पीजीआई में अलग से वार्ड, डाक्टरों के लिए एंटी डॉट तक नहीं !    फर्जी निकला लूट मामला, फाइनेंसर ले गये थे गाड़ी !    टूटी सड़कों के लोगों ने खुद ही भरे गड्ढे !    जिनपिंग बोले कोरोना सबसे बड़ा आपातकाल !    अयोध्या में मस्जिद के लिए जमीन पर फैसला आज !    बठिंडा के सनी हिंदुस्तानी बने इंडियन आइडल !    डीएसजीएमएस के स्कूलों में रोबोट भी पढ़ायेंगे !    मिग-29 के विमान क्रैश, पायलट सुरक्षित !    अपने दम पर चीन से जीत लाए मेडल !    अर्थव्यवस्था की राह रोक रहा कोरोना : आईएमएफ !    

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खास खबर
जन संसद

जन संसद

मुफ्त की राजनीति के खतरे मुफ्त की रेवड़ियां आम आदमी पार्टी ने अपने काम के दावों के साथ मुफ्त सुविधाओं को विस्तार दिया। मुफ्त की राजनीति पर लड़े गये दिल्ली के चुनाव इस बात की ओर इशारा है कि राजनीतिक दलों के पास रचनात्मक मुद्दों और विकास की दृष्टि का नितांत अभाव ...

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उपकार के उद्देश्य से जीवन जीने में आनंद

उपकार के उद्देश्य से जीवन जीने में आनंद

अंतर्मन योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ यह सारी सृष्टि आखिर किसके बल पर चल रही है? आदमी सारी सच्चाई भूलकर जीवन का यह परम सत्य आखिर क्यों भूल जाता है कि उसके हाथ में तो कुछ भी नहीं है। राजनीतिक सत्ता मिल जाए या दौलत के अंबार मिल जाएं तो आदमी जाने क्यों ...

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कोरोना की वैक्सीन खोजने में जुटे वैज्ञानिक

कोरोना की वैक्सीन खोजने में जुटे वैज्ञानिक

मुकुल व्यास चीन में महामारी फैलाने वाले नॉवेल कोरोना वायरस से पूरी दुनिया में खौफ पैदा हो गया है। चीन में इस वायरस से मरने वालों का आंकड़ा 2300 को पार कर चुका है और इससे संक्रमित मरीजों की संख्या 76 हजार से अधिक पहुंच चुकी है। बीमारी की चपेट ...

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ट्रंप की यात्रा के पेच

ट्रंप की यात्रा के पेच

मेहमान से भी संवेदनशीलता की उम्मीद ऐसे वक्त में जब भारत अमेरिकी राष्ट्रपति के स्वागत में पलक-पांवड़े बिछाये बैठा है, डोनाल्ड ट्रंप व अमेरिकी सरकार की तरफ से ऐसे बयान आए हैं, जो संवेदनशील भारतीय को आहत करते हैं। नि:संदेह अमेरिका की सारी रीतियां-नीतियां अमेरिका से शुरू हो कर अमेरिका पर ही ...

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धरोहर का स्मरण

धरोहर का स्मरण

पुस्तकें मिलीं अरुण नैथानी आचार्य सत्यवीर ‘प्रेरक’ का पूरा जीवन समाज, खासकर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक रहा है। वैदिक जीवन मूल्यों में अगाध श्रद्धा रखने वाले योगी आचार्य सत्यवीर ने अपनी पुस्तक ‘मेरा ग्राम पाबड़ा समूह’ में इन गांवों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को समेटने की कोशिश की है। समूह के ...

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सभ्य समाज के छल उघाड़ती रचनाएं

सभ्य समाज के छल उघाड़ती रचनाएं

पुस्तक समीक्षा सरस्वती रमेश आदिवासी समाज मनुष्य द्वारा निर्मित विभेदों से दूर प्राकृतिक समभाव का अनुगामी रहा है। लेकिन आधुनिक काल में आदिवासियों के जन-जीवन में कथित सभ्य समाज का निर्मम दखल है। इस दखल ने आदिवासी समाज को उनकी जड़ों, परंपराओं से दूर करने का ही काम किया है। उजड़े जंगलों ...

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आवारागर्द

आवारागर्द

कहानी सैली बलजीत वे तीन जने हैं, उनके जिस्म पर कपड़े बहुत चीकट हुए पड़े है। वे सुबह से आवारागर्दी कर रहे हैं। इन दिनों शहर में शादियों का भी खूब जोर है। लगभग इन दिनों वे भूखे नहीं रहते, चाहे वह बारातियों की जूठन ही क्यों न हो, इससे पेट तो ...

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कैसे मिल पायेगी सबको बिजली!

Posted On September - 9 - 2010 Comments Off on कैसे मिल पायेगी सबको बिजली!
निरंकार सिंह बिजली मंत्री सुशील कुमार शिंदे अब तक बिजली क्षेत्र की बदहाली में कोई सुधार नहीं कर सके हैं। बरसों से ढांचागत क्षेत्र पर काफी जोर दिये जाने के बावजूद बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका नतीजा एक ओर नागरिक सुविधाओं और सेवाओं की बदहाली के रूप में सामने आ रहा है और दूसरी ओर उद्योग-धंधे बीमार होते जा रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री कार्यालय के एक 

केले मत खाना, कलेक्टर साब!

Posted On September - 9 - 2010 Comments Off on केले मत खाना, कलेक्टर साब!
रोमेश जोशी शहर की मुख्य फल-मंडी में दोपहर का समय था। उस दिन के व्यापार की मारामारी समाप्ति पर थी। ऐसे में तीन-चार बड़े व्यापारी कुछ शहरी लोगों के साथ चर्चा कर रहे थे। एक ने कहा, ‘सच बताएं साब, हमारा सिर्फ केले का ही थोक व्यापार है। तीन पीढ़ी हो गई यही करते-करते। पर साब, कसम से, सात-आठ साल के करीब हो गए, मैंने या मेरे परिवार के किसी भी सदस्य ने शायद ही कभी केला खाया हो। रिश्तेदारों को 

हड़ताल की प्रासंगिकता

Posted On September - 9 - 2010 Comments Off on हड़ताल की प्रासंगिकता
बढ़ती महंगाई, श्रम कानूनों के अतिक्रमण और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश के खिलाफ  आठ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की एक दिन की देशव्यापी हड़ताल कितनी सफल रही या असफल, यह बहस का मुद्दा हो सकता है। लेकिन असली सवाल यह है कि वैश्वीकरण व खुली अर्थव्यवस्था के इस दौर में अर्थव्यवस्था का चक्का जाम कितना औचित्यपूर्ण है? ऐसे दौर में जब शासन तंत्र संवेदनहीन हो चला है और हड़ताल-प्रदर्शन 

आपके पत्र

Posted On September - 9 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
माओ और राजपक्षे अक्षित गुप्ता, रादौर माओ-त्से-तुंग और महेन्द्र राजपक्षे, शासक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों का शासन जन-कल्याणकारी और निष्पक्ष शासन की संज्ञा दिए जाने से कोसों दूर ठहरता है। माओ-त्से-तुंग तो अब हमारे बीच नहीं हैं, पर महेन्द्रा राजपक्षे वर्तमान में श्रीलंका के राष्ट्रपति पद पर विराजमान हैं। कम्युनिस्ट चीन के ताकतवर राष्ट्राध्यक्ष के रूप में माओ-त्से-तुंग 

दबंग मनमोहन

Posted On September - 8 - 2010 Comments Off on दबंग मनमोहन
देश के अग्रणी समाचारपत्रों के संपादकों के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जो तेवर दिखाए, वे उनकी परंपरागत  अल्पभाषी और संक्षिप्त संबोधन के ठीक विपरीत नज़र आए। अब तक मान्यता रही है कि वे बचाव की मुद्रा में विवादों से परहेज करते रहे हैं। लेकिन इस बातचीत में गरीबों को मुफ्त अनाज बांटने के मुद्दे पर उन्होंने जो बेलाग टिप्पणी की, उसने राजनीतिक पंडितों को भी हैरत में डाल दिया। 

खेलों से खिलवाड़

Posted On September - 8 - 2010 Comments Off on खेलों से खिलवाड़
पिछले एक सप्ताह के भीतर डोपिंग टेस्ट में दोषी पाये गए भारतीय खिलाडिय़ों की संख्या 18 के आंकड़े को छू जाने पर तो अफसोस के साथ यही कहा जा सकता है कि राष्ट्रमंडल खेल की तैयारियों में विलंब तथा इनके आयोजन खर्च में कथित घपलों से देश की साख को बट्टा लगाने में शायद कोई कोर-कसर बाकी रह गई थी। कुछ पहलवान व एथलीटों के डोपिंग टेस्ट पॉजिटिव पाये जाने के बाद अब जयपुर में हाल ही में संपन्न हुई 64वीं राष्ट्रीय 

चौबीस साल पहले ही हल हो जाता मसला!

Posted On September - 8 - 2010 Comments Off on चौबीस साल पहले ही हल हो जाता मसला!
अयोध्या-विवाद कृष्ण प्रताप सिंह शायद आप विश्वास न कर पायें लेकिन यह एक बड़ी सच्चाई है कि अयोध्या के जिस रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की बाबत उच्च न्यायालय के सम्भावित फैसले पर इन दिनों अनेक लोगों की सांसें अटकी हुई हैं, आम अयोध्यावासियों की चली होती तो वह चौबीस साल पहले ही अदालतों के बाहर सौहार्दपूर्ण सुलह-समझौते के आधार पर हल हो गया होता। जी हां, अयोध्या व उसके जुड़वां शहर 

देश में असमंजस की सियासत

Posted On September - 8 - 2010 Comments Off on देश में असमंजस की सियासत
अवसरवादी  राजनीति तरसेम गुजराल भारतीय जनता पार्टी को हाल ही में कांग्रेस को घेरने का खूब अच्छा अवसर मिल गया। ममता बनर्जी की लालगढ़ में रैली पर प्लेट में सैलाब आ गया। भारतीय जनता पार्टी को जब मौका मिला तो पूरे फन के साथ तीरंदाजी की। माओवादियों का नाम तो पहले ही ज़हर बराबर लगता है उनको। कहा—आपके गृहमंत्री साहिब जिन माओवादियों पर निशाना साध रहे हैं, आपकी रेलमंत्री साहिबा उन्हीं 

यह सिक्स फिक्स है!

Posted On September - 8 - 2010 Comments Off on यह सिक्स फिक्स है!
सागर में गागर अशोक खन्ना मिस्टर टेन-परसेंट के देश के क्रिकेटरों ने स्पॉट फिक्सिंग के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। दुनिया भर के बुकीज में उनके प्रति सम्मान भाव जागा है। एनसीआर के एक सट्टेबाज ने तो इस त्रिमूर्ति के चित्रों को बाकायदा धूपबत्ती भी दिखानी शुरू कर दी है। प्रभु कब बरसोगे, हमारे अंगना! अन्य देशों के क्रिकेटरों में उनके पदचिह्नों पर चलने की प्रेरणा जगी है। पेप्सी वगैरह 

आपके पत्र

Posted On September - 8 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
मिर्चपुर कांड जाम बरेलवी, चंडीगढ़ ‘सरकारें कुंभकर्णी नींद सोती हैं,’ सुना था लेकिन अब देख भी लिया। मिर्चपुर कांड के आरोपियों की धरपकड़ इतने समय बाद होना तो यही दर्शाता है : ‘जब खाके-नशेमन भी न रही, तब टूटकर बरसा पानी भी, उस वक्त कहां थी काली घटा, जब आग लगाई लोगों ने?’ लगभग दो माह से निर्वासित मिर्चपुर के पीडि़त इस भयावह वर्षा में छत तक को तरस रहे हैं। अदालत का आदेश सिर-माथे लेकिन 

कारगर रणनीति की ज़रूरत

Posted On September - 7 - 2010 Comments Off on कारगर रणनीति की ज़रूरत
बिहार के लखीसराय में एक अपहृत पुलिस कर्मी की हत्या के बाद चौतरफा आलोचना झेल रहे माओवादियों ने बंधक बनाए गए तीन पुलिस कर्मियों को रिहा कर दिया है। उनकी रिहाई से जहां सरकार व पुलिस कर्मियों के परिजनों को राहत मिली है, वहीं राज्य व केंद्र सरकार पर जनता का दबाव माओवादियों के खिलाफ कारगर रणनीति बनाने के लिए बढ़ा है। लखीसराय में माओवादियों से हुई मुठभेड़ में सात पुलिस कर्मियों की मौत तथा 

शिमला करे पुकार!

Posted On September - 7 - 2010 Comments Off on शिमला करे पुकार!
शिमला का पर्यटन व पर्यावरण की दृष्टि से चित्ताकर्षण तो पहले से ही विलुप्तता के रास्ते पर अग्रसर है परंतु अब और भी खेदजनक है कि भूस्खलन की ताज़ा घटनाओं से पहाड़ों की इस रानी का समस्त अस्तित्व ही मानो खतरे में पड़ गया है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला तथा इसके आसपास क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी वर्षा के कारण इस शहर के ऐतिहासिक  रिज़ मैदान काबड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो 

विकास की नीतियों से उपजे अंतर्विरोध

Posted On September - 7 - 2010 Comments Off on विकास की नीतियों से उपजे अंतर्विरोध
अवधेश कुमार जिन लोगों ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की हाल की गतिविधियों एवं दिए गए बयानों को सुना होगा उनके लिए अपने कान और आंख पर विश्वास करना मुश्किल हुआ होगा। उड़ीसा के नियामगिरी पहाडिय़ों के नीचे लांजीगढ़ की रैली में उन्होंने कहा कि विकास तो होना चाहिए, पर विकास आम आदमी को, गरीबों को कुचलकर नहीं हो सकता। इस बात में आश्चर्य का कोई पहलू इसलिए नहीं था, क्योंकि कांग्रेस लगातार 

राष्ट्र-हित में बने कारगर निर्यात नीति

Posted On September - 7 - 2010 Comments Off on राष्ट्र-हित में बने कारगर निर्यात नीति
डॉ. भरत झुनझुनवाला श में खनिजों का निर्यात करने वाली कम्पनियों का दबदबा है। इन कम्पनियों और वाणिज्य मंत्रालय की दृष्टि में खनिजों का अधिकाधिक निर्यात करना चाहिए। निर्यात से मिली रकम का उपयोग हम अपनी दूसरी ज़रूरतों के लिए कर सकते हैं जैसे फाइटर विमानों और फास्फेट फर्टिलाइजर के आयात के लिए। सही है कि आयात-निर्यात से सभी देश लाभान्वित होते हैं। रूस के पास फास्फेट का अपार भंडार 

राष्ट्रमंडल खेल जिंदाबाद!

Posted On September - 7 - 2010 Comments Off on राष्ट्रमंडल खेल जिंदाबाद!
श्याम ‘अनजान’ राष्ट्रमंडल खेल की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। दिल्ली भी आने वाले देसी-विदेशी खिलाडिय़ों एवं दर्शकों के स्वागत के लिए नई नवेली दुल्हन की तरह सज-संवर कर तैयार है। खिलाडिय़ों के लिए रहने-ठहरने के मकसद से बना खेल गांव और वे सारे स्टेडियम जहां खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे, बनकर पूरी तरह तैयार हैं। कहीं किसी तरह का कोई हीला-हवाला या किसी तरह की कोई कमी बाकी 

आपके पत्र

Posted On September - 7 - 2010 Comments Off on आपके पत्र
वक्त का तकाज़ा लाडो, गुडग़ांव विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत में संघर्ष कर रहा है। देश एक पॉलीटिकल हाईब्रिड में बदल गया है जहां अमीर, कार्पोरेट और राजसत्ता ने हाथ मिला लिये हैं। तीनों मिलकर आम आदमी को निचोड़ रहे हैं। उदासीनता के चलते युवाओं का राजनीति से मोह-भंग हो गया है। राजनीति से जुड़ी खबरों से उनकी दिलचस्पी घटती जा रही है। आज के युवाओं को नकारात्मक विचार त्यागकर, सकारात्मक 
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