दो गुरुओं के चरणों से पावन अमर यादगार !    व्रत-पर्व !    ऊंचा आशियाना... आएंगी ढेर सारी खुशियां !    आत्मज्ञान की डगर !    झूठ से कर लें तौबा !    इस समोसे में आलू नहीं !    पुस्तकों से करें प्रेम !    बिना पानी के स्प्रे से नहाएंगे अंतरिक्ष यात्री !    मास्टर जी की मुस्कान !    अविस्मरणीय सबक !    

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खास खबर
सभ्यता की धूप और धुंध

सभ्यता की धूप और धुंध

कमलेश भारतीय यह बात बिल्कुल सही है। कवि समाज को न केवल समझता है बल्कि अपनी कविताओं के माध्यम से अच्छे-बुरे हर बदलाव पर कमेंट भी करता है। सचेत करता है समाज को और नयी पीढ़ी को। यही कोशिश—धुंध, धुआं और धूप काव्य संग्रह के कवि सुरेशचंद्र सर्वहारा ने की है। ...

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परवरिश पर सशक्त हस्ताक्षर

परवरिश पर सशक्त हस्ताक्षर

मीनाक्षी वाशिष्ठ कैसे मां-बाप हैं आप? डॉ. स्वाति लोढ़ा द्वारा परवरिश पर लिखी गयी इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता है इसका सतत प्रवाह। सरल भाषा में लिखी गयी इस पुस्तक में 27 अध्याय हैं जिनमें चंद्रमा की यात्रा के साथ परवरिश के विभिन्न दौरों को जोड़ा गया है। 27 नक्षत्रों ...

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महिला सशक्तीकरण का सच

महिला सशक्तीकरण का सच

पुस्तक समीक्षा यश गोयल राजस्थानी और हिंदी भाषा की लेखिका सावित्री चौधरी की नई किताब : अपनेपन का अहसास (अपणायत रौ अैसास ) संग्रह में 15 कहानियां हैं, जो आज की नारी के संघर्ष और उसके सशक्तीकरण पर उसका प्रतिनिधित्व कर रही हैं। सावित्री के पूर्व में प्रकाशित राजस्थानी कहानी संग्रह : मनचाही ...

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दुखों की टीस से उबरकर ऋषिकर्म-सा सृजन

दुखों की टीस से उबरकर ऋषिकर्म-सा सृजन

राधेश्याम भारतीय हरियाणा साहित्य अकादमी के बालमुकुन्द गुप्त पुरस्कार से सम्मानित मूर्धन्य साहित्यकार रामकुमार आत्रेय आज हमारे बीच नहीं रहे। वे स्वयं कहा करते थे— ‘साहित्य मेरे लिए हवा भी है, पानी भी है, और धूप भी। इन्हें पाने और सहेजने के लिए मैं अक्सर भटका भी हूं और अटका भी। ...

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प्रगतिशील चेतना के पैरोकार का जाना

प्रगतिशील चेतना के पैरोकार का जाना

अशोक भाटिया प्रगतिशील चेतना संपन्न, हरियाणा के वयोवृद्ध साहित्यकार पूरन मुद‍्गल नहीं रहे। अठासी वर्षीय कवि-कथाकार मुद‍्गल की लेखनी लगभग छह दशकों तक निरंतर चलती रही। एम.ए. हिंदी, बी.टी. तक शिक्षित मुद‍्गल हरियाणा शिक्षा विभाग से खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त होकर साक्षरता अभियान से जुड़े रहे। हरियाणा साहित्य अकादमी ...

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गिरगिट

गिरगिट

कहानी चेख़व पुलिस का दारोगा ओचुमेलोव नया ओवरकोट पहने, हाथ में एक बण्डल थामे बाजार के चौक से गुज़र रहा है। लाल बालों वाला एक सिपाही हाथ में टोकरी लिये उसके पीछे-पीछे चल रहा है। टोकरी जब्त की गयी झड़बेरियों से ऊपर तक भरी हुई है। चारों ओर ख़ामोशी…। चौक में ...

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दरकते गठबंधनों के बीच सियासी जंग

दरकते गठबंधनों के बीच सियासी जंग

हरीश लखेड़ा झारखंड विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभाओं के चुनाव नतीजों का असर अभी से दिखने लगा है। भाजपा के साथ गठबंधन के लिए लालायित रहने वाले सहयोगी दल अब उसे आंख दिखाने लगे हैं। अब वे भाजपा की नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर गठबंधन चाहते हैं। यही वजह ...

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  • गिरगिट
     Posted On November - 17 - 2019
    पुलिस का दारोगा ओचुमेलोव नया ओवरकोट पहने, हाथ में एक बण्डल थामे बाजार के चौक से गुज़र रहा है। लाल....
  • प्रगतिशील चेतना के पैरोकार का जाना
     Posted On November - 17 - 2019
    प्रगतिशील चेतना संपन्न, हरियाणा के वयोवृद्ध साहित्यकार पूरन मुद‍्गल नहीं रहे। अठासी वर्षीय कवि-कथाकार मुद‍्गल की लेखनी लगभग छह दशकों....
  • दुखों की टीस से उबरकर ऋषिकर्म-सा सृजन
     Posted On November - 17 - 2019
    हरियाणा साहित्य अकादमी के बालमुकुन्द गुप्त पुरस्कार से सम्मानित मूर्धन्य साहित्यकार रामकुमार आत्रेय आज हमारे बीच नहीं रहे। वे स्वयं....
  • महिला सशक्तीकरण का सच
     Posted On November - 17 - 2019
    राजस्थानी और हिंदी भाषा की लेखिका सावित्री चौधरी की नई किताब : अपनेपन का अहसास (अपणायत रौ अैसास ) संग्रह....

गांधी तेरी मूर्तियां, खड़ी हुईं लाचार

Posted On April - 11 - 2010 Comments Off on गांधी तेरी मूर्तियां, खड़ी हुईं लाचार
पिछले दिनों एक अच्छी खबर आई कि संसद भवन परिसर में अब और प्रतिमाएं नहीं लगाई जा सकेंगी। बकौल कमेटी, अब संसद के खुले स्वरूप को बनाए रखने के मकसद से और प्रतिमाएं नहीं लगाई जाएंगी। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अगुवाई वाली एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने अपनी संस्तुति में कहा है कि संसद परिसर में पहले से ही बहुत अधिक मूर्तियां विद्यमान हैं। अब यह समझ से परे है कि इस फैसले के तात्कालिक 

श्रीमुख से

Posted On April - 10 - 2010 Comments Off on श्रीमुख से
मैं आपको विश्वास दिलाना चाहूंगा कि अगर सेना के अंदर कोई भी घटना होती है तो हमारे कानून-कायदे इतने मजबूत हैं कि हम तुरंत कार्रवाई करते हैं। – सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह, नयी दिल्ली में कानून के हाथ बहुत लंबे हैं, चाहे व्यक्ति कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो। निश्चित तौर पर ये हाथ जस्टिस दिनाकरण तक भी पहुंचेंगे। – विधि मंत्री, एम. वीरप्पा मोइली, नयी दिल्ली में अगर विकास चाहते हैं तो माओवादियों 

दुनिया में सबसे अधिक गरीब महिलाएं

Posted On April - 10 - 2010 Comments Off on दुनिया में सबसे अधिक गरीब महिलाएं
आधी दुनिया डा. रेणुका नैयर बैसाखी यानी 13 अप्रैल का दिन पंजाब में किसानों के लिए खुशी का दिन होता है जब वे अपनी लहलहाती फसल को काटना शुरू करते हैं और घर अनाज से भरना शुरू हो जाता है। यही कारण है कि इस दिन को खूब धूमधाम से मनाया जाता है। धरती पुत्र किसान पारम्परिक वेशभूषाओं में जोश के साथ मेलों में जाते हैं और चारों ओर इस संबंधी गीत ‘ओ जट्टïा आयी बैसाखीÓ आदि गूंजते सुनायी देते हैं। 

जनता की मेहनत की कमाई पर शाही ठाठ

Posted On April - 10 - 2010 Comments Off on जनता की मेहनत की कमाई पर शाही ठाठ
खुशवंत सिंह उ प्र. की मुख्यमंत्री मायावती की दलील  है कि भारत में ऐसा कोर्ई कानून नहीं है जो किसी व्यक्ति की प्रतिमा लगाने की मनाही करता हो। वे सही हैं, यहां कोई ऐसा कानून नहीं है जो जनता की कमाई से व्यक्ति विशेष के महिमामंडन को रोक सके। अनेक मुख्यमंत्री अपने राज्यों में महत्वपूर्ण उपलब्धियों का बखान करने के लिए अपने चित्रों वाले बड़े-बड़े विज्ञापन छपवाकर ऐसा करते रहे हैं। लेकिन 

महंगाई के मोर्चे पर सरकार

Posted On April - 10 - 2010 Comments Off on महंगाई के मोर्चे पर सरकार
गता है कि आम आदमी की कमर ही तोड़ चुकी बेलगाम महंगाई मनमोहन सिंह सरकार के लिए बैठकें और कार्यबलों का गठन करने का एक और शगल बन गया है। पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कोर ग्रुप बनाया गया था तो अब उस गु्रप ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीन कार्यबल बना दिये 

विषय : भारतीय समाज में सहजीवन की स्वीकार्यता

Posted On April - 10 - 2010 Comments Off on विषय : भारतीय समाज में सहजीवन की स्वीकार्यता
भोगवाद का नतीजा विवाह पूर्व जवान लड़के-लड़की का सहजीवन पति-पत्नी का ही रूप है। यह संबंध स्थायी रूप में रहे तो ठीक है लेकिन बार-बार इसे बदलना ढेर सारे कारणों से ठीक नहीं। पूर्वजों ने वैज्ञानिक आधार पर इसको ठीक नहीं माना है और कुछ मान-मर्यादाएं बनाकर परिवार व समाज को सही, वैज्ञानिक व प्रेम से भरपूर सुखी जीवन की ओर अग्रसर किया है। घोर पूंजीवादी षड्यंत्र के तहत निरे भौतिकवादी, भोगवादी जीवन 

साइबर जासूसी के साये में

Posted On April - 9 - 2010 Comments Off on साइबर जासूसी के साये में
karton ....

तुग़लकी फैसले

Posted On April - 9 - 2010 Comments Off on तुग़लकी फैसले
पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान अनेक ऐसे प्रशासनिक फैसले सामने आए हैं जो अदूरदर्शी व अपरिपक्व सोच के ही परिचायक हैं। ये अटपटे फैसले आम जनता की समझ से बाहर हैं और आये दिन विपक्षी दलों को आलोचना का नया मुद्दा थमा जाते हैं। एक ऐसा फैसला दो  दर्जन से अधिक सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारियों की पुन: एक वर्ष के  लिए महत्वपूर्ण पदों पर ताजपोशी का सामने आया है। प्रशासन व कानून-व्यवस्था 

उत्तर प्रदेश में बसपा-कांग्रेस द्वंद्व की दिशा

Posted On April - 9 - 2010 Comments Off on उत्तर प्रदेश में बसपा-कांग्रेस द्वंद्व की दिशा
राजनीतिक समीकरण कृष्ण प्रताप सिंह हिन्दी में एक मुहावरा है—बर्र के छत्ते में हाथ डालना। वैसे छत्ता मधुमक्खियों का हो तो भी उसमें हाथ डालने के अंदेशे कम नहीं होते। अलबत्ता उसमें शहद मिलने की संभावनाएं भी भरपूर होती हैं। लखनऊ में गत 15 मार्च को बहुजन समाज पार्टी की महारैली में मधुमक्खियों के मंच तक जा पहुंचने को लेकर हुई राजनीति के बाद के संकेत भी कुछ ऐसा ही कहते हैं। लेकिन अब उत्तर 

अमरकांत : व्यास सम्मान से मिला जीने का सहारा

Posted On April - 9 - 2010 Comments Off on अमरकांत : व्यास सम्मान से मिला जीने का सहारा
चर्चितव्यक्ति अरुण नैथानी बीते दिनों में आम धारणा रही है कि सरस्वती-पुत्रों से लक्ष्मी रूठी रहती है। वास्तव में यह एक हकीकत भी है कि देश के चोटी के साहित्यकार पैसे-पैसे को मोहताज रहे हैं और उनकी मौलिक रचनाओं का बाजारीकरण करने वाले मालामाल हो गये। सही बात यह रही है कि ये साहित्कार अपनी प्रतिभा की मार्केटिंग नहीं कर पाये। वे दंदफंद वाली बाजारी ताकतों से परहेज करते रहे हैं, वे दिल 

दिल तो बच्चा है जी…!

Posted On April - 9 - 2010 Comments Off on दिल तो बच्चा है जी…!
खबरों की खबर गुरमीत सिंह भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्जा और पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ी शोएब मलिक की शादी की खबर सामने आते ही मुझे सबसे पहला ख्याल शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे का ही आया। दो दिन बाद शिवसेना के पत्र सामना के माध्यम से आई उनकी प्रतिक्रिया बिल्कुल उम्मीद के मुताबिक ही थी। शिवसेना या उस जैसे अन्य तमाम संगठनों को जब पाकिस्तान के खिलाडिय़ों का भारत में खेलना तक मंजूर 

आपके पत्र

Posted On April - 9 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
स्वास्थ्य सुविधा शीशपाल बगडानिया, हिसार देश में भुखमरी के साथ-साथ सही स्वास्थ्य सुविधाएं न मिल पाने के कारण गरीबों की मौतों में वृद्धि होती जा रही है। देश की एक बड़ी आबादी में से कुछ प्रतिशत गरीबों  को ही स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल पा रहा है। स्वास्थ्य ही मानव का असली धन है। सरकार द्वारा चलाई गई स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं का सभी को लाभ प्राप्त हो सके इसलिए सरकार को स्वास्थ्य 

30 साल पहले दैनिक ट्रिब्यून

Posted On April - 8 - 2010 Comments Off on 30 साल पहले दैनिक ट्रिब्यून
मंगलवार, 8 अप्रैल, 1980 गोहाटी हाईकोर्ट द्वारा असम को अशांत क्षेत्र घोषित करने के विरुद्ध निषेधाज्ञा गोहाटी, 7 अप्रैल (प्रेट्र, यून्यु)। आज गोहाटी हाईकोर्ट ने असम को  दो मास के लिए अशांत क्षेत्र घोषित करने तथा नागरिक प्रशासन को सशस्त्र सेनाएं इस्तेमाल करने का अधिकार देने की दो अधिसूचनाओं पर अमल आगे आदेश तक रोक दिया। गोहाटी के एक नागरिक की याचिका पर फैसला होने तक यह निषेधाज्ञा हाईकोर्ट 

आपके पत्र

Posted On April - 8 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
सराहनीय प्रयास जीतेंद्र भाकर, हिसार सरकार गरीब परिवारों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के साथ-साथ सस्ते दामों पर अन्न उपलब्ध करवा रही है, वह सराहनीय प्रयास है। लेकिन साथ ही गरीबों में खाद्य वितरण नीतियों में जब तक भ्रष्टïाचार का अस्तित्व रहेगा यह प्रयास सिरे नहीं चढ़ सकता। देश में भूख से मरने वालों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती रहेगी। सरकार को खाद्य वितरण नीति में सुधार करके उन्हें 

अग्निपथ पर महानायक!

Posted On April - 8 - 2010 Comments Off on अग्निपथ पर महानायक!
सतीश मराठा गागर में सागर कौवा भले ही लाख ‘हंस’ की चाल चलने की कोशिश करे, पर हंस को कभी भूले से भी कौवे की चाल चलने की नादानी नहीं करनी चाहिए। फिर चाहे यह कितना भी सोलह आने सच क्यूं न हो कि ‘रामचंद्र कह गये सिया से, ऐसा कलयुग आएगा। हंस चुगेगा दाना-तिनका, कौवा मोती खाएगा।’ वरना चारों तरफ से आ-आकर मुए ‘कौवे’ ऐसी ‘कांव-कांव’ करते हैं कि बंदे का जीना हराम हो जाता है। लगता 

खतरनाक मोड़ पर जनतंत्र

Posted On April - 8 - 2010 Comments Off on खतरनाक मोड़ पर जनतंत्र
तरसेम गुजराल आर्थिकविषमता पंजाब हो, हरियाणा या रायपुर (छत्तीसगढ़) के किसान जिनकी ज़मीन छिन जाती है वे अदालतों के लाखों चक्कर काटकर बचा-खुचा धन खर्च करके भी इंसाफ नहीं पा सकते। पूंजी के प्रसार और मुनाफे की असीमित भूख ने रायपुर के आदिवासियों को अपनी ज़मीन और गांव से बेदखल कर दिया। कोयले और लौह अयस्क के लिए उनकी भूख अपरिमित रही है। देसी और विदेशी उद्योगपति दोनों का प्राकृतिक 
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