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खास खबर
चीनी महत्वाकांक्षा पर वैश्विक गुस्से की चोट

चीनी महत्वाकांक्षा पर वैश्विक गुस्से की चोट

पिछले कुछ हफ्तों से चीन इस तरह का व्यवहार करने लगा है मानो कोरोना की मार से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी देशों के पस्त पड़ने के बाद उसके विश्व की एकमात्र और निर्विरोध महाशक्ति बनने की राह स्वयंमेव प्रशस्त हो गयी है। हालांकि, कोरोना वायरस की मार सबसे पहले ...

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अकाल की पृष्ठभूमि तैयार करते घुसपैठिये

अकाल की पृष्ठभूमि तैयार करते घुसपैठिये

एन.के. सोमानी कोरोना संक्रमण के बीच राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में टिड्डियाें ने आतंक मचा रखा है। फसलनाशक यह कीट विभिन्न जिलों से होता हुआ राजधानी जयपुर तक में घुस आया है। इससे पहले जनवरी माह में भी टिड्डियों ने बड़ी संख्या में देश के कई राज्यों में सरसों, ...

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ऋण नहीं, संरक्षण दें छोटे उद्योगों को

ऋण नहीं, संरक्षण दें छोटे उद्योगों को

भरत झुनझुनवाला लॉकडाउन से पूरी अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है लेकिन छोटे उद्योगों को विशेष नुकसान हुआ है। सरकार ने छोटे उद्योगों को मदद करने के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की विशाल राशि उन्हें दिए जाने वाले ऋण की गारंटी के रूप में देने का एेलान किया है। इस पैकेज ...

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कोरोना काल में कारोबार कन्फ्यूजन

उलटवांसी आलोक पुराणिक कोरोना ने बहुत से धंधों की सूरत बदल दी है। सूरत क्या धंधे ही बदल गये हैं। लिपस्टिक का कारोबार भीषण मंदी में जाने वाला है, जब मुंह पर मास्क ही लगाना है, तो लिपस्टिक पर काहे खर्च किया जाये। लिपस्टिक के शेड्स पर क्यों माथापच्ची की जाये, सारा ...

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एक बार फिर पारदर्शिता को लेकर सवाल

एक बार फिर पारदर्शिता को लेकर सवाल

कॉलेजियम व्यवस्था अनूप भटनागर देश की शीर्ष अदालत से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने न्यायाधीशों के नामों का चयन करने और उनकी सिफारिश करने वाली उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की कार्यशैली पर की गयी टिप्पणी से एक बार फिर यही संकेत दिया है कि मौजूदा कॉलेजियम व्यवस्था में ...

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हमले से हलकान

हमले से हलकान

टिड्डियां चट कर गईं कई राज्यों की फसलें कोरोना संकट से जूझ रहे देश में पाकिस्तान के रास्ते आईं करोड़ों टिड्डियों ने राजस्थान व मध्यप्रदेश में किसानों की फसलों को तबाह करने के बाद उ.प्र. में हमला बोल दिया है। सोमवार तक आगरा पहुंचने की आशंका से ब्रज क्षेत्र में बड़े ...

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पाक की नापाक हरकत

पाक की नापाक हरकत

जन संसद जवाब देना जरूरी ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और कश्मीर के स्थानीय लोगों को भड़काने का काम कर रहा है। वह अपनी इन हरकतों से बाज नहीं आ रहा। आखिर कब तक ऐसे आतंकवादियों के दम पर लड़ता रहेगा। पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब ...

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  • भारत विरोध के नेपाली राजनीतिक समीकरण
     Posted On May - 29 - 2020
    नेपाली मंत्रिपरिषद ने देश का जो नया नक्शा जारी किया है, उसका संसद द्वारा दो-तिहाई मतों से अनुमोदन अनिवार्य है।....
  • चौबीस कैरेट का खरा सोना निकले सोनू
     Posted On May - 29 - 2020
    भारतीय फिल्मों में सोनू सूद की पहचान एक आकर्षक डील-डौल वाले खलनायक के रूप में होती है। कोई गॉडफादर न....
  •  Posted On May - 29 - 2020
    लॉकडाउन जब से चालू हुआ है, मैंने घर में खाना खाना बंद कर दिया है। जब भूख लगती है, फेसबुक....
  •  Posted On May - 29 - 2020
    लद्दाख में भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले कुछ दिनों से चीनी सैनिकों की घुसपैठ हो रही है। जाहिर है....

कुछ भूली-बिसरी यादें !

Posted On November - 8 - 2010 Comments Off on कुछ भूली-बिसरी यादें !
सहीराम बात की बात कभी ब्रिटेन की महारानी का सिक्का खूब चलता था। जब सिक्का चलता था तो हुक्म भी चलता था। असल में सिक्का और हुक्म साथ-साथ चलते हैं। पर सिक्का तो खैर अब उनका नहीं चलता। और देखिए हमें गुमान था कि हम आजाद हो गए। हालांकि ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो यह मानते हैं कि हम अभी भी मानसिक रूप से गुलाम हैं। उनमें से कुछ की शिकायत तो यह भी होती है कि जब मानसिक गुलाम हैं ही तो हमारे गुलाम क्यों 

आपके पत्र

Posted On November - 8 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
सेना के हवाले शामलाल कौशल, रोहतक 20 सितंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘बना रहे मनोबल सेना  का’ चेतावनियों से भरपूर था। अलगाववादियों तथा सीमा पार शरारती तत्वों द्वारा उकसाये जाने के  बाद कश्मीर के विभिन्न भागों में कफ्र्यू को धता बताते हुए युवक, महिलाएं तथा बच्चे पुलिस पर पत्थर फेंकते हैं, जवाब में पुलिस गोली चलाती है, एकाध युवक मारा जाता है, कुछ जख्मी होते हैं; स्थिति और 

अंधकार मारा फिरे, दीपक जीते जंग

Posted On November - 7 - 2010 Comments Off on अंधकार मारा फिरे, दीपक जीते जंग
एक बार उजाले ने फिर अंधेरे पर जीत दर्ज की। भारतीय बा$जार और सामाजिक रिश्तों को यह पर्व नयी उंचाइयां दे गया। हर तरफ उल्लास-उमंग का माहौल। मिलने-जुलने का अंतहीन सिलसिला। बोनस, उपहार, खरीदारी, उजास, मिठाइयां, झालरों की जगमग चमक से चौंधयाती आंखें; सचमुच एक नये जीवन का-सा उल्लास दे गया यह पर्व। गरीबी के आंकड़े कुछ भी कहें, इस त्योहार ने पूरी दुनिया को भारतीयों की उत्सवप्रियता का बोध तो करा ही 

जंग के विरुद्ध जंग का साहित्य

Posted On November - 7 - 2010 Comments Off on जंग के विरुद्ध जंग का साहित्य
गुरमीत सिंह कारगिल युद्ध के एक दशक बीत जाने के बाद भी इस युद्ध की स्मृतियां आज सभी के •ाहन में ताजा हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के युग में लड़े गए इस युद्ध से जुड़ी हर कहानी घर-घर तक पहुंची थी। इसी युद्ध की पृष्ठभूमि में लिखे गए आलेखों, कहानियों और कविताओं का एक विशेष संकलन प्रस्तुत किया है सरोज वशिष्ठ ने, जो स्वयं भी एक कथाकार हैं। ‘जंग जारी है’ नाम का यह संग्रह जंग के खिलाफ जंग 

नारी-शिक्षा विषयक ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’

Posted On November - 7 - 2010 Comments Off on नारी-शिक्षा विषयक ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’
पुष्पपाल सिंह प. गौरीदत्त कृत ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’ हिंदी का प्रथम श्रेण्य (क्लासिक श्रेणी का) उपन्यास है। यह उपन्यास अपने कथ्य में गहरी सामाजिक संपृक्ति और यथार्थ के खांटी रूप को प्रस्तुत करने में तो बेजोड़ है ही, भाषा-शैली और शिल्प की दृष्टि से भी अपने समय से बहुत आगे की रचना है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि यदि हिंदी उपन्यास ने पं. गौरीदत्त की उपन्यास परम्परा का अनुगमन किया 

अश्क की कथा-यात्रा का दस्तावेज़

Posted On November - 7 - 2010 Comments Off on अश्क की कथा-यात्रा का दस्तावेज़
डॉ. सुभाष रस्तोगी हिंदी के दिग्गज कथाकारों में से एक उपेन्द्रनाथ अश्क हालांकि कवि, नाटककार, एकांकीकार, उपन्यासकार, संस्मरण, लेखक और सुधी आलोचक के रूप में भी जाने-मानेे हैं, लेकिन उनकी मुख्य पहचान एक कथाकार की है। प्रेमचंद के बाद की पीढ़ी के कथाकारों में श्री अश्क अग्रगण्य हैं। उनकी भावभूमि लगभग वही है जो प्रेमचंद की है और यहां तक की उनकी भाषा की बनावट और बुनावट भी लगभग प्रेमचंदीय 

जीवों के प्रति प्रेम जगाते दोहे

Posted On November - 7 - 2010 Comments Off on जीवों के प्रति प्रेम जगाते दोहे
डा. रश्मि सृष्टि के आरंभ से ही मनुष्य व जीव-जन्तुओं का अटूट संबंध रहा है। पर्यावरण के संतुलन में जीव-जन्तुओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रकृति में विविध जीवों का अस्तित्व विद्यमान है। यदि धरती से एक भी प्रजाति विलुप्त होती है तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा। भारत में जीव-जन्तुओं की अनेक प्रजातियां पायी जाती हैं। ये जीव सदियों से मनुष्य के लिए अनेकानेक प्रकार से उपयोगी 

बेहतर हो सकने की गुंजाइश

Posted On November - 7 - 2010 Comments Off on बेहतर हो सकने की गुंजाइश
राजेन्द्र चांद कम लिखना या ज्यादा लिखना मायने नहीं रखता, हां सार्थक लिखना अवश्य मायने रखता है। इस बात का विश्लेषण कर लिया जाए तो अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इस सत्य से वाकि$फ लिखने वालों की संख्या अच्छी-खासी है किंतु जिन लिखने वालों ने इस सत्य से आंखें मूंद रखी हैं उनकी संख्या भी कम नहीं है। सुरेंद्र कुमार ‘अंशुल’ के ताज़ा $गज़ल संग्रह ‘दिल की ज़मीं पर’ की रचनायें उनके 

सासू मां का फ्लैट!

Posted On November - 7 - 2010 Comments Off on सासू मां का फ्लैट!
अतुल कनक मैं हालांकि कोई मुख्यमंत्री- फुख्यमंत्री नहीं हूं लेकिन इन दिनों अपनी सासू मां द्वारा खरीदा गया फ्लैट मेरी भी नींदें उड़ा रहा है। आदमी की किस्मत का कोई भरोसा नहीं है साहब! किस्मत मेहरबान हो तो स्टेडियम और खेल गांव के निर्माण में कमीशन बांटे जाने के चर्चे भी रौब पर कोई बुरा असर नहीं डालें और बुरा वक्त आए तो सासू मां के लिए एक अदद फ्लैट का जुगाड़ करने पर भी आलाकमान के सामने 

खेल मठाधीशों के खेल

Posted On November - 5 - 2010 Comments Off on खेल मठाधीशों के खेल
खेल संघों के मठाधीशों पर नियम-कायदों की लगाम कसने के उद्देश्य से प्रेरित खेल मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को दिल्ली उच्च न्यायालय से भी हरी झंडी मिल जाने के बाद इन मठाधीशों में मचा हड़कंप दरअसल इसी आम धारणा की पुष्टि करता है कि इनके अपने निहित स्वार्थ बहुत गहरे हैं। याद रहे कि कुछ महीने पहले खेलमंत्री मनोहर सिंह गिल ने किसी पुराने संशोधित नियम का हवाला देते हुए दिशा-निर्देश जारी किये 

किसानों की दीवाली

Posted On November - 5 - 2010 Comments Off on किसानों की दीवाली
रियाणा व पंजाब सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को की गई घोषणाओं से इन राज्यों के किसानों को दीपावली से पहले इस त्योहार जैसी खुशी हासिल हो गई। जहां पंजाब सरकार ने किसानों के लिए मुफ्त बिजली बहाल करके उनके चेहरों पर चमक लौटाई है, वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डïा ने भू-अधिग्रहण के सवा दो गुना दाम बढ़ाने की घोषणा की है। यही नहीं फ्लोर रेट से लेकर रॉयल्टी तक में वृद्धि 

त्योहारों का वैज्ञानिक पक्ष जानना भी जरूरी

Posted On November - 5 - 2010 Comments Off on त्योहारों का वैज्ञानिक पक्ष जानना भी जरूरी
रणजीत सिंह दीपोत्सव भारत में नवरात्र-दशहरा-दीवाली का विशेष महत्व है और सारा भारतवर्ष इन त्योहारों को सर्वाधिक धूमधाम से मनाता है। भारत के इन त्योहारों की परम्परा के पीछे यह मान्यता है कि इन अवसरों पर इनको मनाने से पारिवारिक सुख, शांति, शक्ति और समृद्धि आती है और कायम रहती है। यही नहीं भारत में अन्य त्योहार भी पूरी आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाये जाते हैं। वर्षभर विभिन्न 

ओबामा : फीकी पड़ती सितारे की चमक!

Posted On November - 5 - 2010 Comments Off on ओबामा : फीकी पड़ती सितारे की चमक!
अरुण नैथानी चर्चित व्यक्ति बराक ओबामा ऐसे करिश्माई व्यक्तित्व के धनी हैं कि वे सदा चर्चाओं में रहते हैं। लेकिन उनकी हालिया चर्चा दो कारणों से हो रही है—पहली, मध्यावधि चुनावों में करारी शिकस्त के चलते तो दूसरे उनकी भारत-यात्रा को लेकर। गत 4 अक्तूबर, 2008 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अमेरिकी लोगों ने उनसे जो अप्रत्याशित उम्मीदें लगा रखी थीं, वे शायद पूरी नहीं हो पाईं। वास्तव 

लक्ष्मी मैया मेरे घर आना!

Posted On November - 5 - 2010 Comments Off on लक्ष्मी मैया मेरे घर आना!
राजेंद्र निशेश खबरों की खबर ह उलूक-वाहिनी लक्ष्मी-मैया! तुम्हारी जय हो! खानपान का वैभव तुम्हारी कृपा से ही प्राप्त होता है। जय उसी की बोली जाती है जो सुख पहुंचाने में सहायक होता है। फोकट में तो नेता जी की जय भी कोई नहीं बोलता। सुख पहुंचाने का सबसे बड़ा साधन पैसा है। कंगाल की कहीं पूछ नहीं होती। तभी तो कहते हैं कि पैसा बोलता है। जिनके पास धन-दौलत की कमी नहीं उनके लिए सभी तरह 

आपके पत्र

Posted On November - 5 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
पटाखों, मिठाई के नुकसान मुकेश विग, सोलन किसी भी पर्व या विवाह समारोह में पटाखे चलाना एक रिवाज-सा बन गया है। कुछ पल की मस्ती के लिए ह$जारों रुपया पटाखों पर खर्च करना इस महंगाई के समय में कोई अक्लमंदी नहीं है।  दीपों के पर्व को हम पटाखों का पर्व बना देते हैं। यह फिजूलखर्ची न करके पर्व पर सैकड़ों लाचार भूखों को हम खाना खिला सकते हैं। इन पर्वों का अर्थ बेहिसाब पैसे की बर्बादी या प्रदूषण 

कांग्रेस की दशा-दिशा

Posted On November - 4 - 2010 Comments Off on कांग्रेस की दशा-दिशा
अखिल भारतीय कांग्रेस समिति यानी एआईसीसी की एक-दिवसीय बैठक मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली में संपन्न हो गयी। श्रीमती सोनिया गांधी के लगातार चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने के बाद एआईसीसी की यह पहली बैठक थी। इसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक और प्रासंगिक भी है कि उससे देश और खुद कांग्रेस को हासिल क्या हुआ? सामान्यत: जब भी राजनीतिक दलों क ी ऐसी बैठक-अधिवेशन होते हैं तो अपेक्षा रहती है 
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