4 करोड़ की लागत से 16 जगह लगेंगे सीसीटीवी कैमरे !    इमीग्रेशन कंपनी में मिला महिला संचालक का शव !    हरियाणा में आर्गेनिक खेती की तैयारी, किसानों को देंगे प्रशिक्षण !    हरियाणा पुलिस में जल्द होगी जवानों की भर्ती : विज !    ट्रैवल एजेंट को 2 साल की कैद !    मनाली में होमगार्ड जवान पर कातिलाना हमला !    अंतरराज्यीय चोर गिरोह का सदस्य काबू !    एक दोषी की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई 17 को !    रूस के एकमात्र विमानवाहक पोत में आग !    पूर्वोत्तर के हिंसक प्रदर्शनों पर लोकसभा में हंगामा !    

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खास खबर
कसक जो बन गई सफलता की प्रेरणा

कसक जो बन गई सफलता की प्रेरणा

अरुण नैथानी बालमन में यह गहरी टीस थी कि क्यों मेरे पिता जज साहब की जी-हजूरी में दिनभर हाजिरी भरते हैं। हमारे सर्वेंट क्वार्टर में गरीबी का डेरा क्यों है? जज साहब के घर आने-जाने वाली वीआईपी बिरादरी की रौनक क्यों रहती है? क्या चपरासी होना अभिशाप है? जज साहब की ...

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कर्नाटक के उपचुनाव नतीजों से उठे सवाल

कर्नाटक के उपचुनाव नतीजों से उठे सवाल

कर्नाटक में हुए 15 विधानसभा उपचुनावों में से 12 में सत्तारूढ़ भाजपा की जीत का निष्कर्ष यही निकाला गया है कि किसी तरह सदन में बहुमत का जुगाड़ कर बनायी और बचायी गयी बीएस येदियुरप्पा सरकार अब निष्कंटक चल पायेगी, पर इसके दूरगामी संकेत बहुत गहरे हैं, जो कुछ गंभीर ...

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हादसों से निपटने का नजरिया बदलें

हादसों से निपटने का नजरिया बदलें

अवधेश कुमार अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन की उच्चतम व्यवस्था के रहते हुए यदि राजधानी दिल्ली के अग्निकांड में लोगों की जिन्दगी बचाना संभव न हुआ तो समझा जा सकता है कि स्थिति कितनी भयावह रही होगी। जिन लोगों ने अनाज मंडी के उस दुर्भाग्यशाली स्थान को देखा है, वे बता सकते ...

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खुदकुशी समाज की साझी विफलता का प्रतीक

खुदकुशी समाज की साझी विफलता का प्रतीक

जैसे ही मुझे फातिमा लतीफ द्वारा खुदकुशी करने की खबर लगी, मुझे लगा मानो मेरा अपना शरीर जख्मी हुआ है। चूंकि बतौर एक अध्यापक मैं उस लड़की जैसे अंतर्मन वाले हजारों विद्यार्थियों से बावस्ता रहा हूं, इसलिए मुझे इस घटना से एक संभावना का आसामयिक दुखद अंत होने जैसा महसूस ...

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मानसिक रोगों का बढ़ता दायरा चिंताजनक

मानसिक रोगों का बढ़ता दायरा चिंताजनक

अनूप भटनागर हैदराबाद, उन्नाव और त्रिपुरा में युवतियों से सामूहिक बलात्कार के बाद उन्हें जिन्दा जलाकर मार डालने की घटनाओं को लेकर समूचा देश उद्वेलित है। हैदराबाद कांड के आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद लोगों में खुशी, उन्नाव कांड के आरोपियों को सरेआम फांसी देने की मांग ...

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बढ़ती क्रय शक्ति दूर करेगी आर्थिक सुस्ती

बढ़ती क्रय शक्ति दूर करेगी आर्थिक सुस्ती

सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद अर्थव्यवस्था की विकास दर लगातार गिरती ही जा रही है। विकास दर गिरने का मूल कारण यह है कि बाजार में मांग नहीं है। यदि बाजार में मांग होती है तो उद्यमी येन केन प्रकारेण पूंजी एकत्रित कर फैक्टरी लगाकर माल बनाकर उसे बेच ...

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कैसे मिले स्वच्छ पेयजल

कैसे मिले स्वच्छ पेयजल

जन संसद सचेत रहें देश के अनेक इलाकों का जल संकट यदि एक ओर समाज की तकलीफों का प्रतिबिम्ब है तो दूसरी ओर सरकारी प्रयासों की दिशा एवं दशा की हकीकत को बयान करता है। समाज के लिए आंकड़ों के स्थान पर हकीकत का महत्व अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि धरती ...

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  • कर्नाटक के उपचुनाव नतीजों से उठे सवाल
     Posted On December - 13 - 2019
    कर्नाटक में हुए 15 विधानसभा उपचुनावों में से 12 में सत्तारूढ़ भाजपा की जीत का निष्कर्ष यही निकाला गया है....
  •  Posted On December - 13 - 2019
    11 दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘जानलेवा आबोहवा’ सीमा को पार करते हुए विनाशकारी वायु प्रदूषण को लेकर चेतावनी....
  • कसक जो बन गई सफलता की प्रेरणा
     Posted On December - 13 - 2019
    बालमन में यह गहरी टीस थी कि क्यों मेरे पिता जज साहब की जी-हजूरी में दिनभर हाजिरी भरते हैं। हमारे....
  •  Posted On December - 13 - 2019
    इस खबर ने चौंकाया भी और सोचने पर विवश भी किया कि जल्लाद नहीं होने से फांसी की सजा पर....

दहेज-कुप्रथा का जवाब ‘दिवयाना प्रयोग’

Posted On June - 5 - 2010 Comments Off on दहेज-कुप्रथा का जवाब ‘दिवयाना प्रयोग’
आधी दुनिया डा. रेणुका नैयर महिलाओं संबंधी मुद्दों और सामाजिक बुराइयों को लेकर शोर तो नेतागण खूब मचाते हैं लेकिन अपने व्यक्तिगत जीवन में उन्हीं पुरानी रूढिय़ों पर चलते हैं। इन्हीं में से एक समस्या दहेज की है। जनता के ये प्रतिनिधि शादी-विवाह सादा ढंग से करने पर लोगों को भाषण तो बहुत देते हैं लेकिन अपनी बेटी या बेटे की शादी पर करोड़ों रुपये खर्च देते हैं। नसीहत देना आसान होता 

विषय : क्या लगता है कि यूपीए सरकार का पहला साल सफल रहा है?

Posted On June - 5 - 2010 Comments Off on विषय : क्या लगता है कि यूपीए सरकार का पहला साल सफल रहा है?
आंकड़ों पर आधारित सरकार अभी तक लगभग हर मोर्चे पर विफल ही रही है। कांग्रेस ने ‘भोजन का अधिकार’ जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे वालों को तीन रुपये किलो की दर से 25 किलो गेहूं, चावल प्रतिमाह देने का वायदा किया था, लागू नहीं हो सका। ‘अपना हाथ आम आदमी के साथ’ का नारा देने वाली यूपीए सरकार के मंत्रियों का प्रदर्शन भी कुछ खास नहीं रहा है। यूपीए सरकार के कई मंत्री कैबिनेट, लोकसभा व मंत्रालयों 

Posted On June - 5 - 2010 Comments Off on
महंगाई भारी पड़ी यूपीए सरकार का पहला साल ‘आम आदमी’ की नजर में सफल नहीं रहा। भोजन पहली इंसानी प्राथमिकता है परन्तु पिछले साल कीमतों का मोर्चा खुल गया। दाल गरीब ही नहीं, निम्ïन व मध्य वर्ग की थालियों से नदारद हो गई। मुद्रास्फीति 17 फीसदी तक पहुंच गयी। सब्जियों, अनाज और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम आम आदमी की जेब पर भारी पड़े। एक तरफ जहां आतंकवाद खत्म नहीं हुआ, वहीं नक्सलवाद का उग्र रूप सामने 

एशियाड में क्रिकेट, पर भारत नहीं

Posted On June - 5 - 2010 Comments Off on एशियाड में क्रिकेट, पर भारत नहीं
भारतीय क्रिकेट टीम के पास समय नहीं है कि वह एशियाई खेलों सरीखी प्रतिष्ठित स्पर्धा में खेल पाये। टीम के सर्वेसर्वा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का कहना है कि टीम पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्तता के चलते चीन में आयोजित होने वाले एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले सकती। दिलचस्प बात यह है कि बोर्ड के मुताबिक पुरुष और महिला, दोनों ही भारतीय टीमें व्यस्त हैं। महिला टीम की व्यस्तता 

भारत न बने जातियों का महाभारत

Posted On June - 4 - 2010 Comments Off on भारत न बने जातियों का महाभारत
डॉ  वेदप्रताप वैदिक जातीय गणना भारत के टूटने का जैसा खतरा इस समय खड़ा हुआ है, शायद भारत के इतिहास में पहले कभी खड़ा नहीं हुआ। भारत पहले भी दर्जनों बार टूटा, जुड़ा और फिर टूटा, इसके बावजूद वह आज भी दुनिया का एक बड़ा राष्ट्र है लेकिन इस बार जो खतरा इसके सामने आया है, देश की जनता ने उसका मुकाबला नहीं किया तो भारत के उतने ही टुकड़े हो जाएंगे, जितनी कि यहां जातियां हैं। भारत में जातियों 

इला भट्टï : महिलाओं के लिए प्रेरणापुंज

Posted On June - 4 - 2010 Comments Off on इला भट्टï : महिलाओं के लिए प्रेरणापुंज
जोगिन्द्र सिंह चर्चित व्यक्ति माज सेवा कोई खाला जी का बाड़ा नहीं है। इसके लिए ज़रूरत है ठोस संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति और धैर्य की। अगर व्यक्ति भीतर से मजबूत है, शांत है और उसमें भद्रता है। गरीब व दबे-कुचले के प्रति दर्द है और इससे भी ज्यादा कुछ कर गुजरने की तमन्ना है तो उसे इला बेन कहते हैं। इला बेन यानी इला रमेश भट्टï। यह वो नाम है जिसे आज देश में ही नहीं विदेशों में भी बड़े 

बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर

Posted On June - 4 - 2010 Comments Off on बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर
गुरमीत सिंह खबरों की खबर आम लोगों को खबरों की दुनिया से अकसर यह शिकायत रहती है कि वहां नकारात्मक खबरों को ही तरजीह मिलती है। एक बार रामकृष्ण मिशन से जुड़े एक स्वामी जी का भाषण मैंने सुना। वे तो लोगों को सुबह अखबार ही न पढऩे की सलाह दे रहे थे। उनके अनुसार सुबह सवेरे हत्या, लूट, भ्रष्टाचार आदि नकारात्मक समाचार पढऩे से मनुष्य की प्रवृत्ति उसी प्रकार की हो जाती है। स्वामी जी 

आपके पत्र

Posted On June - 4 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
बढ़ता नक्सलवाद मोहित अग्रवाल, हिसार नक्सलवाद आज भारत के अनेक राज्यों में फैल चुका है। छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार में अपना नेटवर्क फैलाकर नक्सली अब भारत के उत्तरी क्षेत्र में बढ़ रहे हैं। हक की लड़ाई लडऩे के नाम पर मौत का तांडव करने वाले नक्सलियों ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। पहले दंतेवाड़ा में 76 पुलिसकर्मियों की हत्या, फिर बस को निशाना बनाया और अब ट्रेन में विस्फोट कर 

बंगाल में ममता का जादू

Posted On June - 4 - 2010 Comments Off on बंगाल में ममता का जादू
केंद्रीय रेलमंत्री के रूप में अपने दायित्व के निर्वाह में लापरवाही तथा मंत्रिमंडल की बैठकों में अनुपस्थिति के लिए ममता बनर्जी की चाहे जितनी आलोचना की जाये, पर पश्चिम बंगाल में उनके जादू पर उसका कोई असर नज़र नहीं आता। वर्ष 2008 में हुए पंचायत चुनावों और फिर पिछले वर्ष पंद्रहवीं लोकसभा के चुनावों के नतीजों के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता की बाबत तो ज्यादा 

ज़ख्मों पर मरहम

Posted On June - 4 - 2010 Comments Off on ज़ख्मों पर मरहम
हिसार के मिर्चपुर गांव में दलित उत्पीडऩ मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये से जहां आगजनी से पीडि़त परिवारों को राहत मिली है, वहीं संवेदनशील प्रशासन को नसीहत भी है कि यदि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति हुई तो अदालत सख्त रवैया अपनाएगी। पीडि़तों द्वारा उपायुक्त के साथ हाथापाई की घटना को आश्वासनों से तंग आ चुके लोगों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है। गत 21 अप्रैल 

चीन के खतरनाक मंसूबों को समझना ज़रूरी

Posted On June - 3 - 2010 Comments Off on चीन के खतरनाक मंसूबों को समझना ज़रूरी
विष्णुगुप्त राष्ट्र-चिंतन ‘ऐ मेरे वतन के लोगो/ जरा आंख में भरलो पानी/ जो शहीद हुए हंै/ उनकी जरा याद करो कुर्बानी। 1962 के चीनी हमले में शहीद हुए देश के जवानों की याद में जब लता मंगेशकर ने इस गीत को गाया था, तब किस भारतीय की आंखों में आंसू नहीं आये थे? किस भारतीय का दिल कराह न उठा था। खुद जवाहरलाल नेहरू की आंखों में आंसुओं की धारा चल निकली थी। उनकी यह भूल जीवनकाल तक उन्हें पीड़ा 

मानवाधिकारों को चुनौती देते ये इस्लामी फतवे

Posted On June - 3 - 2010 Comments Off on मानवाधिकारों को चुनौती देते ये इस्लामी फतवे
स्लाम धर्म में फतवा उस सलाह अथवा दिशा-निर्देश को कहा जाता है जो कि कथित रूप से इस्लामी शरियत तथा इस्लामी कायदे-कानून को मद्देनज़र रखते हुए इस्लाम धर्म के किसी विद्वान द्वारा जारी किया जाता है। आमतौर पर फतवा जारी करने का अधिकार मुफ्ती का पद रखने वाले मुस्लिम विद्वान को ही होता है। जबकि कई इस्लामिक संस्थाओं ने मुस्लिम विद्वानों की फतवा जारी करने वाली एक समिति भी गठित कर रखी है। 

फोटो खिंचवाने की कला

Posted On June - 3 - 2010 Comments Off on फोटो खिंचवाने की कला
योगेश चन्द्र शर्मा गागर में सागर इन दिनों मीडिया पर फोटो का व्यापक साम्राज्य स्थापित हो चुका है। टीवी चैनल तो फोटो के बलबूते पर ही जि़दा हैं। कहां, कैसे, कब, क्या हुआ, इसका पूरा नजारा दर्शक अपने टीवी के परदे पर साक्षात् देखना चाहता है और चैनल वाले यह कार्य पूरी लगन के साथ करते हैं। पत्र-पत्रिकाएं भी इससे अधिक दूर नहीं हैं। उनका काफी बड़ा भाग विभिन्न व्यक्तियों के चित्रों 

आपके पत्र

Posted On June - 3 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
ईंधन की कीमतों पर आग प्रो. शामलाल कौशल, रोहतक 28 मई के दैनिक ट्रिब्यून में छपी खबर ‘ईंधन की घरेलू कीमतों को अंतर्राष्टï्रीय बाज़ार से जोड़ा जाए : मोंटेक’ तेल की कीमतों में वृद्धि की सूचना देने वाली थी। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का यह कहना कि तेल की घरेलू कीमतों में वृद्धि करना देश की वैश्विक प्रतिष्ठा के लिए जरूरी है। गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा है। भारत 

सरकार का रिपोर्ट-कार्ड्र

Posted On June - 3 - 2010 Comments Off on सरकार का रिपोर्ट-कार्ड्र
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आखिरकार मंगलवार की शाम अपनी सरकार की दूसरी पारी के पहले साल का रिपोर्ट-कार्ड जारी कर ही दिया। पहले यह रिपोर्ट-कार्ड सरकार की पहली वर्षगांठ पर ही 22 मई को बड़ी धूमधाम के साथ जारी होना था, लेकिन मंगलोर में हुए यात्री विमान हादसे के कारण टालना पड़ा। अब एक जून को जारी किये गये इस रिपोर्ट-कार्ड को पूर्व की घोषणा के मुताबिक ही जनता के नाम रिपोर्ट का नाम दिया 

सोने की नयी बुलंदी

Posted On June - 3 - 2010 Comments Off on सोने की नयी बुलंदी
अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में आर्थिक मंदी की आहट और यूरोपीय बाज़ार ध्वस्त होने से सोना नये शिखर पर जा पहुंचा है। भारत में शादी-विवाह के सीजन में बढ़ते पारे और आसमान छूते सोने के दामों से  लोगों के पसीने छूट रहे हैं। हालांकि, बाज़ार में सोने के फुटकर खरीदार कम ही हैं, लेकिन यूरोपीय बाज़ार में शेेयर मार्केट ध्वस्त होने से निवेशक सोने में सुरक्षित निवेश कर रहे हैं। भारत सहित दुनिया 
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