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खास खबर
स्मॉग से निपटने के उपाय

स्मॉग से निपटने के उपाय

जन संसद जागरूकता अभियान चले स्मॉग यानी धुंध व धुएं का मिश्रण सर्दी के दिनों में जनजीवन को ज्यादा प्रभावित करता है। कारखानों व वाहनों से निकलने वाला धुआं तथा फसल अवशेष जलाने से समस्या और गंभीर हो जाती है। इससे निपटने के लिए फसल अवशेष में आग लगाने पर प्रतिबंध तथा ...

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सार्थक संगति से ही सुख का उजियारा

सार्थक संगति से ही सुख का उजियारा

योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ समाज में हम सभी मिलकर रहते हैं और हमारा प्रयास होता है कि हम जब भी किसी को साथ लें या उसके साथ चलें तो हमारी संगति को लोग सच्ची और अच्छी संगति कहें। साधारणतः कहा जाता है कि भले ही कोई शराब न पीता हो, लेकिन ...

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‘कृत्रिम पत्तों’ से पर्यावरण अनुकूल ईंधन

‘कृत्रिम पत्तों’ से पर्यावरण अनुकूल ईंधन

वैज्ञानिक पेड़-पौधों से प्रेरणा लेकर वैकल्पिक ईंधन बनाने के तरीके खोज रहे हैं। पेड़-पौधों में होने वाली फोटोसिंथेसिस अथवा प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया को दोहराने के लिए वे ‘कृत्रिम पत्ते’ विकसित कर रहे हैं। खनिज तेलों से तैयार होने वाली एक महत्वपूर्ण गैस अब एक कृत्रिम पत्ते से तैयार की जा ...

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सभ्यता की धूप और धुंध

सभ्यता की धूप और धुंध

कमलेश भारतीय यह बात बिल्कुल सही है। कवि समाज को न केवल समझता है बल्कि अपनी कविताओं के माध्यम से अच्छे-बुरे हर बदलाव पर कमेंट भी करता है। सचेत करता है समाज को और नयी पीढ़ी को। यही कोशिश—धुंध, धुआं और धूप काव्य संग्रह के कवि सुरेशचंद्र सर्वहारा ने की है। ...

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परवरिश पर सशक्त हस्ताक्षर

परवरिश पर सशक्त हस्ताक्षर

मीनाक्षी वाशिष्ठ कैसे मां-बाप हैं आप? डॉ. स्वाति लोढ़ा द्वारा परवरिश पर लिखी गयी इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता है इसका सतत प्रवाह। सरल भाषा में लिखी गयी इस पुस्तक में 27 अध्याय हैं जिनमें चंद्रमा की यात्रा के साथ परवरिश के विभिन्न दौरों को जोड़ा गया है। 27 नक्षत्रों ...

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महिला सशक्तीकरण का सच

महिला सशक्तीकरण का सच

पुस्तक समीक्षा यश गोयल राजस्थानी और हिंदी भाषा की लेखिका सावित्री चौधरी की नई किताब : अपनेपन का अहसास (अपणायत रौ अैसास ) संग्रह में 15 कहानियां हैं, जो आज की नारी के संघर्ष और उसके सशक्तीकरण पर उसका प्रतिनिधित्व कर रही हैं। सावित्री के पूर्व में प्रकाशित राजस्थानी कहानी संग्रह : मनचाही ...

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दुखों की टीस से उबरकर ऋषिकर्म-सा सृजन

दुखों की टीस से उबरकर ऋषिकर्म-सा सृजन

राधेश्याम भारतीय हरियाणा साहित्य अकादमी के बालमुकुन्द गुप्त पुरस्कार से सम्मानित मूर्धन्य साहित्यकार रामकुमार आत्रेय आज हमारे बीच नहीं रहे। वे स्वयं कहा करते थे— ‘साहित्य मेरे लिए हवा भी है, पानी भी है, और धूप भी। इन्हें पाने और सहेजने के लिए मैं अक्सर भटका भी हूं और अटका भी। ...

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  • ‘कृत्रिम पत्तों’ से पर्यावरण अनुकूल ईंधन
     Posted On November - 18 - 2019
    वैज्ञानिक पेड़-पौधों से प्रेरणा लेकर वैकल्पिक ईंधन बनाने के तरीके खोज रहे हैं। पेड़-पौधों में होने वाली फोटोसिंथेसिस अथवा प्रकाश-संश्लेषण....
  •  Posted On November - 18 - 2019
    एक अस्पताल की बात है। खराब केस आ रहे हैं। सुविधाएं कम हैं, लेकिन हर कोई समर्पित है। डाक्टर साहब....
  • सार्थक संगति से ही सुख का उजियारा
     Posted On November - 18 - 2019
    समाज में हम सभी मिलकर रहते हैं और हमारा प्रयास होता है कि हम जब भी किसी को साथ लें....
  • स्मॉग से निपटने के उपाय
     Posted On November - 18 - 2019
    स्मॉग यानी धुंध व धुएं का मिश्रण सर्दी के दिनों में जनजीवन को ज्यादा प्रभावित करता है। कारखानों व वाहनों....

तंबू पार्टी!

Posted On March - 15 - 2010 Comments Off on तंबू पार्टी!
बात की बात सहीराम कहावत तो यह है कि पुरुष के भाग्य का कुछ पता नहीं होता कि कब बदल जाए। पर सच पूछो  तो जी, राजनीतिक पार्टियों के भाग्य का भी कुछ पता नहीं होता कि कब बदल जाए। देख लीजिए, भाजपा देखते-देखते कैसे पांच सितारा पार्टी से तंबूवाली पार्टी बन गयी। शायद इसीलिए गडकरी जी ने यह गाना गाया होगा—जिंदगी कैसी है पहेली। वैसे अगर वे तंबू में बंबू लगाए बैठे टाइप गाना गाते तो भी बुरा 

वंशवाद से कैसे मुक्त हो राजनीति

Posted On March - 15 - 2010 Comments Off on वंशवाद से कैसे मुक्त हो राजनीति
खबरों के आगे-पीछे विश्वनाथ सचदेव कांग्रेस के  महासचिव राहुल गांधी यह जानते हैं कि वे उनमें से हैं, जिन्हें पारिवारिक कारणों से राजनीति में महत्व मिला, लेकिन वे यह जताना भी नहीं भूलते कि राजनीति में होने का कारण भले ही परिवार हो, लेकिन राजनीति में बने रहने, और अपना महत्व बनाये रखने के लिए स्वयं को सिद्ध करना जरूरी है। कांग्रेस को आम आदमी से जोडऩे की कोशिशों से लेकर कांग्रेस में जनतंत्रीकरण 

मिलावटी पदार्थों पर हर्जाने का हक

Posted On March - 15 - 2010 Comments Off on मिलावटी पदार्थों पर हर्जाने का हक
मदन ‘राज’ कानून कचहरी बाजार में आजकल तैयार किए हुए खाद्य-पदार्थ डिब्बों में बंद पैक मिलते हैं इसलिए उन्हें घर में लाने के बाद उनमें और कुछ करने की आवश्यकता नहीं होती है। बस, पैकिंग खोलो और काम में ले लो। किंतु कई बार डिब्बाबंद खाद्य-पदार्थ में हुई मिलावट अथवा पुरानी खाद्य वस्तु का उपयोग करने से व्यक्ति बीमार हो जाता है। इसी प्रकार का एक प्रकरण है—नारायण बैंकट अयंगर बनाम शक्ति 

आपके पत्र

Posted On March - 15 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
महंगाई की मार खुशीराम, गुडग़ांव आज आम व्यक्ति महंगाई की मार झेल रहा है। महंगाई है कि कम होने का नाम नहीं ले रही है। पेट्रोल, डीज़ल की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर खाद्य वस्तुओं की कीमतें पहले ही बढ़ जाती हैं। सरकार की जमाखोरों, मिलावटखोरों पर कोई पकड़ नहीं। नेता बयानबाजी कर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। आखिर इसके लिए जिम्मेवार कौन है? सरकार अपनी जिम्मेवारी से पल्ला 

सामाजिक विषमताओं को उजागर करती कविताएं

Posted On March - 14 - 2010 Comments Off on सामाजिक विषमताओं को उजागर करती कविताएं
डॉ. रूप देवगुण सुरेंद्र कुमार अंशुल बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। उन्होंने कविता, कहानी, लघुकथा तथा गज़ल विधाओं में संग्रह देकर हिन्दी साहित्य के इतिहास में समृद्धि की है। ‘मेरे भीतर का मौन’ इसका कविता संग्रह है जिसमें इनकी 63 कविताएं हैं। इस समय साहित्य के क्षेत्र में मुक्त छंद का बोलबाला है। विषय की दृष्टिï से रचनाकार सामाजिक सरोकार व विषमताओं को ही तरजीह दे रहा है। आजकल भाव 

सरोद और संगीत के निचोड़ की अभिव्यक्ति

Posted On March - 14 - 2010 Comments Off on सरोद और संगीत के निचोड़ की अभिव्यक्ति
डा. रेणुका नैयर ‘अमजद का सरोद-गुलज़ार के गीत’ पुस्तक के नाम से ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि दो महान हस्तियों के संगम ने संगीत व काव्य  प्रेमियों को एक साथ वो कुछ पढऩे और जानने का अवसर दिया है जो शायद पर्दे के पीछे ही रह जाता अगर उसे पुस्तक का रूप न मिलता। पुस्तक की भूमिका में उस्ताद अमज़द अली खां लिखते हैं—संगीत में वह शक्ति है, जो लोगों की मानसिकता बदल सकती है। संगीत द्वारा आत्मा 

खरी-खोटी

Posted On March - 14 - 2010 Comments Off on खरी-खोटी
रणबीर जीवनदायिनी प्रकृति और उसके द्वारा प्रदत्त प्राकृतिक संसाधनों के बेहताशा उपयोग ‘अन्ध उपभोक्तावाद’ की तेज रफतार नै न केवल प्रदूषण बढ़ा दिया है बल्कि जलवायु में बदलाव आने से धरती तप रही सै। इसका सबसे बड़ा कारण धन के लालचियों का स्वार्थ सै जो प्रदूषण का जनक है। जिसने खुद उनको और पूरे विश्व को भयंकर विपत्तियों के जाल में फंसा दिया सै। उससे निकल पाना उन लालचियों के बूते 

फ़िक्रो-फन के लिहाज़ से बुलंद ग़ज़ल संग्रह

Posted On March - 14 - 2010 Comments Off on फ़िक्रो-फन के लिहाज़ से बुलंद ग़ज़ल संग्रह
राजेन्द्र चांद शायरा सुभाषिनी साहिल के दूसरे ग़ज़ल संग्रह खामोश खण्डहरों की सदा’ की ग़ज़लें पढ़ कर भुला दी जाने वाली ग़ज़लें नहीं हैं क्योंकि पढ़  चुकने के बाद भी कलाम की तपिश को अपने इर्द-गिर्द लहराते हुए महसूस किया जा सकता है। फ़िक्रो-फन के लिहाज़ से नई बुलंदियों को छूता शायरा का कलाम इस मिथ को भी तोड़ता है कि उम्दा और पुख्ता शायरी की रचना कर पाना सि$र्फ मर्द शायरों का ही काम 

सबला है इस दौर में, अबला तू मत मान

Posted On March - 14 - 2010 Comments Off on सबला है इस दौर में, अबला तू मत मान
दिल्ली हाईकोर्ट के ताज़ातरीन फैसले में सरकार को भारतीय सेना एवं वायुसेना में स्थायी कमीशन देने के निर्देश के बाद लगता है कि अब भारतीय महिलाएं सेना में भी सबला हो जाएंगी। यह निर्णय देश में स्त्री-पुरुष समानता हासिल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। राज्यसभा में 33 फीसदी आरक्षण के फैसले और बड़े राजनीतिक दलों की सहमति में वैसे ही भारतीय महिलाओं के हौसले बुलंद हुए थे तो हालिया फैसले 

हसीन सपनों की डरावनी हकीकत

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on हसीन सपनों की डरावनी हकीकत
सात समंदर पार सुनहरे जीवन के सपने पंजाब और उसके आसपास के क्षेत्रों में वाकई खतरनाक हद तक पहुंच गये हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के मादक द्रव्य और अपराध संबंधी कार्यालय की यह रिपोर्ट वाकई दहला देने वाली है कि पंजाब से हर साल लगभग 20 हज़ार लोग अवैध रूप से विदेश जाने की कोशिश करते हैं। पंजाबियों का विदेश के प्रति आकर्षण और अपनी मेहनत के बल पर दुनियाभर में नाम कमाने का कौशल जगजाहिर है, पर 

श्रीमुख से

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on श्रीमुख से
हम उन आस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए आए हैं जो हमारे सिनेमा को प्यार करते हैं। नफरत में तो कुछ ही लोग विश्वास करते हैं। – भारतीय अभिनेत्री, रानी मुखर्जी, मेलबर्न में लोकसभा में सरकार के लिए महिला आरक्षण बिल पारित कराना काफी मुश्किल है क्योंकि कांग्रेस एक सीमा के बाहर जाकर खतरा उठाने की स्थिति में नहीं है। उसके पास संख्या बल नहीं है। – लोकसभा के पूर्व महासचिव, सुभाष कश्यप, नयी 

स्वतंत्रता और अधिकार को सही अर्थों की तलाश!

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on स्वतंत्रता और अधिकार को सही अर्थों की तलाश!
डा. रेणुका नैयर आधी दुनिया शहर की खुली सामाजिक हवा में घूमते हुए जब हम स्कूटर, मोटरसाइकिल या कार चलाते हुए अपने कार्यालयों को जाती हुई लड़कियों व महिलाओं को देखते हैं तो लगता है कि महिलाओं ने अपनी समानाधिकार की लड़ाई जीत ली है लेकिन यह सब वैसा ही है जैसे रंगीन चश्मा लगाकर दुनिया रंगीन नज़र आने लगे। अगर यह सच होता तो आज भी महिलाओं की स्थिति पर समीक्षा करने और सेमिनार-गोष्ठिïयां-चिंतन 

मूलभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on मूलभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता
वर्ष 2010-11 के लिए आम बजट में शिक्षा के लिए आबंटन-राशि में पच्चीस प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। शिक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं एवं महंगाई को देखते हुए यह वृद्धि काफी कम है। ऐसी स्थिति में सीमित धन-राशि में बेहतर काम करने की आवश्यकता है। शिक्षा की मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भवन, खेल-मैदान, पाठ्य-पुस्तकें व अध्यापकों की रिक्त-पूर्ति आदि पर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 

बजट का उचित प्रयोग

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on बजट का उचित प्रयोग
शिक्षा आजादी से पूर्व भी मिलती थी और आज भी मिलती है। पहले तो शिक्षा का बजट अपेक्षाकृत कम था। आज के सभी राजनैतिक नेता, अधिकारी, सैन्य अधिकारी, वैज्ञानिक सभी ने उस समय शिक्षा पाई जब शिक्षा का बजट कुछ भी नहीं था। वजह? पढऩे और कामयाब होने की दीवानगी ने उनको आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। आज बजट शिक्षा के लिए कम नहीं है, जरूरत है तो उसके सदुपयोग की। ‘मिड डे मीलÓ कार्यक्रम पर करोड़ों रुपये खर्च 

महाराजा रणजीतसिंह पर पटियालाशाही कसीदे

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on महाराजा रणजीतसिंह पर पटियालाशाही कसीदे
बाल की खाल खुशवंत सिंह हाल ही में जब मुझे रॉली प्रकाशन की पुस्तक ‘दि लास्ट सनसेट : राइज एंड फॉल ऑफ दि लाहौर दरबार’ के लोकार्पण का प्रस्ताव मिला तो लेखक के रूप में अमरेंद्र सिंह का नाम देखकर मुझे हैरत हुई। मैंने सोचा सिख इतिहास पर लिखने वाला यह नया लेखक कौन है? पहली नजर में अनुमान न था कि यह कोई पटियाला राज घराने का वंशज है क्योंकि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री नाम से 

आपके पत्र

Posted On March - 12 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
जनता का बंटवारा डा. अशोक शर्मा, जगाधरी देश को स्वतंत्र हुए 63 वर्ष हो गए हैं मगर हमारे देश के नेताओं और राजनीतिक दलों ने जनता को लुभावने नारे देकर अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए इनको कई हिस्सों में बांटकर सत्ता सुख भोग रहे हैं।  दलितों को आरक्षण में उलझा कर, किसानों को लुभावने नारों में लगाकर और गरीबों मजूदरों को गरीबी मिटाने का नारा लगाकर नेताओं ने खूब शोषण किया। आज के इन नेताओं से प्रार्थना 
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