जनरल नरवणे ने किया अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास अग्रिम इलाकों का दौरा !    फारूक, उमर ने 16 नेताओं की रिहाई के लिये किया हाईकोर्ट का रुख !    पायलट के संपर्क में राहुल-प्रियंका, मनाने की कोशिशें तेज! !    पिचाई ने की 75,000 करोड़ रुपये के ‘इंडिया डिजिटाइजेशन फंड' की घोषणा !    मेडिकल प्रवेश में ओबीसी कोटे पर हाईकोर्ट जल्द ले निर्णय : सुप्रीमकोर्ट !    राजस्थान संकट : कांग्रेस विधायक दल ने गहलोत के समर्थन में पारित किया प्रस्ताव! !    बाबरी प्रकरण : कल्याण सिंह ने विशेष अदालत में दर्ज कराये बयान !    भारत-अमेरिका व्यावसायिक सम्मेलन में पाम्पियो, सीतारमण, जयशंकर करेंगे अपनी बात !    शिवराज सिंह चौहान ने किया विभागों का बंटवारा, सिंधिया समर्थकों को मिले अहम मंत्रालय! !    न्यूजीलैंड की मस्जिदों में गोलीबारी का आरोपी खुद लड़ेगा केस! !    

शरीर में विटामिन डी की जांच करायें

Posted On June - 20 - 2020

डॉ मनिंदर सिंह

कोरोना महामारी के इस दौर में इतने लंबे समय तक चले लॉकडाउन ने लोगों की समूची स्वास्थ्य प्रणाली और फिटनेस पर बुरा असर डाला है। असल में शारीरिक निष्क्रियता रहने से कई तरह के विकार उत्पन्न होते हैं। खासतौर पर तब, जब हम घर के अंदर बंद रहते हैं। घर में पड़े रहने यानी शारीरिक गतिविधियों के कम होने से हमारे शरीर में विटामीन डी का स्तर कम हो जाता है। विटामीन डी की यह कमी हमारे हड्डियों पर खराब असर डालती है। लंबे समय तक निष्क्रियता के परिणामस्वरूप हड्डियों और मांसपेशियों की डी-कंडीशनिंग हो सकती है, जिससे विटामिन डी की कमी होती है और इसके दुष्प्रभाव सामने आने लगते हैं। इसके अलावा, हाल के कुछ अध्ययनों के अनुसार, विटामीन डी के कम होने से श्वसन प्रणाली के प्रभावित होने के साथ-साथ अन्य बीमारियों की भी आशंका बढ़ जाती है। यानी शरीर में कई तरह के विकार उत्पन्न हो जाते हैं।
लॉकडाउन के दौरान हममें से बहुतेरे लोगों का धूप में निकलना भी नहीं हो पाया। ऐसे में हमारा शरीर विटामीन डी के मूल स्रोत यानी सूरज की रोशनी के संपर्क में कम आया। इसलिए हमें अन्य तरीके से विटामीन डी को लेने की आवश्यकता है ताकि हमारे शरीर को कैल्शियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद मिले। ये पोषक तत्व स्वस्थ हड्डियों और मांसपेशियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। विटामिन डी की कमी से हड्डियों के घनत्व में कमी यानी हड्डियों के बीच खाली स्थान बढ़ने की आशंका हो सकती है, जिससे वयस्कों में ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर होने की आशंका बढ़ती है तो बच्चों में रिकेट्स हो सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डी की अन्य बीमारियों की आशंका अधिक होती है, खासकर 50 से ऊपर वालों को इसका अधिक खतरा होता है। अपर्याप्त आहार से ऑस्टियोपोरोसिस भी हो सकता है। विटामिन डी शरीर को कैल्शियम आहार और पूरक स्रोतों से अवशोषित करने में मदद करता है।
संक्रमित लोगों में से कुछ में कोरोना वायरस के कारण निमोनिया जैसे लक्षण हो सकते हैं और यह वजह उनकी खराब फेफड़ों की स्थिति बढ़ा सकती है। विटामिन डी की कमी का इलाज करने से फेफड़ों के संक्रमण में कमी लाई जा सकती है। इसके साथ ही सीओपीडी और अस्थमा के रोगियों को होने वाली दिक्कत को कम करने में मदद मिल सकती है। विटामिन डी न्यूरोमस्कुलर और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मददगार है। इससे फेफड़ों की सूजन को कम करने में भी मदद मिलती है। इसलिए, सीओपीडी यानी फेफड़ों की सूजन का एक रूप, का बेहतर इलाज विटामीन डी के सेवन से संभव है। हालांकि, विटामिन डी की खुराक को केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लिया जाना चाहिए, क्योंकि इसके अधिक मात्रा के सेवन से गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
(लेखक इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर-नयी दिल्ली में वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक हैं)

किसे ज्यादा खतरा ?
0 अधेड़ उम्र के लोग : बढ़ती उम्र के साथ त्वचा की विटामीन डी को संश्लेषित करने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे लोग ज्यादातर समय घर में ही रहते हैं जिसके कारण उन्हें पर्याप्त मात्रा में विटामीन नहीं मिल पाता है।
0 दुधमुंहे बच्चे : स्तनपान करने वाले बच्चों की विटामिन डी की जरूरतें मां के दूध से पूरी नहीं हो सकतीं क्योंकि मां के दूध में विटामिन की मात्रा उसकी अपने शरीर में विटामिन डी की स्थिति से जुड़ी होती है।
0 धूप में बहुत कम निकलने वाले लोग : गहरे रंग के लोग या जो खुद को धूप से बचाने के लिए जतन करते हैं अर्थात हर समय ढके रहते हैं, विटामिन डी की कमी से पीड़ित हो सकते हैं। इसलिए प्रदूषित वातावरण में सीओपीडी बढ़ने यानी विटामीन डी की कमी का ऐसे लोगों में अतिरिक्त जोखिम हो सकता है।
0 क्या करें : पर्याप्त सामाजिक दूरी बनाते हुए और हाथ की स्वच्छता के सभी आवश्यक सावधानी बरतते हुए, धूप में नियमित रहने को सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। सीधे धूप में खड़े होना जरूरी नहीं, बस आप कमरे से बाहर निकल कर कुछ समय गुजारें, इतना ही पर्याप्त है। खासकर गर्मियों के दौरान आप सूरज की रोशनी में सीधे न आकर बाहर के वातावरण में कुछ देर रहें। महामारी के इस दौर में यदि आप जोखिम समूहों में से हैं, तो अपने विटामिन डी के स्तर की जांच करवाएं। यदि विटामीन डी की कमी है तो अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस कमी को पूरा करें।a


Comments Off on शरीर में विटामिन डी की जांच करायें
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.