एकदा !    रॉबर्ट पायस को 30 दिन का पैरोल !    कच्छ एक्सप्रेस में यात्री से 50 लाख के हीरे, नकदी लूटे !    श्रीनगर, 21 नवंबर (एजेंसी) !    आस्ट्रेलिया ने पाक पर कसा शिकंजा !    जिलों में होने वाले राहगीरी कार्यक्रम अब थीम के साथ ही कराए जाएंगे !    इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हरियाणा भी भागीदार !    हरियाणा में मंत्रियों को मिलेगी ट्रांसफर पावर !    सीएम, डिप्टी सीएम समेत मंत्रियों के छोटे पदनाम तय !    पंचकूला डेरा हिंसा मामले में आरोप तय !    

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खास खबर
खलनायक से नायक बने गोतबाया

खलनायक से नायक बने गोतबाया

अरुण नैथानी श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में ‘टर्मिनेटर’ नाम से चर्चित गोतबाया राजपक्षे की जीत को जहां सिंहली राष्ट्रवादियों की जीत बताया जा रहा है, वहीं अल्पसंख्यक तमिल व मुसि्लमों में उनके जीतने से बेचैनी है। दरअसल, श्रीलंका के अल्पसंख्यक बहुल इलाके उत्तर -पूर्व में राष्ट्रपति पद के दूसरे उम्मीदवार सजीत ...

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अभिव्यक्ति है भाषा, अलगाव का प्रतीक नहीं

अभिव्यक्ति है भाषा, अलगाव का प्रतीक नहीं

वह बचपन से संस्कृत पढ़ रहा था। उसके पिता भी संस्कृत के विद्वान हैं। पहली कक्षा से लेकर एम.ए. तक की पढ़ाई में संस्कृत उसका विषय रहा। संस्कृत में ही डाक्टरेट भी की उसने। बी.एड. भी। विश्वविद्यालय में पढ़ाने की सारी योग्यताएं-अर्हताएं उसके पास हैं। पर वह संस्कृत पढ़ा नहीं ...

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रंज लीडर को बहुत है, मगर आराम के साथ

रंज लीडर को बहुत है, मगर आराम के साथ

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद चिंतित है कि देश की राजधानी दिल्ली समेत पड़ोसी राज्यों की बड़ी आबादी जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है। दिल्ली-एनसीआर के निवासी पिछले कई सालों से अक्तूबर-नवंबर महीने में जहरीली हवा में सांस लेते हुए अपना जीवन जोखिम में डालते रहे ...

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मानवीय सरोकारों के लिए कर्तव्यपरायणता

मानवीय सरोकारों के लिए कर्तव्यपरायणता

प्रेरक किसान विकेश कुमार बडोला आधुनिक जनजीवन में हमारे चारों ओर जो भी सकारात्मक और मानवीय गतिविधियां हो रही हैं, उनका स्वागत और सम्मान विशिष्ट तरीके से होते रहना चाहिए। यह इसलिए भी होना चाहिए क्योंकि आजकल ज्यादातर लोग सकारात्मकता और मानवता के विचार से विलग हो चुके हैं। मानवता से रहित ...

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कृषि-डेयरी उद्योग को संरक्षण जरूरी

कृषि-डेयरी उद्योग को संरक्षण जरूरी

बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति पद संभालने के बाद जल्द ही डोनाल्ड ट्रंप ने अंतर-प्रंशात साझीदार संधि से अपने देश को अलहदा कर लिया था। प्रशांत महासागरीय तटों वाले 12 सदस्यीय देशों के इस संघ के बीच जो सहकारी व्यापारिक भागीदारी थी, वह कुल सकल वैश्विक घरेलू उत्पाद का लगभग 40 फीसदी ...

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ठेके को ठेंगा

ठेके को ठेंगा

जनाधिकारों को सशक्त बनायेगा फैसला हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये उस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए, जिसमें कहा गया है कि यदि गांव के दस प्रतिशत लोग भी चाहें तो गांव में शराब का ठेका नहीं खुलेगा। नि:संदेह यह समय की जरूरतों का फैसला है। कई बार दस ...

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महिलाओं के समान अधिकारों का मार्ग प्रशस्त

महिलाओं के समान अधिकारों का मार्ग प्रशस्त

अनूप भटनागर सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं के साथ ही विभिन्न धर्मों में महिलाओं से संबंधित धार्मिक मुद्दे सात सदस्यीय संविधान पीठ को सौंपे जाने से लगता है कि धार्मिक मामलों में महिलाओं के लिये समान अधिकारों का ...

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  • अभिव्यक्ति है भाषा, अलगाव का प्रतीक नहीं
     Posted On November - 22 - 2019
    वह बचपन से संस्कृत पढ़ रहा था। उसके पिता भी संस्कृत के विद्वान हैं। पहली कक्षा से लेकर एम.ए. तक....
  •  Posted On November - 22 - 2019
    21 नवंबर को दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह के ‘रंज लीडर को बहुत है मगर आराम के साथ’ लेख में....
  • खलनायक से नायक बने गोतबाया
     Posted On November - 22 - 2019
    श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में ‘टर्मिनेटर’ नाम से चर्चित गोतबाया राजपक्षे की जीत को जहां सिंहली राष्ट्रवादियों की जीत बताया....
  •  Posted On November - 22 - 2019
    उस दिन सुबह-सुबह बटुक जी घर पर आ गए, बोले-यार तुम पानी वाले विभाग में रहे हो, व्यंग्यकार भी हो,....

दावों से विपरीत उत्तर प्रदेश की तसवीर

Posted On May - 19 - 2010 Comments Off on दावों से विपरीत उत्तर प्रदेश की तसवीर
माया के तीन साल निरंकार सिंह इन तीन वर्षों की सरकार के दौरान मायावती ने अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए खुद कहा है कि उन्होंने बेरोजगारी भत्ता पाने की मानसिक गुलामी से मुक्ति दिलाकर सीधा रोजगार दिलाने का कार्य किया है। 1.9 लाख सफाई कर्मियों, 88 हज़ार प्राथमिक शिक्षकों, 5 हज़ार उर्दू शिक्षकों की भर्ती की। पुलिस महकमे में ढाई लाख नये पदों की स्वीकृति दी। समय-समय पर दलित वर्गो में जन्मे 

मनमोहन सरकार : मजबूरी के नाम पहला साल

Posted On May - 19 - 2010 Comments Off on मनमोहन सरकार : मजबूरी के नाम पहला साल
दरअसल राजकुमार सिंह कांग्रेसी रुझान वाले राजनीतिक पंडित और मनमोहन सिंह के प्रशंसक तर्क दे सकते हैं कि पांच साल के लिए चुनी गयी सरकार के कामकाज का आकलन वार्षिक आधार पर नहीं होना चाहिए, पर जब चुनाव के दौरान समयबद्ध लक्ष्य घोषित कर वायदे किये गये हों तथा सरकार बनते ही मंत्रालयों में 100 दिन के एजेंडे की होड़ लग गयी हो तब तो यह आकलन अनिवार्य ही हो जाता है। यह आकलन इसलिए भी तर्कसंगत लगता 

दंतेवाड़ा में फिर खूनी खेल

Posted On May - 19 - 2010 Comments Off on दंतेवाड़ा में फिर खूनी खेल
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलवादियों के दूसरे बड़े हमले ने एक बार फिर जहां उनके खतरनाक इरादे जाहिर कर दिए हैं, वहीं राज्य व केंद्र सरकार की लचर रणनीति की पोल भी खोल दी है। गत 6 अप्रैल को दंतेवाड़ा स्थित मुकराना के जंगलों में 76 सुरक्षाबलों की निर्मम हत्या के बाद हुई राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया के बाद उम्मीद जगी थी कि केंद्र सरकार माओवादियों के समूल नाश के लिए कोई कारगर मुहिम चलाएगी, 

ईरान की कूटनीतिक क्रांति

Posted On May - 19 - 2010 Comments Off on ईरान की कूटनीतिक क्रांति
अभी किन्हीं निष्कर्षों पर पहुंचना तो जल्दबाजी होगी, पर तेहरान में यूरेनियम ईंधन की अदला-बदली पर ईरान, तुर्की और ब्राजील के बीच हुआ समझौता विश्व-राजनीति के लिए दूरगामी प्रभावों वाली घटना साबित हो सकता है। अब वह तुर्की को निम्र संवर्धित यूरेनियम देगा, जिसके एवज में विएना समूह उसे मध्यम संवर्धित यूरेनियम देगा। इस समझौते से ईरान के अलग-थलग पडऩे का खतरा तो टलेगा ही, उसके विरुद्ध संयुक्त 

चिकित्सा क्षेत्र का शुद्धीकरण

Posted On May - 18 - 2010 Comments Off on चिकित्सा क्षेत्र का शुद्धीकरण
अध्यक्ष डॉ. केतन देसाई की करतूतों की कीमत अंतत: मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को ही चुकानी पड़ी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति से एक अध्यादेश जारी करवाकर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भंग कर उसके कार्य संचालन के लिए छह सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स नियुक्त कर दिया है। पंजाब के एक मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने के लिए रिश्वत लेने के आरोप में डॉ. देसाई की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय 

हादसों का सफऱ

Posted On May - 18 - 2010 Comments Off on हादसों का सफऱ
देश की राजधानी स्थित नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अंतिम समय में रेलवे प्लेटफार्म बदलने से मची अफरातफरी में दो लोगों की मौत और 35 लोगों का घायल होना यही बताता है कि रेलवे अधिकारियों ने अतीत की दुर्र्घटनाओं से कोई सबक नहीं सीखा है। यह जानते हुए भी कि गर्मियों की छुट्टियों के मौसम में यात्रियों की भारी भीड़ स्टेशन पर मौजूद है, अंतिम क्षणों में बिहार जाने वाली सप्तक्रांति और विक्रमशिला ट्रेनों 

ब्रिटेन में नयी सरकार और नयी राजनीति

Posted On May - 18 - 2010 Comments Off on ब्रिटेन में नयी सरकार और नयी राजनीति
ब्रिटिश लोकतंत्र डॉ. वेदप्रताप वैदिक ब्रिटेन में गठबंधन सरकार का बनना जरा अजूबा-सा है। विश्व-युद्घ के बाद यह पहली सरकार है, जो दो पार्टियों ने मिलकर बनाई है। यदि कंजर्वेटिव और लिबरल डेमोक्रेट पार्टी, दोनों नहीं मिलतीं तो क्या करतीं? लिबरल पार्टी के नेता निक क्लेग ने लेबर पार्टी से भी बात तो चलाई थी लेकिन 13 साल राज करने के बाद बुरी तरह से हारने वाली लेबर पार्टी लिबरलों की 

ज़ुबान संभाल के!

Posted On May - 18 - 2010 Comments Off on ज़ुबान संभाल के!
सागर में गागर अशोक खन्ना जीभ चमड़े की होती है इसलिए बार-बार फिसलती है। अज्ञानी की दिन में सौ बार फिसलती है तो ज्ञानी की दिन में हजार बार। यूजी कृष्णामूर्ति नामक एक महाज्ञानी हुए हैं। आप महेश भट्ट, प्रवीण बॉबी इत्यादि फिल्मी हस्तियों के गुरु थे। परसों मैं इंटरनेट पर उनकी एक वीडियो क्लिप देख रहा था। अपने मुखारविन्द से उन्होंने ओशो और जे कृष्णमूर्ति को अंग्रेजी में जो गालियां दीं 

आपके पत्र

Posted On May - 18 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
सज़ा पर अमल -सोहनलाल गौड़, बाहमनीवाला देश के विरुद्ध अघोषित युद्ध छेडऩे के लिए अजमल आमिर कसाब को फांसी की सजा सुनाये जाने से देश के लोग खुश हैं। इस फैसले से भारत ने अपने इरादे स्पष्टï कर दिए कि यदि पाकिस्तान आतंकवाद का निर्यात करेगा तो उसे किसी भी सूरत में बक्शा नहीं जाएगा। अब बात इस पर अमल करने की है। हमारी कानूनी प्रक्रिया काफी लंबी है। संविधान के अनुसार कसाब को अपील कसनी है उनकी 

भ्रमित करता है खाद्य सुरक्षा का नाटक

Posted On May - 18 - 2010 Comments Off on भ्रमित करता है खाद्य सुरक्षा का नाटक
खाद्यान्न आयात डॉ. भरत झुनझुनवाला सरकार की पॉलिसी है कि देश की खाद्य सुरक्षा बनाने के लिए जरूरत हुई तो ऊंचे मूल्यों पर आयात किया जायेगा। प्रयास है कि देश के नागरिक भूखे न मरें इसलिये महंगे खाद्यान्न का आयात करना अच्छा है। जनता को भूखे मरने से बचाने की सोच अच्छी है किन्तु विचारणीय विषय यह है कि भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में खाद्यान्न का आयात खाद्य सुरक्षा का द्योतक कैसे बन गया? शब्दकोश 

राजस्थान का एक ही सिंह

Posted On May - 17 - 2010 Comments Off on राजस्थान का एक ही सिंह
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एक फैसला, एक फतवा

Posted On May - 17 - 2010 Comments Off on एक फैसला, एक फतवा
कानून कचहरी शाहिद ए चौधरी हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से एक महत्वपूर्ण फैसला आया है जिसमें कहा गया है कि अगर कोई मुस्लिम शख्स किसी दूसरे धर्म की महिला से शादी करता है तो इसे तभी वैध माना जाएगा जब वह इस्लाम कबूलेगी। जाहिर है यह फैसला महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास है। लेकिन बदकिस्मती से महिलाओं के विरोध में दारुल उलूम देवबंद की तरफ से भी एक हास्यास्पद फतवा 

वाह, क्या खेल है!

Posted On May - 17 - 2010 Comments Off on वाह, क्या खेल है!
बात की बात सहीराम यह तो सचमुच बड़ा खेल हो गया जी! नेताओं में लत्तम-जूता होने की बजाय एकता हो गयी। पर होती है, कभी-कभी नेताओं में भी एकता होती है। देश के हित में न होती हो, पर अपने हित में तो हो ही जाती है। जैसे हमारे चुने हुए नुमाइंदों का वेतन बढ़ाने की बात आए तो उनमें फौरन एकता हो जाती है। उनमें इस बात पर एकता होती है कि कोई किसी को सजा नहीं देता, भले ही दोषी एक-दूसरे को खूब मानते हों। बेटों-बेटियों, 

जल्दी भुला दिया हमने दंतेवाड़ा की घटना को

Posted On May - 17 - 2010 Comments Off on जल्दी भुला दिया हमने दंतेवाड़ा की घटना को
खबरों के आगे-पीछे विश्वनाथ सचदेव दंतेवाड़ा में नक्सलियों द्वारा 76 सुरक्षाकर्मियों की हत्या से देश दहल गया है, इस आशय के बयान कई पार्टियों, कई नेताओं की ओर से आये थे। इसमें कोई शक नहीं कि इस निर्मम हत्याकांड ने देश को एक क्षण के लिए हिला तो दिया था, लेकिन कितनी जल्दी भूल गये हम वह सब? इस तरह के हादसों को भूल जाना स्वाभाविक भी है और ज़रूरी भी। लेकिन इस भूलने का मतलब पीड़ा और दु:ख से उबरना 

आपके पत्र

Posted On May - 17 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
समाज-विरोधी अलकनंदा, कुरुक्षेत्र 11 मई को प्रकाशित संपादकीय ‘नतमस्तक राजनीति’ न केवल प्रशंसनीय बल्कि वर्तमान सोच का परिचायक भी था। इसी तरह 6 मई का लेख ‘खाप पंचायतों के फैसलों का भीतरी सच’ (डा. रविंद्र गासो) वर्तमान प्रासंगिकता से जुड़ा हुआ एवं सराहनीय था। हरियाणा की खाप पंचायतों के दबाब में इनेलो और कांग्रेस के राजनेता जो बयानबाजी कर रहे हैं वह न केवल निंदनीय है बल्कि हरियाणा 

राजनीति की अदा निराली, सूरत उजली…

Posted On May - 16 - 2010 Comments Off on राजनीति की अदा निराली, सूरत उजली…
भारतीय राजनीति में नेताओं की जुबान फिसलने का दौर जारी है। शशि थरूर की विवादास्पद बयानों की शृंखला पर उनके इस्तीफे के साथ विराम लगा था कि जयराम रमेश के बयान ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया। उनकी बयानबाजी से भारतीय कूटनीतिज्ञ और मीडिया सकपका गया। भारत के साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार रखने वाले चीन में देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर बचकाना बयानबाजी करने वाले केंद्र के जिम्मेदार मंत्री की 
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