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खास खबर
जागरूकता और सरकार की गंभीरता से मिलेंगे अच्छे परिणाम

जागरूकता और सरकार की गंभीरता से मिलेंगे अच्छे परिणाम

आफत बनती  आबादी योगेश कुमार गोयल भारत में वर्ष 1951 से जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हम जनसंख्या पर नियंत्रण पाने के मामले में अन्य देशों के मुकाबले फिसड्डी साबित हुए हैं। हर साल विश्व जनसंख्या दिवस पर भारत में भी लंबे-चौड़े आश्वासनों का ...

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गरीबी, भुखमरी, शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती

गरीबी, भुखमरी, शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती

आफत बनती  आबादी ज्ञानेन्द्र रावत आज बढ़ती आबादी का विकराल संकट समूची दुनिया के लिए चुनौती है। बढ़ती आबादी सीमित संसाधनों पर बोझ बनती जा रही है। 1987 में दुनिया की आबादी 5 अरब थी। 2018 में यह बढ़कर 7.8 अरब हो गई। इसमें हर साल अस्सी लाख की दर से बढ़ोतरी ...

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व्यवसायीकरण रोकना होगा और परंपरागत जल-स्रोत बचाने होंगे

व्यवसायीकरण रोकना होगा और परंपरागत जल-स्रोत बचाने होंगे

वीणा भाटिया पृथ्वी की सतह का 70 फीसदी भाग पानी से भरा है। लेकिन इसमें से सिर्फ 2 फीसदी ही हमारे उपयोग के लायक है। काफी जल बर्फ के रूप में जमा हुआ है। नदियों, तालाबों और झरनों से मिलने वाला जल महज एक प्रतिशत है। लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण ...

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बड़े संकट की आहट, अब नहीं चेते तो बहुत देर हो जाएगी

बड़े संकट की आहट, अब नहीं चेते तो बहुत देर हो जाएगी

कृष्ण प्रताप सिंह पिछले साल इन्हीं दिनों हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का भीषण जल-संकट से सामना हुआ। इसके चलते वहां प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव स्थगित करना पड़ा। पर्यटकों से वहां न जाने की अपीलें की गईं। कई राज्यों में इस बार भी पेयजल को लेकर ऐसे ही हालात हैं। जानकारों ने ...

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बजट उम्मीदों को मंदी की चुनौती

बजट उम्मीदों को मंदी की चुनौती

आलोक पुराणिक केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पूर्ण बजट पेश करेंगी। फरवरी में तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल 2019-20 के लिए अंतरिम बजट पेश कर चुके हैं, अब नये सिरे से बजट के गुणा-गणित तय होंगे। इस साल एक जून से 27 जून के ...

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सोशल मीडिया जरा बचके

सोशल मीडिया जरा बचके

रेशू वर्मा कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक महिला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शादी का प्रस्ताव भेजने की बात कर रही थी। इस वीडियो को एक स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट करते हुए योगी आदित्यनाथ का ...

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मुफ्त की योजनाओं के लाभांश

मुफ्त की योजनाओं के लाभांश

दक्षिण के राज्यों में मुफ्तखोरी के अलग आयाम हैं। रंगीन टीवी से लेकर मंगलसूत्र तक की व्यवस्था की जाती रही है। पर स्मार्ट नेताओं ने यह भी चिन्हित किया कि मुफ्तखोरी अंतत संस्थानों को तबाह करती है, तो मुफ्तखोरी के बजाय आइटमों की कीमत सस्ती रखने पर विचार किया गया। ...

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ऑयल इंडस्ट्री

Posted On April - 14 - 2010 Comments Off on ऑयल इंडस्ट्री
राहें हुईं आसान कीर्ति शेखर विश्वभर में कुछ गिने-चुने उद्योग ही हैं जो दिन-दूनी और रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं। ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री भी इन्हीं में से एक है। जिस तेजी से संपूर्ण विश्व में ऊर्जा की खपत और मांग बढ़ती जा रही है उससे इस क्षेत्र में करिअर बनाने वालों की राहें बेहद आसान नज र आ रही हैं। लगातार तरक्की करता जा रहा यह क्षेत्र किसी के भी भविष्य को उज्ज्वल बना सकता है। 

शैक्षणिक बदलावों से छात्र वर्ग को कितना फायदा?

Posted On April - 14 - 2010 Comments Off on शैक्षणिक बदलावों से छात्र वर्ग को कितना फायदा?
अतुल कुमार शर्मा केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में शिक्षा क्षेत्र में किये गये कुछेक परिवर्तनों की योजनाओं के निर्णय नि:संदेह काबिलेगौर हैं। मानव संसाधान  विकास मंत्री कपिल सिब्बल द्वारा शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन लाने हेतु व्यवस्था की गई है कि पूरे देश में वर्ष 2013 में ली जाने वाली इंजीनियरिंग व मेडिकल कोर्सों में दाखिले हेतु ‘राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा’  होगी। साथ 

विदेशी भाषा जानकारों का जगमगाता क्षेत्र

Posted On April - 7 - 2010 Comments Off on विदेशी भाषा जानकारों का जगमगाता क्षेत्र
सपना बाजपेयी मिश्रा अपनी मातृभाषा से तो हर कोई परिचित रहता है। इसे सीखने के  लिए थोड़े से भी अतिरिक्त प्रयास नहीं करने पड़ते। हमेशा से भाषा संबंधी ज्ञान रखने वालों की विशेष पूछ रही है और अगर यह ज्ञान एक से अधिक भाषाओं का हो तो व्यक्ति की शख्सियत में चार-चांद लग जाते हैं। एक समय तक बहुभाषी होने का अर्थ एक ही देश की अलग-अलग भाषाओं का ज्ञान होना समझा जाता था लेकिन अब समय बदल चुका है। 

पेपर लैस कम्युनिकेशन

Posted On March - 31 - 2010 Comments Off on पेपर लैस कम्युनिकेशन
शैलेंद्र सिंह मद्रास यूनिवर्सिटी ने घोषणा की है कि 2010 के अंत तक उसके सभी कालेजों का आपसी पत्र व्यवहार और दूसरे संवाद पेपरलेस होंगे। यूनिवर्सिटी के कुलपति ने इस बात की घोषणा करते हुए कहा है कि इसमें न सिर्फ 3 से 4 करोड़ रुपये की बचत होगी बल्कि समय भी बहुत बचेगा। इसमें संवाद में तेजी आएगी और निर्णय लेने में आसानी व जल्दी होगी। पेपरलैस कम्युनिकेशन सुनने में भले हमें एक आम-सा 

पीसी की लैपटॉप से टक्कर

Posted On March - 31 - 2010 Comments Off on पीसी की लैपटॉप से टक्कर
विद्युत प्रकाश मौर्य लैपटॉप बाजार को चुनौती अब नोटबुक पीसी से मिल रही है। नोटबुक पीसी यानी लैपटॉप से भी छोटे आकार का कंप्यूटर। नोटबुक पीसी को लेकर चलना और भी आसान है। बाजार में 14 हजार से लेकर 32 हजार के बीच में नोटबुक पीसी आ गये हैं। कई कंपनियां नोटबुक पीसी उन लोगों को ध्यान में रखकर उतार रही हैं जो कंप्यूटर के शुरुआती यूजर हैं। यानी पहली बार कंप्यूटर यूज करने वाले। ऐसे लोग आमतौर 

कंप्यूटर अकाउंटेंसी

Posted On March - 31 - 2010 Comments Off on कंप्यूटर अकाउंटेंसी
नौकरी की पक्की गारंटी रवीन्द्र भारत के मध्यमवर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों में ऐसे युवाओं की कोई कमी नहीं है, जिनकी पहली प्राथमिकता कोई न कोई नौकरी पाना होता है। ये युवा सिंपल ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट करने में अपना वक्त कतई बर्बाद नहीं करना चाहते हैं। इसके बजाय वह कोई ऐसा जॉब ओरिएंटेड कोर्स करना चाहते हैं, जिसे पूरा करने के बाद उन्हें एक सम्मानजनक नौकरी मिल जाए। 

अंतिम तिथि

Posted On March - 24 - 2010 Comments Off on अंतिम तिथि
अशोक सिंह पाठ्यक्रम : एमए (हिंदी नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन, जनसंचार बौद्ध अध्ययन, मानव विज्ञान, समाज कार्य , हिंदी अनुवाद), मास्टर आफ इंफार्मेटिक्स एंड लैंग्वेज इंजीनियरिंग, एम फिल, पीएचडी। संस्थान : महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा। विशेष : एमफिल/ पीएचडी में दाखिले यूजीसी के नियमों के अनुसार। प्रॉस्पैक्टस : संस्थान की वेबसाइट www.hindivishwa. 

कल्पनाशीलता व अभिव्यक्ति से छुएं आकाश को

Posted On March - 24 - 2010 Comments Off on कल्पनाशीलता व अभिव्यक्ति से छुएं आकाश को
करिअर विज्ञापन अनिल कुमार छोटी-सी सुई से लेकर हवाई जहाज तक, नमक से लेकर डिब्बाबंद खाद्य सामग्री तक यहां तक कि मनुष्य के पीने के पानी तक को खरीदने के लिए विज्ञापनों का ही सहारा लिया जा रहा है। आर्थिक उदारीकरण के माहौल में भारतीय बाजार में तथा विदेशी बाजार में कोई भी राष्ट्रीय या बहुराष्ट्रीय कंपनी अपनी सामग्रियों की खपत हेतु अपने बजट का बहुत ही बड़ा हिस्सा विज्ञापनों पर खर्च कर 

क्यों जाएं हम स्कूल?

Posted On March - 24 - 2010 Comments Off on क्यों जाएं हम स्कूल?
डा. रामप्रताप गुप्ता अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर शर्मिंदगी की स्थिति से मुक्ति पाने के लिए भारत ने जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व बैंक की सहायता से सन् 2002 में सर्वशिक्षा अभियान प्रारंभ किया ताकि देश के हर बच्चे को पाठशाला में प्रवेश दिलाया जा सके। पिछले 8 वर्ष से चलाये जा रहे इस कार्यक्रम के माध्यम से देश के 6 वर्ष की आयु के 95 प्रतिशत बच्चों को पाठशाला में प्रवेश 

ताकि आएं खूब अंक

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on ताकि आएं खूब अंक
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परीक्षा से पूर्व परीक्षा की रिहर्सल

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on परीक्षा से पूर्व परीक्षा की रिहर्सल
-राज कुमार ‘दिनकर’ दरअसल परीक्षाओं के दिनों में न बहुत ज्यादा पढऩा चाहिए न ही बिल्कुल कम। सवाल उठता है आखिर परीक्षाओं के दिनों में कितना पढ़ें? कभी भी चालीस या पैंतालीस मिनट से ज्यादा नहीं पढऩा चाहिए, क्योंकि किसी भी इनसान की एकाग्रता क्षमता पैंतीस से चालीस मिनट से ज्यादा नहीं होती। इसलिए चालीस मिनट पर एक ब्रेक लें। कमरे से बाहर आयें, फ्रेश हो लें और नए सिरे से पढऩे के लिए बैठें। पढ़ते 

हर कोई दीवाना इलेक्ट्रोनिक मीडिया का

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on हर कोई दीवाना इलेक्ट्रोनिक मीडिया का
करिअर अनिल कुमार सूचना क्रांति के इस दौर में इलेक्ट्रानिक मीडिया का व्यापक प्रसार हो रहा है। विभिन्न चैनल्स के विस्तार से दूरदर्शन केंद्र में रिक्तियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। वर्तमान में देश के अंदर दूरदर्शन के लगभग 560 केंद्र क्रियाशील हैं। विकास के अन्य आयामों के साथ दूरदर्शन प्रसारण केंद्रों में भी वृद्धि हुई है। इस क्षेत्र में उद्घोषक, समाचार वाचक, समाचार सम्पादक, 

पांच सवाल

Posted On March - 17 - 2010 Comments Off on पांच सवाल
1. मल्लिका साराभाई कौन है? 2. तमिल भाषा में रामायण की रचना किसने की? 3. ताजमहल का खाका किसने तैयार किया? 4. ‘मेपललीफ’ किस राष्ट्र का प्रतीक है? 5. खेल चैनल ईएसपीएन का पूरा नाम क्या है? सवालों के जवाब शिक्षा लोक के पिछले अंक में पूछे एक सवालों के जवाब इस प्रकार हैं : 1. जी.वी. मावलंकर 2. माखनलाल चतुर्वेदी 3. अंडमान निकोबार में 4. संस्कृत 5. सालिम अली को —प्रभारी  

आत्मविश्वास कराएगा परीक्षा में पास

Posted On March - 10 - 2010 Comments Off on आत्मविश्वास कराएगा परीक्षा में पास
सुरेन्द्र राणा शिक्षा-शास्त्री विलियम जेम्स का कथन है कि-‘परीक्षा के दौरान थोड़ा-सा आत्मविश्वास परीक्षा के पूर्व चिंतित होकर की गयी ढेरों तैयारी से  कहीं अच्छा परिणाम दे सकता है।’ परीक्षा में अच्छे एवं संतुलित प्रदर्शन के लिए विद्यार्थी में आत्मविश्वास का होना बहुत जरूरी है। यही एक ऐसा मौका होता है जब आपकी पूरे वर्ष की मेहनत का मूल्यांकन होता है। कभी-कभी देखा जाता है कि 

पौधों के साथ जिंदगी और रोजगार

Posted On March - 10 - 2010 Comments Off on पौधों के साथ जिंदगी और रोजगार
करिअर/प्लांट पैथालोजिस्ट कीर्ति शेखर पेड़-पौधे हमें भोजन के अलावा प्राणवायु यानी आक्सीजन भी देते हैं। आदिकाल से ही हम इनका उपभोग करते आए हैं। यह भी बिना कुछ  बोले चुपचाप सिर्फ हमें देते ही रहे हैं। लेकिन परोपकार में लगे रहने वाले पेड़-पौधे कभी-कभी बीमार भी हो जाते हैं। इनकी बीमारी का पता लगाना व इसका उचित इलाज करने के लिए विज्ञान की एक शाखा निर्धारित की गई है। इस शाखा को 

अंतिम तिथि

Posted On March - 10 - 2010 Comments Off on अंतिम तिथि
अशोक सिंह ०पाठ्यक्रम : एमएससी (जैव प्रौद्योगिकी), एमएससी (कृषि), एमवीएससी, एमटैक (जैव प्रौद्योगिकी)। संस्थान : संयुक्त जैव प्रौद्योगिकी प्रवेश परीक्षा, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली-110067. (वेबसाइट-www.jnu.ac.in) अवधि : दो-दो वर्ष प्रत्येक दाखिले : दिनांक 20 मई को आयोजित की जाने वाली चयन परीक्षा के आधार पर। प्रास्पेक्टस : ‘जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय’ 
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