Iran-US Talks Fail: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई अहम वार्ता आखिरकार बेनतीजा रही। करीब 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने रविवार को कहा कि वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें सबसे अहम मुद्दा परमाणु हथियारों का निर्माण रोकना था।
वेंस ने कहा, “बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।” उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत के दौरान उन्होंने कई बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया।
परमाणु मुद्दे पर टकराव
वार्ता का सबसे बड़ा विवादित मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह से परमाणु हथियार विकसित करने की योजना छोड़ दे, लेकिन ईरान इस पर तैयार नहीं दिखा।
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ी हलचल
इसी बीच, स्ट्रेट आप होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर स्थिति और गंभीर होती दिख रही है। अमेरिकी सेना ने बयान दिया है कि वह इस क्षेत्र में “स्थिति तैयार” कर रही है, ताकि समुद्री मार्ग को सुरक्षित किया जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी युद्धपोत इस जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं और माइंस हटाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
बढ़ सकता है वैश्विक तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है। Hormuz Strait दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, ऐसे में यहां तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। (एजेंसी के इनपुट के साथ)
अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मदद करने का काम जारी रखेगा पाकिस्तान : इसहाक डार
April 12, 2026 11:12 am
पाकिस्तान ने रविवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मदद करने का काम जारी रखेगा और उसने दोनों पक्षों से युद्धविराम बनाए रखने का आग्रह किया। अमेरिका और ईरान के बीच लंबी वार्ता बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त होने के बाद मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले 24 घंटों में कई दौर की ''गहन और सार्थक'' बातचीत में मध्यस्थता की। उन्होंने कहा, ''मैंने रक्षा बलों के चीफ फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर के साथ मिलकर दोनों पक्षों के बीच कई दौर की गहन और रचनात्मक वार्ताओं में मध्यस्थता की, जो 24 घंटों तक चलीं और आज सुबह समाप्त हुईं।'' वार्ता में प्रगति की उम्मीद जताते हुए डार ने कहा कि स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता हासिल करने के लिए दोनों पक्षों को सकारात्मक रुख बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ''यह जरूरी है कि दोनों पक्ष युद्धविराम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखें।'' डार ने कहा कि पाकिस्तान आने वाले दिनों में भी ईरान और अमेरिका के बीच संवाद और वार्ता को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य ईरान और अमेरिका के बीच संवाद को सुगम बनाने में अपनी भूमिका निभाता रहा है और आगे भी निभाता रहेगा।'' डार ने दोनों पक्षों द्वारा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार करने और पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका को मान्यता देने के लिए आभार भी जताया। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई ये वार्ताएं 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच पहली उच्च-स्तरीय प्रत्यक्ष बातचीत थी जिस पर दुनियाभर की निगाहें थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ के नेतृत्व में शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचा, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शनिवार सुबह पहुंचा, जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर और पश्चिम एशिया के दूत स्टीव विटकॉफ भी शामिल हैं, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
ईरान ने अमेरिकी पोतों के होर्मुज जलडमरूमध्य में दाखिल होने का दावा खारिज किया
April 12, 2026 9:46 am
ईरान की संयुक्त सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने अमेरिका के उस दावे का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना के दो विध्वंसक पोत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे थे। ईरान के सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। ईरानी मीडिया के अनुसार, प्रवक्ता ने कहा कि ''किसी भी पोत के गुजरने पर निर्णय लेने का अधिकार ईरान के सशस्त्र बलों के पास है।'' इससे पहले, अमेरिकी सेना ने कहा था कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से पहली बार उसकी नौसेना के दो विध्वंसक पोत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे। हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि ईरान ने जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश कर रहे अमेरिकी सैन्य पोत को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।
ईरान ने शर्तों को स्वीकार न करने का विकल्प चुना
April 12, 2026 8:54 am
दोनों पक्षों के बीच इस स्तर पर 1979 के बाद यह पहली वार्ता थी। वेंस ने कहा, ''हम 21 घंटे से इस पर काम कर रहे हैं और अच्छी खबर यह है कि हमारे बीच कई सार्थक चर्चाएं हुई हैं।'' उन्होंने कहा, ''बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।'' अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने कहा, ''हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं कि हम किन बातों पर समझौता करने को तैयार हैं और किन पर नहीं।'' उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने ''हमारी शर्तों को स्वीकार न करने का विकल्प चुना है।'' जब उनसे यह बताने को कहा गया कि मुख्य अड़चनें क्या थीं और ईरानियों ने किन बातों को ठुकराया तो उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। वेंस ने कहा, ''मैं अधिक विस्तार से नहीं बताऊंगा क्योंकि 21 घंटे तक बंद कमरे में बातचीत करने के बाद मैं सार्वजनिक रूप से बात नहीं करना चाहता लेकिन सीधी सी बात यह है कि हमें उनकी ओर से इस बात की स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए कि वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही ऐसे साधन हासिल करने की कोशिश करेंगे, जिनसे वे बहुत जल्दी परमाणु हथियार हासिल कर सकें।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ''मुख्य लक्ष्य'' ईरान को ''परमाणु हथियार'' हासिल करने से रोकना है और ''हमने इन वार्ताओं के जरिये यही हासिल करने की कोशिश की है।''
वेंस ने पाकिस्तान के पीएम व सेना प्रमुख की तारीफ की
April 12, 2026 8:54 am
वेंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एवं सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सराहना की और उन्हें ''बेहतरीन मेजबान'' बताया। उन्होंने कहा, ''वार्ता में जो भी कमियां रहीं, वे पाकिस्तानियों की वजह से नहीं थीं। उन्होंने शानदार काम किया और हमारे एवं ईरानियों के बीच मतभेदों को पाटकर समझौते तक पहुंचने में मदद करने की वाकई कोशिश की।'' इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी 'एक्स' पर एक संदेश में पुष्टि की कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके और ''दोनों पक्षों के बीच कई संदेशों'' का आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने लिखा, ''पिछले 24 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दे, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंध हटाने और ईरान के खिलाफ एवं क्षेत्र में युद्ध की पूर्ण समाप्ति सहित वार्ता के मुख्य विषयों के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई।'' उन्होंने कहा, ''इस कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता विरोधी पक्ष की गंभीरता एवं सद्भावना, अत्यधिक मांगों और अनुचित आग्रहों से परहेज करने तथा ईरान के वैध अधिकारों एवं हितों को स्वीकार करने पर निर्भर करती है।'' बकाई ने वार्ता की मेजबानी करने और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में किए गए सद्भावनापूर्ण प्रयासों के लिए ''पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य की सरकार और गर्मजोशी से भरे उसके नेक लोगों'' के प्रति भी आभार व्यक्त किया।