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जीवट

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कहानी योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ ज़िंदगी के रंग भी बड़े निराले होते हैं। कब, कौन-सा रंग आपको अनायास ही रंग देगा, यह पता ही नहीं चलता और जब आदमी रंगा जाता है, तब तो भौचक्का-सा खड़ा रह जाता है। बस, यही तो हुआ था मेरे साथ भी, जब अनायास ही रजनी ...

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सामाजिक सरोकारों की फिल्मों के अग्रदूत

सामाजिक सरोकारों की फिल्मों के अग्रदूत

ख्वाजा अहमद अब्बास : जयंती आज अरुण कुमार कैहरबा ऐसे नामी-गिरामी संस्कृति-कर्मियों, साहित्यकारों व पत्रकारों की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने हरियाणा-पंजाब ही नहीं, पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्हीं में से एक हैं लोगों के दिलों पर राज करने वाले संपादक, साहित्यकार, फिल्मकार, निर्देशक, पटकथा लेखक ख्वाजा अहमद अब्बास। ...

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भूली न जाने वाली लाहौर की विरासत

भूली न जाने वाली लाहौर की विरासत

पुस्तक समीक्षा राजकिशन नैन समाज, साहित्य, भाषा एवं संस्कृति के उत्थान के लिए गत 60 साल से सक्रिय डॉ. केवल धीर ने अपनी पुस्तक ‘मैं लाहौर हूं’ में रावी नदी के तट पर बसे लाहौर के इतिहास, सांस्कृतिक थाती, इसके महल-मकानों, गली-मोहल्लों, बाग-बाजारों, मंदिर-मस्जिदों, मेलों-ठेलों और इसकी अजीमोशान शख्सीयतों आदि के ...

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युग-प्रवर्तक महान संत

युग-प्रवर्तक महान संत

पुस्तकें मिलींं अरुण नैथानी मध्यकाल में जब भारतीय जनमानस विदेशी आक्रांताओं के दमन से त्रस्त था तब युग प्रवर्तक संतों ने भारतीय जनमानस को न केवल नयी राह दिखाई वरन‍् आध्यात्मिक शक्ति से भी समृद्ध किया। इन्द्रा स्वप्न की पुस्तक ‘युग-प्रवर्तक महामानव’ में संत ज्ञानेश्वर, भक्त तुलसीदास, महाकवि सूरदास, तीर्थांकर वर्धमान महावीर, ...

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कृषि उत्पादों के कीमत संकट से जूझते किसान

कृषि उत्पादों के कीमत संकट से जूझते किसान

ओपन मार्केट इंस्टिट्यूट के निदेशक, रूढ़िवादी अमेरिकन लेखक आॅस्टिन फ्रेरिक कहते हैं, ‘1980 में प्रत्येक डाॅलर से 37 सेंट किसान के पास वापस पहुंच जाते थे। आज एक डाॅलर में से सिर्फ 15 सेंट ही किसानों को मिल पाते हैं।’ वह दशकों तक कुछ बहुराष्ट्रीय गठजोड़ों की आर्थिक शक्ति बढ़ाने ...

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सिनेमा में मध्यवर्गीय जीवन का कुशल चितेरा

सिनेमा में मध्यवर्गीय जीवन का कुशल चितेरा

सुनील मिश्र बासु चटर्जी के बारे में इस समय इस पीढ़ी के सामने बात करने के लिए बहुत सारे उदाहरणों में जाना पड़ेगा। उम्र और अस्‍वस्‍थता, फिर सिनेमा की आज जो चाल है उसके अनुरूप उनका सिनेमा नहीं था लेकिन आज का सिनेमा कहीं न कहीं एक-दो उदाहरणों में उनके सिनेमा ...

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बदले हालात में नयी सोच बदलेगी तस्वीर

बदले हालात में नयी सोच बदलेगी तस्वीर

को पुनः अपने पैरों पर खड़ा होने में लंबा अरसा लगने वाला है। एक तरफ उत्पादन के लिए मजदूरों की कमी, दूसरी तरफ ग्राहक नदारद। मजदूर यदि आ भी जाएं तो नयी उत्पादन व्यवस्था को अपनाने के लिए इंतजार करना होगा। दरअसल, जो उत्पादन एवं सेवाएं ग्राहकों की जरूरतें थीं, ...

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  • जीवट
     Posted On June - 7 - 2020
    ज़िंदगी के रंग भी बड़े निराले होते हैं। कब, कौन-सा रंग आपको अनायास ही रंग देगा, यह पता ही नहीं....
  • सामाजिक सरोकारों की फिल्मों के अग्रदूत
     Posted On June - 7 - 2020
    ऐसे नामी-गिरामी संस्कृति-कर्मियों, साहित्यकारों व पत्रकारों की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने हरियाणा-पंजाब ही नहीं, पूरे देश में अपनी एक अलग....
  • भूली न जाने वाली लाहौर की विरासत
     Posted On June - 7 - 2020
    समाज, साहित्य, भाषा एवं संस्कृति के उत्थान के लिए गत 60 साल से सक्रिय डॉ. केवल धीर ने अपनी पुस्तक....
  • युग-प्रवर्तक महान संत
     Posted On June - 7 - 2020
    मध्यकाल में जब भारतीय जनमानस विदेशी आक्रांताओं के दमन से त्रस्त था तब युग प्रवर्तक संतों ने भारतीय जनमानस को....

आतंकवाद पर एक महत्वपूर्ण पुस्तक

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on आतंकवाद पर एक महत्वपूर्ण पुस्तक
मनमोहन वरिष्ठ पत्रकार सुशील राजेश की नई किताब आई है— ‘आतंकवाद या छाया-युद्ध’। बीते समय के दौरान जो आतंकी हमले हुए, आतंकवादी गुटों ने साजिशें रचीं, आतंकवाद पाकिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल करता रहा। इस किताब में लेखक ने सटीक व तथ्यपरक टिप्पणियां की हैं। हिंदी पत्रकारिता में यह परंपरा लगभग नगण्य है कि संपादकीय लेखों और सामयिक टिप्पणियों को एक पुस्तक के रूप में संकलित किया 

अचम्भा

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on अचम्भा
खरी खोटी रणबीर पाछले हफते तीन बात दिमाग पर छाई रहीं। उठतें-बैठते, गामां की बैठकां मैं, कालेज मैं कैंटीन पर सारी जागां इन बातां का जिकरा था। एके बात तो महिला आरक्षण बिल के बारे मैं थी। इस बिल नै लेकै पूरे हिन्दुस्तान मैं तहलका सा माचग्या। इस बिल नै लेकै राज्य सभा मैं हंगामा हुआ कसूती ढाल की सर्कस हुई, बिल राज्य सभा मैं पाड़ कै बगा दिया फेर राज्य सभा मैं यो बिल पास होग्या। बिल पास हुए 

श्रीमुख से

Posted On March - 20 - 2010 Comments Off on श्रीमुख से
विजेन्दर का खून कैसे बहना बंद हुआ। मैं तो इसके लिए भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं। उसकी नजरे-इनायत थी कि विजेन्दर स्वर्ण जीतने में सफल हुआ। कोच, जीएस संधु, नयी दिल्ली में मायावती अब दलित की बेटी नहीं रही, बल्कि वह दौलत की बेटी बन चुकी है।  कांग्रेस के वरिष्ठï नेता, दिग्विजय सिंह, नयी दिल्ली में विदेशी विवि को भारत में कैंपस स्थापित करने का विधेयक मील का पत्थर साबित होगा। सही मायने में उच्च 

सौहार्द या सांठगांठ?

Posted On March - 20 - 2010 Comments Off on सौहार्द या सांठगांठ?
पंजाब में राजनेताओं के विरुद्ध दर्ज मुकदमे वापस लिये जाने की कोशिश दरअसल राजनेताओं की बाबत इस आम जनधारणा को और पुष्ट ही करेगी कि सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। जिन राजनेताओं के विरुद्ध मुकदमे वापस लेने की बात चल रही है, उनमें मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह और विधानसभा अध्यक्ष निर्मल सिंह काहलों भी शामिल हैं। राजनेताओं के विरुद्ध दर्ज मुकदमो 

प्रकृति में निहित है अवसान-पुनर्जीवन का संदेश

Posted On March - 20 - 2010 Comments Off on प्रकृति में निहित है अवसान-पुनर्जीवन का संदेश
खुशवंत सिंह जीवन के अवसान तथा पुनर्जीवन का स्पष्टï संदेश हम प्रकृति के आंगन में गहरे तक महसूस कर सकते हैं, बशर्ते हम उसके प्रति संवेदनशील हों। यही सब कुछ मैं अपने घर पीछे स्थित बगीचे में बदलती मौसमी बयार के साथ गहरे तक महसूस करता हूं। इसका सर्वोत्तम रूप हम मार्च के पहले पखवाड़े महसूस कर सकते हैं। इसकी पहली बानगी मैं अपने घर की सीमा में स्थित शहतूत के वृक्ष में देखता हूं जो इस दौरान 

बदल सकती है तस्वीर बशर्ते….

Posted On March - 20 - 2010 Comments Off on बदल सकती है तस्वीर बशर्ते….
आधी दुनिया डा. रेणुका नैयर भारतीय राष्ट्रीय जागरण के एक अनमोल रत्न राधा मोहन गोकुलजी ने नारी स्वाधीनता और उसे सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नारी को समानता का अधिकार दिलाने के वह समर्थक रहे, इसी कारण वह हिन्दू समाज के कट्टर वर्ग में परित्यक्त और बहिष्कृत रहे। वह वर्ण व्यवस्था को नहीं मानते थे, द्विज-शूद्र का भेद न मानते थे, ईश्वर व धर्म को अस्वीकार करते थे और स्त्रियों 

जनमंच

Posted On March - 20 - 2010 Comments Off on जनमंच
विषय : कैसे लगे सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने की प्रवृत्ति पर रोक? उत्तरदायित्व समझना होगा छोटी-छोटी बातों पर तोड़-फोड़, आगजनी और सरकारी संपत्ति को नष्टï करने की घटनाएं दुखद हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून बनाने से क्या होगा? यह कार्य उन उकसाये लोगों द्वारा किया जाता है जिन्हें अहसास नहीं होता कि सरकारी संपत्ति भी उन्हीं के धन से खरीदी जाती है। उसे नष्टï कर  वे अप्रत्यक्ष 

आपके पत्र

Posted On March - 19 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
सादगी का अनुसरण नीरज, यमुनानगर रविवारीय संपादकीय (7 मार्च) ‘धर्म धंधा हो गया, देवता खामोश हैंÓ— साधु का लिबास पहने पाखंडी बाबाओं का पर्दाफाश करने वाला था। भारतीय जनता धर्म व आस्था के प्रति अटूट विश्वास की इतनी अधिक पक्षधर हैं कि हर गेरुए वस्त्रधारक में इन्हें भगवान का ही सच्चा रूप दृष्टिगोचर होता है। इसी मासूमियत का फायदा उठाकर साधु-संत का चोला पहन कथित ढोंगी भक्तजनों की भावनाओं 

सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन

Posted On March - 19 - 2010 Comments Off on सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन
ऐतिहासिक फैसला डॉ. एल.एस. यादव दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 मार्च, 2010 को सरकार को यह निर्देश दिए कि भारतीय सशस्त्र बलों में महिला सैन्य अधिकारियों को स्थाई कमीशन दिया जाए। यह फैसला भारतीय सैन्य इतिहास में ऐतिहासिक रूप से एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। सेवा से निवृत्त एवं सेवारत महिला अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं में केंद्र सरकार को सशस्त्र बलों में पुरुष अधिकारियों 

शैक्षिक सुधारों के अगुवा कपिल सिब्बल

Posted On March - 19 - 2010 Comments Off on शैक्षिक सुधारों के अगुवा कपिल सिब्बल
चर्चित व्यक्ति अरुण नैथानी शैक्षिक क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधारों के प्रति मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के उत्साह और प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें यदि 21वीं सदी में भारतीय शिक्षा क्रांति का प्रणेता कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। मंत्रालय संभालने के बाद लार्ड मैकाले के पदचिह्नïों पर चल रही शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की उनकी मंशा 

कब होगा हॉकी का आईपीएल

Posted On March - 19 - 2010 Comments Off on कब होगा हॉकी का आईपीएल
खबरों की खबर गुरमीत सिंह हाल ही में पंजाब विश्वविद्यालय में एक कोर्स के दौरान व्याख्यान के लिए आए इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मनोहरलाल ने अपने भाषण में कहा कि जब भारत क्रिकेट में कोई बड़ा मैच जीतता है तो वे रोते हैं क्योंकि इससे बाकी खेल दो कदम और पीछे हो जाते हैं। उनकी बात सुनने में अटपटी लग सकती है और एक क्रिकेट-प्रेमी होने के नाते मुझे भी 

पगड़ी संभाल जट्टा!

Posted On March - 19 - 2010 Comments Off on पगड़ी संभाल जट्टा!
सरकारी अदारों में भ्रष्टाचार के घर करने की चर्चा तो अकसर सुनने को मिलती ही रहती है परंतु यदि सत्तारूढ़ दल का कोई विधायक  ही विधानसभा की बैठक में छाती ठोंककर पदों की खरीद-फरोख्त होने का दावा करे तो यह मानना ही पड़ेगा कि भ्रष्टाचार का दीमक सरकारी अदारे की लगभग हर देहरी को चाट रहा है। पंजाब विधानसभा में यह मुद्दा शिरोमणि अकाली दल के विधायक कैप्टन बलबीर सिंह बाठ के तारांकित प्रश्न के माध्यम 

प्रतिस्पर्धा से डरें नहीं

Posted On March - 19 - 2010 Comments Off on प्रतिस्पर्धा से डरें नहीं
पंद्रहवीं लोकसभा के चुनावों में जनादेश लेकर अपनी दूसरी पारी शुरू करने वाली मनमोहन सिंह सरकार के लिए यह निश्चय ही चिंता का विषय होना चाहिए कि उसके एक और विधेयक की राह में विपक्षी एकता की मजबूत दीवार खड़ी होती दिख रही है। यह विधेयक विदेशी शिक्षण संस्थानों को भारत में अपने कैंपस खोलने की अनुमति देने से संबंधित है। सोमवार को हुई केबिनेट की बैठक में इस विधेयक को मंजूरी दी गयी है। साफ है 

रोने के फायदे!

Posted On March - 18 - 2010 Comments Off on रोने के फायदे!
सागर में गागर सागर में गागर रोने का रोना लेकर बैठ जाओ तो फायदे ही फायदे हैं। रोना जीवन में बहुत काम आता है। जिसे रोना नहीं आता, समझो वह पिछड़ गया। बात-बात पर आंखों से आंसू बहने लगें तो समझो जीवन नैया पार लग गई। रोने के लिए यह कतई आवश्यक नहीं कि आप वास्तव में रोयें ही रोयें, बस रोने की कला आनी चाहिए। वैज्ञानिक रूप से रोना भले लाभदायक नहीं हो, परन्तु कलात्मक रूप से रोना फायदे का मूल है। 

अरब देशों से संबंध किस कीमत पर

Posted On March - 18 - 2010 Comments Off on अरब देशों से संबंध किस कीमत पर
विदेश नीति ४विष्णुगुप्त जवाहर लाल नेहरू का मुस्लिम देशों खासकर अरब देशों से अतिरिक्त प्रेम था। इस्राइल के प्रश्न पर जवाहर लाल नेहरू अरब देशों से भी दो कदम आगे थे। जवाहर लाल नेहरू की यह अतिरिक्त प्रेम की नीति का अनुसरण इंदिरा गांधी ने भी किया। जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी की शायद यह सोच रही होगी कि अरब देशों की निकटता और सहयोग से दुनिया में उनकी धाक बढ़ेगी और समर्थन 

नक्सली हिंसा और बेबस सरकार

Posted On March - 18 - 2010 Comments Off on नक्सली हिंसा और बेबस सरकार
निरंकार सिंह बजट सत्र का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा था कि ‘पश्चिम बंगाल और बिहार में इस हफ्ते हुए नक्सली हमले इस बात का सबूत हैं कि नक्सली सिर्फ हिंसा करना जानते हैं। लेकिन सरकार इनसे डरेगी नहीं। इन हमलों ने हमारे नक्सलवाद उन्मूलन के संकल्प को और मजबूत कर दिया है।Ó राष्ट्रपति के इस बयान के बाद नक्सली हिंसा का एक और हादसा बंगाल में ही हुआ। इसमें पुलिस का 
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