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विधानसभा कमेटियों पर सियासत हावी, नहीं बनी विशेषाधिकार हनन कमेटी

Posted On June - 4 - 2020

दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 4 जून
हरियाणा विधानसभा की विभिन्न कमेटियों के गठन में पहली बार ऐसा हुआ है जब विधायकों को उनकी पसंद की कमेटियों में जगह मिली है। आमतौर पर स्पीकर अपनी मर्जी से कमेटियों में विधायकों को शामिल करते रहे हैं। इस बार स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने सभी विधायकों से कमेटियों में शामिल होने के लिए 3-3 विकल्प मांगे थे। बुधवार को अलग-अलग 12 कमेटियों के गठन का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।
बड़ी बात यह है कि पिछली बार की तरह इस बार भी विशेषाधिकार हनन कमेटी का गठन नहीं हो सका है। विधानसभा में इसे सबसे पावरफुल कमेटी माना जाता है। इस कमेटी में शामिल होने के लिए विधायकों में होड़ भी रहती है। इसका बड़ा कारण यह है कि विधायकों की अनदेखी के मामले में इसी कमेटी के पास अधिकारियों को तलब करने के अधिकार हैं। विधायकों तक के मामलों की सुनवाई यही कमेटी करती है।
सूत्रों का कहना है कि ‘बड़े दबाव’ के चलते कमेटी का गठन नहीं हो सका है। पिछले महीने विधानसभा स्पीकर द्वारा विधायकों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की गई बैठक में भी विशेषाधिकार हनन कमेटी का मुद्दा उठा था। इसी बैठक में विधायकों ने अधिकारियों पर फोन तक नहीं उठाने के आरोप जड़े थे। स्पीकर ने विधायकों की शिकायतों पर सीधे सीएम मनोहर लाल खट्टर से बात करने का बोल्ड फैसला लिया।
सरकार ने लिखित में अधिकारियों को सांसदों व विधायकों की सुनवाई करने के आदेश भी जारी किए। वहीं दूसरी ओर, बुधवार को गठित की गई अलग-अलग 12 कमेटियों में से अधिकांश विधायकों को मनचाही कमेटियों में जगह मिली है। मुलाना से कांग्रेसव विधायक वरुण चौधरी ने कहा, पहली बार स्पीकर ने विधायकों की पसंद-नापसंद का ख्याल रखा। विधायकों को उनकी रुचि अनुसार कमेटियों में शामिल किया। बताते हैं कि डबवाली विधायक अमित सिहाग ने तो तीन विकल्प दिए थे, उनका किसी में नंबर नहीं लगा।
स्पीकर ने 9 को बुलाई बैठक
सभी 12 कमेटियों के चेयरमैन की पहली बैठक स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने 9 जून को बुलाई है। विधानसभा में होने वाली इस बैठक में कमेटियों को प्रभावी बनाने की रणनीति बनेगी। अभी तक कमेटियां रुटीन में बैठकें करती रहीं और हर साल उनकी रिपोर्ट सदन में पेश होती रही। जानकारी के अनुसार इस बार हर विभाग की कमेटी को प्रभावशाली ही नहीं शक्तिशाली भी बनाया जाएगा। अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। कमेटियों की सिफारिश पर काम होगा। इन्हीं मुद्दों पर रणनीति तय करने के लिए स्पीकर कमेटियों के चेयरमैन के साथ विचार-विमर्श करेंगे।
कमेटियों के संतुलन पर सवाल
बेशक, स्पीकर ने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन कमेटियों में महिला संतुलन नहीं बन सका। मसलन, कई कमेटियां ऐसी हैं, जिनमें एक ही महिला को जगह मिली है। इसी तरह से अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति को जातियों तक सीमित करने को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे हैं।
क्या कहते हैं विधानसभा स्पीकर
विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि विशेषाधिकार हनन कमेटी का गठन भी होगा। सप्ताह-दस दिन में कमेटी बना दी जाएगी। गठित कमेटियों के चेयरमैन की 9 को बैठक बुलाई है। सभी कमेटियों की वर्किंग में सुधार पर विस्तृत रूप से चर्चा होगी।


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