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खास खबर
कैंसर के खिलाफ जंग हुई अब आसान

कैंसर के खिलाफ जंग हुई अब आसान

चिकित्सा में नोबेल निरंकार सिंह इस साल चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार जिन तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की गयी है, उनकी खोज से अब कैंसर, एनीमिया और कोशिकाओं से जुड़ी हुई कई अन्य बीमारियों के इलाज का रास्ता खुलेगा। पुरस्कार के लिए चुने गये वैज्ञानिकों में अमेरिका के विलियम जी. केलिन ...

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विपक्षी बिखराव से आसान भाजपा की राह

विपक्षी बिखराव से आसान भाजपा की राह

दरअसल जब एक राजनीतिक दल या उसके नेतृत्व वाला गठबंधन केंद्र समेत देश के दो-तिहाई राज्यों की सत्ता पर काबिज हो और उसका प्रतिद्वंद्वी दल या उसके नेतृत्व वाला गठबंधन हाशिये पर खिसक चुका हो, तब दो राज्यों के विधानसभा चुनावों की बहुत ज्यादा राजनीतिक अहमियत तर्कसम्मत नहीं लगती। इसके बावजूद ...

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गरीबी का अर्थशास्त्र

गरीबी का अर्थशास्त्र

अभिजीत ने दिखाई मुक्ति की राह हर भारतीय के लिये गौरव का विषय है कि अमेरिका में बैठकर भी भारत में निर्धनता उन्मूलन के प्रयासों में लगे अभिजीत बनर्जी को गरीबी से मुक्ति के व्यावहारिक अर्थशास्त्र के लिये नोबेल पुरस्कार मिला है। यह भारत के लिये दोहरी खुशी है कि यह ...

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प्राथमिकी दूसरे राज्य में भेजे जाने पर सवाल

प्राथमिकी दूसरे राज्य में भेजे जाने पर सवाल

उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र अनूप भटनागर कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम का कानून बनने के छह साल बाद अब उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक रोचक मामला आया है। इस मामले में उच्च न्यायालय ने महिला पुलिस अधिकारी द्वारा पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी के खिलाफ कथित रूप से ...

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विकास के साथ जीवन की गुणवत्ता भी जरूरी

विकास के साथ जीवन की गुणवत्ता भी जरूरी

बीते बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कंपनियों द्वारा अदा किये जाने वाले आयकर, जिसे कॉरपोरेट टैक्स कहा जाता है, को लगभग 35 प्रतिशत से बढ़ाकर 43 प्रतिशत कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अमीरों का दायित्व बनता है कि देश की जरूरतों में अधिक योगदान करें। बीते माह ...

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सपनों के सौदागर

सपनों के सौदागर

उम्मीदों के उफान पर वायदे हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिये सभी राजनीतिक दल ताल ठोककर मैदान में हैं। जनता को लुभाने के लिये अपने-अपने घोषणा पत्र सार्वजनिक कर जनता की अदालत में हैं। राजनीतिक दलों ने अब तक इतने वायदे किये हैं कि जनता अब इन घोषणा पत्रों को गंभीरता से ...

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जन संसद

जन संसद

प्याज संकट के सबक स्थाई समाधान हो देश में प्याज की मांग बारह माह रहती है। लेकिन बारिश के कारण फसल नष्ट हो जाने से अचानक प्याज की कीमतें आसमान छूने लग जाती हैं। ऐसी स्थिति होने पर तत्काल प्याज के निर्यात पर रोक लगाने, कीमतों पर अंकुश लगाने व इसके भंडारण ...

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  • विपक्षी बिखराव से आसान भाजपा की राह
     Posted On October - 16 - 2019
    जब एक राजनीतिक दल या उसके नेतृत्व वाला गठबंधन केंद्र समेत देश के दो-तिहाई राज्यों की सत्ता पर काबिज हो....
  • कैंसर के खिलाफ जंग हुई अब आसान
     Posted On October - 16 - 2019
    इस साल चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार जिन तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की गयी है, उनकी खोज से अब....
  •  Posted On October - 16 - 2019
    कभी-कभी सरकारें मज़ाक-मज़ाक में सीरियस काम कर देती हैं। एक साल पहले जब देश की पहली प्राइवेट ट्रेन के बारे....
  •  Posted On October - 15 - 2019
    आम लोगों के लिए अपनी बचत को सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका है किसी भी बैंक में बचत खाता....

नक्सली हिंसा की चुनौती

Posted On April - 6 - 2010 Comments Off on नक्सली हिंसा की चुनौती
केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम जिस वक्त नक्सल प्रभावित लालगढ़ में नक्सलियों को हिंसा छोड़कर बातचीत की मेज पर आने का न्यौता और ग्रामीणों को नक्सलियों की मदद न करने की नसीहत दे रहे थे, लगभग उसी वक्त नक्सलियों ने उड़ीसा और झारखंड में फिर हिंसा को अंजाम दिया। झारखंड के लातेहर में नक्सलियों द्वारा बम धमाके से उड़ाये गये अतिथि गृह में उस समय कोई नहीं था, लेकिन उड़ीसा में विस्फोट से 

भारतीय राजनीति के अपराजित नायक : चौ. देवीलाल

Posted On April - 6 - 2010 Comments Off on भारतीय राजनीति के अपराजित नायक : चौ. देवीलाल
पुण्यतिथि 6 अप्रैल डॉ. अजय सिंह चौटाला मेरे दादा चौधरी देवीलाल अकसर कहा करते थे कि गांव व में बसने वाले विशेषकर किसान, मजदूर व खेती पर निर्भर लोगों को खुशहाल  बना दो तो देश अपने आप खुशहाल हो जाएगा। आज उनकी कही हुई बातें एकदम स्टीक व जीवन का निचोड़ नजर आती हैं। दादा जी की आत्मा देहात में रची-बसी हुई थी इसलिए वो अकसर कहा करते थे कि भारत गांवों का देश है। देश की आत्मा का निवास तो देहात 

आपके पत्र

Posted On April - 6 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
अमिट छाप स्नेहलता, सिरसा वर्ष 2004 में भारतीय बाज़ार में बेस्ट सेलिंग कार रही मारुति-800 का भले ही प्रदूषण के अंतर्राष्टï्रीय मानक लगातार कड़े होने के कारण एक अध्याय खत्म हो गया हो। लेकिन बीते वक्त में यह भारतीय वैभव और सपनों का पर्याय बनी रही। भारत की कारों के इतिहास का  जब भी पुनरावलोकन होगा, मारुति-800 का ही चमचमाता इतिहास होगा। मरुति-800 भारतीय दिलों से कभी दूर नहीं हो सकती। इसने भारतीय 

दैनिक ट्रिब्यून 30 साल पहले

Posted On April - 6 - 2010 Comments Off on दैनिक ट्रिब्यून 30 साल पहले
रविवार, 6 अप्रैल, 1980 असम अशांत क्षेत्र घोषित, सेना सतर्क गुवाहाटी, 6 अप्रैल (प्रेट्र, यून्यु) उत्तरी कछार जि़ले को छोड़कर सारे असम को अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया गया है ताकि सरकार गड़बड़  को कुचलने और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नागरिक अधिकारियों की मदद के लिए सशस्त्र सेनाओं का इस्तेमाल कर सके। इस संबंध में राज्यपाल द्वारा जारी की गई अधिसूचना कल से लागू होगी और दो महीने 

गंगा को बचाने के लिए चाहिए कई भागीरथ

Posted On April - 6 - 2010 Comments Off on गंगा को बचाने के लिए चाहिए कई भागीरथ
सार्थक पहल ज्ञानेन्द्र रावत गंगा मुक्ति और उसकी शुद्धि हेतु बरसों से जारी आंदोलनों और संत समाज के घोर-विरोध को मद्देनजर रखते हुए केन्द्र सरकार ने अब कहीं जाकर भागीरथी पर बन रही उत्तराखंड की भैंरों घाटी और मनेरी भाली इन दो परियोजनाओं को निरस्त कर दिया है और केन्द्र की एनटीपीसी की लोहारी नागपाला योजना को निरस्त करने का सैद्धांतिक निर्णय ले लिया है। पर्यावरण मंत्री 

गरीब की रोटी के लिए

Posted On April - 6 - 2010 Comments Off on गरीब की रोटी के लिए
खाद्य सुरक्षा बिल लाने की तैयारी में जुटी केंद्र सरकार की मंशा पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए लेकिन सवाल यह है कि इस योजना से जुड़े तमाम पहलुओं पर कितनी गंभीरता और दूरदर्शिता दिखाई जा रही है। केंद्र सरकार के शीर्ष मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह ने गरीबों को प्रतिमाह दी जानी वाली अनाज की मात्रा को 25 किलोग्राम प्रतिमाह से बढ़ाकर 35 किलोग्राम किए जाने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही 

सड़क से सटक जा तू!

Posted On April - 6 - 2010 Comments Off on सड़क से सटक जा तू!
गोविन्द्र शर्मा सागर में गागर एक आदमी ने दान में मिली आंखें लगवा लीं। आंखें तो लगवा लीं पर कोशिश करने पर भी आंखों के पट नहीं खुले। उसने दानदाता के घरवालों से इसका कारण पूछा तो पता चला कि जिस महाशय की ये आंखें थीं, वह एक आदत से लाचार थे। जब तक सुबह-सुबह दारू के दो-चार पैग नहीं लगाते थे, उनकी आंखें ही नहीं खुलती थीं। ये आंखें अपने पिछले स्वामी के प्रति वफादारी निभा रही हैं। सरकार को आंखें 

परदेस में न्याय की आस

Posted On April - 5 - 2010 Comments Off on परदेस में न्याय की आस
संयुक्त अरब अमीरात यानी कि यूएई की जेल में बंद 17 भारतीय युवकों और उनके परिजनों के ऊपर क्या गुजर रही होगी, इसकी कल्पना मात्र ही सिहरा देने वाली है। एक पाकिस्तानी नागरिक की हत्या के आरोप में इन 17 भारतीय युवाओं को यूएई की अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनायी जा चुकी है और सजा के विरुद्ध अपील करने के लिए मिले 15 दिनों में से भी आधी  अवधि निकल चुकी है। घटना की बाबत बताया जाता है कि अवैध शराब के कारोबार 

करबद्ध प्रार्थना !

Posted On April - 5 - 2010 Comments Off on करबद्ध प्रार्थना !
बात की बात सहीराम अमेरिका ने एक आतंकवादी पकड़ा। आश्चर्य की बात नहीं क्योंकि इधर अमेरिका का काम आतंकवाद से लडऩा, उसे खत्म करना और आतंकवादी पकडऩा ही तो रह गया है। यह अलग बात है कि न तो वह आतंकवाद से लड़ पा रहा है, न उसे खत्म कर पा रहा है और न ही आतंकवादियों को पकड़ पा रहा है। बताइए, ओसामा बिन लादेन कहां पकड़ा गया अभी तक? अगर सचमुच उसे आतंकवादी पकडऩे हैं तो पाकिस्तान चला जाए। वहां 

पाक के साथ नाभिकीय सहयोग का प्रश्न

Posted On April - 5 - 2010 Comments Off on पाक के साथ नाभिकीय सहयोग का प्रश्न
पड़ोस अवधेश कुमार यद्यपि अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में तत्काल असैन्य नाभिकीय सहयोग संधि की संभावना को टाल दिया, और इसके आधार पर हमारे यहां यह समाचार सुर्खियां भी बन गया कि पाकिस्तान को नाभिकीय सहयोग संधि प्राप्त नहीं हुई, लेकिन अमेरिका ने इसे पूरी तरह खारिज भी नहीं 

भावनाओं से कानून नहीं बदलता

Posted On April - 5 - 2010 Comments Off on भावनाओं से कानून नहीं बदलता
कानून कचहरी वीना सुखीजा नलिनी की रिहाई राजीव गांधी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा भुगत रही नलिनी की समयपूर्व रिहाई नहीं होगी। तमिलनाडु सरकार ने समयपूर्व रिहाई की उसकी अर्जी को ठुकरा दिया है और इसकी जानकारी मद्रास उच्च न्यायालय को भी दे दी गई है। यह दूसरा अवसर है जब नलिनी की समयपूर्व रिहाई को ठुकरा दिया गया है। इससे पूर्व भी अक्तूबर, 

आपके पत्र

Posted On April - 5 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
सरकार की जिम्मेदारी सुनील बिश्नोई, हिसार लोककल्याणकारी सरकार का यह दायित्व है कि वह अपनी जनता को बिजली-पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता उपलब्ध करवाए। देश में राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाती रहती हैं। सरकारें इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रही हैं और पूरे देश में बिजली के लिए हाहाकार मचा हुआ है। बिजली का यह संकट कई राज्यों में कानून-व्यवस्था 

पश्चिमी देशों में समाचारपत्रों के अस्तित्व का संकट

Posted On April - 4 - 2010 Comments Off on पश्चिमी देशों में समाचारपत्रों के अस्तित्व का संकट
प्रिंट-मीडिया डा. गौरीशंकर राजहंस इन दिनों अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस में जोरों की बहस हो रही है कि ‘इन्टरनेट’ के बढ़ते हुए प्रभाव के कारण क्या समाचारपत्रों का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा? स्थिति बहुत कुछ वैसी ही है जब 50 और 60 के दशक में अमेरिका में टेलीविजन का प्रसार हुआ था और धीरे-धीरे घर-घर टेलीविजन पहुंच गया था। टेलीविजन अमेरिका में उन दिनों भी 24 घंटे प्रसारित 

विश्व शांति की तलाश

Posted On April - 4 - 2010 Comments Off on विश्व शांति की तलाश
पुस्तक समीक्षा प्रो. मोहन मैत्रेय व्यक्ति हो या समाज, राष्ट्र हो या विश्व—शांति के सभी चाहवान होते हैं, क्योंकि शांति काल में ही सभ्यता का विकास होता है। लेखक ने शांति को इस प्रकार परिभाषित किया है—’मनुष्य द्वारा अपनी सुरक्षा के लिए अपनाई गई वह विधि जिसके द्वारा वह बिना किसी संघर्ष के अपने शरीर को अधिक से अधिक समय तक बचाए रखने की चेष्टा करता है। शांति के महत्व को स्वीकारते हुए 

स्वच्छन्द चरित-काव्य में मार्मिकता

Posted On April - 4 - 2010 Comments Off on स्वच्छन्द चरित-काव्य में मार्मिकता
पुस्तक समीक्षा ‘श्री गुरु नानक देव चरित’ डा. महेशचंद्र शर्मा गौतम की लघु रचना है, जिसे महाकाव्य या खण्डकाव्य की श्रेणी में चाहे न रखा जाए, तो भी स्वच्छन्द-काव्य रचना की इस कृति की मार्मिकता, संवेदनशीलता तथा विलक्षण अभिव्यंजना निश्चय ही स्तुत्य है। हिन्दी-संस्कृत भाषा एवं साहित्य के प्रवर विद्वान डॉ. महेश गौतम हिन्दी के तो जाने-माने कवि हैं ही, ‘मूक निमन्त्रणम्’ 

आने वाले कल की कहानियां

Posted On April - 4 - 2010 Comments Off on आने वाले कल की कहानियां
पुस्तक दीर्घा श्री दयानन्द वर्मा जी अखिल भारतीय हिन्दी प्रकाशक संघ के पूर्व अध्यक्ष, एशियन अकेडमी ऑफ फिल्म एंड टीवी के मानद अध्यापक तथा इंस्टीच्यूट ऑफ पामिस्ट्री, नयी दिल्ली के संस्थापक हैं। वर्मा जी ने पत्रकारिता के साथ-साथ मनोविज्ञान तथा सांस्कृतिक विषयों पर अनेक लेख, उपन्यास और कहानियां लिखी हैं। यौन व्यवहार अनुशीलन, कलजुगी उपनिषद (पुरस्कृत), श्रीमद्भगवद्गीता;