पंजाब में निवेश की नई रफ्तार : ऊर्जा क्षेत्र बदलेगा तस्वीर
एचपीसीएल-एचएमईएल के निवेश से रिफाइनरी, बायोफ्यूल और बायोगैस क्षेत्र को मिलेगा विस्तार; कृषि अवशेषों के इस्तेमाल से रोजगार और हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पंजाब अब उद्योग, ऊर्जा और नई तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। राज्य में बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए पिछले कुछ समय में जिस तरह नीतिगत बदलाव, सिंगल-विंडो व्यवस्था और कारोबार को आसान बनाने की पहल हुई है, उसका असर दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और उसकी संयुक्त कंपनी एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) की पंजाब में बढ़ती गतिविधियां राज्य के बदलते औद्योगिक परिदृश्य की बड़ी मिसाल बनकर सामने आई हैं।
एचपीसीएल ने पंजाब में रिफाइनरी, बायोफ्यूल और बायोगैस क्षेत्रों में बड़े निवेश की योजना की घोषणा की है। पंजाब सरकार का मानना है कि यह राज्य को हरित ऊर्जा, सतत विकास और आर्थिक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही किसानों और युवाओं को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार का जोर इस बात पर है कि बड़े उद्योगों के साथ-साथ उनके आसपास छोटे और मध्यम उद्योगों की पूरी शृंखला विकसित हो, ताकि निवेश का लाभ ज्यादा से ज्यादा युवाओं, उद्यमियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचे। सरकार की नीतियों का जोर इस बात पर है कि निवेशक को अनुमति और मंजूरी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। ‘फास्ट ट्रैक पंजाब’ जैसी सिंगल-विंडो व्यवस्था, ऑटो-डीम्ड अप्रूवल और कारोबार से जुड़े नियमों में सुधार इसी सोच का हिस्सा हैं। 173 से अधिक सरकारी सेवाओं को सरकार-से-व्यापार (जी2बी) मॉडल के तहत उपलब्ध कराने से निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं पहले की तुलना में आसान हुई हैं। ‘पंजाब राइट टू बिजनेस’ व्यवस्था में सुधारों ने भी कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को गति देने का प्रयास किया है।
यही वजह है कि पंजाब सरकार अब राज्य को उत्तर भारत के एक प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में पेश कर रही है। सड़क और रेल संपर्क, दिल्ली-एनसीआर के नजदीक होने, बंदरगाहों तक पहुंच, औद्योगिक आधार और कुशल मानव संसाधन को सरकार निवेश की अपनी ताकत के तौर पर सामने रख रही है।
बठिंडा की रिफाइनरी पंजाब के औद्योगिक विकास की कहानी में पहले ही एक बड़ा अध्याय लिख चुकी है। अब सरकार और उद्योग की नजर रिफाइनरी के इर्द-गिर्द नए डाउनस्ट्रीम उद्योग खड़े करने पर है। कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक कई नई औद्योगिक गतिविधियां पंजाब में विकसित हो सकती हैं। इससे राज्य में सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, इंजीनियरिंग और सहायक विनिर्माण क्षेत्रों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
फसलों के अवशेष से बनेगी हरित अर्थव्यवस्था
पंजाब की औद्योगिक विकास यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू हरित ऊर्जा है। राज्य में कृषि अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में 2G बायोएथेनॉल और बायोगैस परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। बठिंडा में एचपीसीएल का 2G बायोएथेनॉल प्रोजेक्ट इस बदलाव का अहम उदाहरण है। परियोजना कृषि अवशेषों, खासकर धान की पराली का इस्तेमाल करके एथेनॉल तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इसकी प्रस्तावित क्षमता 100 किलोलीटर प्रतिदिन है और पूरी क्षमता पर यह सालाना लगभग दो लाख टन धान के पुआल का उपयोग कर सकती है। इसके वाणिज्यिक उत्पादन की दिशा में 2026 के अंत तक आगे बढ़ने का लक्ष्य है।
बायोगैस से गांवों तक पहुंचेगा निवेश का लाभ
एचपीसीएल की पंजाब में बायोगैस क्षेत्र में भी विस्तार की योजना है। राज्य में करीब 10 बायोगैस संयंत्रों की दिशा में काम चल रहा है, जिनमें से पांच पहले ही चालू हो चुके हैं। इन परियोजनाओं का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इनका सीधा संबंध कृषि अवशेषों के प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने निवेश के मॉडल को रोजगार और पर्यावरण दोनों से जोड़कर देखा है। सरकार का संदेश स्पष्ट है— जो उद्योग पंजाब में पूंजी लगाएगा, उसे केवल जमीन या बाजार नहीं, बल्कि एक ऐसा कारोबारी माहौल देने की कोशिश की जाएगी जहां परियोजनाएं समय पर आगे बढ़ें और उनका लाभ स्थानीय स्तर तक पहुंचे।

