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खास खबर
गुस्से से मिली सीख

गुस्से से मिली सीख

वर्षा रानी हमारे समय में बच्चों का पांच वर्ष की उम्र में स्कूल में दाखिला होता था। मेरी बहन उस समय दूसरी कक्षा में पढ़ती थी। मां उसे रोज़ सुबह नहला-धुलाकर, साफ-सुथरे कपड़े पहनाकर स्कूल भेजती थी। मैं सोचती थी कि मेरे रोने-धोने की तो बात ही नहीं, क्योंकि मेरी बहन ...

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'किसी कमज़ोर पर कभी मत हंसना'

'किसी कमज़ोर पर कभी मत हंसना'

विद्या बात तब की है जब मैं 10वीं की छात्रा थी। पढ़ाई में मन कम लगता तो खेल-कूद के लिये गली में बच्चों को तलाश शुरू हो जाती। पड़ोस में रहने वाले एक परिवार के बच्चों के साथ खासा मेलजोल और खेलना कूदना होता रहता था। एक अन्य घर में दो ...

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किताबों से दोस्ती

किताबों से दोस्ती

ललित शौर्य मंगलवन के राजा शेर सिंह के तीन बच्चे थे। मोंटी, चिंटू और मिंटू। तीनों ही बड़े शरारती थे। मोंटी और चिंटू पढ़ने-लिखने में बहुत होशियार थे। दोनों नियमित स्कूल भी जाते थे लेकिन मिंटू अपनी ही दुनिया में खोया रहता था। उसे स्कूल से कोई मतलब नहीं था। पढ़ाई-लिखाई ...

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बुज़ुर्गों के अधिकार

बुज़ुर्गों के अधिकार

मधु गोयल बुजुर्गों के प्रति आज की पीढ़ी असंवेदनशील होती जा रही है। ऐसे में बहुत ज़रूरी है कि बुज़ुर्गों के प्रति उनके अधिकारों के लिए जानकारी मुहैया कराई जाए। दिन-प्रतिदिन बुजुर्गों के प्रति लापरवाही के केस बढ़ते जा रहे हैं। बच्चे मां-बाप को संपत्ति से बेदखल कर दर-दर की ठोकरें ...

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लज़्जत से भरपूर देसी ज़ायका

लज़्जत से भरपूर देसी ज़ायका

कृष्णलता यादव अगर बरसात के मौसम में बाहर कीचड़ व फिसलन की धमाचौकड़ी हो, घर में कोई सब्जी नहीं, सब्जीवाला भी नहीं आया, फिर ऐसे में कौन-सी सब्जी बनाई जाए? ऐसे में जवाब है— बेसन के गट्टे। सामग्री : तीन-चौथाई कप बेसन, नमक-मिर्च-हल्दी स्वादानुसार, आधा चम्मच गर्म मसाला, एक-चौथाई कप दही, दो ...

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बच्चों को सिखायें डे टू डे मैनर्स

बच्चों को सिखायें डे टू डे मैनर्स

स्वाति गुप्ता हम सभी चाहते हैं कि हमारा बच्चा खाने के बाद अपनी प्लेट खुद उठाकर रखे, खिलौनों से खेलने के बाद उसे वापस अपनी जगह पर रख दें, दिन में दो बार ब्रश करे। लेकिन यह सब इतना आसान नहीं होता। बच्चों को ये सब बातें हमें छुटपन से ही ...

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बाल कविता

बाल कविता

धरती के आभूषण पेड़ आओ मिलकर पेड़ लगाएं। पेड़ लगाकर धरा सजाएं॥ हरी-भरी तब होगी डाली। पौधों की जब हो रखवाली॥ पेड़ों-सा कोई न साथी। पेड़ हमारे बने हिमाती॥ धरती के आभूषण पेड़। प्रदूषण के दुश्मन पेड़॥ तरुवर ही है जीवन दाता। इनसे अपना पावन नाता॥ शुद्ध हवा हमको देते हैं। बदले में न कुछ लेते हैं॥ मेघ बुलाकर वर्षा करते। पोखर ताल-तलैया भरते॥ हम ...

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  • आज़ादी से नौकरी
     Posted On August - 18 - 2019
    नौकरी अगर मनमाफिक नहीं है तो प्रचलित कहावतों और मुहावरों में हमेशा ही तुच्छ मानी गई है चाहे वह सरकारी....
  • सार्वजनिक स्थल पर शिष्टाचार
     Posted On August - 18 - 2019
    प्राचीन समय से बुजुर्ग हमें विनम्र और शालीन व्यवहार की शिक्षा देते आ रहे हैं। शिष्टाचारपूर्ण किया गया व्यवहार....
  • ओ रे… कन्हैया
     Posted On August - 18 - 2019
    अद‍्भुत था श्री कृष्ण का बाल्य जीवन। उनका मनमोहक चेहरा, अनुपम मुस्कान, बांसुरी और उनका नृत्य ऐसा था कि लोग....
  • नयी खोजों का दौर जारी
     Posted On August - 18 - 2019
    पॉकेट वीडियोगेम का भी एक ज़माना हुआ करता था। बाद में उसकी जगह मोबाइल फोन गेम्स ने ले ली और....

विज्ञान के झरोखे से

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on विज्ञान के झरोखे से
-घमंडीलाल अग्रवाल बच्चो, विज्ञान से संबंधित कुछ रोचक प्रश्नोत्तर नीचे दिए जा रहे हैं जो तुम्हारे ज्ञान में वृद्धि करने में सहायक सिद्ध होंगे। मोबाइल फोन त्वचा संबंधी रोग क्यों उत्पन्न करते हैं? — मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल करने वाले लोगों की त्वचा में खुजली से संबंधित शिकायतें उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फोन का प्रयोग करने वालों के चेहरे और 

कविताये

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on कविताये
अप्रैल फूल अप्रैल फूल के दिन, बंदर के आया मन में। गधे को बनाता हूं फूल, वही मूर्ख है वन में। गधे को दिया न्यौता, कहा, ‘आज घर आना। दावत दे रहा हूं सबको, पकवान बने हैं ना ना।’ सुनकर गधा गदगद हुआ, मुंह से टपकी लार। पहना कोट, बांधी टाई, खूब किया शिंगार। तय समय पर पहुंच गया, वह बंदर के घर। देखा जब सिर चकराया, ताला था द्वार पर। शर्मसार सा हुआ गधा, मुंह में बुदबुदाया। ‘आज तो है अप्रैल फूल, बंदर ने खूब 

बाल कहानी

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on बाल कहानी
भूल का अहसास यह प्रेरक प्रसंग महाभारत काल का है। एक बार की बात है। पांडु पुत्र  युधिष्ठिïर अपने चारों भाइयों— भीम, अर्जुन, नकुल व सहदेव के साथ बैठे हुए थे और विविध विषयों पर विचार-ïविमर्श कर रहे थे। बातचीत  के दौरान नाना प्रकार के प्रसंग आ रहे थे— कभी गूढ़ विषय पर बातचीत होने लगती, तो कभी कोई हास्य प्रसंग आ जाता। पांचों भाइयों में भीम विशाल शरीर वाले थे, लेकिन बेहद मजाकिया स्वभाव 

डांस पे चांस!

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on डांस पे चांस!
यशराज कैंप की चर्चित फिल्म ‘रब ने बना दी जोड़ी’ हालांकि बॉक्स ऑफिस पर पिट गई, लेकिन इस फिल्म ने कम से कम यह मैसेज देने की कोशिश तो की कि अगर सलीके से नाचना-गाना आए, तो किसी का भी दिल जीता जा सकता है। फिल्म का यह गाना तब खूब चला था— ‘वो बंदा ही क्या है जो नाचे ना गाए… आ हाथों में तू हाथ थाम ले, ओए डांस पे चांस मार ले!’ इस संदर्भ में हम कह सकते हैं कि बॉलीवुड के फिल्मकारों ने हमेशा ही 

नानाजी देशमुख एक ऋषि-पुरुष का अवसान

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on नानाजी देशमुख एक ऋषि-पुरुष का अवसान
1977 के लोकसभा चुनावों के बाद की बात है। बलरामपुर (उप्र)की रानी राजलक्ष्मी अपने महल में उदास बैठी थीं। मतदाताओं ने चुनाव मैदान में उतरे कई दूसरे सूरमाओं की तरह रानी के खाते में भी शिकस्त लिख दी थी और रानी के निकट यह कुछ ज्यादा ही अपमानजनक बात थी क्योंकि ऐसा उनके गृह क्षेत्र के मतदाताओं ने किया था। वे बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की प्रत्याशी थीं और कांग्रेसविरोधी लहर के बावजूद 

वास्तु समाधान

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on वास्तु समाधान
-पी. खुराना मेरी जन्मतिथि 12 जून, 1964 है। मैं अपने घर की दिशाओं का विवरण दे रहा हूं। कृपया बताएं कि कोई वास्तु दोष तो नहीं है, क्योंकि मैं बीमार रहता हूं। -सुरेश, भिवानी सुरेश जी, जो विवरण आपने दिया है उसमें तो कोई वास्तु दोष वाली बात नहीं है परन्तु  आपकी जन्म तिथि इस प्रकार है कि आपको जल्द ही मानसिक तनाव हो जाता है। आप अपने शयनकक्ष में पलंग दक्षिण दीवार के साथ लगायें, सोते 

गजलें

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on गजलें
बात दिल की दिल में दबी रहने दे, आंखों में थोड़ी सी नमी रहने दे। दुआएं देंगी तितलियां गुलशन की, फूलों में थोड़ी खुशबू बसी रहने दे। रोशन करती है  जहां शमां जलकर, इक लौ दिल में भी जलती रहने दे। हो जाए न शर्मसार आईना देखकर, थोड़ी गैरत तो आंखों में बची रहने दे। रोटी की जद्दोजहद में माना हंसना मुहाल हुआ, होंठों पर फिर भी मुस्कान सजी रहने दे। माना कि आरजू है तेरी आसमां छूने की, ‘प्रीत‘कदमों तले 

गहरे पानी पैठ

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on गहरे पानी पैठ
डा. ज्ञानचंद्र शर्मा सपने और हकीकत उर्दू की किसी पाठ्य-ïपुस्तक में ‘सोते-जागते की दास्तान’ नाम की एक कहानी पढ़ी थी। इसके मुख्य पात्र का नाम संभवत: अबुल हसन था। वह कोई काम नहीं करता था। उसकी मां दिन भर मेहनत कर जो कुछ कमा कर लाती, वह घर में निठल्ला बैठा, मजे से उड़ाता। एक दिन खा-पीकर वह बे$िफक्र गहरी नींद सो रहा था कि कुछ परियां उसे उठा कर अपनी शहजादी के पास ले गईं। उसे नहला 

गुस्से को ऐसे करें नियंत्रित

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on गुस्से को ऐसे करें नियंत्रित
अगर आपको लगता है कि आप अपने गुस्से को नियंत्रित करने में असमर्थ हो रहे हैं तो नीचे दिए गए कुछ बिंदुओं को आजमाकर देखें। इन्हें आजमाकर आप न सिर्फ अपने गुस्से को नियंत्रित कर सकेंगे बल्कि आपके व्यक्तित्व में भी सुधर होंगे। गुस्से में खर्च होने वाली अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में ले जाएं। व्यायाम इसका सबसे अच्छा जरिया है। रोज एक सीमित समयावधि के नियम से व्यायाम करें, ऐसा करके आपका 

गुस्से से भी भरी है नई पीढ़ी

Posted On March - 28 - 2010 Comments Off on गुस्से से भी भरी है नई पीढ़ी
मल्टी नेशनल कंपनी में अच्छी पोस्ट पर कार्यरत नमन के पास जीवन की लगभग हर खुशी है। रहने के लिए एक अच्छा घर, पढ़ी-लिखी, समझदार बीवी व पांच साल का प्यारा-सा बेटा। आर्थिक रूप से काफी मजबूत नमन ऑफिस में भी अच्छा परफोर्मेंस देता है। लेकिन उसकी एक आदत से घर और ऑफिस में उसके सहयोगी सभी परेशान रहते हैं। नमन स्वंय ही अपनी इस आदत से काफी परेशान है। यह आदत है छोटी-छोटी बातों पर अकसर नमन को गुस्सा 

बाल कविताएं

Posted On March - 24 - 2010 Comments Off on बाल कविताएं
अप्रैल फूल अप्रैल फूल के दिन, बंदर के आया मन में। गधे को बनाता हूं फूल, वही मूर्ख है वन में। गधे को दिया न्यौता, कहा, ‘आज घर आना। दावत दे रहा हूं सबको, पकवान बने हैं ना ना।’ सुनकर गधा गदगद हुआ, मुंह से टपकी लार। पहना कोट, बांधी टाई, खूब किया शिंगार। तय समय पर पहुंच गया, वह बंदर के घर। देखा जब सिर चकराया, ताला था द्वार पर। शर्मसार सा हुआ गधा, मुंह में बुदबुदाया। ‘आज तो है अप्रैल फूल, बंदर 

‘सिरसा जिला में लगेंगे 40 करोड़ की लागत से दो ‘वाटर ट्रीटमेंट प्लांट’

Posted On March - 22 - 2010 Comments Off on ‘सिरसा जिला में लगेंगे 40 करोड़ की लागत से दो ‘वाटर ट्रीटमेंट प्लांट’
गांव केलनियां में 60 लाख की लागत से खेल स्टेडियम की घोषणा सिरसा, 21 मार्च (निस)। सिरसा शहर से 5 किलोमीटर दूर केलनियां गांव में 25 करोड़ रुपए की लागत से जर्मन तकनीक पर आधारित ‘वाटर ट्रीटमैंट प्लांट’ लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त शहर के निकटवर्ती गांव बेगू में भी 15 करोड़ रुपए की लागत से एक अन्य ‘वाटर ट्रीटमैंट प्लांट’ की स्थापना की जाएगी। इन दोनों प्लांटों की राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति 

राम नवमी

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on राम नवमी
राम नवमी पावन पर्व मनाएं, श्रीराम, रघुवर का चरित अपनाएं। राम महान, महान रामचरित, जैसे जल से पवित्र गंगा सरित। हरित धरा ज्यों सावन के आये, राम नवमी पावन पर्व मनाएं। कैकई, सुमित्रा जी के प्यारे, आंखों के तारे कौशल्या के बताएं। रामायण के सभी पात्र-चरित्र, संस्कृति में हैं अमर-पवित्र। सर्वत्र सब उनके गुण गाएं, राम नवमी पावन पर्व मनाएं। शिक्षादायक यह पर्व प्यारा, रवि, शशि ज्यों करे उजियारा। तारा, 

तीन बातें

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on तीन बातें
भीलपुर नामक एक छोटा-सा गांव था। यह गांव चारों तरफ पहाडिय़ों से घिरा हुआ था अत: इतना विकसित नहीं था। लोगों को अपनी दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं लाने के  लिए भी आस-पड़ोस के कस्बों में जाना पड़ता था। वहां लगने वाली पैंठ (स्थानीय बाजार) से वे रोजमर्रा की वस्तुएं ले आते। वहां एक जुलाहा अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनकी कोई संतान नहीं थी। वे बहुत गरीब थे। अत्यधिक मेहनत करने के बाद ही वे दो वक्त की 

शहीद भगतसिंह

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on शहीद भगतसिंह
भगतसिंह का मकसद था गुलामी को दूर करना, सीखा नहीं था उसने कभी जुल्म के आगे डरना। जलियांवाला वृतांत के बाद मन में थी बड़ी नफरत, अंग्रेज सरकार को ललकारा उसने की बगावत। लाला जी की मौत देखकर भगत ने ली कसम, जब तक न सांडर्स को मारे नहीं लेगा वह दम। इरादे को दिया अंजाम भगतसिंह ने आखिरकार, इंकलाब के नारे लगाता वहीं तना रहा सरदार। भगत, सुखदेव, राजगुरु तीनों को फांसी लटकाया, इनकी कुरबानी ने अंत में देश 

कविताएं

Posted On March - 21 - 2010 Comments Off on कविताएं
एक शबनमी सुबह नभ से टपककर आ गई एक और सुबह एक सुबह शबनमी फैल गई अफवाह सी गंध… हर श्रृंगार की सब जगह। शिशिर का कातर करुण स्वर उड़ा इधर उधर हलद पांखियों संग सूरज बरसाने लगा बस्ती में जागृति का रंग। झील शांत है- पर बोल रही कितने अनकहे बोल पवन पूछ रही पीपल के पत्तों से स्पंदन का मोल। धूप की चिरैया मुंडेर पर उड़ आई किरनों ने विदा किया ठिठुरन को-कहती ‘गुडबाईÓ चमचम पीतल के कुंभ लिए घूम रही 
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