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धीरे-धीरे रे मना...

धीरे-धीरे रे मना...

साई वैद्यनाथन भले देर से हों, प्रभु के प्यारों के काम होते जरूर हैं। इसलिए भगवान के काम करते समय, धैर्य होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। संत कबीर ने भी कहा है- धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय। साल 1893 में शिकागो में धर्म ...

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कालका जी इतिहास और आस्था का संगम

कालका जी इतिहास और आस्था का संगम

तीर्थाटन अमिताभ स. मंदिर के नाम पर समूचे इलाके के नामकरण होने की मिसालें दिल्ली में एक-दो ही हैं। पहली है झंडेवालान, जिसका नाम झंडेवाला मंदिर से पड़ा है। दूसरी है कालका जी। मां दुर्गा के एक रूप काली माता का मंदिर ‘कालका जी’ पांडवों के समय का माना जाता है। बताते ...

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चौमासा 12 से, मंगल कार्यों को विराम

चौमासा 12 से, मंगल कार्यों को विराम

भगवान विष्णु का विश्राम मदन गुप्ता सपाटू आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी बेहद खास है। देवशयनी कहलाने वाली यह एकादशी इस बार 12 जुलाई को है। पुराणों में कहा गया है कि इस एकादशी की रात भगवान विष्णु क्षीरसागर व पाताल में 4 माह के विश्राम के लिए चले जाते हैं। ...

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मायने रखता है मन का सरिता हो जाना

मायने रखता है मन का सरिता हो जाना

कृष्णलता यादव निरन्तर प्रवाहशीलता का नाम है– सरिता। किसी के लिए मात्र पानी का भंडार तो अन्य के लिए जीवन का आधार, ममत्व, वात्सल्य और त्याग की जीवनदायी त्रिवेणी-सी। इस भाव के वशीभूत सरिता जल में स्नान, उसके तट पर दान, पूजन-अर्चन, अर्पण-तर्पण व आचमन में मानव मन को पुण्यार्जन का ...

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बजट उम्मीदों को मंदी की चुनौती

बजट उम्मीदों को मंदी की चुनौती

आलोक पुराणिक केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पूर्ण बजट पेश करेंगी। फरवरी में तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल 2019-20 के लिए अंतरिम बजट पेश कर चुके हैं, अब नये सिरे से बजट के गुणा-गणित तय होंगे। इस साल एक जून से 27 जून के ...

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सोशल मीडिया जरा बचके

सोशल मीडिया जरा बचके

रेशू वर्मा कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक महिला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शादी का प्रस्ताव भेजने की बात कर रही थी। इस वीडियो को एक स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट करते हुए योगी आदित्यनाथ का ...

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बदलनी होगी सोच

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on बदलनी होगी सोच
महिलाओं को सशक्त करना राजनीतिक एजेंडे में शामिल तो हुआ है, लेकिन अभी पितृसत्तात्मक सोच बदली नहीं है। इस सोच के चलते इसका व्यापक असर अभी दिखना बाकी है। संसद में ही 33 प्रतिशत आरक्षण पर 22 साल से कुछ नहीं हो सका है। कोई भी दिवस मनाने का अपना एक महत्व होता है। यह इतिहास को याद करने और पीछे मुड़कर संघर्ष यात्रा को गर्व से देखने का दिन होता है, लेकिन दिक्कत यह है कि इसका भी बाजारीकरण हो गया है। महिलाओं 

मुखर हुई महिलाएं

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on मुखर हुई महिलाएं
महिलाओं के प्रति हिंसा के कई कारण हैं। एक तो महिलाएं मुखर हुई हैं, भली औरत के तमगे से खुद को आज़ाद किया और बुरी औरत कहलाने का साहस जुटा लिया। उसने सामाजिक निंदा और आरोपों की परवाह करना बंद कर दिया। उसने अपने को पहचाना, उसके भीतर अपनी पहचान की छटपटाहट आई और उसने चुनौतियां स्वीकार कीं। अपने दम पर आगे बढ़ीं। उन्होंने रूढ़ियों ....

अपनी गरिमा पहचानें

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on अपनी गरिमा पहचानें
पिछले साल विश्व महिला दिवस 100 वर्ष पूरे कर चुका है, लेकिन भारत में आज भी इसकी प्रासंगिकता विचारणीय है। सशक्तीकरण का सही अर्थ है कि स्त्री अपने पक्ष में अपने फैसले ले सके। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है अपनी देह के पक्ष में अपनी सहमति और विरोध जाहिर कर सके। यह गौरतलब है कि घर से बाहर तक औरत के वजूद को महज़ एक देह ....

… पर नहीं बढ़ी गांव की भागीदारी

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on … पर नहीं बढ़ी गांव की भागीदारी
आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। जितनी आजादी उन्हें आज है, वैसी पहले नहीं थी। वर्तमान समय में महिलाओं की स्थिति में काफी बदलाव आए हैं, लेकिन ये बदलाव शहरी क्षेत्रों में ही दिखते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इन बदलावों की गूंज सुनाई नहीं देती। कितने ही महिला दिवस आए और चले गये, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इससे बेखबर आज भी पितृसत्तात्मक सोच ....

नयी दिशा में नारी

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on नयी दिशा में नारी
गरिमा यात्रा भारत जैसे देश की सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक परिस्थितियों में कई अर्थों में अभूतपूर्व है। पहली बार इतने व्यापक स्तर पर एक गैर-राजनीतिक आयोजन हुआ। दूसरी बात, 'मी टू' अभियान को पुरुषत्ववादी अहंकार से ग्रस्त लोग एक शिक्षित, खाते-पीते, मध्यम वर्ग तक सीमित बता रहे थे। उनका कहना था कि आम लोगों से इसका कोई ताल्लुक नहीं है। ऐसा कहने वालों का मानना था ....

जीवन प्रबंधन है शिव ज्ञान

Posted On March - 4 - 2019 Comments Off on जीवन प्रबंधन है शिव ज्ञान
शिव यानी कल्याण स्वरूप। शम्भू यानी आनंद स्वरूप वाले। शंकर यानी सबका कल्याण करने वाले। शशिशेखर यानी चंद्रमा धारण करने वाले। नीलकंठ यानी नीले कंठ वाले। त्रिलोकेश अर्थात तीनों लोकों के स्वामी। ऐसे ही 108 नामों से शिव को जाना जाता है। शिव के नाम अनेक। शिव के रूप अनेक। हर नाम और हर रूप का अर्थ अलग। कभी क्रोधित शिव। कभी शांत शिव। कभी ....

धर्म वाक्य

Posted On March - 4 - 2019 Comments Off on धर्म वाक्य
अत्यन्तकोप: कटुका च वाणी दरिद्रता च स्वजनेषु वैरम‍्। नीचप्रसङ्ग कुलहीनसेवा चिह्नानि देहे नरकस्थितानाम‍्।। अति क्रोध, कटु वचन, दरिद्रता, आत्मीय जनों से वैर, नीचों का संग और नीच की सेवा- ये नरक में रहने वालों के लक्षण हैं। गुणैरुत्तमतां याति नौच्चैरासनसंस्थित:। प्रासादशिखरस्थोऽपि काक: किं गरुडायते।। प्राणी गुणों से उत्तम होता है, ऊंचे आसन पर बैठकर नहीं, 

घंटेश्वर महादेव मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु बांधते थे घंटियां

Posted On March - 4 - 2019 Comments Off on घंटेश्वर महादेव मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु बांधते थे घंटियां
लगभग 500 साल प्राचीन रेवाड़ी का घंटेश्वर महादेव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। कभी एक बावड़ी में स्थित छोटा-सा यह मंदिर आज विशाल रूप ले चुका है। शहर के बिलकुल बीच में बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु इसके परिसर में एक घंटी बांध जाते थे। नतीजा यह हुआ कि मंदिर परिसर में ....

चांदी का शिवलिंग बढ़ाता है धन-धान्य

Posted On March - 4 - 2019 Comments Off on चांदी का शिवलिंग बढ़ाता है धन-धान्य
महाशिवरात्रि के दिन व्रत रख कर रात को भगवान शिव की विधिवत आराधना करना कल्याणकारी माना जाता है। रात्रि जागरण में शिव की चार पहर की पूजा व आरती का विधान आवश्यक माना गया है। इस अवसर पर शिव पुराण का पाठ करना व सुनना भी कल्याणकारी बताया गया है। इसके अगले दिन ब्राह्मणों और शारीरिक रूप से असमर्थ लोगों को मिठाई व भोजन देने ....

विधानसभा की रौनक

Posted On March - 1 - 2019 Comments Off on विधानसभा की रौनक
महेन्द्रगढ़ वाले पंडितजी अकेले ऐसे नेता हैं, जो विधानसभा में रौनक लगाए रखते हैं। पक्ष और विपक्ष में कितना भी टकराव क्यों न हो, पंडितजी में ऐसी कला है कि वे उसे तुरंत हंसी-मजाक में बदल देते हैं। विपक्ष की हर बात का तोड़ रखने वाले दादा अकेले ही पूरे विपक्ष से निपट लेते हैं। बजट सत्र में भी कई बार ऐसे मौके आए जब ....

सीआईए और सऊदी अरब ने पाला था हाफिज को

Posted On March - 1 - 2019 Comments Off on सीआईए और सऊदी अरब ने पाला था हाफिज को
पाकिस्तान के तानाशाह जनरल जियाउल हक ने सबसे पहले हाफिज सईद के अंदर की आग को पहचाना था। उस समय हाफिज सईद लाहौर के यूनिवर्सिटी आॅफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाॅजी में इस्लामिक स्टडीज का प्रोफेसर था। 1980 के दशक में हाफिज सईद को सऊदी अरब इस्लामिक शिक्षा के लिए भेजा गया, जहां उसकी मुलाकात मुफ्ती शेख अब्दुल अजीज बिन बाज और फिलस्तीनी स्काॅलर अब्दुल्ला उज्जम से ....

आतंक का आका पाकिस्तान

Posted On March - 1 - 2019 Comments Off on आतंक का आका पाकिस्तान
इमरान खान को सबूत चाहिए कि मसूद अजहर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा में आत्मघाती हमला कराया है। दुनियाभर में उनके इस बयान को मूर्खतापूर्ण करार दिया जा रहा है। इस कांड के कुछ घंटे बाद ही जैश-ए-मोहम्मद के प्रवक्ता मुहम्मद हसन ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। फिर भी इमरान सबूत मांग रहे हैं। ‘सबूत दीजिए और बातचीत कीजिए‘, ये पाक प्रधानमंत्री के शिगूफे ....

व्रत-पर्व

Posted On February - 25 - 2019 Comments Off on व्रत-पर्व
25 फरवरी- श्रीनाथ उत्सव। 26 फरवरी- जानकी व्रत। 27 फरवरी- रामदास नवमी। 28 फरवरी- स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती। 2 मार्च- विजया एकादशी। 3 मार्च- प्रदोष व्रत। -सत्यव्रत बेंजवाल  

जीवनदायिनी नदियों की जीवनगाथा

Posted On February - 25 - 2019 Comments Off on जीवनदायिनी नदियों की जीवनगाथा
नदियां हर सभ्यता की जीवन रेखा हैं, लेकिन हमारे महाकाव्यों ने उन्हें जीवित माना है। आइए उनमें से कुछ के जीवन को जानें। ....

खुला और साफ रखें घर का ब्रह्मस्थान

Posted On February - 25 - 2019 Comments Off on खुला और साफ रखें घर का ब्रह्मस्थान
किसी भी देश, राज्य, शहर को वहां का केंद्र ही चलाता है। इसी तरह किसी भी घर में केंद्र यानी ब्रह्मस्थान बड़ा महत्व रखता है। यह घर का बिलकुल बीच वाला स्थान होता है। इसी स्थान से ऊर्जा घर में प्रवाहित होती है। वास्तु में इसे सूर्य का स्थान माना जाता है। ....

सुधारों के प्रणेता

Posted On February - 25 - 2019 Comments Off on सुधारों के प्रणेता
आर्यसमाज के संस्थापक और हिंदू पुनर्जागरण के प्रणेता स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म सन 1824 में फाल्गुन कृष्ण दशमी को हुआ। जन्म के समय मूल नक्षत्र होने से नाम मिला मूलशंकर। घर में पूजा-पाठ और शिव-भक्ति का वातावरण होने के कारण भगवान शिव के प्रति बचपन से ही उनके मन में गहरी श्रद्धा थी। ....
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