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खास खबर
कसक जो बन गई सफलता की प्रेरणा

कसक जो बन गई सफलता की प्रेरणा

अरुण नैथानी बालमन में यह गहरी टीस थी कि क्यों मेरे पिता जज साहब की जी-हजूरी में दिनभर हाजिरी भरते हैं। हमारे सर्वेंट क्वार्टर में गरीबी का डेरा क्यों है? जज साहब के घर आने-जाने वाली वीआईपी बिरादरी की रौनक क्यों रहती है? क्या चपरासी होना अभिशाप है? जज साहब की ...

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कर्नाटक के उपचुनाव नतीजों से उठे सवाल

कर्नाटक के उपचुनाव नतीजों से उठे सवाल

कर्नाटक में हुए 15 विधानसभा उपचुनावों में से 12 में सत्तारूढ़ भाजपा की जीत का निष्कर्ष यही निकाला गया है कि किसी तरह सदन में बहुमत का जुगाड़ कर बनायी और बचायी गयी बीएस येदियुरप्पा सरकार अब निष्कंटक चल पायेगी, पर इसके दूरगामी संकेत बहुत गहरे हैं, जो कुछ गंभीर ...

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हादसों से निपटने का नजरिया बदलें

हादसों से निपटने का नजरिया बदलें

अवधेश कुमार अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन की उच्चतम व्यवस्था के रहते हुए यदि राजधानी दिल्ली के अग्निकांड में लोगों की जिन्दगी बचाना संभव न हुआ तो समझा जा सकता है कि स्थिति कितनी भयावह रही होगी। जिन लोगों ने अनाज मंडी के उस दुर्भाग्यशाली स्थान को देखा है, वे बता सकते ...

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खुदकुशी समाज की साझी विफलता का प्रतीक

खुदकुशी समाज की साझी विफलता का प्रतीक

जैसे ही मुझे फातिमा लतीफ द्वारा खुदकुशी करने की खबर लगी, मुझे लगा मानो मेरा अपना शरीर जख्मी हुआ है। चूंकि बतौर एक अध्यापक मैं उस लड़की जैसे अंतर्मन वाले हजारों विद्यार्थियों से बावस्ता रहा हूं, इसलिए मुझे इस घटना से एक संभावना का आसामयिक दुखद अंत होने जैसा महसूस ...

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मानसिक रोगों का बढ़ता दायरा चिंताजनक

मानसिक रोगों का बढ़ता दायरा चिंताजनक

अनूप भटनागर हैदराबाद, उन्नाव और त्रिपुरा में युवतियों से सामूहिक बलात्कार के बाद उन्हें जिन्दा जलाकर मार डालने की घटनाओं को लेकर समूचा देश उद्वेलित है। हैदराबाद कांड के आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद लोगों में खुशी, उन्नाव कांड के आरोपियों को सरेआम फांसी देने की मांग ...

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बढ़ती क्रय शक्ति दूर करेगी आर्थिक सुस्ती

बढ़ती क्रय शक्ति दूर करेगी आर्थिक सुस्ती

सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद अर्थव्यवस्था की विकास दर लगातार गिरती ही जा रही है। विकास दर गिरने का मूल कारण यह है कि बाजार में मांग नहीं है। यदि बाजार में मांग होती है तो उद्यमी येन केन प्रकारेण पूंजी एकत्रित कर फैक्टरी लगाकर माल बनाकर उसे बेच ...

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कैसे मिले स्वच्छ पेयजल

कैसे मिले स्वच्छ पेयजल

जन संसद सचेत रहें देश के अनेक इलाकों का जल संकट यदि एक ओर समाज की तकलीफों का प्रतिबिम्ब है तो दूसरी ओर सरकारी प्रयासों की दिशा एवं दशा की हकीकत को बयान करता है। समाज के लिए आंकड़ों के स्थान पर हकीकत का महत्व अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि धरती ...

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  • कर्नाटक के उपचुनाव नतीजों से उठे सवाल
     Posted On December - 13 - 2019
    कर्नाटक में हुए 15 विधानसभा उपचुनावों में से 12 में सत्तारूढ़ भाजपा की जीत का निष्कर्ष यही निकाला गया है....
  •  Posted On December - 13 - 2019
    11 दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘जानलेवा आबोहवा’ सीमा को पार करते हुए विनाशकारी वायु प्रदूषण को लेकर चेतावनी....
  • कसक जो बन गई सफलता की प्रेरणा
     Posted On December - 13 - 2019
    बालमन में यह गहरी टीस थी कि क्यों मेरे पिता जज साहब की जी-हजूरी में दिनभर हाजिरी भरते हैं। हमारे....
  •  Posted On December - 13 - 2019
    इस खबर ने चौंकाया भी और सोचने पर विवश भी किया कि जल्लाद नहीं होने से फांसी की सजा पर....

भाजपा की आत्मघाती राजनीति

Posted On June - 2 - 2010 Comments Off on भाजपा की आत्मघाती राजनीति
राजकुमार सिंह दरअसल झारखंड में भले ही राष्टï्रपति शासन लागू हो गया हो लेकिन  भाजपा के हिस्से तो सिर्फ बदनामी ही आयी है। अगर सीधे-सीधे शब्दों पर न जा कर भावार्थ को समझने की कोशिश करें तो प्याज भी खाये और जूते भी वाली कहावत यहां पूरी तरह सटीक बैठती है। कौन सा राजनेता पाक-दामन है, इस पर तो बहस की गुंजाइश हो सकती है, लेकिन शिबू सोरेन देश के सबसे बदनाम और भ्रष्ट राजनेताओं 

झारखंड में राष्ट्रपति शासन

Posted On June - 2 - 2010 Comments Off on झारखंड में राष्ट्रपति शासन
शिबू सोरेन एक बार फिर भूतपूर्व मुख्यमंत्री बन गये, केंद्र सरकार ने बमुश्किल छह माह पहले चुनी गयी विधानसभा को निलंबित रखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी है। पिछले साल के अंत में हुए झारखंड विधानसभा चुनावों में जैसा खंडित जनादेश आया और फिर जैसी बेमेल सरकार बनी, उसका शायद यही हश्र हो सकता था। शिबू सोरेन के नेतृत्व में बनी झारखंड मुक्ति 

मौत से दोस्ती

Posted On June - 2 - 2010 Comments Off on मौत से दोस्ती
माम सरकारी और गैर-सरकारी औपचारिकताओं के बीच एक और तम्बाकू निषेध दिवस गुजर गया। लेकिन सुलगते प्रश्न वहीं खड़े हुए हैं। दिल्ली के बाद चंडीगढ़ उन अग्रणीय शहरों में शामिल है, जहां सार्वजनिक स्थलों में धूम्रपान निषेध है। शुरुआती दौर में चंडीगढ़ में सख्ती नज़र आई, लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात। एक रिपोर्ट के अनुसर जहां इस साल के पांच महीनों में सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करने वाले 

कितनी जनपक्षीय है अपनी सरकार

Posted On June - 2 - 2010 Comments Off on कितनी जनपक्षीय है अपनी सरकार
तरसेम गुजराल यूपीए की वर्षगांठ भारतीयों को दरअसल सालगिरह पर बहुत उछलने-कूदने की आदत नहीं। सालगिरह समारोह में मजबूरन शामिल होते हैं और भीतरी चाहत यही होती है कि सालगिरह सादगी से मना ली जाये। सवाल जब किसी सरकार की सालगिरह का होता है तब दोनों तरफ की बात सुनकर ही जायजा लिया जा सकता है। एक पक्ष सरकार का है जो अपनी उपलब्धियां धुआंधार तरीके से गिनवाती है, दूसरा पक्ष जनता का है 

मुझे नरक दे दीजौ!!

Posted On June - 2 - 2010 Comments Off on मुझे नरक दे दीजौ!!
अशोक गौतम सागर में गागर वैसे तो यमलोक में अनगिनत ऐसी आत्माएं हत्या, आत्महत्या का शिकार हो प्रेतयोनि में बरसों से अपने फैसले के इंतजार में बैठी हैं कि कब उनका फैसला यमराज करें और वे प्रेतयोनि से मुक्त हो जिस योनि में उनका हक बनता है उस योनि में जन्म ले यमपुरी के भयावह दृश्यों से मुक्त हों। पर यमराज की भी अपनी विवशता है। बेचारे वे तो चाहते हैं कि बंदे अपनी मौत मरकर मृत्युलोक 

आपके पत्र

Posted On June - 2 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
एकतरफा कार्रवाई विनायक, चंडीगढ़ अमेरिका तालिबान से निपटने के लिए पाकिस्तान में घुसकर एकतरफा सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है। आतंकवादियों के विरुद्ध एकतरफा लड़ाई एक अच्छी शुरुआत कही जा सकती है। इस सिलसिले में पाकिस्तान के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की गई है। वैसे भी आतंक के कहर से सारा विश्व त्रस्त है। टाइम्स स्क्वेयर पर नाकाम बम हमले की साजिश के संदिग्ध फैजल शहजाद और पाकिस्तानी 

पारदर्शिता की पहल

Posted On June - 1 - 2010 Comments Off on पारदर्शिता की पहल
ब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर नामकरण करदी गयी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना में अनियमितताओं को रोकने के लिए पंजाब में ओंबड्समैन की नियुक्ति स्थिति की गंभीरता का प्रमाण तो है ही, पारदर्शिता की दिशा में सही पहल भी है। नये नामकरण के बाद नरेगा से मनरेगा बन गयी यह रोज़गार गारंटी योजना उन योजनाओं में से एक है, जिन्हें कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील 

सरकार-डाक्टर टकराव

Posted On June - 1 - 2010 Comments Off on सरकार-डाक्टर टकराव
रियाणा के आंदोलनरत सरकारी डाक्टरों की मांगें जायज़ हो सकती हैं लेकिन इनको मनवाने के लिए हड़ताल का सहारा लेना चिकित्सकीय पेशे की गरिमा और मरीजों के हितों में नहीं कहा जा सकता। सरकार यदि समय रहते उदारतापूर्वक कार्यवाही का आश्वासन देकर डाक्टरों को समझा-बुझा सके तो कई जि़दगियों को असमय काल-कवलित होने से बचाया जा सकता  है। हालांकि, आंदोलन की डगर पर चलने वाले नाराज़ सरकारी चिकित्सकों 

कौन लोहा लेगा माओवादियों से

Posted On June - 1 - 2010 Comments Off on कौन लोहा लेगा माओवादियों से
के विक्रम राव माओवाद गडचिरौली (विदर्भ) में माओवादियों द्वारा बहिष्कार की धमकी के बावजूद छप्पन प्रतिशत मतदाताओं ने महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में शिरकत की। बस्तर की बारह विधानसभा सीटों में से ग्यारह पर भाजपा के डा$  रमण सिंह के प्रत्याशियों को विजय मिली। माओवादियों का आतंक जनता ने नकार डाला। बस्तर जैसा सशस्त्र युद्ध स्वतंत्रता के तुरन्त बाद तेलंगाना के इन चीनपरस्त 

राष्ट्रपति की यात्रा चीन की सोच बदलेगी

Posted On June - 1 - 2010 Comments Off on राष्ट्रपति की यात्रा चीन की सोच बदलेगी
डॉ. मनोज दयाल साम्राज्यवादी चीन भारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल की चीन यात्रा भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में अति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैसे तो बीते एक दशक में भारत के किसी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा है, जिसमें कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। पर क्या राष्ट्रपति का भ्रमण भारत के प्रति चीन की सोच बदल पायेगा? यूं तो चीन एशिया में भारत को अपना 

कौन गोत्र यजमान?

Posted On June - 1 - 2010 Comments Off on कौन गोत्र यजमान?
अशोक खन्ना सागर में गागर मुझे बीस साल पहले नहीं पता था कि मेरा गोत्र क्या है। तब मैं प्रगतिशील किस्म का युवक होता था जो इस किस्म की बकवास पर तव्वजो नहीं देते। एक दिन किसी विद्वान ने बताया कि मेहनत के बावजूद तुम्हारे घर मेें दरिद्रता है। कुछ भी करलो बरकत ही नहीं होती। तुम पितरों की परवाह नहीं करते। मां-बाप का श्राद्ध किया करो। अन्य पितरों के निमित्त भी कुछ दान करो। 

आपके पत्र

Posted On June - 1 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
धर्म के नाम पर राकेश नरूला, बठिंडा धर्म आज संघर्ष, खींचतान व हिंसा का कारण बन गया है।  इसका प्रमुख कारण है कि हमने धर्म को संकुचित कर दिया है, बांध दिया है। चारों ओर ऊंची-ऊंची दीवार खड़ी कर दी है। यदि मानवता का कल्याण करना है तो धर्म को उदार व विशाल बनाना होगा। धर्म के नाम पर पैदा कटुता, शत्रुता को कम करना होगा। समय की मांग है कि हम धर्म के बीच  खड़ी दीवारों को गिरा दें। धर्म अनुशासन 

औरत की आर्थिक आत्मनिर्भता का आधार— स्त्रीधन

Posted On May - 31 - 2010 Comments Off on औरत की आर्थिक आत्मनिर्भता का आधार— स्त्रीधन
कानून कचहरी कैलाश जैन किसी भी समाज की प्रगतिशीलता का अनुमान उस समाज में स्त्रियों की स्थिति को देखकर लगाया जा सकता है। स्त्री-पुरुष नैसर्गिक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं किन्तु पुरुष ने अपने बलशाली होने का अनुचित लाभ उठाते हुए इस प्राकृतिक नियम की अवहेलना की और औरत के सर्वांगीण शोषण को अपना अधिकार मान लिया। इस अर्थ-प्रधान युग में जबकि स्त्री को दूसरे दर्जे की नागरिक मानने की मानसिकता 

जुबान फिसल गई!

Posted On May - 31 - 2010 Comments Off on जुबान फिसल गई!
बात की बात सहीराम मुकाबला बड़ा भारी है जी। सीधी टक्कर तो नहीं है, पर दांव-पेंच जबर्दस्त हैं। नहीं, मुकाबला किसी विरोधी पार्टी से नहीं है। भीतर का है। एकदम आपसी। पूरी तरह बिरादराना। मुकाबला नहीं तो इसे होड़ तो जरूर ही कहा जा सकता है। प्रतियोगिता या प्रतिस्पर्धा भी कह सकते हैं। वरना यह कैसे हो सकता है कि हफ्ते भर के भीतर भाजपा के दो बड़े नेता ऐसी बदजुबानी करें कि हंगामा हो जाए और जिनके 

नक्सलवाद के विरुद्ध दिशाहीनता

Posted On May - 31 - 2010 Comments Off on नक्सलवाद के विरुद्ध दिशाहीनता
अपनी नाकामी को छिपाकर किसी मामले को राजनीतिक रंग देने की कलाकारी कोई हमारे राजनेताओं से सीखे। पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर जिले में हावड़ा-कुर्ला लोकमान्य तिलक ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पर हमले में 100 से भी अधिक यात्रियों की मौत की शर्मनाक घटना पर वाममोर्चा और केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी वैसी ही बेशर्म राजनीति कर रहे हैं। हालांकि दुघर्टनास्थल से बरामद पोस्टरो ं के मुताबिक 

जरूरत जनतंत्र की गरिमा बचाने की

Posted On May - 31 - 2010 Comments Off on जरूरत जनतंत्र की गरिमा बचाने की
खबरों के आगे-पीछे विश्वनाथ सचदेव अकसर संसद के दोनों सदनों के प्रमुख  इस बात पर चिंता व्यक्त करते हैं कि सदन का बहुत-सा  समय नारेबाजी और स्थगन आदि में बर्बाद हो जाता है। पिछले बजट सत्र के समापन के अवसर पर राज्यसभा के चेयरमैन उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने स्पष्टï शब्दों में अपनी पीड़ा और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सदन के कार्य-संचालन के नियमों का भंग किया जाना अब पहले से कहीं 
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