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माइंड गेम की गुगली

माइंड गेम की गुगली

रोहित महाजन विफलता का भय, करिअर खत्म होने की आशंका और जीवन की अनिश्चितता। हम सब इन चीजों को महसूस करते हैं। लेकिन क्या भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली जैसी शख्सियतें भी ऐसा महसूस करती हैं? वे कहते हैं कि वे भी ऐसा ही अनुभव करते हैं। वास्तव में ...

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कल के लिए बचाना होगा आज

कल के लिए बचाना होगा आज

अमलेंदु भूषण खां पहले उत्तर प्रदेश फिर बिहार और अब राजस्थान के कोटा में लगातार हो रही बच्चों की मौत पर राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष कोई भी इन मौतों की गहराई तक जाना नहीं चाहता। पूरी दुनिया में सेहतमंद देश कहलाने के लिए शिशु ...

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क्यों नहीं हो पाया कमाल?

क्यों नहीं हो पाया कमाल?

कलाम का विजन 2020 पुष्परंजन भारत में जो विजन तैयार हुआ, उसकी आवश्यकता सिंगापुर को क्यों आन पड़ी? डेढ़ साल पहले 21 जुलाई 2018 को, जिसने भी अब्दुल कलाम विज़न सोसायटी (एकेवीएस) के बारे में सुना, उसके दिमाग में सबसे पहला सवाल यही कौंधा था। उस समय 400 लोगों की उपस्थिति ...

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हरियाणा 2019 : बदली सियासी चाल

हरियाणा 2019 : बदली सियासी चाल

दिनेश भारद्वाज राजनीतिक रूप से हरियाणा को काफी जागरूक माना जाता है। मीठे बोल सुनकर आपके लिए कुछ भी कर जाने वाली यहां की जनता अच्छे-अच्छों की ‘मरोड़’ निकालने में भी माहिर है। साल 2019 में हरियाणा की सत्तारूढ़ भाजपा प्रदेश के लोगों की यही नब्ज समझने में विफल रही। साल ...

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नागरिकता कानून सवाल और बवाल

नागरिकता कानून सवाल और बवाल

नागरिकता संशोधन बिल अब कानून बन गया है। इसे लेकर देशभर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। सरकार इसे विपक्षी दलों का सियासी विरोध बता रही है, जबकि प्रदर्शन करने वाले इसे एक धर्म के खिलाफ उठाया कदम बता रहे हैं। हालांकि, जानकार संशोधित कानून में धर्म का जिक्र करने ...

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खाद्य सुरक्षा पर संकट

खाद्य सुरक्षा पर संकट

नवीनतम विश्व जलवायु जोखिम सूचकांक बताता है कि जो देश उष्णकटिबंध क्षेत्रों में आते हैं, उनके लिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले खतरों का जोखिम सबसे ज्यादा है। इस पट्टी में भारत जैसे घनी आबादी वाले देश भी आते हैं। हालांकि, आबादी के हिसाब से अगला नंबर इंडोनेशिया और ब्राजील ...

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पाक में सत्ता के दांव-पेच

पाक में सत्ता के दांव-पेच

पुष्परंजन विश्लेषक तंज़िया कहते थे, ‘अल्लाह, आर्मी और अमेरिका की वजह से पाकिस्तान सांस ले रहा है।’ अभी जो हालात हैं, उसमें अमेरिका हाशिये पर है, उसकी जगह वहां की अदालत ने ले ली है। यानी अदालत, आर्मी और अल्लाह की कृपा से यह देश चल रहा है। जिन लोगों को ...

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  • माइंड गेम की गुगली
     Posted On January - 20 - 2020
    विफलता का भय, करिअर खत्म होने की आशंका और जीवन की अनिश्चितता। हम सब इन चीजों को महसूस करते हैं।....
  • कल के लिए बचाना होगा आज
     Posted On January - 13 - 2020
    पहले उत्तर प्रदेश फिर बिहार और अब राजस्थान के कोटा में लगातार हो रही बच्चों की मौत पर राजनीतिक रोटियां....
  • क्यों नहीं हो पाया कमाल?
     Posted On January - 6 - 2020
    भारत में जो विजन तैयार हुआ, उसकी आवश्यकता सिंगापुर को क्यों आन पड़ी? डेढ़ साल पहले 21 जुलाई 2018 को,....
  • हरियाणा 2019 : बदली सियासी चाल
     Posted On December - 30 - 2019
    राजनीतिक रूप से हरियाणा को काफी जागरूक माना जाता है। मीठे बोल सुनकर आपके लिए कुछ भी कर जाने वाली....

परिवार से बड़ी पॉलिटिक्स

Posted On March - 15 - 2019 Comments Off on परिवार से बड़ी पॉलिटिक्स
लोकसभा के सियासी महाभारत के लिए रणभेरी बज चुकी है। राजनीतिक दलों के ‘योद्धा’ अपने-अपने खेमे तलाशने में लगे हैं, लेकिन कई राजनीतिक घराने ऐसे भी हैं, जो इस 17वीं लोकसभा की सियासी जंग में अपनों के खिलाफ तलवारें भांजेंगे। 16वीं लोकसभा में वे एक ही छत्र तले चुनाव मैदान में थे, लेकिन इस बार दूसरों से ज्यादा अपनों को ‘निपटाने’ की कोशिश में हैं। ....

बदलनी होगी सोच

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on बदलनी होगी सोच
महिलाओं को सशक्त करना राजनीतिक एजेंडे में शामिल तो हुआ है, लेकिन अभी पितृसत्तात्मक सोच बदली नहीं है। इस सोच के चलते इसका व्यापक असर अभी दिखना बाकी है। संसद में ही 33 प्रतिशत आरक्षण पर 22 साल से कुछ नहीं हो सका है। कोई भी दिवस मनाने का अपना एक महत्व होता है। यह इतिहास को याद करने और पीछे मुड़कर संघर्ष यात्रा को गर्व से देखने का दिन होता है, लेकिन दिक्कत यह है कि इसका भी बाजारीकरण हो गया है। महिलाओं 

मुखर हुई महिलाएं

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on मुखर हुई महिलाएं
महिलाओं के प्रति हिंसा के कई कारण हैं। एक तो महिलाएं मुखर हुई हैं, भली औरत के तमगे से खुद को आज़ाद किया और बुरी औरत कहलाने का साहस जुटा लिया। उसने सामाजिक निंदा और आरोपों की परवाह करना बंद कर दिया। उसने अपने को पहचाना, उसके भीतर अपनी पहचान की छटपटाहट आई और उसने चुनौतियां स्वीकार कीं। अपने दम पर आगे बढ़ीं। उन्होंने रूढ़ियों ....

अपनी गरिमा पहचानें

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on अपनी गरिमा पहचानें
पिछले साल विश्व महिला दिवस 100 वर्ष पूरे कर चुका है, लेकिन भारत में आज भी इसकी प्रासंगिकता विचारणीय है। सशक्तीकरण का सही अर्थ है कि स्त्री अपने पक्ष में अपने फैसले ले सके। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है अपनी देह के पक्ष में अपनी सहमति और विरोध जाहिर कर सके। यह गौरतलब है कि घर से बाहर तक औरत के वजूद को महज़ एक देह ....

… पर नहीं बढ़ी गांव की भागीदारी

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on … पर नहीं बढ़ी गांव की भागीदारी
आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। जितनी आजादी उन्हें आज है, वैसी पहले नहीं थी। वर्तमान समय में महिलाओं की स्थिति में काफी बदलाव आए हैं, लेकिन ये बदलाव शहरी क्षेत्रों में ही दिखते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इन बदलावों की गूंज सुनाई नहीं देती। कितने ही महिला दिवस आए और चले गये, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इससे बेखबर आज भी पितृसत्तात्मक सोच ....

नयी दिशा में नारी

Posted On March - 8 - 2019 Comments Off on नयी दिशा में नारी
गरिमा यात्रा भारत जैसे देश की सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक परिस्थितियों में कई अर्थों में अभूतपूर्व है। पहली बार इतने व्यापक स्तर पर एक गैर-राजनीतिक आयोजन हुआ। दूसरी बात, 'मी टू' अभियान को पुरुषत्ववादी अहंकार से ग्रस्त लोग एक शिक्षित, खाते-पीते, मध्यम वर्ग तक सीमित बता रहे थे। उनका कहना था कि आम लोगों से इसका कोई ताल्लुक नहीं है। ऐसा कहने वालों का मानना था ....

सीआईए और सऊदी अरब ने पाला था हाफिज को

Posted On March - 1 - 2019 Comments Off on सीआईए और सऊदी अरब ने पाला था हाफिज को
पाकिस्तान के तानाशाह जनरल जियाउल हक ने सबसे पहले हाफिज सईद के अंदर की आग को पहचाना था। उस समय हाफिज सईद लाहौर के यूनिवर्सिटी आॅफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाॅजी में इस्लामिक स्टडीज का प्रोफेसर था। 1980 के दशक में हाफिज सईद को सऊदी अरब इस्लामिक शिक्षा के लिए भेजा गया, जहां उसकी मुलाकात मुफ्ती शेख अब्दुल अजीज बिन बाज और फिलस्तीनी स्काॅलर अब्दुल्ला उज्जम से ....

आतंक का आका पाकिस्तान

Posted On March - 1 - 2019 Comments Off on आतंक का आका पाकिस्तान
इमरान खान को सबूत चाहिए कि मसूद अजहर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा में आत्मघाती हमला कराया है। दुनियाभर में उनके इस बयान को मूर्खतापूर्ण करार दिया जा रहा है। इस कांड के कुछ घंटे बाद ही जैश-ए-मोहम्मद के प्रवक्ता मुहम्मद हसन ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। फिर भी इमरान सबूत मांग रहे हैं। ‘सबूत दीजिए और बातचीत कीजिए‘, ये पाक प्रधानमंत्री के शिगूफे ....

‘माननीयों’ का मर्ज

Posted On February - 22 - 2019 Comments Off on ‘माननीयों’ का मर्ज
हरियाणा को सेहतमंद और तंदरुस्ती वाले प्रदेशों में गिना जाता है, लेकिन उसी हरियाणा के लोग ‘माननीय’ विधायक बनने के बाद ‘बीमार’ हो रहे हैं। विधायक ही नहीं, उनके जीवनसाथी भी बीमार रहे हैं। ‘बीमारी’ भी ऐसी कि लगभग हर माह उन्हें हजारों रुपये की दवा खानी पड़ रही है। ....

जानलेवा जाम

Posted On February - 15 - 2019 Comments Off on जानलेवा जाम
सुरा प्रेम में भारत का दर्जा दुनिया के अन्य कई देशों से बहुत ऊपर है। विश्व में हमारा खुशहाली सूचकांक गिर रहा है तो शराब की खपत के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2005 से 2016 के बीच यह खपत दोगुनी हो चुकी है। मनोवैज्ञानिक विश्लेषण बताता है कि आनंद-प्रमोद के व्यसन का रूप ले लेने से व्यक्ति को मानसिक तनाव, असंतोष ....

सरकार का सियासी कदम

Posted On February - 8 - 2019 Comments Off on सरकार का सियासी कदम
पूर्वोत्तर राज्यों और बंगाल के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक एक बड़ा राजनीतिक-सामाजिक मुद्दा बन गया है। भाजपा को इस विधेयक में अपना बड़ा सियासी फायदा दिखाई दे रहा है, जबकि राजनीतिक पर्यवेक्षक केंद्र सरकार की इस पहल को पूरी तरह संविधान की मूल भावना और चरित्र के विरुद्ध ठहरा रहे हैं। ....

नागरिकता संशोधन विधेयक : बिल पर बवाल

Posted On February - 8 - 2019 Comments Off on नागरिकता संशोधन विधेयक : बिल पर बवाल
असम और त्रिपुरा सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में गैरकानूनी तरीके से आये बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या कई दशकों से राजनीतिक मुद्दा रही है। इन राज्यों में अवैध तरीके से रहने वाले इन विदेशी घुसपैठियों को पहचान कर बाहर निकालने की मांग भी होती रही है, क्योंकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि इनकी बड़ी संख्या की वजह से यहां के जातीय समीकरण बिगड़ गये ....

राजनीति में फलता-फूलता परिवारवाद

Posted On February - 1 - 2019 Comments Off on राजनीति में फलता-फूलता परिवारवाद
परिवारवाद के खिलाफ पहले जो तीखे सुर सुनाई देते थे, अब प्रियंका गांधी के राजनीति में प्रवेश करने पर नहीं सुनाई दिए। कारण साफ है कि आज कश्मीर से कन्या कुमारी तक लगभग ज्यादातर दलों व सभी राज्यों में परिवारवाद गहरी जड़ें जमा चुका है। अभी वामदल ही इससे अछूते हैैं। ....

प्रियंका की परीक्षा

Posted On February - 1 - 2019 Comments Off on प्रियंका की परीक्षा
वे इंदिरा गांधी की तरह दिखती हैं। उनका चेहरा-मोहरा इंदिरा गांधी से काफी मिलता-जुलता है। बालों का स्टाइल भी लगभग वैसा ही है। आमतौर पर आधुनिक परिधान में रहने वाली प्रियंका वाड्रा को सामाजिक व राजनीतिक कार्यक्रमों में साड़ी में देखा जाता है। ....

संविधान की कसौटी पर कितना खरा तंत्र

Posted On January - 25 - 2019 Comments Off on संविधान की कसौटी पर कितना खरा तंत्र
भारत का संविधान हर व्यक्ति को रोजी-रोटी व कपड़े का भरोसा देता है, संविधान हर व्यक्ति को उसकी मर्यादा को बनाए रखने और अपनी बात कहने की पूर्ण आजादी प्रदान करता है। संविधान हर देशवासी को बिना किसी लैंगिक, जातीय, सामुदायिक व सांप्रदायिक भेदभाव के गुजर-बसर करने का पूरा अधिकार देता है। ....

गुम न जायें गणतंत्र के गुण

Posted On January - 25 - 2019 Comments Off on गुम न जायें गणतंत्र के गुण
जब हम ‘भारत के लोग’ अपने देश का गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं, बाबा नागार्जुन की प्रसिद्ध कविता का वह सवाल पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो गया है, जिसमें पहले वे पूछते हैं- ‘किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है’, फिर अपने सवाल को ‘कौन यहां त्रस्त है, कौन पस्त और कौन मस्त’ तक ले जाते हैं। ....
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