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खास खबर
प्रभु से मिलाप का मार्ग प्रेम और श्रद्धा

प्रभु से मिलाप का मार्ग प्रेम और श्रद्धा

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज प्रभु के प्रति प्रेम और श्रद्धा एक शब्दहीन अवस्था है। यह ऐसा अनुभव है जो आत्मा के स्तर पर ही किया जाता है। प्रभु के प्रति प्रेम और श्रद्धा, हमारी आत्मा के प्रभु से मिलाप का मार्ग है। जरूरत है इसे विकसित करने की। इसके लिए ...

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झिरकेश्वर महादेव अरावली की गोद में पांडवकालीन तपोभूमि

झिरकेश्वर महादेव अरावली की गोद में पांडवकालीन तपोभूमि

देशपाल सौरोत प्राचीन झीरी वाला शिव मंदिर का अनूठा इतिहास है। हरियाणा-राजस्थान बार्डर पर फिरोजपुर झिरका में प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण अरावली की वादियों की गोद में है यह मंदिर। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस रमणीक स्थल पर पूजा-अर्चना कर शिवलिंग की स्थापना की थी। तभी से ...

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बांस का आशियाना

बांस का आशियाना

पर्यावरण को लेकर जताई जा रही चिंताओं में कंक्रीट के जंगलों का तेजी से बढ़ना और हरियाली का उजड़ना शामिल है। विशेषज्ञ कहते हैं कि निर्माण कार्य में अगर बांस का इस्तेमाल बढ़ाया जाये तो इसके दोहरे फायदे हैं। बांस तेजी से बढ़ता है और इसे काटने में कोई कानूनी ...

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धर्म-अध्यात्म का योग

धर्म-अध्यात्म का योग

घनश्याम बादल योग, धर्म और अध्यात्म को अक्सर अलग-अलग माना जाता है। योग का संबंध भौतिक शरीर को पुष्ट करने अथवा शारीरिक व्याधियों के उपचार तक सीमित मान लिया जाता है। वहीं, धर्म को प्राय: किसी विशेष पद्धति से पूजा-पाठ अथवा कर्मकांड मान लिया गया है और अध्यात्म को दूसरे लोक ...

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6 वक्री ग्रहों के बीच आज दुर्लभ सूर्य ग्रहण

6 वक्री ग्रहों के बीच आज दुर्लभ सूर्य ग्रहण

मदन गुप्ता सपाटू ज्योतिष के अनुसार आज का सूर्य ग्रहण दुर्लभ है। यह ग्रहण मिथुन राशि में लग रहा। इस दौरान 6 ग्रह- बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु वक्री रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह स्थिति शुभ नहीं मानी जा रही। इसके अलावा अशुभ गण्डयोग, पूर्णकाल सर्पयोग, षडाष्टक योग ...

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ज़िंदगी हैरान हूं मैं...

ज़िंदगी हैरान हूं मैं...

चकाचौंध भरी फिल्मी दुनिया को बाहर से देखने पर तो लगता है कि यहां सबकुछ ‘शानदार’ है, लेकिन छन-छनकर आई जानकारियों और सुशांत सिंह राजपूत सरीखे कई कलाकारों के खुद को खत्म कर लेने की भयावह खबरों से ‘हकीकत’ कुछ और ही लगती है। अवसाद भयानक बीमारी के रूप में ...

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कोरोना से जंग विज्ञापनों से मत होइये गुमराह

कोरोना से जंग विज्ञापनों से मत होइये गुमराह

उपभोक्ता अधिकार पुष्पा गिरिमाजी हाल के दिनों में मैंने कुछ ऐसे विज्ञापन देखे हैं हो जो उपभोक्ताओं को खतरनाक कोरोनावायरस से बचाने का वादा करते हैं। उनमें से ज्यादातर में उनके आयुर्वेदिक या हर्बल होने का दावा किया जाता है और लोग उन्हें इस विश्वास के साथ खरीद रहे हैं कि ये ...

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  • कानूनी शिकंजे में कृषि
     Posted On July - 5 - 2020
    संविधान में संशोधनों के जरिए केंद्र सरकार खेती के विषय में भी अतिक्रमण जारी रखे हुए है। संवैधानिक रूप से....
  • गुरु पूर्णिमा
     Posted On July - 5 - 2020
    गुरु दीक्षा देते हैं। दीक्षा केवल किसी विषय को लेकर कोई सूचना नहीं है, बल्कि यह सजगता और बुद्धिमत्ता की....
  • गुरु बिन ज्ञान न उपजै…
     Posted On July - 5 - 2020
    व्यक्ति में यदि ‘ईश्वर’ को जानने की तीव्र इच्छा है, तो उसे ‘सद‍्गुरु’ आश्रय में जाना होता है। गुरु का....
  • संतुलन ही शिव का संदेश
     Posted On July - 5 - 2020
    ऋतुओं के देश भारत में हर ऋतु मनुष्य में एक नयी ऊर्जा का निर्माण करती है। लेकिन, सावन का महीना....

गहरे पानी पैठ

Posted On August - 21 - 2011 Comments Off on गहरे पानी पैठ
मैं अकेला क्या आपने कभी निपट अकेलेपन का अहसास किया है? चारों ओर सन्नाटा! न देखने को कुछ, न सुनने-बोलने को कुछ। घोर एकांत! यह शून्यता तो स्वयं ईश्वर के लिए असह्य हो उठी थी जब उसने इससे घबराकर अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए एक से अनेक होने की इच्छा प्रकट की थी—एकोअहं बहुस्यामि। यह सृष्टि उसी इच्छा का परिणाम है। परन्तु मनुष्य तो स्रष्टा हो नहीं सकता। वह तो ईश्वर के हाथ का खिलौना है जिसे वह 

सूखता झरना

Posted On August - 21 - 2011 Comments Off on सूखता झरना
कहानी चंद्र भार्गव ‘स्नेहिल’ सावन माह का पहला दिन और सावन की फुहार…कैसे भर देती है तन-मन रूमानियत से! अपने कक्ष में बैठा वो कुर्सी घुमाकर खिड़की से बाहर टप-टप करती बड़ी-बड़ी बूंदों को तापी नदी के प्रसार पर पड़ती देखता रहा काफी समय तक। कब विवेक आकर सामने कुर्सी पर बैठा—उसे पता तक न चला! उसका मन तो जैसे सपने पिरो रहा था जाने कहां-कहां से रंगीन मोती चुन-चुनकर और कर रहा था इंतजार 

स्वयं के कटघरे

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on स्वयं के कटघरे
कहानी डा. गोपाल नारायण आवटे मैं कार्यालय की फाइल को कमरे में ठीक कर रहा था कि किचन से पत्नी ने प्रश्न किया—’क्यों जी 21 अप्रैल को कौन सा दिन पड़ रहा है?’ —’क्यों?’ मैंने अपने कार्य को करते हुए ही प्रश्न किया। —’सुची की शादी है।’ —’लेकिन कार्ड तो अभी तक नहीं आया…।’ —’क्या कार्ड तीन महीने पहले छप जायेगा?’ किचन से निकलते हुए पत्नी ने प्रश्न किया। मैंने बहस को वहीं विराम 

गांधी और भगतसिंह का रूहानी रिश्ता

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on गांधी और भगतसिंह का रूहानी रिश्ता
घनश्याम सक्सेना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और शहीदे आजम भगतसिंह दोनों ने भारत का स्वतंत्रता संग्राम अपने-अपने ढंग से लड़ा। एकांगी दृष्टि से देखें तो गांधीजी और भगतसिंह के रास्ते अलग-अलग दिखेंगे किन्तु समग्र दृष्टि से देखें तो दोनों की मंजिल एक ही नज़र आयेगी। सन् 1920 में गांधीजी के असहयोग आंदोलन को देशव्यापी समर्थन मिला। लेकिन 4 फरवरी, 1922 को गोरखपुर के समीप जो चौरीचौरा कांड हुआ 

भ्रष्टाचार आजादी पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on भ्रष्टाचार आजादी पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा
लोकमित्र क्या भारत की बढ़ती आबादी देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है? क्या उत्तरपूर्व से लेकर कश्मीर तक बढ़ता अलगाववाद और माओवाद देश की अखंडता के लिए सबसे बड़ा खतरा है? क्या रोके न रुक रहा आतंकवाद देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है? क्या जातिवाद, साम्प्रादयिकता देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है? ये सभी समस्याएं देश के लिए खतरनाक तो हैं लेकिन शायद देश के लिए सबसे बड़ा खतरा 

विशेष पुरस्कार

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on विशेष पुरस्कार
बाल कहानी प्रतुल गुप्ता उस दिन पूरे जंगल का वातावरण विचित्र- सा हो गया था। वैसे तो वहां के जानवर सदा प्रसन्नता से आपस में मिलजुल कर रहते आये थे। सभी मेहनती और ईमानदार थे। सभी जानवर एक-दूसरे का मान-सम्मान करते थे। कभी-कभार आपस में कोई मनमुटाव भी हो जाता तो अपने राजा शेर के पास जाकर न्याय करा लेते थे। कोई जानवर कभी दूसरे से झगड़ा करने की नहीं सोचता था, पर वे किसी से कम भी नहीं थे, सभी 

बाल कविताएं

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on बाल कविताएं
पंद्रह अगस्त वीरों की याद दिलाता है पंद्रह अगस्त खुशियों के फूल खिलाता है पंद्रह अगस्त, इसी दिवस टूटीं जंज़ीर गुलामी की तभी तो हमको भाता है पंद्रह अगस्त। देश की खातिर जीना देश पे’ मर जाना यही हमें समझाता है पंद्रह अगस्त, गांधी, सुभाष,  भगत सिंह, ऊधम की कुर्बानी याद दिलाता है पंद्रह अगस्त। बहुत कीमती चीज़ है जो है आज़ादी हमको यह समझाता है पंद्रह अगस्त। -अशोक ‘अंजुम’ स्वतंत्रता 

गहरे पानी पैठ

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on गहरे पानी पैठ
नींद क्यों रातभर नहीं आती? वह हमारी सुबह की सैर के साथी हैं। दो दिन से वह आ नहीं रहे थे, कारण जानने के लिए आज लौटते हुए उनकी तरफ से हो लिये। वह अपने घर के बाहर लॉन में बैठे समाचार-पत्र पढ़ रहे थे। हमारे आने का कारण समझने में उन्हें देर नहीं लगी। उनके मुंह पर बेसाख़ता गीतकार रमानाथ अवस्थी की ये पंक्तियां आ गयीं- सो न सका कल याद तुम्हारी आई सारी रात और दूर कहीं बजी शहनाई सारी रात। हमने 

क्वेश्चन क्लब

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on क्वेश्चन क्लब
नयनतारा दीदी के जवाब इम्पीरियल मात्रक प्रणाली क्या है? ”दीदी, अकसर दादी जब अपनी साड़ी के बारे में बताती हैं तो वह इसे 8 या 10 हाथ की बताती हैं। क्या यह भी कोई नाप जोख का तरीका होता है?” ”हां, इसे इम्पीरियल मात्रक प्रणाली कहते हैं। जिसमें माप तोल के मात्रक काम चलाऊ होते हैं और अलग अलग जगहों पर स्थानीय आधार पर तय होते हैं जैसे आदमी का हाथ, अंगूठे के पोर की दूरी यहां तक कि जमीन की बैलों 

नंबर वन इंडिया

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on नंबर वन इंडिया
उहा रोटी, उहा दाल कल आपां हिक दफा वल मादरे वतन (मातृभूमि) भारत दी आज़ादी का जश्न मनेसूं। हर गली, मुहल्ले, शहर, जिले अते स्टेट दी राजधानिये विच वल तिरंगा लहराया वेसे। प्रधानमंत्री जी लालकिले दिल्ली विच ऐ रस्म अदा करेसिन। पूरी दिल्ली हिक किले विच तबदील थी वेसे ताकि कुई नापाक परिंदा पर न मार सगे। एमसी, होविन या सीएम, एमपी होविन या पीएम सब नवियां नवियां कसमा पीसिन, सलामियां घिनसिन, हिक घंटे 

वास्तु समाधान

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on वास्तु समाधान
पी. खुराना मेरी जन्मतिथि 17.8.1962 है। मैं 15वर्षों से अपना कारोबार कर रहा हूं परंतु मुझे आज तक किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिली, जिस वजह से काफी कर्जदार भी हो गया हूं। कृपया कोई समाधान बताएं। -राजीव, करनाल – राजीव जी, वैसे तो आपकी कुंडली व्यवसाय वाली कुंडली नहीं है और न ही आपने अपने किसी भी व्यवसाय के बारे में बताया है, परंतु चिंता न करें, यदि आप फिर भी व्यवसाय करना चाहते हैं, तो आपके 

तेनाली राम के किस्से

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on तेनाली राम के किस्से
महत्वपूर्ण कौन? एक बार राज दरबार में चर्चा चल रही थी। महाराजा ने पूछा —राज्य के विकास में महत्वपूर्ण कौन होता है? एक दरबारी ने कहा— राजा ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।  राजा ने कहा—नहीं, यदि अन्य प्रजा साथ न दे तो राजा अकेला कुछ नहीं कर सकता। अन्य दरबारी ने कहा—प्रधानमंत्री ही सबसे महत्वपूर्ण होता है। नहीं, यदि राजा अपने प्रधानमंत्री के सुझावों को महत्व न दे तो अकेला प्रधानमंत्री कुछ नहीं 

रविवारी डाक

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on रविवारी डाक
10 जुलाई के रविवारीय में हेल्पलाइन के फायदों और उससे कभी-कभी होने वाली मुश्किलों का बहुत ही सुंदर चित्रण है। लेकिन सब क्षेत्रों की हेल्पलाइन न तो इतनी कारगर है और न सबको सही ढंग से लाभ पहुंचा सकती हैं। हां, कई हेल्पलाइन आदमी को उलझा जरूर देती हैं। कहानी ‘अंतर’ का कथानक उलझा हुआ-सा लगता है लेकिन एक बात स्पष्ट है कि पुरुष वर्ग के साथ यह कहावत कि दूर के ढोल सुहावने बिल्कुल फिट बैठती है। 

आज़ादी की लड़ाई में वीरांगनाएं

Posted On August - 14 - 2011 Comments Off on आज़ादी की लड़ाई में वीरांगनाएं
ज्ञानेन्द्र रावत 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के बारे में इतिहासकारों द्वारा बहुत कुछ लिखा गया है। कुछ इसे सिपाही विद्रोह की संज्ञा देते हैं, कुछ इसे किसान-अभिजात्य-सामंतों के असंतोष से उपजा जन-आंदोलन करार देते हैं तो कुछ इसे जनता का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम कह कर सम्मान देते हैं। वह बात दीगर है कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसे ‘गदर’ की संज्ञा 

तेनाली राम के किस्से

Posted On August - 7 - 2011 Comments Off on तेनाली राम के किस्से
जासूस सेवक राजा कृष्णदेव की सेना ने कई राज्यों को अपने अधीन कर लिया था। उनके वर्चस्व से घबराकर बीजापुर के सुल्तान ने अपने एक सेवक को जासूस बनाकर विजयनगर भेजा। उस जासूस की योजना थी कि राजमहल में ही राजा की हत्या कर दी जाए। इसके लिए ब्राह्मण का भेष धरा। राजमहल में दरबार लगा था। तिलकधारी ब्राह्मण धारा-प्रवाह संस्कृत के श्लोकों से सभी को प्रभावित कर रहा था। कृष्णदेव तो इतने प्रभावित हुए 

उहा रोटी, उहा दाल

Posted On August - 7 - 2011 Comments Off on उहा रोटी, उहा दाल
अगली मजि़ल गोविन्द राकेश गाहल हुई ज्यादा पुराणी कैनी। बस कुझ साल पहले दी ही हे। उन्हां डीहें हर शहर दी हद ते सरकारी चुगियां होदियां इन। शहर विच तुसां कुई बी शै आनो हे तां तुआकूं पहले चुंगी डेवणी पमदी हई जेहड़ी शहर दी म्युनिसिपल्टी दी आमदन दा हिक वडा जरिया होदा हा। हुण कई सालें तो पूरे मुल्क विच चुंगी पूरी तरह खत्म थी गई हे। अते असाडे कई लोग चुंगी कू भुल वी गिन। चुंगी उते पर्ची कटवावण 
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