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Women Reservation Bill: कानून मंत्री मेघवाल बोले- परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं, ताकत बरकरार रहेगी

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केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में भाषण दिया। (संसद टीवी वाया पीटीआई)
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Women Reservation Bill: सरकार ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बीच महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से संबंधित तीन विधेयकों को पेश किया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' और 'परिसीमन विधेयक, 2026' पेश किए, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया।

'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में 251 वोट और विरोध में 185 वोट पड़े। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक और संघ राज्य विधि संशोधन विधेयक को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा और सभी की वर्तमान ताकत बरकरार रहेगी। मेघवाल ने 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि अब इसे लागू करने का समय है। उन्होंने दावा किया कि इससे महिलाओं को राजनीतिक न्याय मिलेगा और लोकसभा सीटें बढ़कर 815 हो जाएंगी। सरकार ने सभी दलों से इन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की।

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इससे पहले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने विधेयकों को 'असंवैधानिक' करार देते हुए इन्हें पेश करने के समय पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने तीनों विधेयकों को भारत के संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए कहा कि वास्तव में विधेयक इस समय लाने का क्या मकसद है।

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उन्होंने कहा कि संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से 2023 में ही महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया था तो सरकार ने उसी समय इसे लागू क्यों नहीं किया? वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ''आप 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर डरे हुए हैं। आप असंवैधानिक विधेयक ला रहे हैं। इन्हें वापस लिया जाना चाहिए।''

समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव ने सवाल किया कि सरकार को इन विधेयकों को लाने की इतनी जल्दीबाजी क्यों हैं? सपा के धर्मेंद्र यादव ने तीनों विधेयकों का विरोध करते हुए कहा ''मैं संवैधानिक आधार पर इनका पुरजोर विरोध करता हूं। संसद की जिम्मेदारी संविधान की सुरक्षा की है। लेकिन इन विधेयकों से संविधान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिस तरह परिसीमन को जनगणना से अलग किया जा रहा है, वह संविधान की भावना के विरुद्ध है।'' केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विधेयक पेश किए जाने से पहले इनके गुण-दोषों पर चर्चा नहीं हो सकती और सदस्य अभी केवल तकनीकी आधार पर आपत्ति जता सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अभी सदस्यों को केवल इस बारे में आपत्ति जतानी चाहिए कि विधेयक पुरस्थापित किए जा सकते हैं या नहीं। शाह ने अध्यक्ष ओम बिरला से कहा, ''आप विधेयकों पर चर्चा के समय विपक्ष को पूरा मौका देना, हम भी कसकर जवाब देंगे।'' लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सदस्य विधेयक पर चर्चा के समय अपनी आपत्तियां जता सकते हैं।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने विधेयकों को 'असंवैधानिक' करार दिया। आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण के लिए नहीं, परिसीमन के लिए लाया गया है और यही मूल आपत्ति है। द्रमुक नेता टी आर बालू ने तीनों विधेयकों को 'सैंडविच विधेयक' करार देते हुए कहा कि तीनों विधेयक एक दूसरे से जुड़े हैं और सरकार को अलग-अलग विधेयक लाने चाहिए थे।

उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही महिला आरक्षण लागू कर सकती थी। एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इन विधेयकों के पारित होने से हिंदी पट्टी से संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, वहीं दक्षिणी राज्यों में जनता का प्रतिनिधित्व कम होगा। उन्होंने सरकार पर संघीय ढांचे का उल्लंघन करने का और ओबीसी तथा मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व कम करने की कोशिश का भी आरोप लगाया। शाह ने कहा कि महिला आरक्षण को तार्किक परिणति तक ले जाने के लिए तीनों विधेयक साथ में जरूरी हैं और इसलिए इन्हें साथ में लाया गया है। (एजेंसी के इनपुट के साथ)

जनगणना जातियों की गिनती के साथ हो रही है, धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक: अमित शाह

April 16, 2026 1:02 pm

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि देश में जनगणना की प्रक्रिया जारी है और जातियों के साथ ही यह जनगणना होगी। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म के आधार पर मुसलमानों को आरक्षण गैर-संवैधानिक है। लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से संबंधित तीन विधेयकों को पेश किये जाते समय समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव और धर्मेंद्र यादव की कुछ टिप्पणियों का जवाब देते हुए शाह ने ये बातें कहीं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में आज 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026' और 'परिसीमन विधेयक, 2026' पेश किए, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया। विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इन विधेयकों के माध्यम से जिस तरह परिसीमन को जनगणना से अलग करने का प्रयास किया जा रहा है, वह संविधान की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक में पिछड़े वर्गों और मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल किया जाए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल किया कि सरकार को विधेयक लाने की इतनी जल्दीबाजी क्या है? उन्होंने कहा, ''आप जनगणना क्यों नहीं कराना चाहते? जैसे ही जनगणना होगी, हम जातीय जनगणना की मांग करेंगे, जातीय जनगणना होगी तो हम आरक्षण की मांग करेंगे। इसलिए आप यह धोखा देना चाहते हैं।'' अमित शाह ने कहा कि सदन की कार्यवाही को पूरा देश देख रहा है और सपा सदस्यों के कुछ बयान जनता में चिंता पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ''अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना क्यों नहीं हो रही है? मैं बताना चाहता हूं कि देश में जनगणना शुरू हो चुकी है और जारी है।'' शाह ने कहा कि सपा अध्यक्ष ने जातीय जनगणना की बात कही ''तो मैं बताना चाहता हूं कि सरकार जातियों की जनगणना का निर्णय पहले ही ले चुकी है और जाति के साथ ही यह जनगणना हो रही है।'' जनगणना में जातियों का कॉलम नहीं होने संबंधी धर्मेंद्र यादव के आरोप पर शाह ने कहा, ''जनगणना में अभी घरों की गिनती हो रही है। घरों की कोई जाति नहीं होती। सपा का वश चले तो घरों की भी जाति तय कर दे। जब घरों की गिनती के बाद नागरिकों की जनगणना होगी, उसमें जाति का कॉलम होगा।'' उन्होंने कहा, ''धर्मेंद्र यादव ने मुस्लिम आरक्षण की गैर-संवैधानिक बात कही। है। संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की कतई मंजूरी नहीं देता। मैं सरकार का संकल्प दोहराता हूं कि धर्म के आधार पर मुस्लिमों का आरक्षण गैर संवैधानिक है।'' संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने भी धर्मेंद्र यादव के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं है और सदस्य को इस तरह की असंवैधानिक बात नहीं बोलनी चाहिए। उन्होंने कहा, ''हम पूरे देश की महिलाओं की बात कर रहे हैं। आप केवल मुस्लिम महिलाओं की बात क्यों कर रहे हैं? यह राजनीतिक बयान है।'' शाह ने यह भी कहा, ''सपा चाहे तो सारी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है।''

किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा, जिसकी जो ताकत है वो बनी रहेगी: मेघवाल

April 16, 2026 1:01 pm

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन संबंधी विधेयक को ऐतिहासिक करार देते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि प्रस्तावित परिसीमन से किसी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा और जिसकी जो ताकत है वो बनी रहेगी। उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर अपने विचार रखते हुए सदस्यों का आह्वान किया कि वे इन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित करें। मेघवाल ने कहा, ''मुझे गर्व, हर्ष और रोमांच की अनुभूति होती है। आज का दिन संसदीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षर में लिखा जा रहा है।'' उन्होंने 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि आज उस ऐतिहासिक निर्णय को लागू करने का समय आ गया है। उन्होंने सरकार की सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सरकार के पास नीयत और नीति है और साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रूप में सशक्त नेतृत्व है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक को लागू करने से महिलाओं को राजनीतिक न्याय मिलेगा। मेघवाल ने कहा कि लोकसभा में सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी किए जाने का प्रावधान है और ऐसे में सीटों की संख्या बढ़कर 815 हो जाएगी। उन्होंने विपक्षी सदस्यों की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि किसी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा। मंत्री का कहना था, ''जो ताकत जिस राज्य की है, वो अभी रहेगी।'' मेघवाल ने पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल के महिला आरक्षण से संबंधित एक कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कलाम के सपने को पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''इस ऐतिहासिक संशोधन के पारित होने से भारत विकसित देश बनेगा।''

अन्नाद्रमुक लोकसभा प्रतिनिधित्व में बदलाव के पक्ष में नहीं: कोवई सत्यन

April 16, 2026 12:36 pm

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने लोकसभा में 7.2 प्रतिशत सीट पर तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं करने का सुझाव दिया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोवई सत्यन ने बृहस्पतिवार को सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर 'सच छिपाने' का आरोप लगाया। सत्यन ने बताया कि द्रमुक द्वारा परिसीमन पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रमुख विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने लोकसभा में 7.2 प्रतिशत सीट पर तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं करने का सुझाव दिया। सत्यन ने 'एक्स‍' पर एक पोस्ट में पूछा, "अगर सांसदों की संख्या बढ़ाकर 850 कर दी जाए, तो तमिलनाडु में सांसदों की संख्या बढ़कर 61 हो जाएगी। द्रमुक ने इसे क्यों छिपाया?" उन्होंने पोस्ट में कहा, "अगर झूठ पर कोई किताब लिखी जाए तो एम.के. स्टालिन ही एकमात्र ऐसे लेखक होंगे जो इसे लिखने के योग्य हैं। बेशर्म द्रमुक।"

महिला आरक्षण विधेयक 2026 आज होगा लोकसभा में पेश, परिसीमन पर विपक्ष विरोध की तैयारी में

April 16, 2026 12:02 pm

Women Reservation Bill: सरकार बृहस्पतिवार को महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी, जिसका विपक्ष के कई दल विरोध करने और इसके परिसीमन से जुड़े प्रावधानों के खिलाफ वोट करने की तैयारी में हैं। सरकार 'संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026' को एक बड़े सुधार के रूप में ला रही है। इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए एक विधेयक तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 भी पेश करेगी। इन तीनों विधेयकों को लोकसभा की आज की कार्यवाही में सूचीबद्ध किया गया है। लोकसभा के वर्तमान बजट सत्र के तहत तीन दिवसीय विशेष बैठक बुलाने का मकसद इन तीनों विधेयकों पर चर्चा और इन्हें पारित कराना है। विधेयक पेश किए जाने से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर कई विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई जिसमें यह फैसला किया गया कि इसके परिसीमन से संबंधित प्रावधानों का पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों के आधार पर वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू किया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि यदि 2029 में लोकसभा और विभिन्न विधानसभाओं के चुनाव महिला आरक्षण के पूर्ण रूप से लागू होने के साथ कराए जाते हैं तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत तथा जीवंत बनेगा। देश की महिलाओं को लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा था कि जब महिलाएं नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी तब विकसित भारत की यात्रा और अधिक सशक्त एवं तेज होगी। सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए बृहस्पतिवार को जो संविधान संशोधन पेश करेगी, उसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में कुल सदस्यों की संख्या के दो तिहाई के समर्थन की जरूरत होती है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास लोकसभा में फिलहाल यह आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। (एजेंसी के इनपुट के साथ)

स्टालिन ने परिसीमन विधेयक की प्रति जलाई, इसे 'काला कानून' बताया

April 16, 2026 10:58 am

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने बृहस्पतिवार को परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाकर उसे ''काला कानून'' करार दिया और आरोप लगाया कि यह विधेयक तमिल लोगों को उनकी अपनी ही भूमि में ''शरणार्थी'' बनाने का प्रयास है। महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम पर संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक से कुछ घंटे पहले स्टालिन ने काला झंडा दिखाया, केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई और नारे लगाए। मुख्यमंत्री चुनाव प्रचार के सिलसिले में पश्चिमी तमिलनाडु के नामक्कल में हैं और वहां उन्होंने विधेयक की प्रति जलाई। स्टालिन और काले वस्त्र पहने अन्य लोगों ने इस बीच नारे लगाए। उन्होंने ''पोराडावोम, वेलवोम ओन्द्रगा'' (आइए हम मिलकर संघर्ष करें, साथ मिलकर जीतें) का नारा भी लगाया। एक बयान में स्टालिन ने कहा, ''विरोध की ज्वाला पूरे तमिलनाडु में फैले। फासीवादी भाजपा का घमंड चकनाचूर हो। तब, तमिलनाडु से उठी हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग ने दिल्ली को झुलसा दिया था। वह तभी शांत हुई जब उसने दिल्ली को झुकने पर मजबूर कर दिया। उनका इशारा स्पष्ट रूप से राज्य में 1960 के दशक में हुए हिंदी विरोधी आंदोलन की ओर था। उन्होंने कहा, ''आज मैंने इस काले कानून की प्रति जलाकर और काला झंडा दिखाकर उस आग को फिर से प्रज्वलित कर दिया है, जो तमिलों को हमारी ही धरती पर शरणार्थी बनाने का प्रयास करता है। यह आग अब पूरी द्रविड़ भूमि में फैलेगी। यह भड़केगी, यह प्रचंड होगी और यह भाजपा के अहंकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देगी।'' जैसे ही स्टालिन ने काला झंडा दिखाया, समूचे तमिलनाडु में उनके पार्टी पदाधिकारियों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने घरों में, पार्टी कार्यालयों में और सार्वजनिक स्थानों पर भी काले झंडे लगाए। चेन्नई में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के राज्य मुख्यालय 'अन्ना अरिवलयम' के अलावा, कमल हासन के नेतृत्व वाले मक्कल निधि मय्यम और वाइको के नेतृत्व वाले मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके), द्रमुक के सहयोगी दलों के चेन्नई परिसर में प्रमुख स्थानों पर काले झंडे लगाए गए। द्रमुक के दिवंगत वरिष्ठ नेता एम. करुणानिधि के चेन्नई-गोपालपुरम स्थित आवास पर भी काला झंडा देखा गया। चेन्नई में मुख्यमंत्री के आवास और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों के घरों पर भी काले झंडे लगे दिखे। केंद्र द्वारा प्रस्तावित परिसीमन का कड़ा विरोध करते हुए बुधवार को स्टालिन ने राज्य भर में काले झंडे दिखाकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के इस कदम से तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुंचेगा।

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