5 कर्मियों को कोरोना, ईडी का मुख्यालय सील !    लोगों को कैश न देकर अर्थव्यवस्था बर्बाद कर रही सरकार : राहुल !    निजी अस्पताल कोरोना मरीजों को लेने से इनकार नहीं कर सकते : केजरीवाल !    मिनियापोलिस और सेंट पॉल से कर्फ्यू हटा !    चीन ने अपने नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया की यात्रा नहीं करने की सलाह दी !    भारत-चीन सीमा विवाद पर दोनों देशों में हो रही कमांडर स्तर की वार्ता !    देश में अब इटली से भी ज्यादा कोरोना मरीज, 2.36 लाख पहुंचा आंकड़ा !    पूर्व राज्यपाल एवं दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त वेद मारवाह का निधन !    ट्रंप जर्मनी से वापस बुलाएंगे 34000 अमेरिकी सैनिक !    आये तुम याद मुझे !    

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खास खबर
कृषि उत्पादों के कीमत संकट से जूझते किसान

कृषि उत्पादों के कीमत संकट से जूझते किसान

ओपन मार्केट इंस्टिट्यूट के निदेशक, रूढ़िवादी अमेरिकन लेखक आॅस्टिन फ्रेरिक कहते हैं, ‘1980 में प्रत्येक डाॅलर से 37 सेंट किसान के पास वापस पहुंच जाते थे। आज एक डाॅलर में से सिर्फ 15 सेंट ही किसानों को मिल पाते हैं।’ वह दशकों तक कुछ बहुराष्ट्रीय गठजोड़ों की आर्थिक शक्ति बढ़ाने ...

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सिनेमा में मध्यवर्गीय जीवन का कुशल चितेरा

सिनेमा में मध्यवर्गीय जीवन का कुशल चितेरा

सुनील मिश्र बासु चटर्जी के बारे में इस समय इस पीढ़ी के सामने बात करने के लिए बहुत सारे उदाहरणों में जाना पड़ेगा। उम्र और अस्‍वस्‍थता, फिर सिनेमा की आज जो चाल है उसके अनुरूप उनका सिनेमा नहीं था लेकिन आज का सिनेमा कहीं न कहीं एक-दो उदाहरणों में उनके सिनेमा ...

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बदले हालात में नयी सोच बदलेगी तस्वीर

बदले हालात में नयी सोच बदलेगी तस्वीर

को पुनः अपने पैरों पर खड़ा होने में लंबा अरसा लगने वाला है। एक तरफ उत्पादन के लिए मजदूरों की कमी, दूसरी तरफ ग्राहक नदारद। मजदूर यदि आ भी जाएं तो नयी उत्पादन व्यवस्था को अपनाने के लिए इंतजार करना होगा। दरअसल, जो उत्पादन एवं सेवाएं ग्राहकों की जरूरतें थीं, ...

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फरमानों की विसंगतियों के यक्ष प्रश्न

फरमानों की विसंगतियों के यक्ष प्रश्न

राजेन्द्र चौधरी पहली खबर थी कि हरियाणा की बसों में टिकट केवल ऑनलाइन बिकेंगे। फिर रेलवे के संदर्भ में खबर थी कि अब स्टेशन पर टिकट आरक्षण शुरू कर दिया है। क्या रेलवे की ऑफलाइन टिकट बिक्री से कोरोना नहीं फैलता पर बस की भौतिक टिकट बिक्री से फैलता है? इस ...

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पाक में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का सिलसिला

पाक में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का सिलसिला

पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के आम अधिवेशन में पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने पश्चिम जगत में व्याप्त इस्लामोफोबिया का जिक्र कई बार किया था। उन्होंने भारत में मुस्लिमों से किए जा रहे कथित दुर्व्यवहार को लेकर कटाक्ष भी किए थे। लेकिन यह सब करने की बजाय उन्हें खुद अपने देश ...

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सेहत, सुकून और पर्यावरण की साथी

सेहत, सुकून और पर्यावरण की साथी

सरस्वती रमेश आजकल ऑटो, टैक्सी का किराया बढ़ा हुआ है। बसों में सीमित संख्या में मुसाफिरों को बैठाया जा रहा है। धीरे-धीरे जिन जगहों पर फैक्टरियां खुल भी रही हैं वहां तक कामगारों के पहुंचने में दिक्कत आ रही है। कई कामगारों ने ऑटो, बस के बजाय साइकिल पर भरोसा जताया ...

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चुकाना होगा कोरोना संकट का आर्थिक मूल्य

चुकाना होगा कोरोना संकट का आर्थिक मूल्य

कोरोना संकट का आर्थिक मूल्य हर देश को अदा करना पड़ रहा है लेकिन इसे अदा करने के तीन अलग-अलग रास्ते हैं। पहला रास्ता ब्राजील का है। उस देश ने निर्णय लिया कि वह कोरोना का सामना करने के लिए कोई कदम नहीं उठाएगा। जितना संक्रमण होता है उसे होने ...

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  • कृषि उत्पादों के कीमत संकट से जूझते किसान
     Posted On June - 6 - 2020
    ओपन मार्केट इंस्टिट्यूट के निदेशक, रूढ़िवादी अमेरिकन लेखक आॅस्टिन फ्रेरिक कहते हैं, ‘1980 में प्रत्येक डाॅलर से 37 सेंट किसान....
  •  Posted On June - 6 - 2020
    संपादकीय ‘सत्ता नहीं जनता सर्वोपरि’ पढ़ा। जनता का सर्वोपरि होना इस बात पर निर्भर करता है कि शासक ओबामा है....
  • सिनेमा में मध्यवर्गीय जीवन का कुशल चितेरा
     Posted On June - 6 - 2020
    सुनील मिश्र बासु चटर्जी के बारे में इस समय इस पीढ़ी के सामने बात करने के लिए बहुत सारे उदाहरणों में जाना पड़ेगा। 
  •  Posted On June - 6 - 2020
    ट्रंप साहब चीन से लड़ते-लड़ते अपनों से ही लड़ बैठे। उन्हें लगा था कि चीन से लड़ेंगे तो अपनों के....

सरकार नौजवानों का कर रही आर्थिक व मानसिक शोषण : लाम्बा

Posted On November - 2 - 2010 Comments Off on सरकार नौजवानों का कर रही आर्थिक व मानसिक शोषण : लाम्बा
रोहतक/बहादुरगढ़, 1 नवम्बर (निस)। सर्वकर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव सुभाष लाम्बा ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार पढ़े-लिखे नौजवानों का आर्थिक -मानसिक शोषण कर रही है। सरकार इस नीति के खिलाफ सभी विभागों के कच्चे कर्मचारियों को एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मजबूत आन्दोलन शुरू करना होगा। उन्होंने यह आह्वान आज बिजली नियमों में कार्यरत आउटशोर्सिंग, डी.सी. रेट, डाटा एंट्री आप्रेटरों के संयुक्त 

येदियुरप्पा को राहत

Posted On November - 1 - 2010 Comments Off on येदियुरप्पा को राहत
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वैचारिक स्वतंत्रता का असंवैधानिक विरोध

Posted On November - 1 - 2010 Comments Off on वैचारिक स्वतंत्रता का असंवैधानिक विरोध
विश्वनाथ सचदेव सच ए लांग जर्नी’ एक किताब का नाम है और महाराष्ट्र के एक नये युवराज का कहना है कि वे नहीं चाहते कि कोई यह किताब पढ़े। वैसे, यह पुस्तक मुंबई विश्वविद्यालय के बी.ए. कोर्स में दो साल से पढ़ाई जा रही थी। अब नहीं पढ़ाई जायेगी। स्वयं बी.ए. की पढ़ाई कर रहे शिवसेना की युवा शाखा के नये-नये मनोनीत अध्यक्ष बीस वर्षीय आदित्य ठाकरे की मांग पर विश्वविद्यालय के नये कुलपति ने शैक्षणिक 

बिछुड़े दम्पति और कानूनी उपचार

Posted On November - 1 - 2010 Comments Off on बिछुड़े दम्पति और कानूनी उपचार
कानून कचहरी/मदन  ‘राज’ आर्यों ने सृष्टि का प्रारम्भ प्रकृति एवं पारस्परिक संबंध से माना है। नारी तथा नर, क्रम से प्रकृति और पुरुष के रूप में उनके आपसी मेल से यह संसार स्थायी है। इस स्थायित्व को मर्यादित बनाने के लिए तथा समाज के विकास के लिए पूर्वजों ने विवाह जैसी संस्था का प्रारम्भ किया। विवाह की इस महत्वपूर्ण घटना से परिवार का प्रारम्भ हुआ और उसमें नारी के भार्या, पत्नी तथा 

लक्ष्मी प्रगट भई!

Posted On November - 1 - 2010 Comments Off on लक्ष्मी प्रगट भई!
सूर्यकुमार पांडेय/सागर में गागर मैं जानता था, दीवाली पर वे मुझे मेरे शहर के किसी गली-कूचे में नहीं मिल पाएंगी। मलिन और पुरानी बस्तियों के खड़ंजों पर चलकर आएंगी तो उनके पद-कमल छिल जाएंगे। पेड़ों के नाम पर मेरे शहर में ठूठ भी तो नहीं बचे हैं, जहां पर वे अपने प्रिय वाहन की पार्किंग के निमित्त कोई उपयुक्त कोटर भी तलाश पाएंगी। वे आदिकाल से वैभवशाली स्थलों पर ही अपनी दयादृष्टि बरसाती 

आपके पत्र

Posted On November - 1 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
सुप्रीम कोर्ट की फटकार कृष्णराम देवले, पंचकूला सुप्रीम कोर्ट ने कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में हुए भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगायी। भ्रष्टाचार आज देश के लिए कोढ़ बन गया है। देश में  बिना काम किए ही पैसे का भुगतान कर दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के संदर्भ में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के पास फुटओवर ब्रिज के गिर जाने की घटना का भी 

न हमारा ठिकाना न तुम्हारा!

Posted On October - 31 - 2010 Comments Off on न हमारा ठिकाना न तुम्हारा!
शैलेश कुमार सागर में गागर अरे! लूटने वाले बंधुगण, अब मैंने तुझे पहचाना है। कोई लूटे मिड-डे-मील का बोरा, कोई राशन कार्ड ही लूट चले। हम रक्षक हैं मानवता के,अपने घर को ही लूट रहे। कोई चावल का बोरा लूटे, कोई म-न-रे-गा को ही लूट रहे। हम सच्चे दिल जनसेवक हैं, अपने ही घर को लूट रहे। वो लूटने वाले बंधुगण! सड़क, कोलतार ही लूट चले। कॉमनवेल्थ महारानी की अति कृपा है। इसने खुशियां लुटाई और उसने बोरियां 

प्रेम में शृंगार है!

Posted On October - 31 - 2010 Comments Off on प्रेम में शृंगार है!
प्रहलाद सूर्य पुस्तक समीक्षा प्रस्तुत कविता-गजल-संग्रह ‘काश! तुम्हारे अश्रु पोंछूं’ कवि अंकुर अरोड़ा की प्रथम कृति है। प्रत्येक मनुष्य की जीवन-यात्रा अनेक उतार-चढ़ावों से संपन्न होती है जिसमें सुख-दुख, संवेदनाएं और प्रेम का अनुभव विभिन्न आयामों से होता हुआ एक केंद्र बिंदु पर जाकर रुक जाता है। काव्य-संग्रह में लगभग सभी कविताएं प्रेमाधारित हैं जो कल्पनाओं में विचरते हुए 

मुसलमानों की उन्नति में सहायक ‘मुसद्दस-ए-हाली’

Posted On October - 31 - 2010 Comments Off on मुसलमानों की उन्नति में सहायक ‘मुसद्दस-ए-हाली’
इफ्तखार कुरैशी पुस्तक समीक्षा भारत में 1857 के गदर (क्रांति) में मौलाना ‘हाली’ और उनका खानदान भी मुतअस्सिर (प्रभावित) हुआ था, के बाद मुसलमानों की हालत बहुत खराब हो गयी थी। हर ए’तिबार (विश्वास, यकीन) से ये कौम (जाति, बिरादरी) पिछड़ेपन की तरफ जा रही थी। ता’लीम खत्म (शिक्षा समाप्त) हो रही थी, दीन (धर्म) का केवल नाम बाकी था, गरीबी अपना दायरा बढ़ा रही थी। भूख पीछा नहीं छोड़ रही थी, अख्लाक 

बच्चों की नज़र में भारत-चीन युद्ध

Posted On October - 31 - 2010 Comments Off on बच्चों की नज़र में भारत-चीन युद्ध
डा. आरती वर्मा पुस्तक समीक्षा शांति और सुरक्षा के लिए किए गए पंचशील समझौते को तोड़ते हुए चीन ने 1962 में भारत पर आक्रमण किया था। लेखिका नीलम सरन गौड़ ने इस ऐतिहासिक घटना को उपन्यास ’62 की बातें का मूल विषय-वस्तु चुना है और उसे बड़े ही रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत किया है। मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया यह उपन्यास पेंगुइन बुक्स इंडिया से 1995 में आया था और अब इसका हिंदी संस्करण पेंगुइन 

संवेदनाओं से बुनी कहानियां

Posted On October - 31 - 2010 Comments Off on संवेदनाओं से बुनी कहानियां
पूरन मुद्गल पुस्तक समीक्षा ‘संवेदनाओं संग संवाद’ सुरेश बरनवाल की कहानियों का प्रथम संग्रह है। कहानी या फिर किसी भी साहित्यिक विधा में न्यूनाधिक यथार्थ और कल्पना का सुमेल होता है। यथार्थ देखा, सुना, पढ़ा या अनुभूत किसी भी रूप में हो सकता है। ‘संवेदनाओं संग संवाद’ की कहानियों में इस सुमेल की झलक सम्मोहक है। यथार्थ से कथ्य का खाका बनता है तो शिल्प उसमें रंग भरता है,उसे आकर्षक 

भाषा एवं बोलियों को जीवित बनाये रखने की पहल

Posted On October - 31 - 2010 Comments Off on भाषा एवं बोलियों को जीवित बनाये रखने की पहल
प्रमोद भार्गव संकटग्रस्त भाषाएं कोई भी भाषा जब मातृभाषा नहीं रह जाती है तो उसके प्रयोग की अनिवार्यता में कमी और उससे मिलने वाले रोजगारमूलक कार्यों में भी कमी आने लगती है। भाषा और बोलियों को इस संकट से उबारने की दृष्टि से मध्यप्रदेश सरकार एक अच्छी पहल करने जा रही है। हाल ही में प्रदेश सरकार ने जो लोक सेवा गारंटी कानून लागू किया है उसके तहत कानून की जानकारी आदिवासियों की बोलियों 

उत्तर औंधे मुंह पड़े, गर्वित हुए सवाल!

Posted On October - 31 - 2010 Comments Off on उत्तर औंधे मुंह पड़े, गर्वित हुए सवाल!
पिछले फुटबाल कप में खेल से ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाले बाबा पॉल आखिरकार दुनिया को बाय-बाय कह गए और अपने पीछे तमाम सवाल छोड़ गए। सवाल यह भी छोड़ गए कि खुद का आधुनिक, प्रगतिशील और वैज्ञानिक सोच का अगुवा कहने वाला पश्चिमी समाज कितना अंधविश्वासी है। एक बेजुबान ऑक्टोपस के प्रतीकात्मक संकेत को भविष्यवाणी मानने और उसके परिणामों पर पागलपन की हद तक प्रतिक्रिया देने वाले यूरोपीय देशों ने 

बड़ा फ़र्क है चापलूसी एवं बचपने में

Posted On October - 30 - 2010 Comments Off on बड़ा फ़र्क है चापलूसी एवं बचपने में
खुशवंत सिंह कुछ सप्ताह पूर्व लिखे अपने लेख में मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जिक्र किया और उन कारणों का जिक्र भी किया था जो उन्हें बेहतर प्रधानमंत्री साबित करते हैं। इस आलेख को लेकर कुछ पाठकों की तल्ख प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इनमें से अधिकांश पत्र जिनमें मेरी आलोचना की गई थी, अखबारों में प्रकाशित भी किए गए। ऐसा करके संपादकों ने अपने दायित्व का निर्वहन ही किया। मैं पाठकों 

जनमंच

Posted On October - 30 - 2010 Comments Off on जनमंच
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अपना दीया जलायें, दूसरों का भी बुझने न दें!

Posted On October - 30 - 2010 Comments Off on अपना दीया जलायें, दूसरों का भी बुझने न दें!
डॉ. रेणुका नैयर जिंदगी में जिसने कभी दु:ख नहीं देखा, वह सुख के आनंद को अनुभव नहीं कर सकता। इसी तरह अगर अंधेरा न हो तो हम उजाले के महत्व को समझ ही न पायें। रोशनी, जीवनदायिनी है, शायद यही समझाने के लिए अमावस की रात को दीयों से रोशन किया जाता है और उस रात को ‘दीपावली’ के नाम से पुकारा जाता है। यूं तो दशहरा के 20 दिन बाद दीपावली का त्योहार आता है। दशहरा हम बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में 
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