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खास खबर
आध्यात्मिक यात्रा में सहायक मुद्राएं

आध्यात्मिक यात्रा में सहायक मुद्राएं

डॉ. रमेश पुरी सत्संग, ध्यान, कीर्तन, सद्साहित्य का अध्ययन, चिंतन-मनन तो आध्यात्मिक यात्रा में सहायक हैं ही, मुद्राएं भी बहुत उपयोगी हैं। अन्य चीज़ों के लिए तो खास तरह के वातावरण या अलग-से समय की आवश्यकता होती है, लेकिन कई मुद्राएं आप कहीं भी, कभी भी आजमा सकते हैं। इनमें समय ...

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परोपकार को याद रखना भी ईश्वर का संदेश

परोपकार को याद रखना भी ईश्वर का संदेश

साई वैद्यनाथन इस दुनिया में लेना-देना, लाभ-हानि, उतार-चढ़ाव चलते रहते हैं। सभी को कभी न कभी किसी से मदद लेनी पड़ सकती है। लेकिन, अहसान को जल्द से जल्द और बराबर मात्रा में लौटाना महत्वपूर्ण है। भगवान कृष्ण हमें इन उदाहरणों में दिखाते हैं... भाइयों का बंधन : भगवान विष्णु ने जब ...

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उपवास के लिए साबूदाना व्यंजन

उपवास के लिए साबूदाना व्यंजन

कृष्णलता यादव मोती-से चमकीले दानों वाला साबूदाना विभिन्न रूपों में सेवन किया जाता है। फलाहार श्रेणी का होने के कारण इसका सर्वाधिक उपयोग व्रत-उपवास के समय किया जाता है। कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत, ऊर्जादायक, थकान हरने , शरीर के तापमान व रक्तचाप को नियंत्रित रखने आदि विशेषताओं के कारण यह रसोईघर ...

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हिंदी मन को भाये

हिंदी मन को भाये

बाल कविता अंग्रेजी विदेशी भाषा, मुझको रास ना आये। गणित के गुणा-भाग से, सिर मेरा चकराए। इतिहास सदा हमसे, गड़े मुर्दे उखड़वाये। विज्ञान निज प्रयोगों से, मेरे भेजे को खाये। संस्कृत है वैदिक भाषा, जननी हिंदी की कहलाये। हिंदी हमारी मातृभाषा, हिंदी मन को भाये। भूप सिंह 'भारती'

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इनसान से एक कदम आगे टेक्नोलॉजी

इनसान से एक कदम आगे टेक्नोलॉजी

कुमार गौरव अजीतेन्दु कैपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट के ताजा सर्वे में खुलासा हुआ है कि ग्राहक इनसानों से ज्यादा चैटबॉट की सहायता लेना पसंद कर रहे हैं। खासतौर पर तब जब वे कोई प्रोडक्ट खरीदने के लिए रिसर्च कर रहे हों, नई सर्विस के बारे में समझना चाहते हों या प्रोडक्ट खरीदने ...

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महिलाएं भी कर सकती हैं श्राद्ध!

महिलाएं भी कर सकती हैं श्राद्ध!

पितरों की सद‍्गति के लिए अकसर पुरुष ही श्राद्ध करते हैं। लेकिन, विशेष परिस्थितियों में महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती हैं। गरुड़ पुराण समेत कई ग्रंथों में इसका उल्लेख है। गरुड़ पुराण के अनुसार पति, पिता या कुल में कोई पुरुष सदस्य नहीं होने पर या उसके होने पर भी ...

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आज का एकलव्य

आज का एकलव्य

बाल कहानी गोविंद भारद्वाज मास्टर श्याम दसवीं कक्षा में गणित पढ़ा रहे थे। पढ़ाते-पढ़ाते उनका ध्यान खिड़की की ओर गया। उनको लगा कि कोई बाहर की तरफ खड़ा है। उन्होंने खिड़की से झांक कर देखा तो वहां कोई नज़र नहीं आया। अगले दिन जब उन्होंने पढ़ाना शुरू किया तो उनको लगा कि ...

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  • महिलाएं भी कर सकती हैं श्राद्ध!
     Posted On September - 15 - 2019
    पितरों की सद‍्गति के लिए अकसर पुरुष ही श्राद्ध करते हैं। लेकिन, विशेष परिस्थितियों में महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती....
  • इनसान से एक कदम आगे टेक्नोलॉजी
     Posted On September - 15 - 2019
    कैपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट के ताजा सर्वे में खुलासा हुआ है कि ग्राहक इनसानों से ज्यादा चैटबॉट की सहायता लेना पसंद....
  • विद्यालय जाने की खुशी
     Posted On September - 15 - 2019
    4 साल की थी मैं तब, मेरे माता-पिता ने मुझे स्कूल में दाखिल करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।....
  • सुडोकू से बढ़ाएं बच्चों की एकाग्रता
     Posted On September - 15 - 2019
    कई शोधों के नतीजे बताते हैं कि मस्तिष्क को नई, चुनौतीपूर्ण एवं उद्दीपन गतिविधियों से कुरेदते रहने पर वह ‘शार्प’....

गुस्से को ऐसे करें नियंत्रित

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on गुस्से को ऐसे करें नियंत्रित
अगर आपको लगता है कि आप अपने गुस्से को नियंत्रित करने में असमर्थ हो रहे हैं तो नीचे दिए गए कुछ बिंदुओं को आजमाकर देखें। इन्हें आजमाकर आप न सिर्फ अपने गुस्से को नियंत्रित कर सकेंगे बल्कि आपके व्यक्तित्व में भी सुधर होंगे। गुस्से में खर्च होने वाली अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में ले जाएं। व्यायाम इसका सबसे अच्छा जरिया है। रोज एक सीमित समयावधि के नियम से व्यायाम करें, ऐसा करके आपका 

गुस्से से भी भरी है नई पीढ़ी

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on गुस्से से भी भरी है नई पीढ़ी
मल्टी नेशनल कंपनी में अच्छी पोस्ट पर कार्यरत नमन के पास जीवन की लगभग हर खुशी है। रहने के लिए एक अच्छा घर, पढ़ी-लिखी, समझदार बीवी व पांच साल का प्यारा-सा बेटा। आर्थिक रूप से काफी मजबूत नमन ऑफिस में भी अच्छा परफोर्मेंस देता है। लेकिन उसकी एक आदत से घर और ऑफिस में उसके सहयोगी सभी परेशान रहते हैं। नमन स्वंय ही अपनी इस आदत से काफी परेशान है। यह आदत है छोटी-छोटी बातों पर अकसर नमन को गुस्सा 

बाल कविताएं

Posted On March - 24 - 2010 Comments Off on बाल कविताएं
अप्रैल फूल अप्रैल फूल के दिन, बंदर के आया मन में। गधे को बनाता हूं फूल, वही मूर्ख है वन में। गधे को दिया न्यौता, कहा, ‘आज घर आना। दावत दे रहा हूं सबको, पकवान बने हैं ना ना।’ सुनकर गधा गदगद हुआ, मुंह से टपकी लार। पहना कोट, बांधी टाई, खूब किया शिंगार। तय समय पर पहुंच गया, वह बंदर के घर। देखा जब सिर चकराया, ताला था द्वार पर। शर्मसार सा हुआ गधा, मुंह में बुदबुदाया। ‘आज तो है अप्रैल फूल, बंदर 

‘सिरसा जिला में लगेंगे 40 करोड़ की लागत से दो ‘वाटर ट्रीटमेंट प्लांट’

Posted On March - 22 - 2010 Comments Off on ‘सिरसा जिला में लगेंगे 40 करोड़ की लागत से दो ‘वाटर ट्रीटमेंट प्लांट’
गांव केलनियां में 60 लाख की लागत से खेल स्टेडियम की घोषणा सिरसा, 21 मार्च (निस)। सिरसा शहर से 5 किलोमीटर दूर केलनियां गांव में 25 करोड़ रुपए की लागत से जर्मन तकनीक पर आधारित ‘वाटर ट्रीटमैंट प्लांट’ लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त शहर के निकटवर्ती गांव बेगू में भी 15 करोड़ रुपए की लागत से एक अन्य ‘वाटर ट्रीटमैंट प्लांट’ की स्थापना की जाएगी। इन दोनों प्लांटों की राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति 

कविताएं

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on कविताएं
एक शबनमी सुबह नभ से टपककर आ गई एक और सुबह एक सुबह शबनमी फैल गई अफवाह सी गंध… हर श्रृंगार की सब जगह। शिशिर का कातर करुण स्वर उड़ा इधर उधर हलद पांखियों संग सूरज बरसाने लगा बस्ती में जागृति का रंग। झील शांत है- पर बोल रही कितने अनकहे बोल पवन पूछ रही पीपल के पत्तों से स्पंदन का मोल। धूप की चिरैया मुंडेर पर उड़ आई किरनों ने विदा किया ठिठुरन को-कहती ‘गुडबाईÓ चमचम पीतल के कुंभ लिए घूम रही 

वास्तुसमाधान

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on वास्तुसमाधान
मैं पिछले काफी समय से अपने व्यवसाय के बारे में सोच रहा हूं, परन्तु कुछ समझ नहीं आ रहा है। कृपया आप ही कोई सुझाव दें, जन्मतिथि 1.12.1980 है? -जिंदल, अ ब स — जिंदल जी, जन्मकुंडली के मुताबिक आपके लिए खुशबू से संबंधित कार्य जैसे कॉस्मेटिक, फूलों का व्यवसाय या अन्य कार्य शुभ हैं। अपने व्यवसाय का नाम किसी देवी के नाम से रखें। शुभ फल देगा। बैठने के स्थान पर लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति  अवश्य रखें तथा रोजाना 

गहरे पानी पैठ

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on गहरे पानी पैठ
डा. ज्ञानचंद्र शर्मा राम कथा सुंदर करतारी तीन दिन बाद राम नवमी को रामचरित मानस की जयंती है। सम्वत् 1631 को अयोध्या में इसका प्रथम प्रकाश हुआ था। राम कथा युगों से लोकमानस में बसी हुई है। नाना पुराण निगम-आगम आदि में इसका वर्णन मिलता है। इसमें कुछ और अपनी ओर से मिलाकर गोस्वामी तुलसीदास ने अपने अंत:करण के सुख के लिए जन भाषा में प्रस्तुत किया है। नाना पुराण निगमागम सम्मत यद्रामायणे 

राम नवमी

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on राम नवमी
राम नवमी पावन पर्व मनाएं, श्रीराम, रघुवर का चरित अपनाएं। राम महान, महान रामचरित, जैसे जल से पवित्र गंगा सरित। हरित धरा ज्यों सावन के आये, राम नवमी पावन पर्व मनाएं। कैकई, सुमित्रा जी के प्यारे, आंखों के तारे कौशल्या के बताएं। रामायण के सभी पात्र-चरित्र, संस्कृति में हैं अमर-पवित्र। सर्वत्र सब उनके गुण गाएं, राम नवमी पावन पर्व मनाएं। शिक्षादायक यह पर्व प्यारा, रवि, शशि ज्यों करे उजियारा। तारा, 

तीन बातें

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on तीन बातें
भीलपुर नामक एक छोटा-सा गांव था। यह गांव चारों तरफ पहाडिय़ों से घिरा हुआ था अत: इतना विकसित नहीं था। लोगों को अपनी दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं लाने के  लिए भी आस-पड़ोस के कस्बों में जाना पड़ता था। वहां लगने वाली पैंठ (स्थानीय बाजार) से वे रोजमर्रा की वस्तुएं ले आते। वहां एक जुलाहा अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनकी कोई संतान नहीं थी। वे बहुत गरीब थे। अत्यधिक मेहनत करने के बाद ही वे दो वक्त की 

शहीद भगतसिंह

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on शहीद भगतसिंह
भगतसिंह का मकसद था गुलामी को दूर करना, सीखा नहीं था उसने कभी जुल्म के आगे डरना। जलियांवाला वृतांत के बाद मन में थी बड़ी नफरत, अंग्रेज सरकार को ललकारा उसने की बगावत। लाला जी की मौत देखकर भगत ने ली कसम, जब तक न सांडर्स को मारे नहीं लेगा वह दम। इरादे को दिया अंजाम भगतसिंह ने आखिरकार, इंकलाब के नारे लगाता वहीं तना रहा सरदार। भगत, सुखदेव, राजगुरु तीनों को फांसी लटकाया, इनकी कुरबानी ने अंत में देश 

गजलें

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on गजलें
चांद हो चांदनी हो और क्या हो मेरे लिए, प्यास बुझा जाती है जैसे घटा हो मेरे लिए। दर्द से सींचा जिसे धड़कन से संवारा है जिसे, ऐसे माहौल में उगता हुआ बूटा हो मेरे लिए। तुम तो बस तुम हो, नहीं तुम सा कोई जहां में, सारे जहां को समेटकर दिल बना लिया है मेरे लिये। तुम्हारे होने से बहार, न होने से पतझर है, तुम ही मेरी उम्मीद, मेरी वफा का सिला मेरे लिये। कैसे उड़े आजाद परिंदा, अपनी परवा लेकर, तुम हो आकाश 

नव संवत्

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on नव संवत्
नव संवत् सड़सठ है आया, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन मन भाया। चारों तरफ फसलें पकी, सरसों, गेहूं की बाली झुकी, रुकी सर्द हवा ने बसंत मनाया, नव संवत् सड़सठ है आया। बजट सत्र, परीक्षा की घड़ी, वित्त, चित्त की चिंता बड़ी, पड़ी शांत फाग, नवरात्र नियराया, नव संवत् सड़सठ है आया। मौसम सुहाना सुहानी बयार, बढऩे लगता सृष्टिï में प्यार। चार दिन की चांदनी ज्यों सुख छाया, नव संवत् सड़सठ है आया। मलमास वैशाख 

मत सो

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on मत सो
अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो, सुबह हो गई, अब मत सो। लो प्रभु का नाम, तुम पहले, सबको फिर प्रणाम कह लें। दांतुन मंजन, कर लें पेस्ट, समय करें नजारा भी वेस्ट। शुद्ध जल से करें स्नान, फिर करें प्रभु का ध्यान। करें नाश्ता बड़े भाव से, जाएं स्कूल में बड़े चाव से। —डा. अनिल ‘सवेरा’  

सगाई

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on सगाई
बीहड़ वन में राजकुंवर की हो रही आज सगाई, सारी प्रजा झूम रही है दे रही उन्हें बधाई। होना था इस अवसर पर एक सुखद ऐलान, जंगलवासी उत्सुक बैठे थे खोले अपने कान। नियत समय पर आए राजा सहित अपने परिवार, सारी भीड़ खड़ी होकर के करने लगी जय-जयकार। एक कौड़ी भी तिलक न लेंगे बोले हंसकर वनराज, अच्छी सुघड़ बहू मिली है करेगी निज गृह काज। नेक सलाह मानो सब मेरी सुन लो प्यारे भाई, दहेज रूपी इस दानव की कर दो आज 

तारों को कैसे मापा जाता है?

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on तारों को कैसे मापा जाता है?
”दीदी, पृथ्वी के जो सबसे करीब तारा है वह भी साढ़े चार लाइट-ईयर्स या प्रकाशवर्ष की दूरी पर है। एक प्रकाश वर्ष लगभग 6,000,000,000,000 मील का होता है। अब अगर तारे इतनी दूरी पर हैं तो हम यह कैसे माप सकते हैं कि वह कितने बड़े हैं, वह किस चीज के बने हैं, वगैरह-वगैरह।’ ”एक समय था जब खगोलशास्त्रियों के पास केवल एक ही यंत्र था- टेलिस्कोप। आज उनके पास विशेष यंत्र मौजूद हंै जिनकी मदद से तारों की गति, चमक, रंग, 

विज्ञान के झरोखे से

Posted On March - 13 - 2010 Comments Off on विज्ञान के झरोखे से
बच्चो, विज्ञान से संबंधित कुछ रोचक प्रश्नोत्तर नीचे दिए जा रहे हैं जो तुम्हारे ज्ञान में वृद्धि करने में सहायक होंगे। 0 आइसक्रीम का सेवन हानिकारक क्यों है? —आïइसक्रीम का सेवन हानिकारक होता है। इसमें प्रयुक्त रासायनिक तत्व स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह रहते हैं। आइसक्रीम में तीस प्रतिशत बिना उबला तथा बिना छना पानी, छह प्रतिशत चर्बी और सात-आठ प्रतिशत शक्कर होती है। इसके अतिरिक्त