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बाल कविता

Posted On June - 20 - 2020

गर्मी से जंगल में तबाही
गर्मी आई, गर्मी आई, जंगल में है मची तबाही।
शेरनी रानी, बिल्ली ताई, लू के आगे हैं घबरायी।।
सूरज दादा, क्या गुस्सा है, अग्नि बहुत है क्यों बरसाई।
गर्म लू के थपेड़ों ने जंगल के हर कोने है आग लगाई।।
राजा शेर है घबराया, उपाय कोई समझ नहीं आया।
सेनापति हाथी आया उसने फिर राजा को समझाया।।
राजा जी, सब जंगल वासियों को बुलाना होगा।
पौधे सब लगाए अब ये सबको समझाना होगा।।
जंगल में फिर हर साल वर्षा होगी अपार।
फिर ना कभी मचेगा जंगल में गर्मी से हाहाकार।।

नीरज त्यागी

लुका-छिपी
बैठे-बैठे बोर हो रही
मम्मी-पापा जल्दी आओ।
जल्दी-जल्दी अब छिप जाओ
छुट्टी को तो यूं न बिताओ
दस तक ही बस आज गिनूंगी
जल्दी-जल्दी सब छिप जाओ
गिनती मेरी खत्म हुई तो
कहीं न झट से पकड़े जाओ।
छिप गई हो दादी आप तो
बुआ तुम भी तो छिप जाओ।
नानी मेरी कहां छिपी है
नानू चुपके से बतलाओ।
मामू तुम भी पूरे जोकर
पैरों को तो जरा छिपाओ।
बस दीदी को खोज निकालूं
कहां छिपी कुछ पता बताओ।
बारी-बारी सबको ढूंढूं
लुका-छिपी में मैं ही जीतूं।
दिशा ग्रोवर


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