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खास खबर
मंदी पर महाभारत

मंदी पर महाभारत

आलोक पुराणिक मंदी है या नहीं? यह सवाल है तो आर्थिक लेकिन यह विकट राजनीतिक भी है। सरकार और उसके प्रवक्ता चाहते हैं कि इसे मंदी नहीं सुस्ती मान लिया जाये और कुल मिलाकर ऐसा मसला माना जाये, जो कुछ दिनों में ठीक हो जायेगा। दूसरी तरफ, कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी ...

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ट्रैफिक रूल्स की रेड लाइट

ट्रैफिक रूल्स की रेड लाइट

अभिषेक कुमार सिंह मुमकिन है कि कई लोगों के लिए नियम-कानून तोड़ना शान की बात हो। रसूखदार, ऊंचे संपर्कों वाले और जेब में नोटों की गड्डी लेकर चलने वालों के लिए कानून को ठेंगा दिखाना कभी मुश्किल नहीं रहा, लेकिन पहली सितंबर, 2019 से देश में लागू संशोधित नये मोटर वाहन ...

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कुदरती खेती कमाल की

कुदरती खेती कमाल की

राजकिशन नैन कुदरत ने महामूल्यवान संपदा के रूप में जो चीजें हमें उपहार में दी हैं, उनमें धरती यानी माटी की महिमा सबसे ज्यादा है। धरणी धन से परिपूर्ण है, इसीलिए बड़ों ने इसे वसुंधरा कहा है। मेरी मां सवेरे खाट छोड़ते ही सबसे पहले तीन बार धरती को मैया कहकर ...

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बार-बार बाढ़

बार-बार बाढ़

हरीश लखेड़ा देश का एक तिहाई से ज्यादा भू-भाग इस मानसून में बारिश के कहर से बेहाल रहा है। जुलाई और अगस्त के दौरान उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक कोई न कोई भू-भाग जल में डूबा रहा है। केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, असम, ...

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दलबदल से राजबल

दलबदल से राजबल

हरीश लखेड़ा विश्व की सबसे बड़ी सियासी पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। यह इसलिए कि भाजपा विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के नेताओं को बड़ी संख्या में अपने में शामिल कराने के अभियान में जुटी है। एक ओर पार्टी अपनी सदस्यता ...

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फिर सोनिया गांधी

फिर सोनिया गांधी

हरीश लखेड़ा कांग्रेस को फिर सोनिया गांधी की शरण लेनी पड़ी है। राहुल गांधी के ‘रणछोड़ जी’ बनने के बाद संकट में आई कांग्रेस के सामने सोनिया से बेहतर कोई विकल्प भी नहीं था। इसलिए राहुल के कांग्रेस का अगला अध्यक्ष नेहरू-गांधी परिवार से बाहर के व्यक्ति को बनाने के बयान ...

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आजादी का अहसास

आजादी का अहसास

अनूप भटनागर हिन्दू समाज में व्याप्त सती प्रथा, देवदासी प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर अंकुश लगाने के लिये कानून बनाने के बाद देश की संसद ने मुस्लिम समाज के सुन्नी समुदाय के एक वर्ग में प्रचलित एक बार में तीन तलाक देने की कुप्रथा को अब दंडनीय अपराध बनाकर ...

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  • मंदी पर महाभारत
     Posted On September - 16 - 2019
    मंदी है या नहीं? यह सवाल है तो आर्थिक लेकिन यह विकट राजनीतिक भी है। सरकार और उसके प्रवक्ता चाहते....
  • ट्रैफिक रूल्स की रेड लाइट
     Posted On September - 9 - 2019
    मुमकिन है कि कई लोगों के लिए नियम-कानून तोड़ना शान की बात हो। रसूखदार, ऊंचे संपर्कों वाले और जेब में....
  • कुदरती खेती कमाल की
     Posted On September - 2 - 2019
    कुदरत ने महामूल्यवान संपदा के रूप में जो चीजें हमें उपहार में दी हैं, उनमें धरती यानी माटी की महिमा....
  • बार-बार बाढ़
     Posted On August - 26 - 2019
    देश का एक तिहाई से ज्यादा भू-भाग इस मानसून में बारिश के कहर से बेहाल रहा है। जुलाई और अगस्त....

फसल विविधीकरण फैसले की घड़ी

Posted On May - 26 - 2017 Comments Off on फसल विविधीकरण फैसले की घड़ी
पंजाब में धान की फसल की बुआई के दिन नजदीक आ रहे हैं। पर्यावरण-संतुलन, भूमिगत जल के गिरते स्तर और कृषि नीति को देखते हुए चावल की जोत के रकबे को घटाने की जरूरत है। भारी मात्रा में पानी की जरूरत के लिए जानी जाने वाली धान की फसल से यहां पानी संकट गहरा रह है। ....

जड़ में जहर और छांट रहे हैं पत्तियां

Posted On May - 18 - 2017 Comments Off on जड़ में जहर और छांट रहे हैं पत्तियां
सोनीपत निवासी युवती के साथ सामूहिक बलात्कार, वीभत्सता, यौन क्रूरता की हदें पार करने के बाद उसकी हत्या कर रोहतक शहर के निकट सड़क किनारे झाड़ियों में फेंक देने की जिस घटना ने आजकल समूचे हरियाणा को हिला रखा है, उस “हरियाणवी निर्भया कांड” का खुलासा अपने आप में पुलिस व्यवस्था की लापरवाही और संवेदनहीनता का गंभीर प्रमाण भी है। ....

और कितनी निर्भया

Posted On May - 18 - 2017 Comments Off on और कितनी निर्भया
अगर मुझे लम्बी सी सीढ़ी मिल जाये जो आसमान तक जाती हो तो मैं उस पर चढ़कर अपने रक्त की स्याही से लिखकर आऊं कि आज बहन-बेटियों के सम्मान से किसी का कोई वास्ता नहीं रह गया है, ताकि उसे पूरा जहान पढ़ ले और इस सच्चाई पर आत्म-मंथन करे। ....

सीएम को जवाब देना होगा : अभय कुमार दुबे

Posted On May - 11 - 2017 Comments Off on सीएम को जवाब देना होगा : अभय कुमार दुबे
भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन कर दिल्ली की सत्ता हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी और इसके संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता ने सियासत में बदलाव की उम्मीद से सिंहासन पर बैठाया। जनलोकपाल, स्वराज सरीखे जुमले देश की राजधानी के लोगों के कानों में कभी मिश्री घोला करते थे, लेकिन दिल्ली नगर निगम चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया कि जनता ने इस ....

बच नहीं पाएंगे केजरीवाल : मिश्रा

Posted On May - 11 - 2017 Comments Off on बच नहीं पाएंगे केजरीवाल : मिश्रा
कभी अरविंद केजरीवाल के खास रहे कपिल मिश्रा आजकल उनके सबसे बड़े राजनीितक दुश्मन बने हुए हैं। प्रमुख संवाददाता अजय पांडेय की कपिल मिश्रा से बातचीत के प्रमुख अंश। ....

आत्मघाती आप

Posted On May - 11 - 2017 Comments Off on आत्मघाती आप
आप यानी आम आदमी पार्टी एक बार फिर सुर्खियों में है। अपनी जन्म स्थली दिल्ली से लेकर पंजाब तक आप मीडिया में छायी है। सुर्खियां किसी भी राजनेता की पहली चाहत होती हैं। फिर आप तो मानी ही मीडिया की देन जाती है। लेकिन इस बार आप जिन कारणों से सुर्खियों में है, वह नकारात्मक ही नहीं हैं, बल्कि आप की नैतिकता और प्रासंगिकता पर ....

बस्तर का नश्तर

Posted On May - 4 - 2017 Comments Off on बस्तर का नश्तर
छत्तीसगढ़ में एक और नक्सली हमला। इस बार सुकमा में 25 जवान शहीद। आदिवासी जन-जीवन के लिए आकर्षण का केंद्र रहा बस्तर दशकों से नक्सली आतंक का दंश झेल रहा है। जो बस्तर कभी अल्हड़-उन्मुक्त आदिवासी जीवन के लिए जाना जाता था, अब नक्सली हिंसा के लिए ही सुर्खियां बनता है। बस्तर के इस दर्द की दास्तां बयां कर रहे हैं रमेश नैयर। ....

फीस बनी फांस

Posted On April - 27 - 2017 Comments Off on फीस बनी फांस
आजकल निजी स्कूलों में नये सत्र की शुरुआत होती है आंदोलन से। निजी स्कूल हर साल स्कूल फीस बढ़ा देते हैं और अभिभावक इसका विरोध करते हैं। ज्ञापन देते हैं। कई बार आंदोलन सड़कों तक भी पहुंचता है। संसद में उठता है। लेकिन इसके बाद सब शांत। एक साल के लिए। फीस बढ़ोतरी की समस्या तो देश में हैं। ....

शिक्षा बनती जा रही कारोबार

Posted On April - 27 - 2017 Comments Off on शिक्षा बनती जा रही कारोबार
राज्य की सबसे पहली जिम्मेदारियों में शुमार शिक्षा इन्वेस्टमेंट का सबसे बेहतरीन क्षेत्र बन गया है। आप किसी व्यापारी से पूछ लीजिए। वह आपको बताएगा कि अच्छी कमाई के लिए आप इसी क्षेत्र में निवेश कीजिए। विडंबना देखिए कि जिनका शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है, वे लोग स्कूल चला रहे हैं। ....

जरा सोचिए…

Posted On March - 1 - 2015 Comments Off on जरा सोचिए…
हरियाणा में आये दिन हो रहे सड़क हादसों में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। कोई दिन ऐसा नहीं जिस दिन अखबार ऐसी खबरों से अटे न पड़े हों। कभी करनाल तो कभी हिसार से या फिर कभी रोहतक से तो कभी फरीदाबाद आये दिन सड़क हादसों के समाचार आते रहते हैं। इन हादसों में किसी का इकलौता चिराग बुझ जाता है। किसी मां की गोद सूनी हो जाती है तो किसी का सुहाग छिन जाता है। किसी बहन का भाई चला जाता है तो किसी भाई की प्यारी 

होली के पां पाणी म्हं

Posted On March - 1 - 2015 Comments Off on होली के पां पाणी म्हं
होली की झल, होली पूजन, होली पाच्छै सरीखे मुहावरे और होली-सी मंगलणा, होली पाच्छै बुड़कल्यां का के काम?, एक घर होली अर एक घर दिवाली, कोए गावै होली के…कोए गावै दिवाली के तथा होली के पां पाणी म्हं जैसी कहवतें बताती हैं कि होली के ठाठ हरियाणा में सबसे निखालिस और निराले हैं। बांगरू की एक पुरानी कहाबत में होली को तमाशे को सर्वकाम्य एवं सर्वोच्च स्थान दिया गया है— ‘धीणा धौली का, जमाई कौली का। डिठोरा 

देहात में महिलाओं का सांग और लूहर

Posted On March - 1 - 2015 Comments Off on देहात में महिलाओं का सांग और लूहर
होली के अवसर पर देहात में खूब खेल-तमाशे होते हैं। फाल्गुन लगते ही होली के स्वागत और सत्कार में महिलाएँ और पुरूष लग जाते हैं। पुरूषों की भाँति महिलाएँ भी अपने काम-धंधे से निबटकर रात को गली-मोहल्ले में इकट्ठी होकर धमाचौकड़ी मचाती हैं, वहीं नवयौवनाएँ झुंडों में नाचती-गाती और सांग निकालती हैं। चांद की चांदनी में नवयौवनाओं के अल्हड़ नृत्यों की मधुरता और सुंदरता सिर चढ़कर बोलती है। पुरुषों 

आंडी रमलू

Posted On March - 1 - 2015 Comments Off on आंडी रमलू
सते, फते, नफे, सविता, सरिता, कविता इतवार को चर्चा घर में सुबह दस बजे पहुंच जाते हैं। नफे अन्ना के आन्दोलन पर बात करना चाहता है तो सते स्वामीनाथन रिपोर्ट पर बात करना चाहता है तो सविता नेपाली लड़की रोहतकी निर्भया पर चर्चा करना चाहती है। मुद्दे सारे के सारे महत्वपूर्ण भी और समसामयिक भी। करें तो क्या करें? फते बोल्या-इन सारे मामल्यां नै छोड़ कै कोए मजाक लतीफी होनी चाहिए। फते के सुझाव पर आम 

हरियाणवी में मानक साहित्य सृजन करना होगा

Posted On March - 1 - 2015 Comments Off on हरियाणवी में मानक साहित्य सृजन करना होगा
नजरिया /हरिकृष्ण द्विवेदी जहां एक तरफ यह संतोष का विषय है कि हरियाणवी रचनाधर्मिता निरंतर नए आयाम रच रही है, हर विधा में हरियाणवी साहित्य न्यूनाधिक रचा गया है किंतु यह पहलू भी उल्लेखनीय है कि अधिकांश हरियाणवी साहित्य संबंधित मानदण्डों पर खरा नहीं उतरता। हमें हरियाणवी भाषा एवं साहित्य को न्यायोचित स्थान एवं मान दिलाने के लिए मानक साहित्य का सृजन करना होगा। यह मानना है कुंडलियां विधा 

इतणी भी लट्ठमार नही है हरियाणवी बोली

Posted On March - 1 - 2015 Comments Off on इतणी भी लट्ठमार नही है हरियाणवी बोली
हरियाणवी बोली को लट्ठमार, गंवारू व बांगरू कहकर इसका मजाक उड़ाने वाले, इससे किनारा करने वाले निसन्देह हरियाणवी साहित्य, लोक, संस्कृति, रहन-सहन से अछूते रहे हैं। उनका पाल़ा शायद किसी बुरे हादसे की तरह ही हरियाणवी से हुआ होगा, अगर वो शहर की आबोहवा से हटकर गाँव की पगडण्डियों, खेत-खलिहानों, चना, बाजारा, ज्वार, सरसों के खेतों, सरकण्डे की झोपडिय़ों से होकर गुजरेंगे तो उनका ये भ्रम दूर हो जाएगा। 

होली पाछे बिड़कलां का के काम

Posted On March - 1 - 2015 Comments Off on होली पाछे बिड़कलां का के काम
कहावत है-होली पाछे बिड़कलां का के काम। यानी अवसर विशेष के समय जिस चीज की जरूरत हो और वह चीज जरूरत के समय उपलब्ध न होकर, बाद में उपलब्ध हो। इस कहावत से यह बात स्पष्ट होती है कि होली व बिड़कलों का पुराने समय से अटूट संबंध रहा है। लेकिन अब तो बेचारी होली जैसे आती है, वैसे ही लौट जाती है। होली के ईंधन के बहाने सदियों से चली आई बिड़कले बनाने की परम्परा आज दम तोड़ रही है। होली के रंग, गुलाल खेलने