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खास खबर
कृषि उत्पादों के कीमत संकट से जूझते किसान

कृषि उत्पादों के कीमत संकट से जूझते किसान

ओपन मार्केट इंस्टिट्यूट के निदेशक, रूढ़िवादी अमेरिकन लेखक आॅस्टिन फ्रेरिक कहते हैं, ‘1980 में प्रत्येक डाॅलर से 37 सेंट किसान के पास वापस पहुंच जाते थे। आज एक डाॅलर में से सिर्फ 15 सेंट ही किसानों को मिल पाते हैं।’ वह दशकों तक कुछ बहुराष्ट्रीय गठजोड़ों की आर्थिक शक्ति बढ़ाने ...

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सिनेमा में मध्यवर्गीय जीवन का कुशल चितेरा

सिनेमा में मध्यवर्गीय जीवन का कुशल चितेरा

सुनील मिश्र बासु चटर्जी के बारे में इस समय इस पीढ़ी के सामने बात करने के लिए बहुत सारे उदाहरणों में जाना पड़ेगा। उम्र और अस्‍वस्‍थता, फिर सिनेमा की आज जो चाल है उसके अनुरूप उनका सिनेमा नहीं था लेकिन आज का सिनेमा कहीं न कहीं एक-दो उदाहरणों में उनके सिनेमा ...

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बदले हालात में नयी सोच बदलेगी तस्वीर

बदले हालात में नयी सोच बदलेगी तस्वीर

को पुनः अपने पैरों पर खड़ा होने में लंबा अरसा लगने वाला है। एक तरफ उत्पादन के लिए मजदूरों की कमी, दूसरी तरफ ग्राहक नदारद। मजदूर यदि आ भी जाएं तो नयी उत्पादन व्यवस्था को अपनाने के लिए इंतजार करना होगा। दरअसल, जो उत्पादन एवं सेवाएं ग्राहकों की जरूरतें थीं, ...

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फरमानों की विसंगतियों के यक्ष प्रश्न

फरमानों की विसंगतियों के यक्ष प्रश्न

राजेन्द्र चौधरी पहली खबर थी कि हरियाणा की बसों में टिकट केवल ऑनलाइन बिकेंगे। फिर रेलवे के संदर्भ में खबर थी कि अब स्टेशन पर टिकट आरक्षण शुरू कर दिया है। क्या रेलवे की ऑफलाइन टिकट बिक्री से कोरोना नहीं फैलता पर बस की भौतिक टिकट बिक्री से फैलता है? इस ...

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पाक में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का सिलसिला

पाक में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का सिलसिला

पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के आम अधिवेशन में पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने पश्चिम जगत में व्याप्त इस्लामोफोबिया का जिक्र कई बार किया था। उन्होंने भारत में मुस्लिमों से किए जा रहे कथित दुर्व्यवहार को लेकर कटाक्ष भी किए थे। लेकिन यह सब करने की बजाय उन्हें खुद अपने देश ...

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सेहत, सुकून और पर्यावरण की साथी

सेहत, सुकून और पर्यावरण की साथी

सरस्वती रमेश आजकल ऑटो, टैक्सी का किराया बढ़ा हुआ है। बसों में सीमित संख्या में मुसाफिरों को बैठाया जा रहा है। धीरे-धीरे जिन जगहों पर फैक्टरियां खुल भी रही हैं वहां तक कामगारों के पहुंचने में दिक्कत आ रही है। कई कामगारों ने ऑटो, बस के बजाय साइकिल पर भरोसा जताया ...

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चुकाना होगा कोरोना संकट का आर्थिक मूल्य

चुकाना होगा कोरोना संकट का आर्थिक मूल्य

कोरोना संकट का आर्थिक मूल्य हर देश को अदा करना पड़ रहा है लेकिन इसे अदा करने के तीन अलग-अलग रास्ते हैं। पहला रास्ता ब्राजील का है। उस देश ने निर्णय लिया कि वह कोरोना का सामना करने के लिए कोई कदम नहीं उठाएगा। जितना संक्रमण होता है उसे होने ...

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  • कृषि उत्पादों के कीमत संकट से जूझते किसान
     Posted On June - 6 - 2020
    ओपन मार्केट इंस्टिट्यूट के निदेशक, रूढ़िवादी अमेरिकन लेखक आॅस्टिन फ्रेरिक कहते हैं, ‘1980 में प्रत्येक डाॅलर से 37 सेंट किसान....
  •  Posted On June - 6 - 2020
    संपादकीय ‘सत्ता नहीं जनता सर्वोपरि’ पढ़ा। जनता का सर्वोपरि होना इस बात पर निर्भर करता है कि शासक ओबामा है....
  • सिनेमा में मध्यवर्गीय जीवन का कुशल चितेरा
     Posted On June - 6 - 2020
    सुनील मिश्र बासु चटर्जी के बारे में इस समय इस पीढ़ी के सामने बात करने के लिए बहुत सारे उदाहरणों में जाना पड़ेगा। 
  •  Posted On June - 6 - 2020
    ट्रंप साहब चीन से लड़ते-लड़ते अपनों से ही लड़ बैठे। उन्हें लगा था कि चीन से लड़ेंगे तो अपनों के....

मेरा भारत महान!

Posted On October - 2 - 2010 Comments Off on मेरा भारत महान!
संवेदनशील अयोध्या विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ का बहुप्रतीक्षित फैसला पूरे देश को राहत देने वाला है। फैसले के बाद किसी अप्रिय घटना की आशंकाएं निर्मूल साबित हुई हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि इक्कीसवीं सदी का भारत अधिक परिपक्व और आगे देखने वाला है। किसी भी विवाद में एक से अधिक पक्ष होते हैं, इसलिए स्वाभाविक ही कोई पक्ष किसी भी फैसले से असहमत भी हो सकता है। अयोध्या 

न्याय भी अधूरा मिलता है आधी दुनिया को

Posted On October - 2 - 2010 Comments Off on न्याय भी अधूरा मिलता है आधी दुनिया को
डॉ. रेणुका नैयर आधीदुनिया अपराध, विशेषकर ऐसा अपराध जो किसी को मौत की नींद सुला सकता हो, ऐसे अपराधी को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी ही चाहिए। हमारा समाज  यद्यपि इसमें विश्वास रखता है, लेकिन स्थिति प्राय: उस समय पलट जाती है जब अपराध किसी महिला के विरुद्ध होता है। बात अगर ‘ऊंचे लोगों’ की हो तो हमारा नज़रिया बदल जाता है। सच्चाई को जाने बिना हम इलज़ाम दूसरों पर लगाने की कोशिश करते 

विषय : क्या देश का आपदा प्रबंधन तंत्र ऐसी चुनौतियों के मुकाबले को तैयार है?

Posted On October - 2 - 2010 Comments Off on विषय : क्या देश का आपदा प्रबंधन तंत्र ऐसी चुनौतियों के मुकाबले को तैयार है?
जनमंच उत्तर भारत में अधिक खतरा भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जो बिना किसी पूर्व सूचना के आती है। संसार के अन्य देशों की भाति भारत में भी भूकंप आते रहते हैं। भारत में आज तक आने वाले सभी भूकंपों के अध्ययन और विश्लेषण के आधार पर भारतीय मौसम विभाग ने संपूर्ण भारत को पांच भूकंप संभावित क्षेत्रों में विभाजित किया है। इन क्षेत्रों में उत्तर और उत्तरी पूर्व भारत ऐसा बड़ा क्षेत्र है, 

न्याय की मृग-मरीचिका के लिए भटकता आम आदमी

Posted On October - 2 - 2010 Comments Off on न्याय की मृग-मरीचिका के लिए भटकता आम आदमी
खुशवंत सिंह न्यायिक व्यवस्था में व्याप्त कदाचार का खुलासा करते हुए पूर्व कानून मंत्री और सर्वोच्च न्यायालय के अग्रणीय अधिवक्ता शांति भूषण ने सोलह में से आठ पूर्व न्यायाधीशों के नाम इस मामले में उजागर किए हैं जिन पर अनियमितताओं के आरोप हैं। इसके प्रत्युत्तर में सर्वोच्च न्यायालय ने उन पर न्यायालय की अवमानना के आरोपों के तहत कार्यवाही की है। यह घटनाक्रम न्यायिक व्यवस्था 

भारतीयों की नयी पहचान

Posted On October - 1 - 2010 Comments Off on भारतीयों की नयी पहचान
हर भारतीय को नई पहचान देने तथा शासन-प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए एक अरब से अधिक भारतीयों के लिए ‘आधार’ परियोजना एक महत्वाकांक्षी शुरुआत है। दुनियाभर में अपनी तरह की इस अनूठी योजना की शुरुआत महाराष्ट्र के नंदुरबार जनपद के थेंभली इलाके के आदिवासियों से किया जाना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि देश के उपेक्षित तबके को अब राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा। जाहिर तौर पर इस नयी 

अब ओबामा घुमाएं अपनी चाबी

Posted On October - 1 - 2010 Comments Off on अब ओबामा घुमाएं अपनी चाबी
न्यूयार्क से चली खबरों के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शीघ्र ही बातचीत कर सकते हैं। वे क्या बातचीत करेंगे? बॉब वुडवर्ड की ताज़ा किताब ने पाकिस्तान की पोल खोलकर रख दी है। 400 पृष्ठों की इस किताब का निष्कर्ष यही है कि आतंकवादियों की चाबी पाकिस्तान के पास है और पाकिस्तान की चाबी अमेरिका के पास है। भारत की कोई भी चाबी पाकिस्तान का ताला नहीं खोल सकती। बॉब वुडवर्ड की यह किताब यदि 

श्रद्धा के पात्र हैं, उन्हें पलकों में जगह दें

Posted On October - 1 - 2010 Comments Off on श्रद्धा के पात्र हैं, उन्हें पलकों में जगह दें
प्रो. योगेश चन्द्र शर्मा विश्व वृद्ध दिवस आज बढ़ती जनसंख्या के प्रति विश्वव्यापी चिंता के कारण इस समय विश्व भर में शिशु-जन्मदर में कुछ कमी हो रही है, लेकिन दूसरी ओर स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी बढ़ती सुविधाओं के कारण औसत आयु में निरन्तर वृद्धि हो रही है। यह औसत आयु अलग-अलग देशों में अलग-अलग है। भारत में सन 1947 में यह औसत आयु केवल 27 वर्ष थी, जो 1961 में 42 वर्ष, 1981 में 54 वर्ष और अब लगभग पैंसठ 

शहरयार : शायरी में शीर्ष सफलता के बाद ज्ञानपीठ

Posted On October - 1 - 2010 Comments Off on शहरयार : शायरी में शीर्ष सफलता के बाद ज्ञानपीठ
अरुण नैथानी चर्चित व्यक्ति उमराव जान के हिट गीत ‘दिल चीज़ है क्या आप मेरी जान लीजिए’ तथा ‘सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है’ के लिए याद किए जाने वाले शायर-गीतकार अखलाक मुहम्मद खान ‘शहरयार’ को 44वां ज्ञानपीठ पुरस्कार का मिलना सही मायनों में उनकी साहित्यिक साधना का सम्मान है। साहित्य जगत के इस सबसे बड़े पुरस्कार को पाने वाले शहरयार चौथे उर्दू साहित्यकार हैं। इससे 

स्कूल चलें हम!

Posted On October - 1 - 2010 Comments Off on स्कूल चलें हम!
गुरमीत सिंह खबरों की खबर कश्मीर घाटी में पिछले कुछ महीनों से जारी उपद्रव और हिंसा के बाद केंद्र सरकार की ओर से जारी आठ-सूत्रीय फार्मूले का शांति बहाली की राह में कितना योगदान होगा, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा लेकिन इस फार्मूले का सबसे अहम सूत्र राज्य में शिक्षा संस्थानों को फिर से चालू करने का ही है। यही वजह है कि केंद्र के पैकेज से नाखुश हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टïरपंथी 

आपके पत्र

Posted On October - 1 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
मजदूर फैक्ट्रियां डॉ. शशिकान्त गर्ग, बल्लभगढ़ एक ओर प्रतिवर्ष लाखों रुपये कमाने वाले लोगों की संख्या और दूसरी ओर गरीबी और बेरोजगारी के कारण आत्महत्या करने वालों की संख्या बढ़ती जाती है। गरीब और अमीर में अंतर बढ़ता जा रहा है। इस अंतर का कारण वे लोग हैं, जो कि अपनी जाति या मजहब की संख्या बढ़ाने के लिए अधिक बच्चे पैदा कर रहे हैं। आमदनी कम और बच्चे अधिक होने के कारण पौष्टिक आहार, उत्तम 

आपके पत्र

Posted On September - 30 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
कैसा मंदिर-कैसी मस्जिद? उपेन्द्र भटनागर, बलटाना मन हो जब अशांत, आत्मा हो जब क्लांत, तब कैसी पूजा – कैसी इबादत कैसा मंदिर, कैसी मस्जिद? ठीक ही तो कहा है — ईश्वर कहें या खुदा ईंट गारे की इमारतों में नहीं दिलों में रहते हैं। ऐसा ऋषि, मुनि और विद्वान कहते हैं। अपने लिए सुनिश्चित दो गज़ ज़मीन का तो पता नहीं, राम-रहीम के घर को लेकर बवाल मचा रहे हैं लोग। हैरान हूं इस बात को लेकर कि हम अपने भीतर 

मैंने गांधीजी को नहीं मारा!

Posted On September - 30 - 2010 Comments Off on मैंने गांधीजी को नहीं मारा!
सागर में गागर राजेंद्र निशेश वह बड़बड़ाते हुए जा रहे थे—’मैंने गांधीजी को नहीं मारा, मैंने गांधीजी को नहीं मारा।’ हमने उनकी तरफ ध्यान से देखा। उम्र करीब पचास वर्ष। वह गांधी टोपी नहीं धारण किए हुए थे। हां, वह सिल्क-खादी का चमचमाता हुआ सूट अवश्य पहने हुए थे। खादी कभी गरीबों का पहनावा होती थी लेकिन अब स्टेटस सिंबल बन चुकी है। गांधीजी के मुताबिक खादी एक पवित्र कपड़ा था, गरीबों 

सेना का मनोबल गिराने की कोशिश

Posted On September - 30 - 2010 Comments Off on सेना का मनोबल गिराने की कोशिश
विष्णुगुप्त सुरक्षा बल अधिनियम भारतीय सेना विश्व की सबसे अधिक अनुशासनशील, मानवतावादी, कर्तव्यनिष्ठ और धर्मनिरपेक्ष है। ‘विभिन्नता में एकता’ की जो मिसाल देश के लिए दी जाती है वही मिसाल भारतीय सेना में भी देखने को मिलती है। भारतीय सेना विभिन्न धर्मों, समूहों, जातियों का संगम है। जातियों और क्षेत्रों के नाम पर सेना में विभिन्न ब्रिगेडें जरूर खड़ी हैं जैसे राजपूताना राइफल्स, 

भारत के हित में नहीं हैं निरंकुश राजपक्षे

Posted On September - 30 - 2010 Comments Off on भारत के हित में नहीं हैं निरंकुश राजपक्षे
श्रीलंका डॉ. गौरीशंकर राजहंस गत 26 वर्षों के खूनी गृहयुद्ध के बाद जब श्रीलंका में शांति की स्थापना हुई और राष्ट्रपति के चुनाव में महेन्दा राजपक्षे को अभूतपूर्व सफलता मिली तब यह समझा जा रहा था कि महेन्दा राजपक्षे उदारवादी रवैया अपनाएंगे और श्रीलंका में सही अर्थ में लोकतंत्र की बहाली करेंगे। परन्तु राजपक्षे ने एक के बाद दूसरा ऐसा काम किया जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि न तो वे अल्पसंख्यक 

फैसले से देश बड़ा

Posted On September - 30 - 2010 Comments Off on फैसले से देश बड़ा
देश की शीर्ष अदालत ने पिछले छह दशक से चल रहे बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मालिकाना हक विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला देने का मार्ग प्रशस्त कर अनिश्चितता का माहौल समाप्त कर दिया है। पहले कयास लगाये जा रहे थे कि सिर पर राष्ट्रमंडल खेल के आने तथा फैसले से असंतुष्ट पक्ष द्वारा की जाने वाली प्रतिक्रिया की आशंका से फैसले पर रोक लगा दी जाएगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने खुद स्वीकारा, मामले 

साख पर संकट

Posted On September - 30 - 2010 Comments Off on साख पर संकट
चंडीगढ़ स्थित पीजीआई समेत देश के कुछ प्रतिष्ठित मेडिकल शिक्षण संस्थानों में किस तरह मोटी रकम लेकर दलालों के माध्यम से सीटें बेची जा रही हैं, ट्रिब्यून का यह खुलासा फिर इसी कटु सच्चाई को रेखांकित करता है कि भ्रष्टाचार के घुन ने हमारी व्यवस्था को खोखला कर दिया है। उत्तर प्रदेश और बिहार में शिक्षा-माफिया व उसके दलालों द्वारा हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं असली परीक्षार्थी की 
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