भगौड़े को पकड़ने गयी पुलिस पर हमला, 3 कर्मी घायल !    एटीएम को गैस कटर से काट उड़ाये 12.61 लाख !    कुल्लू में चरस के साथ 2 गिरफ्तार !    बारहवीं की छात्रा ने घर में लगाया फंदा !    नेपाल को 56 अरब नेपाली रुपये की मदद देगा चीन !    इस बार अब तक कम जली पराली !    पीएम की भतीजी का पर्स चुरा सोनीपत छिप गया, गिरफ्तार !    फरसा पड़ा महंगा, जयहिंद को आयोग का नोटिस !    महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रचार करेंगी मायावती !    ‘गांधीजी ने आत्महत्या कैसे की?’ !    

लहरें › ›

खास खबर
पाप का अंत

पाप का अंत

बाल कविता दस शीश का दशानन ना एक शीश बचा पाया। राम ने जीत लंका सत्य का परचम फहराया। झूठ कभी जीते ना सामने कभी सच्चाई के। दुष्ट ही सदैव झुके सामने यहां अच्छाई के। जब-जब भी पाप बढ़ा लिया ईश्वर ने अवतार। राम और कृष्ण हुए मिटा दुष्टों का अत्याचार। बच्चों तुम जीवन में भगवान राम सरीखे बनो। राह अपनी नित्य ही सच पर चलने ...

Read More

स्वाद में सेहत वाला तड़का

स्वाद में सेहत वाला तड़का

दीप्ति त्योहारों का मौसम है। ऐसे में मीठा तो हर घर में बनता है। खासकर जब हलवे की बात हो तो इसके अलग-अलग ज़ायके हमारे मुंह में पानी भर देते हैं। घीया (लौकी) का हलवा सामग्री - लोकी-तीन कप (ग्रेटैड), मिल्क पाउडर-आधा कप, इलायची पाउडर - एक छोटा चम्मच, चीनी- दो बडे़ चम्मच, ...

Read More

हेल्थ और सिक्योरिटी के इनोवेटिव रास्ते

हेल्थ और सिक्योरिटी के इनोवेटिव रास्ते

कुमार गौरव अजीतेन्दु दिल की बीमारियां हमेशा खतरनाक होती हैं, इसलिए अब इनसे लड़ने के लिए भी टेक्नोलॉजी ने अपने कदम आगे बढ़ा दिए हैं जो भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक की जानकारी दे रही है। थी-डी प्रिंटिंग हार्ट से ट्रांसप्लांट के लिए लगी कतार को कम करने की कोशिश ...

Read More

नानी से बचत की सीख

नानी से बचत की सीख

याद रही जो सीख विकास बिश्नोई जब मैं स्कूल में पढ़ा करता था तो लगभग हर तीन से चार महीने के बाद मैं और भाई मां के साथ नानी के पास जाया करते थे। नानी हमें बहुत प्यार करती थी। वहां जाते ही हम खूब खेलते थे और हर रोज शाम को ...

Read More

अविस्मरणीय यादें

अविस्मरणीय यादें

स्कूल में पहला दिन शोभा गोयल जीवन की अविस्मरणीय यादों में एक होती है स्कूल में पहले दिन की याद। उस जमाने में 5-6 साल के बच्चे को प्रथम कक्षा में एडमिशन मिलता था। पहले दिन मेरी मम्मी मुझे स्कूल छोड़ कर चली गयी। पहला दिन और अजनबी स्कूल में अजनबी बच्चे। ...

Read More

पड़ोसी के बच्चे से न करें तुलना

पड़ोसी के बच्चे से न करें तुलना

पेरेंटिंग सुभाष चन्द्र सौम्या आज सहमी-सहमी है अपने घर में। शाम को पिताजी भी घर आए। लेकिन, उनसे भी बात नहीं कर रही है। आखिर क्या हुआ उसे? पिता जी ने एक बार पूछा। कोई जवाब नहीं दिया सौम्या ने। खाने की टेबल पर भी गुमसुम। वैसे, गुमसुम रहना सौम्या की आदत नहीं। ...

Read More

मतभेद हों, मनभेद नहीं

मतभेद हों, मनभेद नहीं

रिश्ते मोनिका शर्मा रिश्तों में टकराव की स्थिति जब बनती है तो मतभेद हो ही जाते हैं। फिर चाहे वह सहकर्मी से हों, किसी रिश्तेदार से या परिवार से, मतभेद को समझदारी से सुलझाना ज़रूरी है। ऐसा नहीं किया तो पुरानी बातें कब गांठ बनकर मनभेद में बदल जाएं, पता ही नहीं ...

Read More


वास्तु समाधान

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on वास्तु समाधान
* मेरा घर पूर्व की तरफ व गोमुखी है फिर भी घर के हालात बिल्कुल खराब चल रहे हैं। मेरी जन्म तिथि 18 जून, 1967 है। – कुलदीप, लुधियाना – कुलदीप जी,यह एक सामान्य धारणा है। इस धारणा के पीछे तर्क यह है कि सूर्य जो ब्रह्मांड में सभी प्रकार की ऊर्जा का स्रोत है, इन घरों को अधिकतम ऊर्जा प्रदान करता है जबकि काफी कुछ मुख्यद्वार की स्थिति, जल स्रोत, रसोईघर व शौचालय आदि की स्थिति पर भी निर्भर 

कविताएं

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on कविताएं
शहर इस शहर की सीमाएं आपस में कितनी घुलमिल गई हैं इस दौरान हमारे बीच फासले कितने बढ़ गए हैं हम कितने अजनबी होते जा रहे हैं तुम्हारे साथ रहकर भी तुम्हारे साथ होने का अहसास अब क्यूं नहीं होता तुम से जल्दी-जल्दी मिलने का वह उतावलापन अब क्यूं नहीं रहता कहीं यह हमारे सामीप्य की चरम सीमा तो नहीं कहीं यह वह मोड़ तो नहीं जहां से हमें पुन: एक दूसरे से बहुत दूर छिटक जाना है। -जसविन्दर शर्मा यह 

जड़ों से कटते लोग

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on जड़ों से कटते लोग
गहरे पानी पैठ डा. ज्ञानचंद शर्मा भारत उत्सवों, पर्वों और त्योहारों का देश है। यहां साल के तीन सौ पैंसठ दिनों में तीन सो छियासठ पर्व होते हैं। कहावत है  ‘सदा दीवाली साधू की आठों पहर बसंत।’ कवि बच्चन की ‘मधुशाला’ में तो इनकी संख्या सात सौ तीस हो जाती है- ‘दिन में होली, रात दीवाली रोज मनाती मधुशाला’ त्योहार किसी समाज की सांस्कृतिक सम्पन्नता और आर्थिक समृद्धि के द्योतक 

कब से बन रही हैं बहुमंजिला इमारतें

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on कब से बन रही हैं बहुमंजिला इमारतें
क्वेश्चन क्लब नयनतारा दीदी के जवाब ”दीदी क्या दुनिया में सैकड़ों साल पहले भी स्काई स्कैपर्स या गगनचुंबी इमारतें थीं?” ”इस मायने में तो नहीं जैसे कि आज हैं। लेकिन ईसा से 2650 साल पहले यानी तकरीबन साढ़े चार हजार साल पहले भी मिस्र में ऐसे पिरामिड बनने लगे थे जिनमें सीढिय़ों से ऊपर जाया जाता था यानी वह एक से ज्यादा मंजिल के होते थे।”, ”दीदी कहते हैं इमारतों की शैली समाज 

बड़ी अंतरिक्ष महाशक्ति बन रहा है भारत

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on बड़ी अंतरिक्ष महाशक्ति बन रहा है भारत
अपराजिता जैसे नासा का नाम लेते ही सिर्फ एक अमेरिकी विज्ञान अनुसंधान संस्थान का चेहराभर आंखों के सामने नहीं घूमता बल्कि अमेरिका की ताकत और उसकी श्रेष्ठता का एहसास हो जाता है, ठीक उसी तरह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो सिर्फ अंतरिक्ष के क्षेत्र में महज काम करने वाला एक संगठन भर नहीं है बल्कि यह आधुनिक भारत की शान है। आ$जादी के बाद जिन कुछ क्षेत्रों, संगठनों ने भारत की 

टोपी

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on टोपी
बाल कहानी सुरजीत एक लड़का था राजन। एक दिन उसकी मां ने उसके लिए एक ऊनी टोपी बनाई। टोपी बड़ी सुंदर थी। उसका रंग नीला था और फुंदना हरा। राजन ने बड़े चाव से टोपी को सिर पर रख लिया। उसके बहन-भाइयों ने टोपी की बहुत-बहुत प्रशंसा की। राजन ने टोपी पर हाथ फेरा और अकड़ से चल पड़ा। वह चाहता था कि वह अपनी टोपी प्रत्येक को दिखाए और सभी उसकी टोपी की प्रशंसा करें। वह गली से झूमता हुआ सड़क पर 

जेम्स बॉन्ड किंवदंती बने कॉनरी

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on जेम्स बॉन्ड किंवदंती बने कॉनरी
असीम चक्रवर्ती रुपहले परदे से आशातीत मान-सम्मान और ख्याति मिलने के बावजूद शीन कॉनरी यानी जेम्स बॉन्ड ने अपने आपको सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रखा था। उन्होंने स्वतंत्र स्कॉटलैंड का सपना देखा था। जेम्स बॉन्ड या शीन कॉनरी, या फिर शीन कॉनरी का मतलब जेम्स बॉन्ड। यह प्रश्न आपको जरा भी उलझा देने के लिए नहीं पूछा गया है। 1962 में इयान फ्लेमिंग द्वारा निर्मित किरदार जेम्स बॉन्ड पर केंद्रित 

21वीं सदी में भी नारी की अग्नि-परीक्षा

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on 21वीं सदी में भी नारी की अग्नि-परीक्षा
प्रदीप सरदाना साहित्य कृतियों पर बने सीरियल दर्शकों को अकसर लुभाते रहे हैं। ‘श्रीकांत’, ‘चंद्रकांता’, ‘एक कहानी’ और ‘कथा सागर’ जैसे कई सीरियल इस बात की मिसाल हैं। दूरदर्शन तो साहित्य पर बने सीरियल को दिखाने में काफी आगे रहा है। अब एक बार फिर दूरदर्शन विष्णु प्रभाकर के उपन्यास ‘अद्र्धनारीश्वर’ पर सीरियल दिखाने जा रहा है। इस सीरियल का नाम है ‘कोई तो हो अद्र्धनारीश्वर’। 

तेनाली राम के किस्से

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on तेनाली राम के किस्से
दांत का दर्द राजा कृष्णदेव के राज्य विजयनगर के ब्राह्मण साधन संपन्न होने के बावजूद लालची किस्म के थे। राजा के भोलेपन का फायदा उठाते हुए वे समय-समय पर राजकोष से कीमती सामान ऐंठते रहते थे एक दिन दरबार सजा था। एक दरबारी ने कहा—’महाराज, मेरी मां जब अंतिम सांस ले रही थी तो उसकी इच्छा थी कि वो अनार खाए। उस समय अनारों का मौसम नहीं था। अत: उसकी इच्छा मैं पूरी  न कर सका। क्या अब किसी उपाय 

विज्ञान के झरोखे से

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on विज्ञान के झरोखे से
बच्चो, विज्ञान से संबंधित कुछ रोचक प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं जो तुम्हारे ज्ञान में वृद्धि करने में सहायक सिद्ध होंगे। अमरूद स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद क्यों होता है? — अमरूद में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो स्कर्वी नामक रोग को रोकता है। इसके अतिरिक्त यह डायरिया, पेचिश, कब्ज, सर्दी, जुकाम, त्वचा की सुरक्षा, उच्च रक्तचाप और वजन घटाने में कारगर है। अमरूद में एस्ट्रिन्जेंट 

जीव-जन्तुओं की अनोखी दुनिया

Posted On November - 21 - 2010 Comments Off on जीव-जन्तुओं की अनोखी दुनिया
-योगेश कुमार गोयल डायनासोर से पहले भी थे कॉकरोच जिन कॉकरोचों को अपने बाथरूम या किचन में बेखौफ सैर करते देख आप डर जाते हैं या नाक-भौं सिकोड़ते हैं, उनका अस्तित्व  करोड़ों वर्ष पुराना है। वैज्ञानिकों की मानें तो धरती पर कॉकरोचों का अस्तित्व डायनासोरों की उत्पत्ति से भी पहले से है। वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि उनका आकार भी उस समय डायनासोरों के मुकाबले किसी भी मायने में कम नहीं 

नहीं! उदास नहीं!

Posted On November - 14 - 2010 Comments Off on नहीं! उदास नहीं!
दिबेन उनका फोन था। ‘मैं शंकर दास से मिल सकता हूं?’ ‘जी! मैं बोल रहा हूं।’ मैंने उत्तर दिया। ‘आपसे मिलने आ सकता हूं?’ उन्होंने कहा, साथ ही यह भी जोड़ दिया कि ‘किस समय आ सकता हूं?’ ‘सांझ को 7 बजे के बाद कभी भी आइए। मैं आपका स्वागत करूंगा।’ मैंने कहा। फिर मैं सांझ को 6 बजे से रात होने तक उनकी प्रतीक्षा करता रहा। वो नहीं आए। कई दिन बीत गए। उनके फोन आने की बात मैं भूल ही चुका था। आज 

वास्तु समाधान

Posted On November - 14 - 2010 Comments Off on वास्तु समाधान
पी. खुराना मेरी जन्मतिथि 12 जून, 1964 है। मैं अपने घर की दिशाओं का विवरण दे रहा हूं। कृपया बताएं कि कोई वास्तु दोष तो नहीं है, क्योंकि मैं बीमार रहता हूं। -सुरेश, भिवानी — सुदेश जी, जो विवरण आपने दिया है उसमें तो कोई वास्तु दोष वाली बात नहीं है परंतु आपकी जन्म तिथि इस प्रकार है कि आपको जल्द ही मानसिक तनाव हो जाता है। आप अपने शयनकक्ष में पलंग दक्षिण दीवार के साथ लगायें, सोते समय सिर दक्षिण 

सोने का घोड़ा

Posted On November - 14 - 2010 Comments Off on सोने का घोड़ा
तेनाली राम के किस्से एक दिन राजा कृष्णदेव और तेनालीराम अपने घोड़ों पर सवार होकर जंगल की सैर पर निकले। राजा का घोड़ा था बढिय़ा अरबी नस्ल का पूर्णतया स्वस्थ जबकि तेनालीराम का घोड़ा था अति दुर्बल और दयनीय। राजा के घोड़े की कीमत थी लगभग पांच हजार स्वर्ण मुद्राएं जबकि तेनालीराम के घोड़े की कोई 50 स्वर्ण मुद्राएं भी न देता। राजा ने तेनालीराम को चिढ़ाते हुए कहा – तेनाली! क्या तुम अपने घोड़े 

मित्रता की पहचान

Posted On November - 14 - 2010 Comments Off on मित्रता की पहचान
काफी समय पुरानी बात है। मोहनपुर में मोहनलाल नामक एक व्यापारी रहता था। वह कपड़े का व्यापार करता था। उसका एक पुत्र था जिसका नाम रामलाल था। पिता चाहता था कि पुत्र भी उसके समान कुशल व्यापारी एवं दूरदर्शी बने। रामलाल का एक मित्र था जिस पर  वह बहुत भरोसा करता था, पर मोहनलाल ने अपनी अनुभवी आंंखों से भांप लिया कि वह धोखेबाज है, उस पर अधिक विश्वास नहीं किया जा सकता। मोहनलाल इस बारे में पुत्र को 

हमें थकान क्यों होती है?

Posted On November - 14 - 2010 Comments Off on हमें थकान क्यों होती है?
”दीदी, आज तो मैं इतना खेला कि अब थकान के मारे उठा नहीं जा रहा।” ”लेकिन क्या तुम्हें मालूम है कि थकान क्यों होती है?” ”नहीं।” ”थकान वास्तव में एक प्रकार का जहर देना है। जब हमारे शरीर में मांसपेशियां काम करती हैं तो वह लेक्टिक एसिड का उत्पादन करती हैं। अगर हम थकी हुई मांसपेशी से लेक्टिक एसिड को हटा देंगे तो वह फिर से काम करना शुरू कर देती हैं। शरीर में अन्य पदार्थ मांसपेशीय गतिविधि