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खास खबर
अस्पतालों में बच्चों की मौत

अस्पतालों में बच्चों की मौत

जन संसद सुविधाओं का संकट शिशुओं की बढ़ती मृत्यु दर शिशु चिकित्सा पर एक प्रश्नचिन्ह है। देश में जिलास्तर के अस्पतालों की दयनीय स्थिति के दृष्टिगत सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की दुर्दशा स्वयं दृष्टिगोचर हो जाती है। नेता अपने वक्तव्यों में लोकलुभावन वादे करते हैं लेकिन बीमार अस्पतालों का इलाज करने ...

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खुले हृदय से आसमानी सफलताएं

खुले हृदय से आसमानी सफलताएं

रेनू सैनी हृदय यानी आम बोलचाल की भाषा में दिल। वही दिल जो मनुष्य के सीने में बाईं ओर धड़कता है और यह सुनिश्चित करता है कि जीवन चल रहा है। दिल पर अनेक कवियों ने रचनाएं लिखी हैं। साहित्य एवं फिल्म जगत दिल के उदाहरणों से भरा पड़ा है। आपको ...

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निस्तेज होती पीढ़ी को दीजिए नयी ऊर्जा

निस्तेज होती पीढ़ी को दीजिए नयी ऊर्जा

वेल्लोर मठ में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद को स्मरण किया और बताया कि स्वामी जी कहा करते थे—‘मुझे सौ प्रतिबद्ध और ऊर्जावान युवक दे दो, मैं इनके सहयोग से युग पलट दूंगा।’ निश्चय ही भारत एक युवा देश है। देश की उन्चास प्रतिशत जनसंख्या पैंतीस बरस तक ...

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धुन के धोनी

धुन के धोनी

सम्मानजनक हो हर खिलाड़ी की विदाई भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने जब से खिलाड़ियों के सालाना करार का ऐलान किया है और उसमें दिग्गज क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी को शामिल नहीं किया, उनको लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। कयास लगाये जा रहे हैं कि महेंद्र सिंह धोनी संन्यास ...

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आदर्श और यथार्थ का टकराव

आदर्श और यथार्थ का टकराव

पुस्तक समीक्षा कमलेश भारतीय सावित्री चौधरी का दूसरा कथा-संग्रह ‘रेशमी गुच्छी’ आदर्श और यथार्थ का टकराव प्रस्तुत करती कहानियों का संग्रह है। हिंदी कहानी शुरू से ही आदर्श और यथार्थ के बीच झूलती रही। शीर्षक कथा ‘रेशमी गुच्छी’ नारी के फैसले को लोकलाज, ममता और पत्नी होना कैसे बदल देता है, ...

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विसंगतियों की तस्वीर

विसंगतियों की तस्वीर

पुस्तक समीक्षा सरस्वती रमेश हमारा समाज तरह-तरह की विडंबनाओं और त्रासदियों से भरा हुआ है। ये त्रासदियां जब तब हमारी आंखों से टकराती भी रहती हैं। लेकिन हमारी जिंदगी में ये इतनी आम हो चुकी हैं कि हम देखकर भी आंखें मूंद लेते हैं या फिर जरा सी आह निकाल भूल जाते ...

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पौराणिक कथाओं के साहित्यिक विमर्श

पौराणिक कथाओं के साहित्यिक विमर्श

पुस्तक समीक्षा केवल तिवारी कवि, लेखक शेषेंद्र शर्मा दक्षिण भारत के बड़े साहित्यिक हस्ताक्षर रहे हैं। उनके नाम से गुंटूरू शेषेन्द्र शर्मा मेमोरियल ट्रस्ट बना है। हैदराबाद में स्थित इस ट्रस्ट के जरिये उनकी कई किताबें आज भी अनूदित होकर आ रही हैं। कुछ समय पहले उनकी एक किताब ‘मेरी धरती मेरे ...

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  • निस्तेज होती पीढ़ी को दीजिए नयी ऊर्जा
     Posted On January - 20 - 2020
    वेल्लोर मठ में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद को स्मरण किया और बताया कि स्वामी जी कहा....
  •  Posted On January - 20 - 2020
    ज़िन्दगी से प्यार किसे नहीं होता, लेकिन हमने ही न जाने क्यों ज़िन्दगी से यह कहना छोड़ दिया कि लव....
  • खुले हृदय से आसमानी सफलताएं
     Posted On January - 20 - 2020
    हृदय यानी आम बोलचाल की भाषा में दिल। वही दिल जो मनुष्य के सीने में बाईं ओर धड़कता है और....
  • अस्पतालों में बच्चों की मौत
     Posted On January - 20 - 2020
    शिशुओं की बढ़ती मृत्यु दर शिशु चिकित्सा पर एक प्रश्नचिन्ह है। देश में जिलास्तर के अस्पतालों की दयनीय स्थिति के....

बालमन पर कालिख

Posted On December - 12 - 2019 Comments Off on बालमन पर कालिख
इक्कीसवीं सदी के भारत में यदि छात्रों को दंडित करने के लिये उनके चेहरों पर काला रंग लगाने की घटना सामने आए तो इसे शर्मनाक ही कहा जायेगा। वैसे भी विद्यार्थियों को आज के दौर में दंडित करने का औचित्य समझ में नहीं आता। नई पीढ़ी के विद्यार्थी इतने ज्यादा संवेदनशील हैं कि सार्वजनिक बेइज्जती पर तल्ख प्रतिक्रिया देते हैं। फिर भी किसी सभ्य समाज ....

लोकतांत्रिक आज़ादी के चीनी द्वंद्व

Posted On December - 12 - 2019 Comments Off on लोकतांत्रिक आज़ादी के चीनी द्वंद्व
भारत की विदेशों में रहने वाले आप्रवासी भारतीयों के प्रति नीति रही है कि जिस किसी भी मुल्क में बसे हैं, वहां पर उनकी पहली वफादारी उस देश के प्रति बनती है, मसलन यह मॉरीशस, फिजी या यूनाइटेड किंग्डम हो। हालांकि, वे अपने पुरखों की भूमि भारत के साथ अपने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पारिवारिक और आर्थिक संबंध पहले की तरह खुशी-खुशी बनाए रख सकते हैं। ....

आपकी राय

Posted On December - 12 - 2019 Comments Off on आपकी राय
देश में साइबर ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि पढ़े-लिखे लोग भी साइबर ठगी के शिकार हो जाते हैं? जबकि ऐसे लोगों को तो देश में बढ़ते साइबर ठगी को रोकने और इसके प्रति अशिक्षित लोगों को जागरूक करने के लिए रुचि दिखानी चाहिए। साइबर ठग, धोखाधड़ी करने के लिए लोगों को ऑफर या पैसे डबल करने ....

एकदा

Posted On December - 12 - 2019 Comments Off on एकदा
कोलरेडो में जब सबसे पहली दफा सोने की खदानें मिलीं तो सारा अमेरिका कोलरेडो की तरफ दौड़ पड़ा। खबरें आईं कि जरा-सा खेत खरीद लो और सोना मिल जाएगा। लोगों ने जमीनें खरीद डालीं। एक करोड़पति ने अपनी सारी संपत्ति लगाकर एक पूरी पहाड़ी ही खरीद ली। ....

न्याय के लिए बहुत कुछ बदलना होगा

Posted On December - 12 - 2019 Comments Off on न्याय के लिए बहुत कुछ बदलना होगा
एक तरफ देश की अदालतों में मुकदमों के अंबार दूसरी तरफ निर्भया जैसे चर्चित मामले में निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया में अटकी अपराधियों की फांसी की सजा और तीसरी तरफ हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक महिला के साथ दरिंदगी के आरोपियों के कथित पुलिस एनकाउंटर पर फूल बरसाता देश। ....

अंगीकार कला करे सबका भला

Posted On December - 12 - 2019 Comments Off on अंगीकार कला करे सबका भला
‘आप मुझे अच्छे लगने लगे, सपने सच्चे लगने लगे।’ यह गाना या तो किसी फिल्म के हीरो-हीरोइन गा सकते हैं या फिर राजनीति के धुरन्धर। और धुरन्धर भी वे जो एक-दूसरे को फूटी आंख ना सुहाते हों। कोर्ट-कचहरियों की बात करें तो पता चलता है तलाक के लाखों मुकदमे लंबित पड़े हैं। ....

एकदा

Posted On December - 11 - 2019 Comments Off on एकदा
एक बार एक राजा भोजन कर रहा था। खाना परोस रहे सेवक के हाथ से अचानक थोड़ी सी सब्जी राजा के कपड़ों पर छलक गई। राजा की त्योरियां चढ़ गयीं। यह देख सेवक घबराया, लेकिन कुछ सोचकर उसने प्याले की बची सारी सब्जी भी राजा के कपड़ों पर उड़ेल दी। अब तो राजा के क्रोध की सीमा न रही। ....

अपना क्या बिगाड़ लेगा जी प्याज

Posted On December - 11 - 2019 Comments Off on अपना क्या बिगाड़ लेगा जी प्याज
जब महंगाई अपना कुछ नहीं बिगाड़ पाई। अफसरों से लेकर निचले स्तर के मुलाजिमों की रिश्वतखोरी की आदत अपना कुछ नहीं बिगाड़ पाई। नेताओं द्वारा भ्रष्टाचार करने की आदत अपना कुछ नहीं बिगाड़ पाई। शनि की साढ़ेसाती हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाई तो छोटा-सा प्याज हमारा क्या बिगाड़ लेगा। ....

हादसों से निपटने का नजरिया बदलें

Posted On December - 11 - 2019 Comments Off on हादसों से निपटने का नजरिया बदलें
अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन की उच्चतम व्यवस्था के रहते हुए यदि राजधानी दिल्ली के अग्निकांड में लोगों की जिन्दगी बचाना संभव न हुआ तो समझा जा सकता है कि स्थिति कितनी भयावह रही होगी। जिन लोगों ने अनाज मंडी के उस दुर्भाग्यशाली स्थान को देखा है, वे बता सकते हैं कि वहां काम करने वालों की जिन्दगी हर क्षण जोखिम में थी। ....

आपकी राय

Posted On December - 11 - 2019 Comments Off on आपकी राय
बीते दिनों हैदराबाद में महिला डॉक्टर से बलात्कार कर जिंदा जलाने की घटना पर पूरा देश सदमे में था। सभी लोग चाहते थे कि अपराधी को तुरंत सजा मिलनी ही चाहिए। इसी बीच सप्ताह भर के अंदर ही उन चारों आरोपियों के एनकाउंटर में मारे जाने की खबर आई। लोग खुश नजर आए। महिलाओं ने मिठाइयां बांटी और खुशी का इजहार किया। ....

खुदकुशी समाज की साझी विफलता का प्रतीक

Posted On December - 11 - 2019 Comments Off on खुदकुशी समाज की साझी विफलता का प्रतीक
जैसे ही मुझे फातिमा लतीफ द्वारा खुदकुशी करने की खबर लगी, मुझे लगा मानो मेरा अपना शरीर जख्मी हुआ है। चूंकि बतौर एक अध्यापक मैं उस लड़की जैसे अंतर्मन वाले हजारों विद्यार्थियों से बावस्ता रहा हूं, इसलिए मुझे इस घटना से एक संभावना का आसामयिक दुखद अंत होने जैसा महसूस हुआ है। ....

जानलेवा आबोहवा

Posted On December - 11 - 2019 Comments Off on जानलेवा आबोहवा
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद का वह अध्ययन चिंता बढ़ाने वाला है, जिसमें बताया गया है कि वर्ष 2017 में देश में वायु प्रदूषण की वजह से 12.4 लाख लोगों की मौत हुई। इसके अलावा बड़ी संख्या उन लोगों की भी होगी जो इससे जनित रोगों से जीवन पर्यंत जूझते रहेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले वायु प्रदूषण के घातक प्रभावों का यह अध्ययन बताता है ....

एकदा

Posted On December - 10 - 2019 Comments Off on एकदा
अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन बहुत ही सुलझे हुए तथा शांत प्रकृति के लिए जाने जाते थे। एक बार लिंकन ने अपने क्रोधी और विचलित स्वभाव के बेटे को तीन चीजें दीं। ये तीन चीजें थी काफी, आलू और अंडा। बेटे को ये तीन चीजें देकर उन्होंने तीन अलग-अलग बर्तनों मे खौलते हुए पानी में इनको डालने को कहा। ....

क्षणभंगुर जीवन में सुख-दुख के नृत्य

Posted On December - 10 - 2019 Comments Off on क्षणभंगुर जीवन में सुख-दुख के नृत्य
वह मित्र कुछ दिन पहले गोआ गये थे, तरह-तरह का डांस किया था। उस डांस से एक झाबड़झऊआ डांस का फोटू निकला था, जिसे उन्होंने फेसबुक पर बतौर प्रोफाइल पिक्चर सैट किया। फेसबुक पर उन्होंने अभी दुखद सूचना दी कि पत्नी ना रही। पत्नी के निधन के समाचार के साथ की प्रोफाइल-पिक्चर में वह नृत्यरत थे। ....

मानसिक रोगों का बढ़ता दायरा चिंताजनक

Posted On December - 10 - 2019 Comments Off on मानसिक रोगों का बढ़ता दायरा चिंताजनक
हैदराबाद, उन्नाव और त्रिपुरा में युवतियों से सामूहिक बलात्कार के बाद उन्हें जिन्दा जलाकर मार डालने की घटनाओं को लेकर समूचा देश उद्वेलित है। हैदराबाद कांड के आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद लोगों में खुशी, उन्नाव कांड के आरोपियों को सरेआम फांसी देने की मांग और इस पर उत्तेजक टिप्पणियां काफी विचलित करने वाली हैं। ....

आपकी राय

Posted On December - 10 - 2019 Comments Off on आपकी राय
6 दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘आलोचना को धैर्य, ध्यान से सुने सरकार’ संतुलित विचार प्रकट करने वाला था। जिस तरह एक कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री अमित शाह तथा देश के उद्योगपतियों के बीच प्रसिद्ध उद्योगपति राहुल बजाज ने देश में व्याप्त डर की आशंका व्यक्त की और कोई उद्योगपति और समाचार पत्र इस उद्योगपति के पक्ष में खुलकर नहीं आया, ....
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