हरियाणा में मतदान समाप्त, 65 प्रतिशत लोगों ने डाले वोट !    हरियाणा में चार बजे तक 50.59 प्रतिशत मतदान !    कलानौर और महम में कांग्रेस-भाजपा समर्थकों में हाथापाई !    हरियाणा में तीन बजे तक 46 फीसदी मतदान !    बहादुरगढ़ में भिड़े 2 गुट !    हरियाणा में 2 बजे तक 37 फीसदी मतदान !    हरियाणा में सुबह 11बजे तक 22 फीसदी मतदान, सबसे ज्यादा फतेहाबाद में 27 प्रतिशत पड़े वोट !    छिटपुट शिकायतों के बीच हरियाणा में मतदान जारी !    इस बार पहले से दोगुना होगा जीत का अंतर !    आजाद हिंद फौज के सेनानी का निधन !    

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खास खबर
शहरों में बाढ़ की चुनौती

शहरों में बाढ़ की चुनौती

हम भी जिम्मेदार पिछले कुछ समय से देश को जिस तरह से सूखे और बाढ़ का सामना करना पड़ा है वह आईपीसीसी की जलवायु परिवर्तन पर आधारित उस रिपोर्ट का ध्यान दिलाती है, जिसमें जलवायु परिवर्तन के कारण देश को बाढ़ और सूखे जैसी आपदाएं झेलने की चेतावनी दी गई थी। ...

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बढ़ती उम्र में नये अनुभवों संग जीना

बढ़ती उम्र में नये अनुभवों संग जीना

अंतर्मन रेनू सैनी नि:संदेह हम सभी यह समझते हैं कि सफलता व काम करने का उम्र के साथ संबंध होता है। जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता घटती जाती है। पर यह केवल एक मिथक है। यदि व्यक्ति बढ़ती आयु में भी लगातार सक्रिय रहे तो ...

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विसंगतियों के व्यवहार से उपजी टीस

विसंगतियों के व्यवहार से उपजी टीस

सुरेश सेठ पौन सदी के आज़ाद भारत के विगत छह वर्ष एेसे रहे हैं, जिनमें देश की सांस्कृतिक गरिमा और गौरवपूर्ण अतीत का खूब बखान होता रहा। हिमाचल ही देवभूमि नहीं, बल्िक देश की अधिकांश आबादी धार्मिक निष्ठा और उत्सव-त्योहारों के सांस्कृतिक ओज से कुछ इस प्रकार डूबने लगी कि कश्मीर ...

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लोकतंत्र का उत्सव

लोकतंत्र का उत्सव

जिम्मेदारी-जवाबदेही का भी हो अहसास सही मायनो में चुनाव लोकतंत्र का उत्सव ही तो है। सारे राजनीतिक दल जनता के सामने नतमस्तक नजर आते हैं। जनता को लुभाने के लिये अपने-अपने घोषणा पत्र लेकर आते हैं। तमाम तरह के वायदे करते हैं। प्रलोभन भी देते हैं, क्षेत्र विशेष जनसंख्या के ...

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प्रेम की सशक्त अभिव्यक्ति

प्रेम की सशक्त अभिव्यक्ति

पुस्तक समीक्षा शशि सिंघल प्रेम सर्वोपरि है। प्रेम सिर्फ स्त्री-पुरुष में ही नहीं, बल्कि हर रिश्ता प्रेम-भाव से ही जुड़ा होता है। रिश्ता कोई भी हो, लेकिन प्रेम-भाव को चंद शब्दों में अभिव्यक्त कर पाना नामुमकिन है। प्रेम ही है जो किसी भी जीव या अस्तित्व में प्रविष्ट करने वाली पहली अनुभूति ...

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ज़िंदगी की जंग में जीत का जज्बा

ज़िंदगी की जंग में जीत का जज्बा

पुस्तक समीक्षा जोगिंद्र सिंह हिंदी के कथाकार कमल चोपड़ा की पत्रिकाओं में छपी कहानियों पर आधारित ‘भट्ठी में पौधा’ उनका दूसरा कहानी संग्रह है। इस कहानी संग्रह के पात्र अपनी हाशियाग्रस्त स्थिति को स्वीकारते हैं मगर वे नियति से टकराने का बूता रखते हैं। वे लड़ते हैं, जूझते हैं, चुनौती देते हैं। ...

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छोटे कलेवर में बड़ी बात

छोटे कलेवर में बड़ी बात

पुस्तक समीक्षा मनमोहन गुप्ता मोनी 19 भाषाओं के 83 लेखकों की 122 लघु कथाओं का गुलदस्ता है ‘देश-विदेश से कथाएं’। इन्हें अशोक भाटिया ने संपादित किया है। कथाकार के रूप में अशोक भाटिया परिचित नाम है। लघुकथा की खूबियां होती हैं कि छोटा कलेवर होने के बावजूद वह बड़ी बात कहने की ...

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भाजपा का नया चेहरा

Posted On March - 18 - 2010 Comments Off on भाजपा का नया चेहरा
भारतीय जनता पार्टी का चिरप्रतीक्षित नया चेहरा भी सामने आ ही गया। महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष पद से सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बिठा दिये गये नितिन गडकरी ने नवरात्र के पहले दिन अपनी जिस टीम की घोषणा की है, उसमें नये चेहरों की कमी तो नहीं है। महिला आरक्षण विधेयक पर अंतर्कलह से जूझ रही भाजपा ने अपने संगठन में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दे दिया है। युवाओं को भी आगे लाने की कोशिश की गयी 

आपके पत्र

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
नारे-दावे मात्र ढकोसला अक्षित गुप्ता, रादौर रूस से आए लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने के अवसर पर आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री ने कहा, कि हम अपनी एक-एक इंच जमीन की रक्षा करेंगे। कौन-सी जमीन की बात की जा रही है। वह जमीन जो पाकिस्तान और चीन के कब्जे में गयी है? बेहद अफसोसनाक स्थिति की सूचना तो गत दिनों लद्दाख से भी मिली, जहां यह सामने आया कि चीन ने धीरे-धीरे, इंच-इंच 

सबसिडी में कटौती नहीं, दिशा-परिवर्तन की ज़रूरत

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on सबसिडी में कटौती नहीं, दिशा-परिवर्तन की ज़रूरत
अर्थव्यवस्था डा. भरत झुनझुनवाला खाद्य सबसिडी का मूल उद्देश्य गरीब को राहत पहुंचाना है जो उच्च वर्ग को सस्ते खाद्यान्न की सप्लाई से नहीं हासिल हो सकता है। परन्तु खाद्य सबसिडी को गरीब तक पहुंचाना भी दुष्कर कार्य है। एक अध्ययन में पाया गया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली से 36 प्रतिशत खाद्यान्न का लीकेज हो जाता है और 21 प्रतिशत उच्चवर्गीय लोगों को चला जाता है। गरीब के नाम पर दिये जा रहे 

दमन से बेहतर है शांति-वार्ता

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on दमन से बेहतर है शांति-वार्ता
नक्सलवाद अखिलेश आर्येन्दु पिछले महीने जब केंद्र सरकार ने नक्सली समस्या का हल पुलिस और सेना के जरिए निकालने की घोषणा की थी तभी देश के बुद्धिजीवियों और समाजकर्मियों के बीच एक चर्चा इसकी सफलता और विफलता को लेकर होने लगी थी। राजनीतिक गलियारों में भी यह महसूस किया जाने लगा था कि हिंसा का जवाब हिंसा से देने पर समाधान नहीं निकल सकता है। 15 फरवरी को जब पं$ बंगाल के मिदनापुर जिले के सिल्दा 

मार्च का महापर्व

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on मार्च का महापर्व
सागर में गागर योगेश चन्द्र शर्मा सरकारी दफ्तरों में काम करने वालों के लिए मार्च महीने का विशेष महत्व है। लेखा विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों को इन दिनों अवकाश मिलना कठिन होता है। उन्हें अपनी सीट पर कुछ अधिक ही बैठना पड़ता है। मटरगश्ती कम हो जाती है और चाय के दौर बढ़ जाते हैं। वैसे इस चाय के लिए उन्हें अपनी जेब सेे व्यय कम ही करना पड़ता है। इन दिनों उन्हें खिलाने-पिलाने वाले 

बसपा की ‘माया’

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on बसपा की ‘माया’
बहुजन समाज पार्टी के बीते पच्चीस साल शून्य से एक बड़े राज्य के सत्ता-शिखर तक पहुंचने की दास्तां बयां करते हैं। लखनऊ में पार्टी के पच्चीस साल पूरे होने पर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जो जश्न मनाया उसके वे हकदार हैं। पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने समाज के उपेक्षित तबके को केंद्र में रखकर जिस बहुजन समाज पार्टी की शुरुआत की थी, उसकी सफलता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि आज बसपा देश के 

हरियाणा के अपराधी पुलिसकर्मी

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on हरियाणा के अपराधी पुलिसकर्मी
अपना हरियाणा वाकई नंबर वन बन गया। चहुंमुखी विकास और प्रति व्यक्ति आय के क्षेत्र में नंबर वन होने के दावों में कितना दम है, यह तो पता नहीं, पर हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स के ही व्यापारियों से चौथ वसूली का सच सीसीटीवी कैमरों में कैद है। घटना पानीपत की है, पर क्या यह पूरे पुलिस तंत्र के आचरण और व्यवहार को बेनकाब नहीं करती? पुलिसकर्मियों पर तरह-तरह के अनुचित ही नहीं, आपराधिक कामों में 

आपके पत्र

Posted On March - 16 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
महिलाओं का उद्धार डा. अशोक शर्मा, जगाधरी राज्यसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण बिल भारी हंगामे के बीच पास हो गया है। संसद व विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी यह प्रसन्नता की बात है। क्या इस बिल से देश में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार, मानसिक व शारीरिक प्रताडऩा, कन्या भ्रूणहत्याएं रुक जाएंगी? देश में कन्या भ्रूण-हत्याएं हो रही हैं। किसी अभिभावक व डाक्टर को आज तक कानून ने 

हमें संसदीय लोकतंत्र की सीमाओं को स्वीकारना होगा

Posted On March - 16 - 2010 Comments Off on हमें संसदीय लोकतंत्र की सीमाओं को स्वीकारना होगा
जनतंत्र अवधेश कुमार कई बार जो सतह पर दिखता या दिखाया जाता है वही सत्य नहीं होता। संसद एवं राज्य विधायिकाओं में महिलाओं के आरक्षण पर हो रही राजनीति ऐसा ही है। हम सबको पता है कि इस विधेयक का समर्थन कर रहे सारे सांसद एवं नेता न वाकई अंतर्मन से इसके समर्थक हैं और न इसका विरोध करने वाले महिला विरोधी। सच यह है कि यदि पार्टियां व्हिप न जारी करतीं एवं सांसदों के खिलाफ किसी प्रकार 

आम आदमी सुखी नहीं है चीन में

Posted On March - 16 - 2010 Comments Off on आम आदमी सुखी नहीं है चीन में
पड़ौस डा. गौरीशंकर राजहंस वर्ष 1949 में जब चीन की मुख्य भूमि पर साम्यवादियों का कब्जा हो गया तभी से चीन के बारे में प्रामाणिक खबरें बाहर की दुनिया को मिलनी बंद हो गयीं। माओ-त्से-तुंग की मृत्यु के बाद जब देंग सत्ता में आए तब यह उम्मीद की जाने लगी कि राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में चीन उदारवादी रवैया अपनाएगा। यह जरूरी है कि उदारवादी रवैया अपनाने के कारण चीन का अप्रत्याशित 

तेरा जाना…

Posted On March - 16 - 2010 Comments Off on तेरा जाना…
सागर में गागर अशोक खन्ना कभी दृश्य मीडिया के मायने दूरदर्शन होता था। उन दिनों जब कोई महान विभूति लुढ़कने को होती थी तो लाखों हाथ प्रार्थना के लिए जुड़ जाते थे, ‘प्रभु उन्हें आज न उठाना। आज बुधवार है। आज चित्रहार है।’ प्रार्थनाएं आमतौर पर अनसुनी रह जाती हैं। शाम के सात बजते-बजते देश एक और महान सपूत को खो बैठता था। ऐसा भयंकर किस्म का राष्ट्रीय शोक होता था कि डीडी तो डीडी 

टीवी बनाम अखबार

Posted On March - 16 - 2010 Comments Off on टीवी बनाम अखबार
भारत के कुछ महानगरों में किए गए एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में बताया गया कि बहुसंख्यक भारतीय मनोरंजन और विज्ञापनों के रूप में टेलीविजन को प्राथमिकता देते हैं जबकि चाय की चुस्कियों के साथ अखबार पढऩे वाले पाठकों का प्रतिशत दूसरे नंबर पर है। देश  में सूचना-क्रांति के चलते टेलीविजन एक सशक्त मनोरंजन माध्यम के रूप में उभरा है। इसमें दो राय नहीं कि दृश्य और श्रव्य माध्यम होने के नाते दर्शकों 

भ्रष्टाचार का घुन

Posted On March - 16 - 2010 Comments Off on भ्रष्टाचार का घुन
देश के सर्वोच्च नौकरशाह के.एम. चंद्रशेखर का भारत सरकार के सभी सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों को भ्रष्टाचार बर्दाश्त न करने की नसीहत वाला पत्र निश्चय ही भ्रष्टाचार के मामले में देश की बिगड़ती छवि के प्रति सरकार की चिंता का प्रमाण है। जो देश कभी विश्व गुरू रहा हो, जिसकी आजादी के संघर्ष का नेतृत्व सत्य और अहिंसा के उपासक महात्मा गांधी ने किया हो तथा जिसके नैतिक मूल्यों व आदर्श परंपराओं 

नेक ख्वाहिश के साथ बहुत शुक्रिया

Posted On March - 15 - 2010 Comments Off on नेक ख्वाहिश के साथ बहुत शुक्रिया
एचके दुआ ‘ट्रिब्यून’ जैसे संस्थान में सात साल का समय बहुत थोड़ा है, लेकिन एक संपादक के लिए पत्रकारिता की दुनिया में ये दिन बहुत लंबी अवधि है। कल, सात साल से कुछ सप्ताह कम की कार्यावधि के पश्चात मैं इस प्रतिष्ठित समाचारपत्र के प्रधान सम्पादक के पद से कार्यमुक्त हो रहा हूं। यह पारी अत्यंत सन्तोषप्रद रही। इन वर्षों के दौरान  ट्रिब्यून ने कुछ मील पत्थर कायम किये और राष्ट्रीय दृष्टिकोण 

तंबू पार्टी!

Posted On March - 15 - 2010 Comments Off on तंबू पार्टी!
बात की बात सहीराम कहावत तो यह है कि पुरुष के भाग्य का कुछ पता नहीं होता कि कब बदल जाए। पर सच पूछो  तो जी, राजनीतिक पार्टियों के भाग्य का भी कुछ पता नहीं होता कि कब बदल जाए। देख लीजिए, भाजपा देखते-देखते कैसे पांच सितारा पार्टी से तंबूवाली पार्टी बन गयी। शायद इसीलिए गडकरी जी ने यह गाना गाया होगा—जिंदगी कैसी है पहेली। वैसे अगर वे तंबू में बंबू लगाए बैठे टाइप गाना गाते तो भी बुरा 

वंशवाद से कैसे मुक्त हो राजनीति

Posted On March - 15 - 2010 Comments Off on वंशवाद से कैसे मुक्त हो राजनीति
खबरों के आगे-पीछे विश्वनाथ सचदेव कांग्रेस के  महासचिव राहुल गांधी यह जानते हैं कि वे उनमें से हैं, जिन्हें पारिवारिक कारणों से राजनीति में महत्व मिला, लेकिन वे यह जताना भी नहीं भूलते कि राजनीति में होने का कारण भले ही परिवार हो, लेकिन राजनीति में बने रहने, और अपना महत्व बनाये रखने के लिए स्वयं को सिद्ध करना जरूरी है। कांग्रेस को आम आदमी से जोडऩे की कोशिशों से लेकर कांग्रेस में जनतंत्रीकरण 
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