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बरसात में यहां जिंदगी हो जाती है ‘लॉक’

Posted On June - 29 - 2020

खरड़ विधानसभा के करौंदावाला गांव में कच्चे रास्ते से गुजरता बरसाती नाला। -ट्रिन्यू

विवेक शर्मा/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 28 जून
चंडीगढ़ से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर पंजाब के पांच गांव। बरसात शुरू होते ही यहां सब कुछ लॉक हो जाता है। ग्रामीण घरों में कैद हो जाते हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। कामकाजी लोगों को भी छुट्टी करनी पड़ती है। जैसे-तैसे दिन काटने पड़ते हैं। हम बात कर रहे हैं जयंती माजरी, करौंदा वाला, गुड़ा, कसौली और बंगेंड़ी गांवों की। यह पांचों गांव घाड़ क्षेत्र में आते हैं। गांवों में पक्की सड़कें और पुल नहीं होने की वजह से ग्रामीण इतने दुखी है कि वो अब हरियाणा में शामिल होने की मांग कर रहे हैं। करौंदावाला गांव की सीमा खत्म होते ही हरियाणा का गांव खोल मुल्ला पड़ता है, जहां 18 फुट चौड़ी पक्की सड़कें हैं और इन पर पुल भी बने हैं।
यहां पहाड़ से करीब 4 बड़े बरसाती नाले गुजरते हैं। इन पर पुल नहीं होने की वजह से ग्रामीणों की जिंदगी एक ही जगह पर रुक जाती है। जब ट्रिब्यून संवाददाता इन गांवों में पहुंचा तो ग्रामीणों का दर्द झलक पड़ा। जयंती माजरी के सरपंच भाग सिंह भी प्रदेश सरकार की उपेक्षा से काफी दुखी नजर आए। बार-बार इन पांच गांवों में बरसाती नालों पर पुल की मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। भाग सिंह कहते हैं बेशक यह 2020 का भारत हो। पूरे विश्व में देश का डंका बजता हो, लेकिन इन पांच गांवों में रहने वालों की जिंदगी तो नरक बनी हुई है। इसके अलावा पहाड़ों से रात के समय बारहसिंगा और जंगली सूअर खेतों में आ जाते हैं जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। वन विभाग को कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
विधानसभा में फिर उठाऊंगा मुद्दा
खरड़ विधानसभा के आम आदमी पार्टी के विधायक कंवर संधू का कहना है कि दो साल पहले उन्होंने दो पुल मंजूर करवा दिए थे, लेकिन पता नहीं क्यों सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है। वो इन पांचों गांवों की समस्या एक बार फिर विधानसभा में उठाएंगे। विधायक ने कहा कि वो गांव वालों का दर्द समझते हैं।
राजा साहब प्रजा की भी सुन लो
गांव करौंदावाला के भाग चंद पंजाब विधानसभा के हॉस्टल में 42 साल नौकरी करने के बाद अब खेतीबाड़ी कर रहे हैं। बरसात में अचानक पहाड़ से पानी आता है और सब कुछ बंद हो जाता है। उनका कहना है कि यदि कोई बीमार पड़ जाए तो मरीज तड़पता रहता है और घर वाले सिर्फ देखते ही रहते हैं। उनके पास कोई चारा नहीं होता। पीजीआई 10 किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन हमें इसका क्या फायदा। उन्होंने कहा कि राजा साहब (सीएम) अपनी प्रजा की तरफ ध्यान करो।
हमें हरियाणा में कर दो शामिल
करौंदावाला के सरपंच छींदा सिंह कहते हैं कि उनका गांव पंजाब का अंतिम गांव है। इसके बाद हरियाणा के पंचकूला जिले का खोला मुल्ला गांव पड़ता है। वहां 15 फुट से भी ज्यादा चौड़ी सड़क है। 12वीं तक स्कूल और अन्य सुविधाएं हैं, लेकिन पंजाब सरकार उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही। हरियाणा की सीमा के साथ लगते पंजाब के ग्रामीण चाहते हैं कि उन्हें हरियाणा में शामिल कर लिया जाए। इसके लिए पंचायतें प्रस्ताव भी पास कर सकती हैं।
पढ़ाई भी हो गई चौपट, छत पर सुनने पड़ते हैं फोन
इन गांवों के युवा बहुत परेशान हैं। लॉकडाउन के चलते स्कूल-कॉलेज बंद हैं। ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है, लेकिन यहां के बच्चे उससे भी वंचित हैं। यहां मोबाइल के सिग्नल ही नहीं आते। लोगों को छत पर जाकर फोन सुनना पड़ता है। यहां कभी-कभार हिमाचल के सिग्नल पकड़ते हैं। ऐसे में डिजिटल इंडिया का सपना कैसे पूरा होगा। कसौली गांव की एक छात्रा का कहना है कि दसवीं से ऊपर की पढ़ाई के लिए उनके गांव के साथ लगते हरियाणा के खोला-मुल्ला जाना पड़ता है। 12वीं के बाद उन्हें मोहाली या चंडीगढ़ जाना पड़ता है। जब वो घर से कॉलेज जाती हैं तो नालों में पानी नहीं होता, लेकिन अचानक बरसात आने के कारण नालों को पार करना मुश्किल होता है।
ग्रामीणों से मिलकर होगा समाधान
खरड़ के एसडीएम हिमांशु जैन ने कहा कि इन पांचों गांव में बरसात में पानी आ जाता है। अभी इन गांवों के लोगों ने प्रशासन को अवगत नहीं कराया है। ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए योजना पर काम हो रहा है। यहां ड्रेनेज की सफाई का काम भी चल रहा है। जहां पुलों की जरूरत है, वहां योजना तैयार करवा समस्या का समाधान कराया जाएगा।
नौकरीपेशा परेशान
यहां के ज्यादातर लोग हिमाचल के बद्दी में नौकरी करने जाते हैं। सामान्य दिनों में यहां से बद्दी की दूरी करीब 15 किलोमीटर की है, लेकिन बरसात में इन्हें चंड़ीगढ़ होकर जाना पड़ता है, जो 50 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर है।


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