Middle East War Update: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए दी गयी समयसीमा नजदीक आने के बीच ईरान ने सोमवार को पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बिजली देने वाले ऊर्जा संयंत्रों पर हमला करने की धमकी दी।
ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा दिया गया यह बयान तेहरान की ओर से खाड़ी के अरब देशों पर हमलों को सही ठहराने की नयी कोशिश माना जा रहा है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने सोमवार सुबह यह बयान प्रसारित किया।
बयान में कहा गया है, ''हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि हमारे ऊर्जा संयंत्रों पर हमला होता है, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करते हुए 'कब्जा करने वाले शासन' (इजराइल) के ऊर्जा संयंत्रों के साथ-साथ उन क्षेत्रीय देशों के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाएगा, जो अमेरिकी ठिकानों को बिजली आपूर्ति करते हैं और उन आर्थिक, औद्योगिक तथा ऊर्जा ढांचों को भी निशाना बनाएगा, जिनमें अमेरिकियों की हिस्सेदारी है।'' बयान के अनुसार, ''इसमें कोई संदेह न रखें कि हम ऐसा नहीं करेंगे।''
इससे पहले रविवार तड़के ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरानी हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद रहता है, तो अमेरिका 48 घंटे के भीतर ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाएगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने 'बहुत बड़ा खतरा' पैदा हो गया है : अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी प्रमुख
March 23, 2026 2:41 pm
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने सोमवार को कहा कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने ''बहुत बड़ा खतरा'' खड़ा हो गया है। उन्होंने सोमवार को ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में नेशनल प्रेस क्लब को संबोधित करते हुए कहा, ''अगर यह संकट यूं ही आगे बढ़ता रहा, तो कोई भी देश इसके प्रभाव से अछूता नहीं रहेगा।'' बिरोल ने कहा कि पश्चिम एशिया का यह संकट 1970 के दशक के दो तेल संकटों और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान गैस बाजारों पर पड़े प्रभाव से भी अधिक गंभीर असर डाल रहा है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है, जब तेहरान पर सोमवार तड़के इजराइल ने हमलों की बौछार शुरू की। इस बीच, एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य कमांडर ने ईरान के लोगों से फिलहाल शरणस्थलों में रहने को कहा है जबकि ईरान ने अपने खाड़ी पड़ोसी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं और उनके बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने की धमकी दी है। बिरोल ने बताया कि इस पूरे क्षेत्र में नौ देशों के 40 ऊर्जा प्रतिष्ठान ''गंभीर या बेहद गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त'' हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह यूरोप और एशिया की सरकारों के साथ तेल भंडार को मुहैया करने की संभावना पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''हम बाजार की स्थिति पर नजर रखेंगे। अगर आवश्यकता पड़ी, तो हम निश्चित रूप से कदम उठाएंगे, लेकिन पहले हम हालात का विश्लेषण करेंगे और सदस्य देशों के साथ चर्चा करेंगे।''
ईरान ने जमीनी आक्रमण होने पर फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछाने की धमकी दी
March 23, 2026 2:37 pm
ईरान की रक्षा परिषद ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर जमीनी आक्रमण हुआ, तो वह ''पूरे फारस की खाड़ी'' में समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है। रक्षा परिषद का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब तेहरान में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि अमेरिकी मरीन नौसैनिक क्षेत्र में तैनात किए जा सकते हैं। रक्षा परिषद ने कहा, ''दुश्मन द्वारा ईरान के तटों या द्वीपों को निशाना बनाने का कोई भी प्रयास स्वाभाविक रूप से और स्थापित सैन्य प्रथाओं के अनुसार फारस की खाड़ी और तटीय इलाकों में पहुंच के सभी मार्गों को बारूदी सुरंगों से भर देने का कारण बनेगा।'' इस बीच, अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को ऊर्जा आपूर्ति के लिए फिर से खोलने की कोशिश कर रहा है, जो फारस की खाड़ी का संकरा प्रवेश द्वार है। इस मिशन को समर्थन देने के लिए अमेरिकी मरीन नौसैनिक ईरान के द्वीपों या उसके तटीय क्षेत्रों पर कब्जा करने के लिए उतर सकते हैं। वहीं, इस्राइल ने भी संकेत दिया है कि युद्ध के दौरान जमीनी अभियान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
Middle East War Update: ईरान ने दी US की धमकी पर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पूरी तरह बंद करने की चेतावनी
March 23, 2026 1:20 pm
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Middle East War Update: अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की रविवार को धमकी दी। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका अपने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिजली संयंत्रों पर हमले की धमकी पर अमल करता है, तो तेल और अन्य निर्यात के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल ''पूरी तरह से बंद'' कर दिया जाएगा। ट्रंप ने शनिवार देर रात ईरान को जलडमरूमध्य को खोलने के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी थी। ईरान ने इस्राइल के एक गुप्त परमाणु अनुसंधान स्थल पर मिसाइल हमला किया और इस हमले में आस पास के स्थानों पर रहने वाले लोग बड़ी संख्या में घायल हुए, जिसके बाद इस्राइल के नेताओं ने वहां जा कर लोगों से मुलाकात की और उनका हाल चाल जाना। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमले में किसी की जान नहीं गई और यह एक "चमत्कार" है। नेतन्याहू ने दावा किया कि इस्राइल और अमेरिका अपने युद्ध लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इन लक्ष्यों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और सशस्त्र समर्थन को कमजोर करना तथा ईरान की जनता को धार्मिक शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकने में सक्षम बनाना शामिल है। इस्राइल की मंशा के विपरीत ईरान में न तो किसी विद्रोह का कोई संकेत मिला है और न ही उस लड़ाई के अंत का जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है, तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है और दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त हवाई मार्गों को खतरे में डाल दिया है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए इस युद्ध में 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इस बीच, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने सोमवार तड़के कहा कि उनकी हवाई रक्षा प्रणाली मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपट रही है, वहीं बहरीन में हवाई हमले के संकेत देने वाले सायरन बज रहे हैं। ईरान ने फारस की खाड़ी को शेष विश्व से जोड़ने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है और कहा है कि शत्रु देशों को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति है, लेकिन जहाजों पर हमलों ने लगभग सभी टैंकर यातायात को रोक दिया है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान जलडमरूमध्य नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके ''ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर देगा, शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।'' अमेरिका का तर्क है कि ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड देश के अधिकांश बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करता है और इसका उपयोग युद्ध अभियानों को शक्ति प्रदान करने के लिए करता है। वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ईरान के बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है, तो पूरे क्षेत्र के अहम बुनियादी ढांचे को वैध लक्ष्य माना जाएगा और उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा, जिसमें खाड़ी देशों में पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा और जल शोधन प्रतिष्ठान शामिल हैं।