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हिंदी फीचर फिल्म हरियाली और रास्ता

Posted On May - 16 - 2020

फ्लैशबैक

शारा
यह ऐसी फिल्म नहीं जो हमें तार्किकता सिखाए और बार-बार सोचने को मजबूर करे। यह एक दार्जिलिंग की पहाड़ियों में ट्रेन पर सवार होकर संगीतमय यात्रा है, जिसका सिर्फ आनंद लिया जा सकता है। दार्जिलिंग की वादी में एक प्रेमी जोड़े की गीतों के ज़रिये चूहलें दर्शकों को भीतर तक आज भी गुदगुदाती है। कहानी तो ठीक ठाक है लेकिन संगीतकार ने शैलेन्द्र व हसरत जयपुरी की कविताओं को संगीत देकर फिल्म को दर्शकों के दिलो-दिमाग तक पहुंचाया, उसके कारण भी यह फिल्म साठ के दशक के बाद वाली फिल्मों में से एक बन गयी। इसके गीत आज भी आपको यादों के गलियारों में दूर तक ले जाते हैं। वर्ष 1962 में रिलीज़ ‘हरियाली और रास्ता’ हर तरफ से हिट रही। उस वक्त ही इसने 1,90,00,000 रुपये का राजस्व बटोरा जो कि रिकॉर्ड सफलता का मापदंड कहा जा सकता है। पढ़े-लिखे लोगों को इस फिल्म का नाम अटपटा लग सकता है लेकिन विजय भट्ट के कहानी लेखक का अपना फलसफा है कि जीवन के रास्ते टेढ़े-मेढ़े हैं लेकिन हरियाली तो उनमें चलकर ही मिलती है। ठीक उसी तरह जैसे मनोज कुमार और माला सिन्हा को फिल्म में मिली थी। फिल्म की तमाम शूटिंग दार्जिलिंग के जिंग टी एस्टेट और रणजीत टी-एस्टेट में हुई। इस फिल्म के निर्माण के वक्त विजय भट्ट को उनके बेटे अरुण भट्ट ने सहयोग दिया है। अरुण भट्ट वहीं हैं जिन्होंने गुजराती सिनेमा को निर्देशन में नया नाम दिया। प्रवीण भट्ट जो बॉलीवुड सिनेमा के जाने-माने निर्देशक रह चुके हैं, पाठक जानते ही होंगे—इन्हीं विजय भट्ट के दूसरे बेटे हैं। बहरहाल, यह फिल्म मनोज कुमार की शुरुआती फिल्मों में से एक है। और इसी फिल्म से मनोज कुमार व माला सिन्हा के बीच दोस्ताना व्यवहार शुरू हुआ क्योंकि सीनियर कलाकार होने के कारण माला सिन्हा ने मनोज कुमार को एक्टिंग के काफी पाठ पढ़ाये। माला सिन्हा का उन दिनों बॉलीवुड में सिक्का चलता था। वह स्त्रीपरक दबंग भूमिकाएं अभिनीत करने के लिए जानी जाती थी। मनोज कुमार और माला सिन्हा ने बाद में काफी फिल्मों में एक साथ काम किया। उन्होंने इंडस्ट्रीज को काफी हिट फिल्में दीं, जिनमें ‘हिमालय की गोद में’ एक है। इस कहानी में थ्रिलर को छोड़कर सभी मसाले हैं।
यह हरियाली और यह रास्ता, इब्तिदाए इश्क में सारी रात जागे, तेरी याद दिल से भुलाने चला हूं आदि ऐसे गीत हैं जो आज भी लोकप्रिय हैं और फिल्म को ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। एक अन्य फैक्ट ओमप्रकाश की एक्टिंग भी है, जिससे दर्शक बोर नहीं होता।
इस प्रेम कहानी वाली फिल्म की शुरुआत ट्रेन से होती है, जहां बेबी शोभना (फरीदा) अपने पिता शिवनाथ (मनमोहन कृष्ण) के साथ शिवनाथ के दोस्त रमाकांत के घर जा रही है। शिवनाथ बेबी शोभना को बताते हैं कि वह वहां पर खूब मज़े करेगी क्योंकि वहां उसका हमउम्र शंकर भी है। शंकर रमाकांत का इकलौता बेटा है। जब शिवनाथ रमाकांत के घर पहुंचते हैं तो बीमारी के कारण रमाकांत अंतिम सांसें ले रहे हैं। रमाकांत अपने टी-एस्टेट व तमाम दौलत की बागडोर शंकर के बड़े होने तक शिवनाथ को सौंप जाते हैं, साथ ही उससे जज्बाती वादा भी ले लेते हैं कि बड़ा होने पर शंकर की शादी रीता नामक लड़की के साथ कर दी जाये। इस दौरान शोभना माला सिन्हा के रूप में जवान हो जाती है और मनोज कुमार को दिल दे बैठती है। उनका प्यार दार्जिलिंग की वादियों में खूब परवान चढ़ता है। उनके प्यार की भनक हर आम और खास कान को है सिवाय शिवनाथ के जो अपने दोस्त के सौंपे कामकाज को संभालने में खासे व्यस्त हैं। जब उन्हें उनके प्यार का पता चलता है, वह दोस्त को दिये गये वचन को याद करके बेटी शोभना को वापस कलकत्ता के लिए एक ट्रेन में भेज देता है। जैसा कि हिंदी फिल्मों में होता है, ट्रेन का एक्सीडेंट हो जाता है। शोभना को मृतक समझ लिया जाता है लेकिन शोभना को ग्रामीण लोग बचा लेते हैं। वह उनकी सेवा से ठीक हो जाती है। जब वह वापस घर पहुंचती है तो मनोज कुमार उर्फ शंकर की शादी रीता (शशिकला) से हो रही होती है। हताश शोभना वापस उसी डॉक्टर के पास नर्स की नौकरी कर लेती है, जिस डाॉ्टर ने उसे ठीक किया था। रीता से शादी करने के बाद शंकर बेटे का बाप तो बन जाता है लेकिन पाश्चात्य संस्कृति में रंगी रीता पार्टियों और क्लबों की शौकीन है। वह बच्चे को मां का प्यार नहीं देती। एक दिन बच्चा सीढ़ियों से गिर जाता है और इलाज करवाने के लिए उसे उसी डॉक्टर के अस्पताल में लाया जाता है, जहां शोभना नर्स है। जब बच्चा अस्पताल आया है तो पिता भी आएगा और शोभना से भी मिलेगा। अब इतना सस्पेंस तो बनता है कि दोनों मिले या नहीं—ये दर्शक फिल्म देखकर फैसला करेंगे।

गीत
तेरी याद दिल से भुलाने चला हूं : मुकेश
इब्तिदा-ए-इश्क में सारी रात जागे : लता मंगेशकर, मुकेश
यह हरियाली और यह रास्ता : लता मंगेशकर
परवानों की राह में : लता मंगेशकर
खो गया है मेरा प्यार : महेंद्र कपूर
एक था राजा एक थी रानी : लता मंगेशकर
दिल मेरा चुपचाप जला : लता मंगेशकर
बोल मेरी तकदीर में क्या : मुकेश, लता मंगेशकर


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