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खास खबर
बदले हालात में नयी सोच बदलेगी तस्वीर

बदले हालात में नयी सोच बदलेगी तस्वीर

को पुनः अपने पैरों पर खड़ा होने में लंबा अरसा लगने वाला है। एक तरफ उत्पादन के लिए मजदूरों की कमी, दूसरी तरफ ग्राहक नदारद। मजदूर यदि आ भी जाएं तो नयी उत्पादन व्यवस्था को अपनाने के लिए इंतजार करना होगा। दरअसल, जो उत्पादन एवं सेवाएं ग्राहकों की जरूरतें थीं, ...

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फरमानों की विसंगतियों के यक्ष प्रश्न

फरमानों की विसंगतियों के यक्ष प्रश्न

राजेन्द्र चौधरी पहली खबर थी कि हरियाणा की बसों में टिकट केवल ऑनलाइन बिकेंगे। फिर रेलवे के संदर्भ में खबर थी कि अब स्टेशन पर टिकट आरक्षण शुरू कर दिया है। क्या रेलवे की ऑफलाइन टिकट बिक्री से कोरोना नहीं फैलता पर बस की भौतिक टिकट बिक्री से फैलता है? इस ...

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पाक में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का सिलसिला

पाक में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का सिलसिला

पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के आम अधिवेशन में पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने पश्चिम जगत में व्याप्त इस्लामोफोबिया का जिक्र कई बार किया था। उन्होंने भारत में मुस्लिमों से किए जा रहे कथित दुर्व्यवहार को लेकर कटाक्ष भी किए थे। लेकिन यह सब करने की बजाय उन्हें खुद अपने देश ...

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सेहत, सुकून और पर्यावरण की साथी

सेहत, सुकून और पर्यावरण की साथी

सरस्वती रमेश आजकल ऑटो, टैक्सी का किराया बढ़ा हुआ है। बसों में सीमित संख्या में मुसाफिरों को बैठाया जा रहा है। धीरे-धीरे जिन जगहों पर फैक्टरियां खुल भी रही हैं वहां तक कामगारों के पहुंचने में दिक्कत आ रही है। कई कामगारों ने ऑटो, बस के बजाय साइकिल पर भरोसा जताया ...

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चुकाना होगा कोरोना संकट का आर्थिक मूल्य

चुकाना होगा कोरोना संकट का आर्थिक मूल्य

कोरोना संकट का आर्थिक मूल्य हर देश को अदा करना पड़ रहा है लेकिन इसे अदा करने के तीन अलग-अलग रास्ते हैं। पहला रास्ता ब्राजील का है। उस देश ने निर्णय लिया कि वह कोरोना का सामना करने के लिए कोई कदम नहीं उठाएगा। जितना संक्रमण होता है उसे होने ...

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उदासीनता बरतने वालों पर कार्रवाई हो

उदासीनता बरतने वालों पर कार्रवाई हो

भटनागर केन्द्र सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के दौरान लागू लॉकडाउन को अब अनलॉक करने का निर्णय ले लिया है। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि लॉकडाउन के दौरान महानगरों से पलायन करने वाले कामगारों के साथ सौतेला व्यवहार हुआ। पलायन कर रहे इन कामगारों ...

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एक विवशता, गर्व करें या शर्म

एक विवशता, गर्व करें या शर्म

गुरुग्राम से दरभंगा की दूरी लगभग बारह सौ किलोमीटर है। यह दूरी ज्योति पासवान ने सात दिन में पूरी की। यह एक सूचना है, जो समाचार तब बनती है जब इसमें यह जुड़ जाता है कि पंद्रह वर्ष की ज्योति ने अपने अपाहिज पिता को साइकिल पर पीछे बिठाकर यह ...

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  • भयावह संकट की आहट महसूस कीजिए
     Posted On June - 5 - 2020
    आज विश्व पर्यावरण दिवस है। इस अवसर पर प्रकृति और पर्यावरण से की गई छेड़छाड़ की चर्चा इसलिए भी आवश्यक....
  • अंधेरे से जूझते दूर तलक चली ज्योति
     Posted On June - 5 - 2020
    आज हर तरफ बिहार के दरभंगा जनपद के गांव सिरहुल्ली की ज्योति का नाम हर जुबान पर है। गुरुग्राम से....
  •  Posted On June - 5 - 2020
    कोरोना की आंधी कम थी हमारे हौसलों को चुनौती देने के लिए, जो अब जान-जान पर नये-नये तूफान चले आ....
  •  Posted On June - 5 - 2020
    एक जून को दैनिक ट्रिब्यून में संपादकीय पृष्ठ पर विश्वनाथ सचदेव के ‘एक विवशता, गर्व करें या शर्म’ लेख श्रमिकों....

सुधरेगा परलोक भी, करके कन्यादान

Posted On December - 12 - 2010 Comments Off on सुधरेगा परलोक भी, करके कन्यादान
भारत यात्रा पर आई फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की पत्नी कार्ला ब्रूनी द्वारा फतेहपुर सीकरी स्थित संत सलीम चिश्ती की दरगाह पर पुत्र के लिए मन्नत मांगने की खबर ने उन लोगों को संबल ही प्रदान किया जो बेटे की उत्कट अभिलाषा रखते हैं। ये निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं कि पुत्र-लालसा एक अंतर्राष्ट्रीय प्रवृत्ति है। यह भी कहा जा सकता है कि फ्रांस जैसे आधुनिक शैली वाले एक विकसित राष्ट्र 

जीवन का व्यापक परिदृश्य

Posted On December - 12 - 2010 Comments Off on जीवन का व्यापक परिदृश्य
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भारतीय संस्कृति व अस्मिता के रिसते ज़ख्म

Posted On December - 12 - 2010 Comments Off on भारतीय संस्कृति व अस्मिता के रिसते ज़ख्म
डॉ. ज्ञानचंद्र शर्मा भारतीयता की ओर पवन कुमार की पुस्तक ‘बी कमिंग इंडियन’ का हिन्दी अनुवाद है। रचना से पहले रचनाकार का थोड़ा परिचय—इतिहास और विधि में स्नातक पवन कुमार वर्मा का संबंध भारतीय विदेश सेवा के साथ है। इसी नाते उन्होंने विश्व के अनेक देशों में भिन्न-भिन्न पदों पर काम किया है। राजनयिक होने के अतिरिक्त वह भारत, भारतीयता और भारतीय संस्कृति के साथ जुड़े हुए एक गहन चिंतक 

बेरंग ज़िन्दगी में रंगों की तलाश

Posted On December - 12 - 2010 Comments Off on बेरंग ज़िन्दगी में रंगों की तलाश
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जीवन की रिक्तता के दर्शन

Posted On December - 12 - 2010 Comments Off on जीवन की रिक्तता के दर्शन
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बच्चों को खूब भाएगा ‘जादूगर बादल’

Posted On December - 12 - 2010 Comments Off on बच्चों को खूब भाएगा ‘जादूगर बादल’
डा. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ गीतकार विनोद भृंग द्वारा रचित मनोरंजक और गेयता से परिपूर्ण बाल गीतों का नयनाभिराम संकलन नन्हे-मुन्ने बाल पाठकों के दिलों को अवश्य छू लेगा, चूकि इसके प्रत्येक बाल गीत के साथ ‘बोलता-सा रेखा चित्र’ दिया गया है, जो बाल गीत के भावों को बाल-मन के सामने प्रत्यक्ष कर देता है। बाल काव्य की रचना सरल नहीं बल्कि ‘टेढ़ी खीर’ ही कही जा सकती है। बड़ों के 

ईमानदार आदमी की खोज!

Posted On December - 12 - 2010 Comments Off on ईमानदार आदमी की खोज!
रोमेश जोशी इसे कहते हैं अव्यवस्था की पराकाष्ठा, उधर दिल्ली में सरकार को ईमानदार आदमी नहीं मिल रहे हैं और इधर मैं जाने कब से खाली बैठा हूं। सच, सतर्कता आयुक्त  पद पर थामस की नियुक्ति  पर जैसे ही सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने ईमानदार आदमी न मिलने की मजबूरी जताते हुए अपना दुखड़ा रोया, मुझे लगा, यही समय है, जब मुझे अपनी सारी अकड़ को भुलाकर सरकार के सामने पेश हो जाना चाहिए। लेकिन फिर 

स्पेक्ट्रम : जांच से डर कैसा?

Posted On December - 11 - 2010 Comments Off on स्पेक्ट्रम : जांच से डर कैसा?
स्पेक्ट्रम आवंटन में धांधली के आरोपों की जेपीसी जांच की एकजुट विपक्ष की मांग को न$जरअंदा$ज कर केंद्र सरकार द्वारा अचानक ही सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच समिति बना देने और मुख्य विपक्षी दल भाजपा द्वारा उसे आनन-फानन में ही नकार देने से फिर इसी बात की पुष्टि हुई है कि सरकार समेत सभी राजनीतिक दलों की दिलचस्पी सच सामने लाने से ज्यादा इस संवेदनशील 

नोबल पुरस्कार के असली हकदार

Posted On December - 11 - 2010 Comments Off on नोबल पुरस्कार के असली हकदार
खुशवंत सिंह पिछले दिनों मेरी तबीयत नासा$ज थी। खांसी, जुकाम और छींकों से बुरा हाल था। स्थिति इतनी विकट थी कि आंखों से पानी, नाक बह रही, गले में कफ; ऐसे हालात में मैं प्रार्थना कर रहा था कि मेरे अतिथि जल्दी से जाएं और मुझे अकेला छोड़ दें।  ऐसी ही परिस्थिति में अप्रत्याशित ढंग से पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता व प्रसिद्ध वकील असमा जहांगीर का आगमन हुआ। लाहौर से हवाई यात्रा से असमा 

आधी दुनिया के हिस्से में आधा-अधूरा न्याय

Posted On December - 11 - 2010 Comments Off on आधी दुनिया के हिस्से में आधा-अधूरा न्याय
डॉ. रेणुका नैयर सृष्टि के सफल संचालन के लिए प्रकृति ने नारी और पुरुष की उत्पत्ति की, परन्तु प्राकृतिक शरीर रचना की दृष्टि से, दोनों ही अपने आप में अपूर्ण हैं और पूर्णता के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं। वस्तुत: नारी और पुरुष की इस पूर्णता का प्रतीक ही समाज का विकास है, जिसमें पुरुष से अधिक नारी का भाग होता है। वह केवल पुरुष की जननी ही नहीं बल्कि उसकी पालक भी है। परन्तु यह एक ऐतिहासिक 

विषय : बिहार जनादेश के निहितार्थ

Posted On December - 11 - 2010 Comments Off on विषय : बिहार जनादेश के निहितार्थ
महिलाएं भी हुईं जागरूक बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जनता दल और भाजपा की गठबंधन सरकार को जो स्पष्ट जनादेश मिला है वह ऐतिहासिक है। यह एक दुर्लभ अवसर है कि एक सरकार को तीन चौथाई बहुमत के साथ दोबारा सरकार चलाने का अवसर मिला है। वह भी उस राज्य में जिसे कुछ सालों पहले अराजकता, विकासहीनता और जातिवाद के दलदल में धंसे होने के लिए जाना जाता था। नीतीश कुमार ने राज्य को अपराधियों की गिरफ्त 

श्रीमुख से

Posted On December - 11 - 2010 Comments Off on श्रीमुख से
भारतीय राजदूत मीरा शंकर के साथ अमेरिका में हुई बदसलूकी को गंभीरता से लिया है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। मामला अमेरिका सरकार के सामने उठाया जाएगा। – केंद्रीय विदेश मंत्री, एसएम कृष्णा, नयी दिल्ली में। मैंने जनसंपर्क सेवा कंपनी प्रबंधक नीरा राडिया की सेवाएं इसलिये ली, क्योंकि उनकी विरोधी कंपनियों कुछ पत्रकारों के साथ मिलकर उनके हितों को चोट पहुंचा रही थीं। – 

आपके पत्र

Posted On December - 10 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
बेकसूर बच्चे रजत, चंडीगढ़ जिन दंपतियों में आपसी रिश्ते किसी वजह से जब दरकने लगते हैं चाहे वो परस्पर विश्वास की कमी से या किसी अन्य कारण से हो अगर समय रहते उनको न संभाल लिया जाये तो ऐसे रिश्ते तलाक को जन्म देते हैं। स्थिति तब और भी सोचनीय हो जाती है जब इन दंपतियों के बच्चों को भाग्य के भरोसे छोड़ दिया जाता है। वास्तव में झगड़ा तो पति-पत्नी के बीच का होता है लेकिन सजा इनके बच्चों को 

विश्वसनीयता का सवाल !

Posted On December - 10 - 2010 Comments Off on विश्वसनीयता का सवाल !
गुरमीत सिंह खबरों की खबर हमारी फिल्मों में समाज के किसी वर्ग का चेहरा देखा जा सकता है। कभी कभी वह चित्रण अतिरंजनापूर्ण भी हो सकता है लेकिन आमतौर पर उसमें सच्चाई की झलक देखी जा सकती है। वैसे भी समाज में किसी वर्ग विशेष की छवि बनाने में भी फिल्मों की अपनी भूमिका रहती है। उदाहरण के लिए अपवादों को छोड़ दे तो शुरू से ही हमारी फिल्मों में नेताओं व पुलिस की एक स्टीरियोटाइप छवि नजर आती 

अजीम प्रेमजी : सामाजिक सरोकारों के उद्यमी

Posted On December - 10 - 2010 Comments Off on अजीम प्रेमजी : सामाजिक सरोकारों के उद्यमी
अरुण नैथानी चर्चित व्यक्ति अजीम प्रेमजी सही मायनों में महान शख्सियत हैं। एक अरबपति उद्यमी यदि इतने ऊंचे मुकाम पर पहुंचकर आम आदमी के दर्द को शिद्दत के साथ महसूस करता है तो उसे महान कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए। वे पहले ऐसे अरबपति हैं, जिसने शिक्षा के उन्नयन और सामाजिक कल्याण के लिए नौ हजार करोड़ रुपये का अभूतपूर्व दान दिया है। यूं तो सादगीभरा जीवन जीने वाले प्रेमजी अपने 

कहां तक उचित है अलग राज्यों की मांग

Posted On December - 10 - 2010 Comments Off on कहां तक उचित है अलग राज्यों की मांग
ज्ञानेन्द्र रावत संदर्भ : पूर्वांचल बीती एक दिसंबर को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी इलाहाबाद यानी प्रयाग में विशाल जनसमूह और सांसद-अभिनेत्री जयाप्रदा और अभिनेता संजय दत्त की मौजूदगी में लोकमंच के अध्यक्ष राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने अलग पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग को लेकर पूर्वांचल स्वाभिमान सद्भावना यात्रा की जोर-शोर से शुरुआत की। इलाहाबाद से गोरखपुर की इस यात्रा की शुरुआत 
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