन पाॅट, गिलास और टिफिन खूब बिके। एक अनुमान के अनुसार बाजार मेें करोड़ों रुपये का कारोबार हुआ। यहां से […]

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जगाधरी, 9 नवंबर

जगाधरी में बर्तन बाजार में सजा मुरादाबाद में तैयार कांसे-तांबे का सामान। -निस

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सोमवार को धनतेरस के मौके पर मेटल नगरी जगाधरी में खासी रौनक रही। लोगों ने धातु से बनी मनपसंद आइटमों की जमकर खरीदारी की। देवी-देवताओं की मूर्तियां, पूजा की थालियां, घंटियां, जोत, डेकोरेशन पाॅट, गिलास और टिफिन खूब बिके। एक अनुमान के अनुसार बाजार मेें करोड़ों रुपये का कारोबार हुआ। यहां से हरियाणा, यूपी, उत्तरांचल, हिमाचल प्रदेश, पंजाब के साथ लगते जिलों के लोग खरीदारी के लिए आते हैं।
धातु खरीद को मानते हैं शुभ : भले ही व्यापारी मार्केट में मंदी बता रहे हों, लेकिन धनतेरस पर मेटल नगरी का बाज़ार गुलज़ार रहा। लोग सुबह ही बर्तनों के शोरूम पर पहुंचना शुरू हो गये थे। साथ लगते प्रदेशों से आये लोगों ने भी बर्तनों की खूब खरीदारी की। स्टील, एल्युमिनियम, कांसा, पीतल, तांबा आदि के बर्तन बिके। कारोबारी नवीन कुमार, राजीव कुमार का कहना था, वैसे तो हर सामान बिकता है, लेकिन ज्यादातर लोगों ने रोज़मर्रा इस्तेमाल वाली आइटमें जैसे बाल्टी, टब, परात, गिलास, कुकर, कड़छी, थाली, प्लेट और कटोरियां ज्यादा खरीदीं। हिमाचल व उत्तराखंड से आये लोग थालियां खास तौर पर खरीदते हैं। महंगा होने के कारण पीतल, तांबे आदि के बर्तन तो कम ही ग्राहक लेते हैं लेकिन यहां पर फैक्टरियों में प्रवासी लेबर लाखों की संख्या में काम करती है।

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धनतेरस पर …
इसलिए हजारों की तादाद में स्टील के टिफिन बिके।  धातु नगरी का मेटल उद्योग जहां लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का जरिया है, वहीं सरकार को भी करोड़ों का सालाना राजस्व देता है। आज मुरादाबाद के कारीगरों द्वारा तराशे गए बर्तनों और दूसरी आइटमों ने यहां के बाजार की शान खूब बढ़ाई और बिकी भीं। पहले जगाधरी बर्तन उद्योग का 70 फीसदी से ज्यादा काम हाथ से होता था। इसे ठठेरे करते थे, लेकिन अब इनकी संख्या बहुत कम रह गई है। बर्तन नगरी में राजस्थान, चेन्नई, मुंबई आदि से भी तैयार माल आने लगा है। मुरादाबाद से मूर्तियां, डेकोरेशन पॉट लाये जाते हैं।

मंदी का भी असर
बर्तन कारोबारियों का कहना है कि मार्केट में छाई मंदी से यह उद्योग भी नहीं बचा है। मेटल संघ के नेता सुंदरलाल बतरा का कहना है कि इस बार पिछले साल से आधा भी काम नहीं है। उनका कहना है कि टैक्सों की भरमार से धंधा चौपट हो गया है। वैट रिफंड न होने से कारोबारियों को झटका लगा है। कारोबारी पंकज का कहना है कि दीपावली के दिनों में पहले सुबह से शाम तक खाना खाने की फुर्सत नहीं होती थी, लेकिन अब हर कारोबारी मंदे से बेहाल हैं।

मौका था धनतेरस का और दस्तूर भी था खरीदारी का…ऐसे में खूब गुलज़ार रहे धातु नगरी जगाधरी के बाज़ार…चौतरफा चहल-पहल थी…हर चेहरे पर चमक… इस पावन दिवस पर हर कोई कुछ न कुछ खरीदना चाहता था…किसी ने गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्ति खरीदी तो किसी ने पूजा की थाली… किसी को डेकोरेशन पाॅट पसंद अाया तो कोई बहन-बेटी की शादी में उपहार देने के लिए बर्तनों का चयन करता दिखा। मान्यता है आज के दिन सोना, चांदी, तांबा या किसी अन्य धातु से बनी वस्तु खरीद कर घर ले जाने और पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि मिलती है…अरविंद शर्मा की खास रिपोर्ट

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