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कोरोना से जंग विज्ञापनों से मत होइये गुमराह

Posted On June - 21 - 2020

उपभोक्ता अधिकार
पुष्पा गिरिमाजी
हाल के दिनों में मैंने कुछ ऐसे विज्ञापन देखे हैं हो जो उपभोक्ताओं को खतरनाक कोरोनावायरस से बचाने का वादा करते हैं। उनमें से ज्यादातर में उनके आयुर्वेदिक या हर्बल होने का दावा किया जाता है और लोग उन्हें इस विश्वास के साथ खरीद रहे हैं कि ये उनका बचाव करेंगे। क्या ऐसे विज्ञापनों को रोकने और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए कोई कानून है?
ड्रग्स एंड मैजिक रेमिडीज यानी औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम विशेष रूप से दवाओं से संबंधित झूठे और भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए है। इस अधिनियम के तहत ‘औषधि’ की परिभाषा काफी व्यापक है और इसमें मानव या जानवरों के आंतरिक या बाहरी उपयोग के लिए कोई भी दवा शामिल है। किसी भी पदार्थ का उपयोग मनुष्यों या जानवरों में बीमारी के निदान, इलाज, उपचार या रोकथाम के लिए किया जाता है; इसमें भोजन के अलावा वह चीज शामिल होगी जिसके जरिये मानव या पशुओं के शरीर या उनके अंगों में जैविक कार्य प्रभावित हो रहे हों। यह अधिनियम न केवल कुछ बीमारियों, जैसे मधुमेह, मोटापा, अनियमित मासिक धर्म के उपचार के लिए दवाओं के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाता है, बल्कि झूठे और भ्रामक विज्ञापन पर भी रोक लगाता है। अधिनियम के तहत, एक ‘विज्ञापन’ में ‘कोई भी नोटिस, सर्कुलर, लेबल, रैपर या अन्य दस्तावेज, और किसी भी घोषणा को मौखिक या संचार के किसी भी माध्यम से’ शामिल है। जिन विज्ञापनों का आप जिक्र कर रहे हैं वह इस कानून के दायरे में आते हैं।
प्रवर्तन एजेंसियों, राज्य सरकारों को ऐसे विज्ञापनों पर निगरानी रखने और इन पर कार्रवाई करने का अधिकार है। जो लोग दोषी पाए जाते हैं उन्हें पहली बार 6 माह तक की जेल या फाइन (आर्थिक दंड) या दोनों तथा गलती दोहराने पर एक साल तक की जेल या कोई भी सजा दी जा सकती है।
मुझे यहां यह भी उल्लेख करना चाहिए कि कोविड से संबंधित झूठे और भ्रामक दावों के बारे में शिकायतों के जवाब में, केंद्रीय आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) मंत्रालय ने प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 33पी के तहत 1 अप्रैल को आदेश जारी किया। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियामक अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कोविड -19 से संबंधित विज्ञापनों को रोकें और इसमें शामिल व्यक्तियों/एजेंसियों के खिलाफ प्रासंगिक कानूनी प्रावधान’ के तहत आवश्यक कार्रवाई करें।
मंत्रालय ने कहा कि ‘सभी पहलुओं में सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने और आयुष दवाओं और सेवाओं के बारे में भ्रामक जानकारी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपायों को लागू करना अनिवार्य है।’ मंत्रालय ने विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) जो विज्ञापन उद्योग का एक स्व नियामक निकाय है, से इस तरह के विज्ञापनों की निगरानी और रिपोर्ट करने के लिए कहा है।
यदि विज्ञापनों में कोविड से संबंधित भ्रामक दावा हो तो उपभोक्ता क्या करे?
आप उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर शिकायत कर सकते हैं जो विशेष तौर पर ऐसी ही शिकायतों को देखते हैं। अगर आप गामा डॉट जीओवी डॉट इन पर जाएंगे तो यह आपको उस वेबसाइट पर ले जाएगा। आप राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकरण में भी शिकायत कर सकते हैं जो ड्रग्स एंड मैजिक रेमिडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम एवं नियम के तहत ऐसे विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। यदि शिकायत झूठे और भ्रामक हैं, तो आप राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण या भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण से शिकायत कर सकते हैं। भोजन से संबंधित भ्रामक दावों को खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम और राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा देखा जाता है। इन नियमों के उल्लंघन पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम की धारा 53 के अनुसार 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। आप एएससीआई से इसकी वेबसाइट-एएससीआईऑनलाइन डॉट ओआरजी या उनके व्हाट्सएप नंबर 7710012345 पर भी शिकायत कर सकते हैं।
वर्ष 2019 में सरकारी रिलीज के मुताबिक ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम के उल्लंघन में 2017-18 में एएससीआई द्वारा आयुष से संबंधित 732 विज्ञापनों के बारे में रिपोर्ट किया गया। इसमें से 456 विज्ञापनों के मामलों को कानूनी कार्रवाई के लिए राज्य नियामक अधिकारियों के हवाले किया गया। इसी तरह 2018-19 में ऐसे ही 497 विज्ञापनों की पहचान की गयी जिनमें से 203 मामलों को राज्य प्राधिकारियों के सुपुर्द किया गया। एएससीआई विज्ञापनदाता को ऐसे विज्ञापनों को वापस लेने या संशोधित करने के लिए मनाने की कोशिश करता है और यदि विज्ञापनदाता इसका पालन नहीं करता है, तो कानून के तहत उपयुक्त कार्रवाई के लिए नियामक प्राधिकरण को मामला सौंप देता है।
मुझे यह भी उल्लेख करना चाहिए कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत भी, कोई भी झूठे और भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकता है। उपभोक्ता अदालतों को कानून ऐसे विज्ञापनों को वापस लेने और सुधारात्मक विज्ञापनों को सीधे जारी करने संबंधी शक्ति प्रदान करता है। इसके अलावा ऐसे विज्ञापनों से प्रभावित उपभोक्ताओं को लागत और मुआवजा भी दिलाता है।


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