कांग्रेस के शासन से कई गुणा बेहतर खट्टर सरकार : भाटिया !    प्रियंका के राज्यसभा में जाने की ‘अटकल’ का जवाब देने से कांग्रेस ने किया परहेज !    जेएनयू छात्रों का जंतर मंतर पर प्रदर्शन !    बुर्किना फासो में चर्च के पास हमला, 24 की मौत !    पाकिस्तान में जहरीली गैस से 4 की मौत !    ट्रंप ने सीरिया में रूस के हस्तक्षेप पर उठाए सवाल !    कांग्रेस ने भी कहा- पहले नेताओं से प्रतिबंध हटायें !    इंजीनियरिंग छात्र फिर गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में !    एकदा !    नहीं रहे आजाद हिंद फौज के सिपाही छोटूराम !    

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खास खबर
दागियों पर अंकुश लगाने की जवाबदेही

दागियों पर अंकुश लगाने की जवाबदेही

अनूप भटनागर देश की राजनीति को अपराधीकरण से मुक्त कराने के इरादे से न्यायपालिका ने इस बार संविधान के अनुच्छेद 129 और अनुच्छेद 142 में प्रदत्त अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुये राजनीतिक दलों और निर्वाचन आयोग को नये निर्देश दिये हैं। राजनीतिक दलों को अब बताना होगा कि चुनाव ...

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व्यापार संतुलन के लिए चीन से सख्ती जरूरी

व्यापार संतुलन के लिए चीन से सख्ती जरूरी

बीते समय में अमेरिका और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता संपन्न हुआ है। पिछले कई वर्षों से अमेरिका में चीन से माल का आयात बहुत अधिक मात्रा में हो रहा था और निर्यात तुलना में बहुत ही कम हो रहा था। अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ रहा था। इस ...

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हादसा नहीं, हत्या

हादसा नहीं, हत्या

सरकार के साथ अभिभावक भी चेतें पंजाब में संगरूर के एक पब्लिक स्कूल की वैन में पैट्रोल रिसने से लगी आग में चार बच्चों की दर्दनाक मौत बच्चों के जीवन से खिलवाड़ की पराकाष्ठा को दर्शाती है। विडंबना देखिये कि कबाड़ी से खरीदी गई बीस साल पुरानी वैन में बच्चों को लाया-ले ...

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जन संसद

जन संसद

वाहनों पर स्टीजन संसदकर की रोक स्वागतयोग्य पहल आजकल हर कोई अपना रुतबा दिखाने के लिए निजी वाहनों पर विभिन्न स्टीकर लगा देता है ताकि उनके वाहनों को ट्रैफिक पुलिस वाले चैकिंग के लिए न रोक सकें। समतामूलक समाज में इस प्रकार से भेदभाव को बढ़ावा देने वाले कार्य को जायज नहीं ...

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आत्मबल संवर्धन से अप्रत्याशित कामयाबी

आत्मबल संवर्धन से अप्रत्याशित कामयाबी

अंतर्मन रेनू सैनी आज के समय में दसवीं-बारहवीं कक्षा से ही होड़ लग जाती है कि किस क्षेत्र का चुनाव करना है। फिर भी क्या कारण है कि बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और लोग अपने लक्ष्य के करीब नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसका कारण है युवाओं के अंदर ऑटोजेनिक प्रशिक्षण ...

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दरकते सपनों के द्वंद्व से जूझती पीढ़ी

दरकते सपनों के द्वंद्व से जूझती पीढ़ी

भारत की पहचान एक युवा देश के रूप में होती है, उसके पड़ोसी देशों चीन और जापान की नहीं। भारत की आबादी का आधा भाग कार्य योग्य युवा पीढ़ी का है। इसे यथोचित काम नहीं मिल पाता। जो काम देश के युवा कर रहे हैं, उससे उन्हें श्रम का न ...

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नयी राजनीति के मायने

नयी राजनीति के मायने

पूरे भारत पर ‘आप’ की नजर दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बाद रामलीला मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने अपने वायदे-इरादे जाहिर कर दिये। अपनी कार्यशैली को नयी राजनीति का पर्याय बताते हुए उन्होंने मुफ्त की राजनीति का बचाव किया। उन्होंने ...

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आपके पत्र

Posted On September - 1 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
हिसाब अभी बाकी कृष्णराम देवले, पंचकूला नौ अगस्त को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’  की 68वीं वर्षगांठ थी, जिसे क्रांति दिवस भी कहते हैं। ब्रिटिश सरकार ने सर स्टेफर्ड क्रिप्स को भारत नये संविधान के साथ भेजा जिसे कांग्रेस-मुस्लिम लीग ने निरस्त कर दिया था। यही भारत छोड़ो आंदोलन का मूल कारण बना था। अंगे्रज भारत को दिवालिया हालत की व$जह से छोड़ गये, मगर उन्होंने जो क्रूर यातनाएं भारतीयों को 

कारगर व जनोपयोगी होगा यह कानून

Posted On August - 31 - 2010 Comments Off on कारगर व जनोपयोगी होगा यह कानून
अवधेश कुमार एक बार मुख्य विपक्षी भाजपा द्वारा सिद्धांतत: नाभिकीय जनदायित्व विधेयक (सिविल लिएबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज बिल यानी नाभिकीय क्षति का नागरिक दायित्व विधेयक) पर सहमति व्यक्त करने के बाद इसका पारित होना प्राय: निश्चित था। सरकार ने भी इसे पारित कराने के लिए लचीला रुख अपनाया एवं विपक्ष के 18 संशोधनों को स्वीकार कर लिया। सच कहें तो अब इसका विरोध करने वाले वही हैं जो भारत-अमेरिका 

भ्रष्टाचार का पौधरोपण

Posted On August - 31 - 2010 Comments Off on भ्रष्टाचार का पौधरोपण
रोमेश जोशी शीर्षक कुछ भ्रमित करने वाला है। ऐसा लगता है जैसे आज की तारीख में पौधरोपण का कामकाज भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ नहीं है, निश्चय ही अन्य क्षेत्रों की तरह सरकारी स्तर पर इस काम में भी भ्रष्टाचार है। लेकिन उसका प्रतिशत बहुत कम है, आटे में नमक या उससे कुछ ही ज्यादा। जबकि सरकारी काम में तो नमक में आटा मिलाने का चलन है। कम मार्जिन होने के कारण हो यह रहा है कि जब भी कोई सरकारी एजेंसी 

नाकामियों का ठीकरा सेना पर फोड़ते राजनेता

Posted On August - 31 - 2010 Comments Off on नाकामियों का ठीकरा सेना पर फोड़ते राजनेता
ब्रिगेडियर अरुण बाजपेयी (सेनि) प्रसिद्ध पत्रकार कुलदीप नैयर की हाल की आरटीआई याचिका जिसमें कहा गया था कि 1962 के भारत-चीन युद्ध की जनरल हैंडरसन ब्रूक की गोपनीय रपट को अब इस घटना के 48 वर्षों के बाद तो भारतीय जनता के सामने लाया जाए, भारत के चीफ इनफारमेशन कमिश्नर वजाहत हबीबउल्लाह साहब ने बुधवार 25 अगस्त को खारिज कर दिया है। हां, इसको खारिज करने से पहले उन्होंने यह जरूर कहा कि यह रपट भारतीय 

चीन के खतरनाक मंसूबे

Posted On August - 31 - 2010 Comments Off on चीन के खतरनाक मंसूबे
सुपरपॉवर बनने का सपना पाले हमारे पड़ोसी देश चीन ने पिछले दिनों उकसाने की जो शरारतभरी हरकतें की हैं, हमें उन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। हमें चिंतित नहीं, सावधान होना चाहिए। पिछले दिनों घटित दो घटनाओं ने भारतीयों को विचलित किया है; पहली उत्तरी सैन्य कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वीएस जसवाल को चीनी वीजा न देना तथा दूसरी न्यूयार्क टाइम्स की चौंकाने वाली वह खबर जिसमें गिलगित व बाल्तिस्तान 

राहुल की राजनीति

Posted On August - 30 - 2010 Comments Off on राहुल की राजनीति
कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी हरियाणा के तूफानी दौरे पर आये और विश्वविद्यालय एवं डेयरी संस्थान के छात्रों से संवाद कर चले गये। इस एक दिन की यात्रा में राहुल ने युवाओं से राजनीति में बदलाव और देश निर्माण के लिए उनका हाथ मांगा। इस मौके पर उन्होंने जो कुछ कहा, उससे असहमत होना मुश्किल है।  यह सही है कि राजनीति एक दलदल बनती जा रही है। यह भी सही है कि देश में अमीर-गरीब के बीच खाई लगातार चौड़ी 

वेतन के साथ जवाबदेही भी बढ़े

Posted On August - 30 - 2010 Comments Off on वेतन के साथ जवाबदेही भी बढ़े
विश्वनाथ सचदेव खबरों के आगे-पीछे यह विडम्बना ही है कि हमारे सांसदों को अपना वेतन बढ़वाने के लिए संसद में शोर मचाना पड़ा है। उस दिन जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रह चुके लालूप्रसाद यादव सांसदों की ‘बुरी हालत’ का रोना रोते हुए वेतन बढ़ाये जाने की मांग कर रहे थे तब कम्युनिस्ट सांसदों को छोड़कर शेष सभी पार्टियों के सांसद या तो मेजें थपथपाकर इस मांग का समर्थन 

स्वास्थ्य की सुरक्षा का संवैधानिक अधिकार

Posted On August - 30 - 2010 Comments Off on स्वास्थ्य की सुरक्षा का संवैधानिक अधिकार
मदन ‘राज’ कानून  कचहरी एक समय वह भी था जब डॉक्टर को भगवान समझा जाता था; किंतु आज उन्हें ऐसा नहीं समझा जाता। इसकी वजह है लोभ और लालच। उसे सिर्फ पैसा चाहिए, मरीज चाहे ठीक हो या नहीं, यह उसकी किस्मत है। डॉक्टरों की लापरवाही एवं लालच के अनेक प्रसंग समाचारपत्रों में अकसर पढऩे को मिलते रहते हैं। ऐसा ही एक प्रकरण श्रीमती शांता बनाम राज्य सरकार ए.आई.आर. 1998 आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के 

नोटों की बरसात

Posted On August - 30 - 2010 Comments Off on नोटों की बरसात
बात की बात सहीराम इधर यह फर्क करना बहुत मुश्किल हो रहा है कि मेह ज्यादा बरस रहा है या सांसदों पर नोट ज्यादा बरस रहे हैं। धरती जल-थल है। सारी शिकायतें दूर हो गयी। अब कोई नहीं कह रहा कि मेह कम है। वास्तव में तो औसत से ज्यादा ही है। दिल्ली तो रोज डूबती है। जी नहीं, जमना में नहीं डूबती। हालांकि वह भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच रही है। रोज खबर आती है कि हरियाणा से पानी छोड़ दिया गया है। लेकिन 

आपके पत्र

Posted On August - 30 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
बारहवां खिलाड़ी अतुल वर्मा, कैथल गत रविवार को दाम्बुला में भारत-श्रीलंका के बीच खेले गए एकदिवसीय मैच में दिए गए गलत फैसलों से साफ जाहिर होता है कि अम्पायर धर्मसेना श्रीलंका की ओर से बारहवें खिलाड़ी की भूमिका निभा रहे थे। शुरुआती ओवरों में ही गलत फैसले देने से मैच का रुख ही पलट गया। शायद अम्पायर ने रणनीति बना रखी थी कि मैच भारत की झोली में नहीं जाना चाहिए। साफ जाहिर होता है कि श्रीलंका 

कहीं गुम हो गयी मानव की पहचान

Posted On August - 29 - 2010 Comments Off on कहीं गुम हो गयी मानव की पहचान
बदलते वक्त के साथ ही आदमी की व्यक्तिगत पहचान हाशिये पर चली गई है। आने वाले समय में प्रत्येक भारतीय को एक नंबर दे दिया जाएगा जो हर सरकारी दफ्तर में उसकी नाम-सरनेम, गांव, शहर के बजाय इसी नंबर से पूछ होगी। एक ज़माना था कि गांव-देहात में आदमी की पहचान उस खानदान, रुतबे, पद, जाति-कुल यानी परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठïा और सामाजिक मानकों से होती थी। धीरे-धीरे महानगरीय संस्कृति के साथ गांव से शहरों 

कृष्ण जीवन दर्शन और कर्मण्येवाधिकारस्ते…

Posted On August - 29 - 2010 Comments Off on कृष्ण जीवन दर्शन और कर्मण्येवाधिकारस्ते…
गोपाल जी गुप्त कितना अद्भुत, आश्चर्यजनक लगता है यह सोचकर कि जो बालक यमुनातट पर घेरेदार  कदम्ब वृक्ष तले या उसकी शाखाओं पर बांस से बनी बांसुरी बजाकर ग्वाल-बालों, गोपिकाओं, पशु-पक्षियों को आकर्षित करता रहा, गोपिकाओं के साथ ब्रजमंडल में रास रचाता रहा, वन में धेनु चराता रहा, माखन चुराता रहा वही महाभारत का सूत्रधार बन बैठा, पार्थ को तत्वज्ञान देते हुए गंभीर आचार्य बन गया। उसके एक ओर 

हबीब तनवीर : जिनके नाटक यथार्थ गढ़ते थे…

Posted On August - 29 - 2010 Comments Off on हबीब तनवीर : जिनके नाटक यथार्थ गढ़ते थे…
प्रेमशीला गुप्ता इस वक्त पूरे देश में आमिर खान की फिल्म ‘पिपली लाइवÓ की धूम मची हुई है किन्तु इसके दृश्यों को देखकर सहसा रंगकर्मी हबीब तनवीर की याद आ जाती है क्योंकि ऐसे यथार्थ घटनाओं की झलक तो उन्हीं के नाटकों में झलकती है। हबीब साहब यद्यपि अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन मेरा यह सौभाग्य था कि मैं उनसे रू-ब-रू होकर मिली। इस बीच इन्होंने भारत के नाट्यशास्त्र से लेकर आधुनिक रंगमच 

जीने की कला सिखाती वैज्ञानिक सोच

Posted On August - 29 - 2010 Comments Off on जीने की कला सिखाती वैज्ञानिक सोच
अरुण  नैथानी कोशिकीय एवं आणविक जीव  विज्ञान केंद्र हैदराबाद के ग्यारहवें वार्षिक अंक में आधुनिक जीवन शैली से  उपजी बीमारियों से मुक्ति की राह दिखायी गई है। भागमभाग जिंदगी में तनावपूर्ण जीवन शैली में जी रहे लोगों को यह पत्रिका जरूर पढऩी चाहिए। हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके कंप्यूटर के उपयोग से  जो गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, उससे बचाव के लिये बरती 

‘डा. अरुण’ को ‘राष्ट्र-गरिमा सम्मान’

Posted On August - 29 - 2010 Comments Off on ‘डा. अरुण’ को ‘राष्ट्र-गरिमा सम्मान’
नयी दिल्ली के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सभागार में आयोजित हुए राष्ट्र कवि मैथिलिशरण गुप्त जयंती ट्रस्ट द्वारा एक भव्य समारोह में उत्तराखंड के साहित्यकार डा. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ को ‘मैथिलीशरण गुप्त गरिमा-सम्मान-2010’ से विभूषित किया गया है। भारत की केंद्रीय साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली के सदस्य डा. ‘अरुण’ को राष्ट्र कवि मैथिलिशरण गुप्त की 124वीं जयंती पर संपन्न 

उर्दू और हिंदी साहित्य में बेवफ़ाई

Posted On August - 29 - 2010 Comments Off on उर्दू और हिंदी साहित्य में बेवफ़ाई
फूलचंद मानव जुलाई और अगस्त 2010 के साढ़े चार सौ पन्नों के बेवफाई सुपर विशेषांक रवींद्र कालिया ने निकाले हैं। विश्व उपन्यासों, उर्दू कहानियों, शायरी, फिल्मों-गानों, मीडिया, इंटरनेट और अंग्रे•ाी उपन्यासों में बेवफाई टटोल कर, पढ़-पढ़वाकर जहां बहुत कुछ चर्चित और पठनीय आज की पीढ़ी के लिये संकलित किया है विशेषांक एक में, वहीं अगस्तांक में कन्फैशंज नयनतारा सहगल, मन्नू भंडारी, राजेंद्र 
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