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खास खबर
पानीदार आदिवासी इलाकों में अकाल की छाया

पानीदार आदिवासी इलाकों में अकाल की छाया

पर्यावरण विरोधी नीति अमरेंद्र किशोर कभी झारखंड का पलामू पानीदार था। पश्चिमी ओडिशा की आबोहवा में भी सालों भर नमी रहा करती थी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में पानी से उपजी खुशियां वहां के लोकगीतों में छलकती थीं। ये सभी आदिवासी बहुल इलाके हैं जहां कभी पानी संग्रह करने की तरह-तरह ...

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तनाव घटा मगर बाकी हैं चुनौतियां

तनाव घटा मगर बाकी हैं चुनौतियां

मल्लापुरम में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई शिखर वार्ता से चीन-भारत के रिश्तों में सुधार आने का अहसास हो रहा है। जबकि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर चीन ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के प्रति अपेक्षाकृत कम मैत्रीपूर्ण रुख अख्तियार किया था। हालांकि, ...

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सांसों पर संकट

सांसों पर संकट

प्रदूषण से निपटने को बने कारगर रणनीति यह नयी बात नहीं है। हर साल अक्तूबर के मध्य से नवंबर तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के अन्य भागों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब होने लगती है। दलील दी जाती है कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व उ.प्र. के किसान खेतों में ...

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कैंसर के खिलाफ जंग हुई अब आसान

कैंसर के खिलाफ जंग हुई अब आसान

चिकित्सा में नोबेल निरंकार सिंह इस साल चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार जिन तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की गयी है, उनकी खोज से अब कैंसर, एनीमिया और कोशिकाओं से जुड़ी हुई कई अन्य बीमारियों के इलाज का रास्ता खुलेगा। पुरस्कार के लिए चुने गये वैज्ञानिकों में अमेरिका के विलियम जी. केलिन ...

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विपक्षी बिखराव से आसान भाजपा की राह

विपक्षी बिखराव से आसान भाजपा की राह

दरअसल जब एक राजनीतिक दल या उसके नेतृत्व वाला गठबंधन केंद्र समेत देश के दो-तिहाई राज्यों की सत्ता पर काबिज हो और उसका प्रतिद्वंद्वी दल या उसके नेतृत्व वाला गठबंधन हाशिये पर खिसक चुका हो, तब दो राज्यों के विधानसभा चुनावों की बहुत ज्यादा राजनीतिक अहमियत तर्कसम्मत नहीं लगती। इसके बावजूद ...

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गरीबी का अर्थशास्त्र

गरीबी का अर्थशास्त्र

अभिजीत ने दिखाई मुक्ति की राह हर भारतीय के लिये गौरव का विषय है कि अमेरिका में बैठकर भी भारत में निर्धनता उन्मूलन के प्रयासों में लगे अभिजीत बनर्जी को गरीबी से मुक्ति के व्यावहारिक अर्थशास्त्र के लिये नोबेल पुरस्कार मिला है। यह भारत के लिये दोहरी खुशी है कि यह ...

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प्राथमिकी दूसरे राज्य में भेजे जाने पर सवाल

प्राथमिकी दूसरे राज्य में भेजे जाने पर सवाल

उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र अनूप भटनागर कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम का कानून बनने के छह साल बाद अब उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक रोचक मामला आया है। इस मामले में उच्च न्यायालय ने महिला पुलिस अधिकारी द्वारा पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी के खिलाफ कथित रूप से ...

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  • गरीबी के विस्तृत आयामों की अनदेखी
     Posted On October - 18 - 2019
    अर्थशास्त्र में वर्ष 2019 का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अभिजीत बनर्जी एवं एस्थर डफ्लो....
  • नोबेल हकदार इथियोपिया का ‘नेल्सन मंडेला’
     Posted On October - 18 - 2019
    आमतौर पर शांति के लिये दिये जाने वाले नोबेल पुरस्कार को लेकर यदा-कदा सवाल उठाये जाते हैं। खासकर राजनेताओं को....
  •  Posted On October - 18 - 2019
    दुनिया की ग़रीबी धन्य हुई कि उसकी ‘खैरख्वाही’ को नोटिस किया गया। न सिर्फ नोटिस किया गया बल्कि बरस्ते अर्थशास्त्र....
  •  Posted On October - 18 - 2019
    16 अक्तूबर को दैनिक ट्रिब्यून के सम्पादकीय पृष्ठ पर राजकुमार सिंह का ‘विपक्षी बिखराव से आसान भाजपा की राह’ लेख....

नवीकरणीय ऊर्जा के अनुकूल हों परिस्थितियां

Posted On September - 24 - 2019 Comments Off on नवीकरणीय ऊर्जा के अनुकूल हों परिस्थितियां
केंद्र सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा अथवा रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा दिया है। मुख्य कारण है कि कोयले से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जो ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनता है। तेल का हमें आयात करना पड़ता है और वह भी महंगा पड़ता है। परमाणु ऊर्जा भी हमारे लिए कठिन है क्योंकि रिहायशी इलाकों में इन संयंत्रों को लगाने में खतरा रहता है और हमारे ....

ह्यूस्टन की हुंकार

Posted On September - 24 - 2019 Comments Off on ह्यूस्टन की हुंकार
टेक्सास के ह्यूस्टन स्थित एनआरजी स्टेडियम में समृद्ध व सामर्थ्यवान पचास हजार भारतवंशियों के बीच सबसे बड़े तथा सबसे ताकतवर लोकतंत्रों के मुखियाओं की मौजूदगी भले ही पहली नजर में एक ‘रॉक कंसर्ट’ सी नजर आये, मगर इस आयोजन के गहरे निहितार्थ हैं। पहली बार कोई अमेरिकी राष्ट्रपति किसी दूसरे देश के मुखिया के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे। ....

जन संसद

Posted On September - 23 - 2019 Comments Off on जन संसद
देश के सभी नागरिक इसरो के प्रति एक सकारात्मक नजरिया रखते हैं। बात जब इसरो के मान-सम्मान की आई, तब पक्ष-विपक्ष सभी एकजुट होकर आगे आये और इसरो की प्रशंसा में पीछे नहीं रहे। सही मायनो में सकारात्मक नजरिया ही एकमात्र उपाय है जो हर तरह से सहायता प्रदान करता है। ....

एकदा

Posted On September - 23 - 2019 Comments Off on एकदा
नगर में बुद्ध का आगमन हुआ। हर्षोल्लास के वातावरण में नगर सम्राट के वजीर ने महाराज से अनुरोध किया—नगर में भगवान बुद्ध पधारे हैं। आप भी उनके स्वागत के लिए नगर द्वार पर चलिए। आप प्रजा के प्रतिनिधि हैं। सम्राट अपनी ठाठ-बाट की अकड़ में था। वजीर से बोला—ऐसे भिखमंगे, मांगकर खाने वाले के लिए मेरा जाना शोभा नहीं देता। उसे मेरे पास आना चाहिए। ....

सुविधा का फ्रेमवर्क

Posted On September - 23 - 2019 Comments Off on सुविधा का फ्रेमवर्क
सामाजिक विज्ञान को विज्ञान की उपाधि जरूर किसी ऐसे व्यक्ति ने दी होगी, जिसे लगा होगा कि विज्ञान को विज्ञान कहना डिस्क्रिमिनेशन हो चला है। विज्ञान और तार्किकता बुर्जुआ बन गए हैं। इस बात के मतलब में मत उलझिये। पहले गणित की कुछ बातें-एक साक्षात्कार में तीन लोग गए। ....

समय प्रबंधन से साकार इंद्रधनुषी सपने

Posted On September - 23 - 2019 Comments Off on समय प्रबंधन से साकार इंद्रधनुषी सपने
संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रसिद्ध उपन्यासकार और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अंग्रेजी के साहित्यकार अर्नेस्ट हेमिंग्वे के जीवन से जुड़ी एक घटना अति प्रेरणादायी है। कहते हैं कि अर्नेस्ट बचपन से ही अद‍्भुत प्रतिभा के धनी थे किंतु उनकी एक बहुत बड़ी कमजोरी थी। वे किसी भी कार्य को समय पर नहीं कर पाते थे। किसी कार्य को करने के लिए टालमटोल करना और उसके ....

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पहरेदारी का औचित्य

Posted On September - 23 - 2019 Comments Off on अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पहरेदारी का औचित्य
उस दिन यह किस्सा गायक-कलाकार और संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री शेखर सेन ने मुंबई के एक कार्यक्रम में सुनाया था। बात लगभग पैंतीस-छत्तीस साल पुरानी है। धर्मयुग के तत्कालीन संपादक धर्मवीर भारती के सुझाव पर तब के उभरते हुए कलाकार शेखर ने ‘पाकिस्तान के हिंदी कवियों’ की रचनाओं पर अाधारित एक कार्यक्रम तैयार किया था और कुछ अखबारों में इस बारे में सूचना ....

जनता द्वारे ‘सरकारें’

Posted On September - 23 - 2019 Comments Off on जनता द्वारे ‘सरकारें’
आखिरकार चुनाव आयोग ने हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करके चुनावी संग्राम को हरी झंडी दिखा दी। केंद्र में मोदी सरकार की वापसी, उसके बदलावकारी फैसलों तथा दोनों राज्यों में विपक्ष के बिखराव से उत्साहित भाजपा अर्से से चुनावी तैयारी में जुटी थी। ....

कविताएं

Posted On September - 22 - 2019 Comments Off on कविताएं
अमराइयों में वसंत क्षितिज के उस पार कहीं उसने बुलाया है लगता है फिर कहीं अमराइयों में वसंत आया है। सूखी टहनियों से आज फिर गुलाबी कोंपलें मुस्काई हैं ठिठुरती-सी, कुहासी सी धूप की देह आज फिर गदराई है। बगियों में फूलों की मधुशालाओं ने फिर, पवन के कदमों को लड़खड़ाया है लगता है, फिर कहीं अमराइयों में वसंत आया है। आंखें बनी झील, बनी पलकें तरणी-सी बही जाती हैं कल्पनाओं के कगारों से दूर तक ज़ाफरानी 

सरलता से अजूबों की बयानी

Posted On September - 22 - 2019 Comments Off on सरलता से अजूबों की बयानी
हिंदी में एक कहावत है, जितने मुंह उतनी बातें। इस कहावत का रूप बदलकर कह सकते हैं कि जितने मुंह उतने आश्चर्य। वैसे दुनिया में 7 अजूबे माने जाते हैं। लेखक गोविंद शर्मा ने अपनी रचना ‘कई अजूबे इस दुनिया में’ में कई ऐसे अजूबों का जिक्र किया है, जिनके बारे में अब तक हम अनभिज्ञ थे। इनमें कई तो हमारे देश में ही हैं, ....

भव्यता के रंगकर्म से संवाद

Posted On September - 22 - 2019 Comments Off on भव्यता के रंगकर्म से संवाद
रतन थियाम का नाम थियेटर की दुनिया में बड़ी श्रद्धा से लिया जाता है। उन्हें अग्रणी नाटककार एवं कवि के रूप में जाना जाता है। वर्ष 1974 में उन्होंने एनएसडी से स्नातक डिग्री हासिल की थी। फिर बाद में एनएसडी के निदेशक भी बने। अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजे जा चुके थियाम ने देश-विदेश के नामी लेखकों के नाटकों का मंचन भी किया। ....

विसंगतियों पर पैनी दृष्टि

Posted On September - 22 - 2019 Comments Off on विसंगतियों पर पैनी दृष्टि
लघुकथा लेखन में अपनी ज़मीन तलाशती लेखिका मधु गोयल की पहली पुस्तक ‘थरथर्राती बूंद’ में कुल 87 लघुकथाएं हैं जो हमारे आसपास के परिवेश पर केंद्रित हैं। इनमें से कई लघुकथाएं मन-मस्तिष्क को झिंझोड़ने में सफल होती दिखती हैं। बहरहाल, ‘तलाश’, ‘सूटेड-बूटेड’, ‘वर्दी वाले’, ‘दुआ-बद्दुआ’, ‘फैंसी ड्रेस’, ​’तिलक’, ‘चिंता की रेखा’, ‘ठंडी लाश जैसी कथाएं प्रभावशाली बन पड़ी हैं और कम शब्दों में कथा-विस्तार समेटे ....

दरकते हिमालय पर जिद्दी कदमों की दास्तान

Posted On September - 22 - 2019 Comments Off on दरकते हिमालय पर जिद्दी कदमों की दास्तान
धूमधारकांडी बेस कैंप पर बितायी आफत भरी रात के बाद जब यायावर कह डाले कि इस रात के दूसरे छोर पर भोर की पहली किरण उसके फना होने का वारंट लिए डटी थी, तो जान लीजिए कि रात वाकई कत्लेेआम पर उतारू थी। और हिमालय के ऐसे खतरनाक अभियान से लौटकर, उसकी पर्वत शृंखलाओं की चुनौतियों को लांघकर, उसकी वादियों को तककर, ....

वाम राजनीति का भटकाव

Posted On September - 22 - 2019 Comments Off on वाम राजनीति का भटकाव
भारत में वामपंथी राजनीति के उत्थान, विस्तार और फिर संकुचन की 70 वर्षों से अधिक पुरानी यात्रा को विद्वान पत्रकार और लेखक प्रफुल्ल बिदवई ने बड़ी सूक्ष्मता से जांचा और परखा है। लेखक ने वाम राजनीति की संघर्ष-यात्रा पर बहुत अधिकारपूर्वक लिखा है। उन्होंने उन निर्णायक बिंदुओं को भी स्पर्श किया है, जहां वामपंथी राजनीति के परवान चढ़ने की प्रबल संभावना थी। ....

प्रतिशोध

Posted On September - 22 - 2019 Comments Off on प्रतिशोध
‘जल्दी जल्दी चलो न।’ कुसु ने कुढ़ते हुए कहा। और इधर-उधर देखने लगा कि कहीं कोई पुलिस वाला तो नहीं आ रहा। ‘इतनी दूर है श्मशान घाट, टाइम तो लगेगा ही। बड़ी ही जल्दी पहुंचना था तो शनि सदन वालों का शव वाहन मंगवा लेना था।’ किसी ने दबे स्वर में कहा। ....

आपकी राय

Posted On September - 21 - 2019 Comments Off on आपकी राय
12 सितंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘संवेदनाओं को चुनौती देता चुटकी भर नमक’ पढ़कर मन सिहर उठा। माता-पिता अपने कलेजे के टुकड़ों को अध्यापक वृंद की कर्तव्यनिष्ठा के प्रति वफादारी के चलते संतान तुल्य बच्चों को शिक्षार्थ भेजा जाता है। नन्हे बालकों का शारीरिक, मानसिक विकास को कुछ लोग निजी स्वार्थ की भेंट चुटकी भर नमक चढ़ा देते हैं। ....
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