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खास खबर
पंजाब के ग्राम्य-जीवन का शब्दचित्र

पंजाब के ग्राम्य-जीवन का शब्दचित्र

पुस्तक समीक्षा मोहन मैत्रेय चर्चित अवतार सिंह बिलिंग रचित उपन्यास ‘खाली कुओं की कथा’ के संबंध में कथन है कि इस कृति में पंजाब के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक उन परिवर्तनों की प्रस्तुति है जो क्षेत्र ने देखे-झेले हैं। वास्तव में यह रचना क्षेत्र के ग्रामीण जीवन का शब्द-चित्रण है। रचना के शीर्षक का ...

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विविध आयामों की कविता

विविध आयामों की कविता

पुस्तक समीक्षा शशि सिंघल कवयित्री निधि ख़ाली ध्यानी मृगतृष्णा की काव्य कृति ‘रातें सूरज सी’ जीवन के विविध आयामों को दर्शाती हल्की-फुल्की कविताओं का जखीरा है। इस काव्य कृति की लगभग बयासी कविताएं ताजा हवा के झोंकों की तरह जीवन के हर मोड़ में झांकती नजर आती हैं। इनमें प्रेम है, रिश्ता ...

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कामकाजी महिलाओं की जिजीविषा

कामकाजी महिलाओं की जिजीविषा

पुस्तक समीक्षा सुशील कुमार फुल्ल विद्वानों ने उपन्यास को जीवन की व्याख्या माना है। समाज की समस्याओं एवं विसंगतियों को आधार बनाकर पात्रों के माध्यम से कथावस्तु को बुनते हुए उसे किसी निष्कर्ष तक ले जाना उपन्यास की सफलता का पैमाना होता है। ‘नारी कभी न हारी’ वीना चौहान विरचित ऐसा ही ...

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मूर्तिकला के एक युग का बोध

मूर्तिकला के एक युग का बोध

पुस्तक समीक्षा राजवंती मान मनुष्य प्रारम्भ से ही अपने ज्ञान-दर्शन और मान्यताओं को संरक्षित और संवाहित करने की चेष्टा करता रहा है। सभ्यता के विकास के साथ ही उसने मूर्तिकला और चित्रकला जैसी कठिन कलाएं विकसित की। सिन्धु सभ्यता के कला-नमूनों से पाटलिपुत्र की यक्षिणी तक, सांची से अजंता-एलोरा की गुफाओं ...

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दलित विमर्श के अग्रदूत

दलित विमर्श के अग्रदूत

पुस्तक समीक्षा रमेश नैयर राष्ट्रीय राजनीति में दलित समाज के महत्व को रेखांकित करने में डॉ. भीमराव अंबेडकर के बाद कांशीराम का विशेष महत्व है। पंजाब के ग्रामीण क्षेत्र में राजनीति की वर्णमाला सीखने वाले कांशीराम ने राष्ट्रीय स्तर पर दलित वर्ग के जुझारू नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनको ...

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विरासत से जुड़ने की अनूठी मुहिम

विरासत से जुड़ने की अनूठी मुहिम

हरियाणा सृजन यात्रा अरुण कुमार कैहरबा घुमक्कड़ी एक बेहतरीन शौक है। अनेक प्रकार की यात्राओं के जरिये यात्रियों ने समाज निर्माण व तथ्यों की खोज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साहित्य में यात्रा साहित्य की एक पूरी धारा है। हिन्दी साहित्य में राहुल सांकृत्यायन ने ‘घुमक्कड़ शास्त्र’ रच कर घुमक्कड़ी को प्रतिष्ठित ...

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शैलेंद्र के गीतों में ज़िंदगी के फलसफे का यथार्थ

शैलेंद्र के गीतों में ज़िंदगी के फलसफे का यथार्थ

आलोक यात्री 21वीं सदी के दो दशक बीत जाने के बाद तमाम सुख-सुविधाओं से संपन्न इस दुनिया में ‘हाउस अरेस्ट’ की अवस्था में पहुंच चुके आम व्यक्ति के पास करने के लिए खास कुछ नहीं है। टीवी रिमोट और मोबाइल फोन के बटन या की-पैड भी इस एकाकीपन, ऊब, निरसता और ...

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  • विरासत से जुड़ने की अनूठी मुहिम
     Posted On March - 29 - 2020
    घुमक्कड़ी एक बेहतरीन शौक है। अनेक प्रकार की यात्राओं के जरिये यात्रियों ने समाज निर्माण व तथ्यों की खोज में....
  • दलित विमर्श के अग्रदूत
     Posted On March - 29 - 2020
    राष्ट्रीय राजनीति में दलित समाज के महत्व को रेखांकित करने में डॉ. भीमराव अंबेडकर के बाद कांशीराम का विशेष महत्व....
  • मूर्तिकला के एक युग का बोध
     Posted On March - 29 - 2020
    मनुष्य प्रारम्भ से ही अपने ज्ञान-दर्शन और मान्यताओं को संरक्षित और संवाहित करने की चेष्टा करता रहा है। सभ्यता के....
  • कामकाजी महिलाओं की जिजीविषा
     Posted On March - 29 - 2020
    विद्वानों ने उपन्यास को जीवन की व्याख्या माना है। समाज की समस्याओं एवं विसंगतियों को आधार बनाकर पात्रों के माध्यम....

हादसों की जवाबदेही

Posted On March - 13 - 2020 Comments Off on हादसों की जवाबदेही
यह आंकड़ा विचलित करने वाला है कि बीते दो सालों में बेसहारा मवेशियों की चपेट में आकर 241 राहगीर बेमौत मरे। यह सरकारी विभागों से हासिल आंकड़ा है। नि:संदेह इसके अलावा तमाम ऐसी दुर्घटनाएं भी होंगी, जो दर्ज नहीं हो सकी होंगी। ....

एकदा

Posted On March - 12 - 2020 Comments Off on एकदा
एक शिष्य ने सदगुरु से पूछा, ‘प्रेम व सेवा में हमंे किसे अधिक प्राथमिकता देना चाहिये?’ सदगुरु ने सहज भाव से कहा, ‘प्रेम व सेवा में प्राथमिक तो प्रेम ही है, क्योंकि बिना प्रेमपूर्ण हुए सेवा हो ही नहीं सकती। जो बिना प्रेमपूर्ण हुए ही सेवा करने का दावा करता है, उसका दावा झूठा है, खोखला है, थोथा है। ....

बंदी बनाकर बदरंग कर दी दुनिया

Posted On March - 12 - 2020 Comments Off on बंदी बनाकर बदरंग कर दी दुनिया
वे दिन गये जब किसी दिन भी गर कोई लड़का किसी लड़की को कह दिया करता कि ‘आई लव यू’ तो बदले में रहपटा पड़ा करता और गाल लाल हो जाया करता। अब तो गाल लाल करवाने के लिए होली का इन्तज़ार करना पड़ता है। वैसे हम भारतीय हैं कमाल के कि रंग-बिरंगे चेहरे देखने के लिए होली की साल भर प्रतीक्षा करते हैं जबकि ....

रोक के बावजूद हड़ताल का औचित्य!

Posted On March - 12 - 2020 Comments Off on रोक के बावजूद हड़ताल का औचित्य!
उच्चतम न्यायालय ने करीब 18 साल पहले दिसंबर, 2002 में एक फैसले में कहा था कि वकीलों को हड़ताल करने का अधिकार नहीं है और वे सांकेतिक हड़ताल भी नहीं कर सकते। लेकिन आज भी किसी न किसी मुद्दे पर वकीलों की हड़ताल और इस वजह से अदालती कार्यवाही टल जाने की खबरें सामने आती रहती हैं। ....

आपकी राय

Posted On March - 12 - 2020 Comments Off on आपकी राय
जब लोकतांत्रिक राष्ट्र में राजनीतिक महत्वाकाक्षाएं राष्ट्रहित से ऊपर हो जायें तो फिर लोकतंत्र का कमजोर होना स्वाभाविक है। नफरत की राजनीति से कोई राजनीतिक दल अपना भला सोचता है तो यह देश के हित में नहीं है। आज वोट बैंक की राजनीति ने आपसी सौहार्द, भाईचारा एवं सहिष्णुता की तिलांजलि दे दी है। ....

दंगे टाल सकती थी पुलिस की सतर्कता

Posted On March - 12 - 2020 Comments Off on दंगे टाल सकती थी पुलिस की सतर्कता
हाल ही में उत्तर-पूर्व दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा से उथल-पुथल मच गई थी, जिसमें अब तक 50 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। बड़े पैमाने पर सरकारी और गैर सरकारी संपत्तियां लूट-आगजनी-तोड़फोड़ का शिकार हुई हैं। स्थिति हाथ से निकल गई क्योंकि मौके पर तैनात कानून-व्यवस्था लागू करवाने वाली प्रशासनिक इकाइयां न केवल दृढ़ता से हालातों से निपटने में नितांत असफल रही हैं बल्कि उनमें ....

सिंधिया की गुगली

Posted On March - 12 - 2020 Comments Off on सिंधिया की गुगली
मध्य प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने होली के दिन ऐसा रंग खेला कि कांग्रेस सरकार का चेहरा जहां धूमिल हुआ, वहीं भाजपा का चेहरा खिल गया। मंगलवार को सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद राजनीतिक घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि कांग्रेस आलाकमान हतप्रभ रह गया। ....

एकदा

Posted On March - 10 - 2020 Comments Off on एकदा
एक बालक ने अपने पिता से पूछा कि पिताजी मनुष्य का जन्म एक जैसा होता है, उसकी बनावट भी एक जैसी रहती है, परंतु जब वह बड़ा होता है तो किसी का बहुत नाम, मान-सम्मान होता है और कोई पतन के गर्त में डूब कर अपना अस्तित्व ही खो बैठता है, ऐसा क्यों होता है? पिता उसे अपने साथ एक गुब्बारे वाले के पास ले ....

रंग भी उनका, रंग में भंग भी उनकी

Posted On March - 10 - 2020 Comments Off on रंग भी उनका, रंग में भंग भी उनकी
ब्रज में धूम है होली है। ये पुराने टाइप का स्टेटमेंट था। पुरानी बाइट, होली के पुराने टीवी कार्यक्रम की। नया सीन कुछ अलग-सा है जी। हुरियारे उर्फ होली खेलक अब शुरू ही तब होते हैं, जब सामने टीवी कैमरे हों। टीवी ने इत्ती आदतें खऱाब कर दी हैं कि कुछ दिनों बाद सरसों के फूल उगने से इनकार ना कर दें, यह कहते हुए ....

जीवन में इंद्रधनुषी रंगों की उमंग

Posted On March - 10 - 2020 Comments Off on जीवन में इंद्रधनुषी रंगों की उमंग
कभी सोचा है, कैसी होगी रंगों से विहीन दुनिया? सब कुछ श्वेत-श्याम होगा तो विभिन्न वस्तुओं की पहचान कैसे सुगम होगी, और कैसे उनमें भेद करना संभव होगा? इसी के साथ हमारी सोच और संवेदनाओं में आमूल, अजीबोगरीब तबदीली आएगी, जीवन कमोबेश मशीनी हो जाएगा। इसमें नीरसता तथा उकताहट पसर जाएगी। ....

आपकी राय

Posted On March - 10 - 2020 Comments Off on आपकी राय
बिहार के नियोजित शिक्षक पूर्ण वेतनमान, सेवा शर्त, पेंशन आदि की मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। सरकार इन मांगों को मानने को तैयार नहीं है। प्रधान सचिव की दलील है कि अगर मांग मानी गयी तो कई योजनाएं बंद करनी पड़ेगी, जो हास्यास्पद है। मुख्यमंत्री ने भी सदन में कहा कि सब कुछ शिक्षकों को ही दे देंगे तो जनता को क्या देंगे? ....

अवध की होली में गंगा-जमुनी रंगत

Posted On March - 10 - 2020 Comments Off on अवध की होली में गंगा-जमुनी रंगत
इस बहुलतावादी देश में, जैसे कई दूसरे त्योहारों के, वैसे ही होली, यहां तक कि उससे जुड़ी ठिठोलियों के भी, अनेक रंग हैं। कुछ परम्परा, आस्था व भक्ति से सने हुए तो कुछ खालिस हास-परिहास, उल्लास और शोखियों के। आप चाहें तो इन्हें ‘भंग के रंग और तरंग’ वाले भी कह लें। शौक-ए-दीदार फरमाने वाले तो कई बार यह देखकर दांतों तले उंगली दबा लेते ....

तन-मन के रंग

Posted On March - 10 - 2020 Comments Off on तन-मन के रंग
यूं तो हर दौर में होली के त्योहार की सार्थकता रही है, मगर आज के आत्मकेंद्रित होते समाज में होली के खास मायने हैं। उन मनोग्रंथियों को खोलने के मकसद से, जो सामाजिक व आर्थिक नजरिये से व्यक्ति-व्यक्ति में भेद करती हैं। एक दिन खुले दिल से गले मिलने का, रंग लगाने का और तन-मन को भिगोने का। एक दिन सहज भाव से रंग ....

एकदा

Posted On March - 9 - 2020 Comments Off on एकदा
एक शिष्य ने ऋषि से पूछा, ‘इस कलियुग में रहते हुए पाप-कर्मों से बचने का क्या उपाय है?’ ऋषि ने गंभीर होकर कहा, ‘शुद्धता अन्तस की होनी चाहिए, अन्तस शुद्ध होगा तो हम जो भी करेंगे वह पुण्य ही होगा, शुद्ध अन्तस से पाप हो ही नहीं सकता। और यदि अन्तस शुद्ध नहीं है तो हम जो भी करेंगे वह गलत ही होगा, पुण्य भी ....

हरियाणा की आबकारी नीति

Posted On March - 9 - 2020 Comments Off on हरियाणा की आबकारी नीति
हरियाणा सरकार की हालिया नयी आबकारी नीति से नवयुवकों में शराबखोरी की लत पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगी। पंजाब की तरह हरियाणा में नशे का सेवन बढ़ने से सरकार पहले ही बहुत चिंतित है। ऐसे में इसकी आबकारी नीति नशे की आग में घी डालने वाला काम ही करेगी। माना कि आबकारी विभाग राजस्व प्राप्ति का मुख्य स्रोत है ....

अदम्य आशा में नवजीवन सृजन-मंत्र

Posted On March - 9 - 2020 Comments Off on अदम्य आशा में नवजीवन सृजन-मंत्र
कहते हैं ‘जब तक सांस, तब तक आस’ अर्थात जीवन में जब तक आशा यानी शुभ के होने का विश्वास बना रहता है, तब तक आदमी जीवन में हिम्मत नहीं हारता और जैसे ही उसकी आशा टूटती है, वैसे ही आदमी जीवन खो बैठता है। ‘रामचरित मानस’ में महाकवि संत तुलसीदास ने तो आशा, विश्वास और निष्ठा की शक्ति को आदमी का सबसे बड़ा संबल ....
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