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6 वक्री ग्रहों के बीच आज दुर्लभ सूर्य ग्रहण

Posted On June - 21 - 2020

मदन गुप्ता सपाटू
ज्योतिष के अनुसार आज का सूर्य ग्रहण दुर्लभ है। यह ग्रहण मिथुन राशि में लग रहा। इस दौरान 6 ग्रह- बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु वक्री रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह स्थिति शुभ नहीं मानी जा रही। इसके अलावा अशुभ गण्डयोग, पूर्णकाल सर्पयोग, षडाष्टक योग भी बन रहा है।
यह ग्रहण ऐसे दिन लग रहा है, जब सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ेंगी। इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। रविवार यानी सूर्य के दिन ग्रहण होने से यह और भी प्रभावी हो गया है। पंचांग के अनुसार, साल का यह पहला सूर्य ग्रहण सुबह 9.15 बजे से शुरू होगा। हालांकि, यह दिखना 10.17 बजे शुरू होगा। यह दोपहर 2 बजे खत्म होगा, लेकिन इसका प्रभाव करीब 3 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण वलयाकार होगा, यानी चांद पूरी तरह से सूर्य को नहीं ढक पाएगा। करीब 30 सेकंड के लिए ही चांद सूर्य के बड़े भाग को ढकेगा। अंत में सूर्य का आखिरी हिस्सा चमकते हुए रिंग के समान नजर आएगा। यह सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण के 16 दिन बाद लग रहा है। 5 जुलाई को एक बार फिर चंद्र ग्रहण लगेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार एक माह में दो ग्रहण कई क्षेत्रों में हानि का सूचक होते हैं। दुष्प्रभावों से बचने के लिए भगवान शिव और भगवान विष्णु की उपासना करनी चाहिए।
राशियों पर प्रभाव : मेष, सिंह, कन्या, मकर और मीन राशि वालों पर ग्रहण का अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा। जबकि वृष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु और कुंभ राशि के जातकों को सावधान रहने की जरूरत है। इसमें वृश्चिक राशि वालों को विशेष ध्यान रखना चाहिये। इस सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान, दान और मंत्र जाप करना विशेष फलदायी रहेगा। अशुभ असर से बचने के लिए प्रभावित राशि वालों को ग्रहण काल के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए या सुन भी सकते हैं। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को अनाज दान करें।
क्या न करें : ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। ग्रंथों के अनुसार सूतक काल में देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिये। इस दौरान कोई शुभ काम शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता है कि सूतक में बालक, वृद्ध एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन नहीं करना चाहिए। ग्रहण से पहले खाद्य पदार्थों में तुलसी दल या कुशा रखनी चाहिए। ग्रहण के दौरान फूल, पत्ते, लकड़ी आदि नहीं तोड़ने चाहिए। देवी-देवताओं की प्रतिमा और तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए। उधार लेन-देन से बचना चाहिए। सूर्य ग्रहण को भूलकर भी सीधे देखने की गलती न करें।
क्या करें : ग्रहण काल के समय भगवान का ध्यान करना चाहिए। मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए।
सूतक काल के पहले तैयार भोजन को खाने से पहले उसमें तुलसी के पत्ते डालकर शुद्ध करें’ ग्रहण लगने और खत्म होने के दौरान सूर्य मन्त्र ‘ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ’ के अलावा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का धीमे-धीमे शुद्ध जाप करें।


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