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खास खबर
प्रताप की प्रतिभा संभाल पाया देश

प्रताप की प्रतिभा संभाल पाया देश

विष्णुगुप्त देश के लिए सुखद रहा कि प्रताप एन.एम. ने देशभक्ति चुनी और डीआरडीओ में वैज्ञानिक का पद स्वीकार कर लिया। अब प्रताप एन.एम. अपनी प्रतिभा और खोज से देश को लाभान्वित करेंगे, देश का नाम रोशन करेंगे। प्रताप एन.एम. ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील सुनी और अमेरिका, फ्रांस आदि ...

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हर मोर्चे पर जरूरी चीन की घेराबंदी

हर मोर्चे पर जरूरी चीन की घेराबंदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन जुलाई को लद्दाख का दौरा कर चीन द्वारा देश की सुरक्षा को पैदा की गई गंभीर चुनौती से वीरता से निपटने के लिए भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों का धन्यवाद किया है। उनकी यह यात्रा जनता में व्याप्त गुस्से और प्रतिकर्म की मांग के आलोक ...

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अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण की पड़ताल हो

अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण की पड़ताल हो

कानपुर में पुलिसकर्मियों की हत्या अनूप भटनागर कानपुर की घटना ने एक बार फिर बाहुबलियों की राजनीतिक दलों और पुलिस प्रशासन के भीतर सांठगांठ को उजागर किया है। राजनीति में बड़ी भूमिका हासिल करने के लिए प्रयत्नशील इन बाहुबलियों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को ...

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अपराध सींचती व्यवस्था

अपराध सींचती व्यवस्था

पुलिस व समाज को सचेत करता हत्याकांड राजनीति व पुलिस में रसूख रखने वाले कुख्यात अपराधी विकास दुबे व उसके गुर्गों द्वारा एक डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या ने देश को झकझोरा है। पुलिस एक भूमि विवाद में वांछित विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई थी। घटना जहां हमारे तंत्र ...

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हर पल सीखते रहें

निशांत मिश्रा जवानी की दहलीज पर पहुंचे किसी से भी सामान्यत: हम क्या कहते हैं। यही कि ज़िद्दी मत बनो, विनम्र बने रहो; प्रश्न पूछते रहो! तुम्हें हमेशा लगेगा कि तुम सुपर-स्मार्ट हो और तुम्हें सब पता है; नहीं, तुम कुछ नहीं जानते! अपने माता-पिता और प्रियजनों की सलाह पर ध्यान ...

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चीनी उत्पादों का बहिष्कार

चीनी उत्पादों का बहिष्कार

जन संसद आत्मनिर्भरता का मंत्र गलवान घाटी पर भारतीय और चीनी सैनिकों की झड़प के बाद देश में चीनी सामानों के बहिष्कार की जोरदार मांग चल रही है। मगर, कोरोना काल में जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी को झेल रही है, ऐसे में युद्ध का विस्तार भी देश के हित में नहीं ...

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चिंता को सकारात्मक ऊर्जा में बदलें

चिंता को सकारात्मक ऊर्जा में बदलें

रोहित कौशिक लॉकडाउन के दौरान देश के अनेक हिस्सों से अवसाद के कारण आत्महत्याओं की खबरें सामने आईं। दरअसल, नकारात्मक विचार एक समय बाद हमें अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं और हम अवसाद की स्थिति में पहुंच जाते हैं। हमने साहिर लुधियानवी का गीत सुना है ‘मैं जिंदगी का साथ ...

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पाप सरीखा है मनुष्य का गुस्सा!

Posted On December - 25 - 2010 Comments Off on पाप सरीखा है मनुष्य का गुस्सा!
खुशवंत सिंह बाल की खाल मेरे एक मुस्लिम मित्र रहे हैं जिनके बारे में यूं तो बहुत कुछ कहा जा सकता है। मसलन, वे प्रखर बुद्धि के धनी रहे हैं, अच्छा लिखते हैं। उन्होंने कुछ अच्छी पुस्तकें भी लिखी जो प्रकाशित हुई। वे सांस्कृतिक दृष्टिï से समृद्ध थे। देश के शीर्ष उर्दू शायरों से उनके घर पर मेरी मुलाकात हुई जिनमें अली सरदार जाफरी व साहिर लुधियानवी जैसे शायर शामिल थे। उन्होंने अपने समाज 

केरल ने समझी औरतों की मजबूरी!

Posted On December - 25 - 2010 Comments Off on केरल ने समझी औरतों की मजबूरी!
डॉ. रेणुका नैयर आधी दुनिया कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनकी कोई थाह नहीं होती। उनको कुछ शब्दों में बांधा नहीं जा सकता। उनकी कोई परिभाषा बनाना मुश्किल होता है क्योंकि ऐसे रिश्ते खून के नहीं होते। ऐसे रिश्तों में बंधे लोगों को हर कदम पर नया अनुभव होता है। जी हां, यह रिश्ता है पति-पत्नी का। एक ज़माना था जब पति को परमेश्वर की संज्ञा दी गयी यानी एक पतिव्रता नारी के लिए उसका 

जनमंच

Posted On December - 25 - 2010 Comments Off on जनमंच
विषय : भ्रष्टाचार—लोकतंत्र के लिए चुनौती दोषियों को सजा मिले भ्र्रष्टï राजनीति, नौकरशाही और कारपोरेट घरानों के नापाकगठजोड़ ने देश की लाखों-करोड़ों की संपत्ति को एक झटकेमें निगल लिया। एक के बाद एक महाघोटालों की खुलती परतें हमारे जनतंत्र केलिए गंभीर चुनौती पेश कर रही हैं। निश्चित तौर पर इन घोटालों में हुई लूट इतनी बड़ी है कि इस पैसे से देश की बड़ी आबादी के लिए शिक्षा व स्वास्थ्य 

जेपीसी पर जुबानी जंग

Posted On December - 24 - 2010 Comments Off on जेपीसी पर जुबानी जंग
भ्रष्टाचार विरेाधी महासंग्राम रैली के जरिये अब विपक्ष ने सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का इस्तीफा मांग लिया है। बेशक विपक्ष के मांगने भर से कभी कोई सत्ताधीश इस्तीफा नहीं दे देता और दोनों ही पक्ष इस सच्चाई को जानते भी हैं। इसके बावजूद मामला सीधे-सीधे जेपीसी या फिर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गया है तो उससे आसन्न राजनीतिक टकराव का अनुमान लगा पाना ज्यादा मुश्किल नहीं होना 

आत्मघाती उदासीनता

Posted On December - 24 - 2010 Comments Off on आत्मघाती उदासीनता
संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में भारत की जल एवं सफाई व्यवस्था के बारे में जुटाये गए आंकड़े एक भयावह सच को सामने लेकर आते हैं। देश के सत्ताधीशों की उदासीनता तथा प्रशासन की काहिली के चलते करोड़ों लोग अस्वस्थकारी परिस्थितियों में जीने को अभिशप्त हैं। स्वच्छ जल तथा समुचित जल-निकासी के चलते देश में जो बीमारियां फैल रही हैं उसकी कीमत राष्ट्र चुका रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट 

विस्फोटक हो सकता है सुलगता एशिया

Posted On December - 24 - 2010 Comments Off on विस्फोटक हो सकता है सुलगता एशिया
परिदृश्य डॉ. गौरीशंकर राजहंस 20वीं शताब्दी के अंत में सारी दुनिया में विशेषज्ञों ने यह भविष्यवाणी करना शुरू कर दिया था कि 21वीं सदी एशिया की सदी होगी। यह भविष्यवाणी बहुत हद तक सही साबित हुई क्योंकि अमेरिका और यूरोप के देश मंदी की चपेट में आकर पंगु बन गये थे। केवल एशिया के दो प्रमुख देश भारत और चीन इस मंदी की मार से बचे रहे। अब 21वीं सदी का पहला दशक समाप्त हो रहा है और दूसरे दशक में दुनिया 

मेदवेदेव : खुली हवा में विकास के पक्षधर

Posted On December - 24 - 2010 Comments Off on मेदवेदेव : खुली हवा में विकास के पक्षधर
अरुण नैथानी रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव भारत के दौरे पर आने वाले शीर्ष विश्व नेताओं की कड़ी में शामिल हो गए, जो तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़ाव महसूस करना चाहते थे। अमेरिका, फ्रांस, चीन के राष्ट्र प्रमुखों की भारत यात्रा के उपरांत मेदवेदेव की भारत यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। भारत के नैसर्गिक मित्र रूस के साथ हुए तमाम समझौते उनकी सक्रियता-दूरदर्शिता 

हिंदी का झंडा!

Posted On December - 24 - 2010 Comments Off on हिंदी का झंडा!
गुरमीत सिंह पंजाब विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में और कुछ समय तक पत्रकारिता में मेरे साथ रहे इरशाद कामिल अब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके गीत पिछले कुछ सालों से खूब धूम मचा रहे हैं और कई पुरस्कार भी उनकी झोली में आ चुके हैं। पिछले साल जब मैंने उन्हें हिंदी विभाग में आने को कहा तो उन्होंने मुझे आगाह करते हुए कहा कि कोई यह न कहे कि विभाग में फिल्म वालों को बुला रहे हो। इस पर 

आपके पत्र

Posted On December - 24 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
बाल मजदूरी किरणपाल बुम्बक, गोन्दर देश में बाल मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है जोकि सभ्य समाज के लिए एक चिंता का विषय है। आज भी लाखों-करोड़ों बच्चे बाल मजदूरी करने पर मजबूर हैं। जिन बच्चों के हाथों में कापी-पेन होना चाहिए उन मासूम बच्चों के हाथों में चाय की केतली थमा दी जाती है या किसी अन्य मजदूरी के काम में लगा दिया जाता है। बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है। क्या यही 

फिर गुर्जर आंदोलन

Posted On December - 23 - 2010 Comments Off on फिर गुर्जर आंदोलन
गुर्जरों को दिये गये पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण को राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा रद्द कर दिये जाने पर शायद ही किसी को आश्चर्य हुआ होगा। भारत के संविधान के मुताबिक 50 प्रतिशत से अधिक  आरक्षण नहीं दिया जा सकता। इसलिए यह मानना गलत नहीं कहा जा सकता कि राजस्थान की पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार को भी गुर्जरों से यह वादा करते समय यह अहसास रहा होगा कि केंद्र सरकार संविधान संशोधन नहीं करती तो यह वादा 

रुलाने वाला प्याज

Posted On December - 23 - 2010 Comments Off on रुलाने वाला प्याज
आम आदमी के भोजन का हिस्सा बन चुके प्याज के दामों में अचानक आये उछाल का कारण जहां अतिवृष्टिï के चलते उत्पादन कम होना है, वहीं सबसे अहम कारण शासन की अदूरदर्शी नीतियां व जमाखोरी का बेलगाम होना है। विडंबना देखिये कि एक ओर प्रधानमंत्री प्याज के दामों में शीघ्र कमी का आश्वासन देकर सख्त कदम उठाने की बात कर रहे हैं, वहीं उनके एक जिम्मेदार मंत्री शरद पवार जमाखोरों को खुली लूट  की छूट देकर कह रहे 

ऐतिहासिक आयोजन और सिर्फ भाजपा-संघ विरोध

Posted On December - 23 - 2010 Comments Off on ऐतिहासिक आयोजन और सिर्फ भाजपा-संघ विरोध
अवधेश कुमार कांग्रेस महाधिवेशन राजधानी दिल्ली के बुराड़ी में आयोजित कांग्रेस पार्टी का दो दिवसीय महाधिवेशन कोई साधारण सम्मेलन नहीं थाा। पार्टी स्वयं को स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस का उत्तराधिकारी मानती है, इसलिए यह 125 वें वर्ष का समारोह कार्यक्रम भी था। पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी ने अपने उद्घाटन भाषण के आरंभ में इसका उल्लेख भी किया। इस नाते यह 

राष्ट्र को दरकार है दूसरी हरित क्रांति की

Posted On December - 23 - 2010 Comments Off on राष्ट्र को दरकार है दूसरी हरित क्रांति की
डा. मनोज मिश्र खाद्यान्न संकट इस समय जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिकीकरण व अन्य कारणों से घटती जमीन, आर्थिक विकास तथा अन्तर्राष्ट्रीय चुनौतियों के कारण भारत की कृषि जबर्दस्त दबाव से गुजर रही है। सन् 1965 के आसपास गेहूं से लदे जहाज प्रतिदिन अमेरिका से भारत आ रहे थे तथा ‘सिप टू माऊथ’ की स्थिति के कारण हमारी दशा दयनीय थी, परन्तु सन् 1970 तक आते-आते हम खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर 

लोकतंत्र में शीला!

Posted On December - 23 - 2010 Comments Off on लोकतंत्र में शीला!
अतुल कनक सागर में गागर कल तक हर तरफ मुन्नी की बदनामी के चर्चे थे, आजकल शीला की जवानी के जलवे हैं। अक्खा लोकतंत्र शीला की जवानी /तेरे हाथ नहीं आनी सुन-सुनकर हर्षमिश्रित मायूसी में डूबा हुआ है।  एक छोकरी कमर मटका-मटका कर अगर अपुन को चिढ़ाने की भी कोशिश करे तो मन में गुदगुदी होती है। एक मुन्नी थी जो मटक-मटक कर सबको बता रही थी कि वो किसके वास्ते बदनाम हुई और एक शीला है जो उसी तरह मटक तो रही 

आपके पत्र

Posted On December - 23 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
नैतिक मूल्य पैमेल प्रीत कौर, सिरसला, कुरुक्षेत्र एक तरफ विभिन्न चैनलों द्वारा बेसिर-पैर के धारावाहिक पेश किए जा रहे हैं, जिससे समाज में नैतिक मूल्यों में गिरावट आ रही है। वहीं दूसरी तरफ समाज में उत्साह और देशप्रेम की भावना को जगाते ‘झांसी की रानीÓ जैसे धारावाहिक भी प्रसारित हो रहे हैं। यह सीरियल मनोरंजन के साथ-साथ भारतीय इतिहास की गाथा भी सुनाता है। बच्चों में ऐसे धारावाहिकों 

महाधिवेशन से आगे

Posted On December - 22 - 2010 Comments Off on महाधिवेशन से आगे
देश की सबसे पुरानी और बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का 83वां महाधिवेशन देश की राजधानी में संपन्न हो गया। इस तरह के आयोजनों में किसी भी राजनीतिक दल से दशा और दिशा पर चिंतन की अपेक्षा की जाती है, पर इस दो दिवसीय आयोजन में ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया। केंद्र में गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस का यह महाधिवेशन जिस राजनीतिक परिदृश्य और माहौल में हुआ, उसमें यह तो अपेक्षित ही था कि घोटालों 
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