आयुष्मान कार्ड बनाने के बहाने 90 हजार की ठगी !    चुनाव के दृष्टिगत कानून व्यवस्था की स्थिति पर की गई चर्चा !    पंप कारिंदों के मोबाइल चुराए, किशोर काबू !    कपूरथला के गांव में 50 ग्रामीण डेंगू की चपेट में !    उमस से अभी राहत नहीं, 5 दिन में लौटने लगेगा मानसून !    गोदावरी नदी में नौका डूबने से 12 लोगों की मौत !    शताब्दी, राजधानी ट्रेनों में दिखेंगे गुरु नानक के संदेश !    ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति हुई आधी !    सरकार मैसेज का स्रोत जानने की मांग पर अडिग !    अर्थशास्त्र का अच्छा जानकार ही उबार सकता है अर्थव्यवस्था : स्वामी !    

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खास खबर
जन संसद

जन संसद

यातायात नियमों में सख्ती सख्ती जरूरी मगर... नये मोटर वाहन अधिनियम को सख्त बनाया जाना समय की मांग थी। लेकिन जिस तरह से वाहनों की कीमतों से भी अधिक राशि के चालान काटने के उदाहरण तथा जनमानस की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, उसे देखकर लगता है कि अधिनियम ज्यादा ही सख्त ...

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‘उत्तम क्षमा’ के समावेश से अभिमान का पराभव

‘उत्तम क्षमा’ के समावेश से अभिमान का पराभव

अंतर्मन योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ आज हम सब जाने क्यों, संस्कारों से दूर होकर भौतिकता के जाल में फंसते जा रहे हैं। भौतिकता का ऐसा बुरा प्रभाव हमारे आचरण और चिंतन पर पड़ता जा रहा है कि हमारे भीतर की सहनशीलता के साथ-साथ हमारी विनम्रता भी धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। ...

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असुरक्षा बोध और आपराधिक न्याय

असुरक्षा बोध और आपराधिक न्याय

पिछले दिनों बच्चा चोरी और बच्चा उठाने की अफवाहें लगातार फैलती रही हैं। एक जगह से होते हुए अब ये पूरे देश में जा पहुंची हैं। हर रोज ऐसी खबरें आ रही हैं कि लोग किसी को भी बच्चा चोर समझकर पकड़ रहे हैं, पीट रहे हैं। उदाहरण के तौर ...

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निर्माण-निर्यात को तरजीह

निर्माण-निर्यात को तरजीह

सत्तर हजार करोड़ के पैकेज से उम्मीद आखिरकार सरकार को एहसास हो गया है कि अर्थव्यवस्था के आधारभूत निर्माण और निर्यात सेक्टर को गति दिये बिना अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर नहीं होगी। सरकार ने अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं को सिरे चढ़ाने के लिये बीस हजार करोड़ रुपये का कोष बनाने की ...

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आस्था के कारोबार का स्याह सच

आस्था के कारोबार का स्याह सच

जोगिंद्र सिंह आज हम जिस भागमभागम और आपाधापी वाले दौर में जी रहे हैं वहां कोई भी सुखी, प्रसन्न नहीं है। बेशक हम आर्थिक तौर पर समृद्ध हो गये हों और हमने अपने ऐशोआराम की तमाम सुविधाएं जुटा ली हों मगर हमारा मन फिर भी भीतर से एक अज्ञात भय के ...

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अहिंसा के आयामों पर गंभीर पहल

अहिंसा के आयामों पर गंभीर पहल

चंद्र त्रिखा हिंसा, आतंक व असहिष्णुता के जिस माहौल में हम जी रहे हैं, उसमें अहिंसा के मनोविज्ञान, व्यावहारिकता व आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक आयामों पर चर्चा बेहद आवश्यक है। इस गंभीर विषय को लेकर नंद किशोर आचार्य ने यह कृति समकालीन विचारकों एवं हमारे प्रबुद्ध समाज को दी है। कृति 9 ...

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असंयमित मन की भटकन

असंयमित मन की भटकन

केवल तिवारी खासतौर से बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों के लिए मजेदार कहानियां लिखने वाले रस्किन बॉन्ड ने इस बार लीक से एकदम हटकर रचना लिखी है। कथ्य, कथानक ही नहीं शैली और शिल्प की दृष्टि से भी यह रचना बिल्कुल अलहदा है। इंसान के अंदर यौनेच्छा एक स्वाभाविक गुण होता है, लेकिन ...

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  • असुरक्षा बोध और आपराधिक न्याय
     Posted On September - 16 - 2019
    पिछले दिनों बच्चा चोरी और बच्चा उठाने की अफवाहें लगातार फैलती रही हैं। एक जगह से होते हुए अब ये....
  • ‘उत्तम क्षमा’ के समावेश से अभिमान का पराभव
     Posted On September - 16 - 2019
    आज हम सब जाने क्यों, संस्कारों से दूर होकर भौतिकता के जाल में फंसते जा रहे हैं। भौतिकता का ऐसा....
  •  Posted On September - 16 - 2019
    बहुत समय से सुनते आए हैं कि नदियां किसी भी सभ्यता का आधार रही हैं और उसकी धमनियों की तरह....
  • जन संसद
     Posted On September - 16 - 2019
    नये मोटर वाहन अधिनियम को सख्त बनाया जाना समय की मांग थी। लेकिन जिस तरह से वाहनों की कीमतों से....

आधी आबादी का अधिकार

Posted On March - 11 - 2010 Comments Off on आधी आबादी का अधिकार
सौवें अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर न सही, पर उसके अगले दिन भारत की महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आरक्षण का तोहफा कमोवेश मिल ही गया। भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा ने मंगलवार की शाम इसे एक के मुकाबले 186 के भारी बहुमत से पारित कर दिया। पिछले लगभग डेढ़ दशक से दलगत राजनीति के चक्रव्यूह में फंसे महिला आरक्षण विधेयक की यह बड़ी छलांग है। कह सकते हैं कि कानून बनने के लंबे 

आपके पत्र

Posted On March - 11 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
सहयोग की भावना नीरज, यमुनानगर विश्वनाथ सचदेव जी का लेख ‘नक्शे नहीं बांट सकते साझी संस्कृति’ (22 फरवरी) अहिंसा व शांति का संदेश लिए हुए था। पाकिस्तानी रचनाकार इंतजार हुसैन का यह कथन कि मुल्क भले ही बंट गया हो पर हम नहीं बंटे, सत्य है। लेख का यह कथन एकदम सटीक है कि सह-अस्तित्व की भावना दोनों देशों की जरूरत है। अकेले हाथ से ताली नहीं बजती। हाल ही में 26/11 के हमलों में पाक द्वारा 

मुजाहिदीन के खतरनाक मंसूबे कुचलना ज़रूरी

Posted On March - 11 - 2010 Comments Off on मुजाहिदीन के खतरनाक मंसूबे कुचलना ज़रूरी
राष्ट्र-चिंतन विष्णुगुप्त हम बाहरी और आयातित आतंकवाद का तो सफाया करने में सफल हो सकते हैं और उनके खतरनाक मंसूबों को भी कुचला जा सकता है। पाकिस्तान संरक्षित और आयातित आतंकवाद को  कुचलने में काफी हद तक हमें सफलता भी मिली है और कश्मीर को हड़पने के उसके नापाक इरादे सफल भी नहीं हुए हैं। पर आंतरिक आतंकवाद की जड़ों को कुचलना आसान नहीं होता है। इसलिए नहीं कि आंतरिक आतंकवाद की 

भूख से किसी की मौत न हो

Posted On March - 11 - 2010 Comments Off on भूख से किसी की मौत न हो
खाद्यान्न नीति तरसेम गुजराल देश भर के राजनीतिज्ञ, ब्यूरोक्रेट, मुख्यधारा के अर्थशास्त्री अचानक नींद से जागते हैं और नींद में चलने वाले किसी मरीज की तरह बड़बड़ाने लगते हैं कि भारत एक बड़ी अर्थशक्ति बनने वाला है। लगभग पैंतालीस रुपये किलो चीनी खरीदकर, सत्तर-पचहत्तर रुपये किलो दाल और सत्रह रुपये आटा खरीदने वाली मजबूर जनता के लिए आर्थिक शक्ति होने के क्या मायने हैं? यह कष्टïों-दिक्कतों 

रहिमन चुप रहिए

Posted On March - 11 - 2010 Comments Off on रहिमन चुप रहिए
सागर में गागर जसविंदर शर्मा यदि आप अपने वैवाहिक जीवन में शांति चाहते हैं तो वही करो जो आपकी पत्नी कहे। यह किसी विवाह विशेपज्ञ की नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की नेक सलाह है। जस्टिस काटजू तथा जस्टिस दीपक वर्मा की अवकाशकालीन बैंच ने कहा है कि पत्नी जो बोलती है वह सुनो अन्यथा आप मुसीबत में पड़ सकते हैं और फिर पत्नी से तकरार करके आप अदालत की शरण में जाएंगे मगर वहां भी आपको कोई न्याय नहीं 

बजट में सकारात्मक सोच

Posted On March - 11 - 2010 Comments Off on बजट में सकारात्मक सोच
हरियाणा सरकार के वर्ष 2010-11 के लिए प्रस्तुत बजट में यूं तो कोई क्रांतिकारी पहल नज़र नहीं आती लेकिन सामाजिक कल्याण की दृष्टिï से घोषित कतिपय योजनाएं उम्मीद ज़रूर जगाती हैं। यूं तो बजट सरकार के आंकड़ों की बाजीगरी ही कहा जाता है क्योंकि इसके क्रियान्वयन तक अनुमानित खर्च और आय स्रोतों के बारे में सटीक आकलन कर पाना संभव नहीं हो पाता। राज्यों के बजट जहां राष्टï्रव्यापी आर्थिक परिवर्तनों 

किसके द्वारा, किसके लिए, किसकी सरकार!

Posted On March - 10 - 2010 Comments Off on किसके द्वारा, किसके लिए, किसकी सरकार!
दरअसल राजकुमार सिंह लोकतंत्र की प्रचलित परिभाषा है : जनता के द्वारा, जनता के लिए, जनता की सरकार। सरकार के गठन की प्रक्रिया तक यह परिभाषा प्रासंगिक भी नजर आती है, पर उसके बाद सरकारों के कामकाज के संदर्भ में भी यही बात उतने दावे के साथ नहंी कही जा सकती। सरकारों के कई काम-फैसले ऐसे होते हैं,जिन्हें जनहित में या व्यापक जनहित में जरूरी नहीं ठहराया जा सकता। अगर लोकतंात्रिक ढंग 

आपके पत्र

Posted On March - 10 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
महिला दिवस का औचित्य चन्द्रकला, खातोद, महेंद्रगढ़ सदियों से नारी के कई रूपों का गुणगान होता आया है। नारी कभी मंदिर की देवी बनी, तो कभी कवि की कल्पना, तो कभी किसी शिल्पकार की अद्ïभुत प्रेरणा। आधुनिक कही जाने वाली इस 21वीं सदी में भी नारी के नसीब में कोई व्यापक अंतर नहीं आया है। आज भी नारी उतनी ही प्रताडि़त है। आज भी पुरुष समाज उस पर हावी है। तमाम प्रयासों और आंदोलनों के बावजूद आलम जस 

बाज़ार से बनाइए रोज़गार

Posted On March - 10 - 2010 Comments Off on बाज़ार से बनाइए रोज़गार
रोज़गार गारंटी डा. भरत झुनझुनवाला यूपीए सरकार का आम आदमी के प्रति नरम रुख है। रोजगार गारंटी कार्यक्रम से गरीबतम लोगों को निश्चित रूप से राहत मिली है। दो घंटा आधा-अधूरा काम करके 100 रुपये मिल जाते हैं। पहले गांव में दिहाड़ी 100-120 रुपये थी। रोजगार गारंटी के लागू होने के बाद श्रमिक 8 घंटे मजदूरी करने के लिए 140-150 रुपये की मांग कर रहे हैं। आम आदमी की आय में यह वृद्धि सुखद प्राप्ति 

आना-जाना बसंत का

Posted On March - 10 - 2010 Comments Off on आना-जाना बसंत का
सागर में गागर राजेंद्र निशेश अरे भइया! बसंत आया और चला भी गया। हमें तो पता भी नहीं चला कि कब आया और कब भोर के सपने की तरह चला गया। ऐसे भी कोई आता है दुबके से कि एक पत्ता तक न हिले और चुपचाप दबे पांव वापस चला जाये। कोई हलचल नहीं; कोई कोलाहल नहीं, जैसे पूरा देश चिरनिद्रा में पड़ा हो। बाग-बागीचे में देखा, लाल-पीले-नीले फूलों का नामोनिशान नहीं। तितली, भंवरा, कोयल, अमराई सभी कुछ गायब, भला ऐसा 

नौकरियों की बंदरबांट

Posted On March - 10 - 2010 Comments Off on नौकरियों की बंदरबांट
पंजाब सार्वजनिक चिकित्सा सेवा में चिकित्सकों की भर्ती में पैसे और प्रभाव के बलबूते पर शर्मनाक ढंग से जो नियुक्तियां हुई हैं, वे हमारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टïाचार की एक बानगी दिखाती हैं। पंजाब लोक सेवा आयोग के जरिये हुई नियुक्तियों में समाज को न्याय दिलाने वाले वर्ग के नाते-रिश्तेदारों को जिस तरह चयनित किया गया उससे भ्रष्टï व्यवस्था में न्याय भी मृग-मरीचिका सरीखा नज़र आता है। 

विपक्ष के बिना बजट सत्र

Posted On March - 10 - 2010 Comments Off on विपक्ष के बिना बजट सत्र
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आपके पत्र

Posted On March - 9 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
विभाजन का दर्द राकेश बाबू, कलायत 22 फरवरी को विश्वनाथ सचदेव का लेख—’नक्शे नहीं बांट सकते साझी संस्कृति’ पढ़ा। लेखक ने हृदय को छू लेने वाला लेख लिखा। सच्चाई यही है कि राजनीति ने बेशक इस भूखंड के दो टुकड़े कर दिये हों, लेकिन आज भी दोनों देशों की जनता एक-दूसरे को सांस्कृतिक स्तर पर काफी नजदीक महसूस करती है। दोनों ही देशों के प्रसिद्ध शायर हों या लेखक, गायक हों या रंगकर्मी-एक-दूसरे 

खबरों की विश्वसनीयता

Posted On March - 9 - 2010 Comments Off on खबरों की विश्वसनीयता
लोकसभा चुनाव और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान कतिपय समाचारपत्रों द्वारा राजनेताओं द्वारा प्रायोजित खबरों को एडिटर गिल्ड तथा स्वच्छ पत्रकारिता के पक्षधरों ने गंभीरता से लिया और इस कृत्य की निंदा की गई। लेकिन इस सारे प्रकरण को लेकर एक बात सामने जरूर आई कि यदि प्रेस कौंसिल अधिकार-संपन्न संस्था होती तो दोषियों के खिलाफ समय रहते कारगर कार्रवाई हो पाती। वास्तव में प्रेस कौंसिल 

भारतीय हॉकी की हताशा

Posted On March - 9 - 2010 Comments Off on भारतीय हॉकी की हताशा
आगाज़ तो अच्छा था, पर अंजाम फिर वही निराशाजनक रहा। अपने चार लीग मैच में से तीन मैच हारकर टीम सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो चुकी है और अब उसे अंक तालिका में अपना प्रदर्शन सुधारने का ही संघर्ष करना है। इस बार जब विश्व कप हॉकी शुरू हुआ तो भारतीय टीम से किसी चमत्कारिक प्रदर्शन की उम्मीद का कोई और कारण नहीं था सिवाय इसके कि मेजबान होने के नाते उसे अपने ही मैदान पर अपने ही दर्शकों-प्रशंसकों के 

वार्तालाप जारी रखना कूटनीतिक मजबूरी

Posted On March - 9 - 2010 Comments Off on वार्तालाप जारी रखना कूटनीतिक मजबूरी
अवधेश कुमार भारत-पाक वार्ता भारत एवं पाकिस्तान के विदेश सचिवों के बीच बातचीत पर लोकसभा में राजग के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी एवं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जुगलबंदी काफी रोचक थी। आडवाणी ने यदि अमेरिकी दबाव का आरोप लगाया तो प्रधानमंत्री ने इसे निराधार बताया है। किंतु इससे देश मेे उठ रहे सारे प्रश्नों का समाधान नहीं हुआ है। निस्संदेह, पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर 
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