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हरियाली आने दो

Posted On May - 9 - 2020

‘अगर आपके पास एक बगीचा और एक लाइब्रेरी है, तो समझ लें कि आपके पास वह सब कुछ है जो आपको चाहिए’ -मार्क्स ट्यूलियस सिसरो, रोमन दार्शनिक

अमरजीत बाथ
गर्मियों का मौसम है, ऐसे में अगर घर के गार्डन में पौधे लगें हैं तो उनकी देखभाल का यह खास समय है। ध्यान रहे कि इन दिनों जब माली आपके आस-पास नहीं है तो वह आप ही हैं जिन्हें यह काम करना है। ऐसे में फुरसत के इन दिनों में गार्डन में जाकर हर एक पौधे का बारीकी से निरीक्षण करें। देखें कि किस पौधे को खाद, पानी और पोषण की ज़रूरत है। यहां हम आपको बता रहे हैं पौधों की देखभाल के कुछ सही और नायाब तरीके….
पौधों की सिंचाई
पौधों को पानी देना बेहद ज़रूरी है। इसी से उनकी जड़ों को ऑक्सीज़न मिलती है। दिन की शुरुआत करने के लिए पौधों को पानी देने का काम सही होगा। यहां यह भी ध्यान में रखें कि पानी की ज़रूरत सभी पौधों को बराबर नहीं होती। कई बार हम पौधे को पानी में डुबो देते हैं जो कि सही नहीं है। दरअसल हर एक पौधे को कितना पानी दिये जाने की ज़रूरत है यह उसके विकास के साथ जलवायु पर भी निर्भर करता है? कुछ पौधों को दूसरों की तुलना में अधिक नमी की आवश्यकता होती है। कुछ पौधे ऐसे भी होते हैं जिनको लगातार दो बार सिंचाई की ज़रूरत होती है। इसलिये पौधे की पानी की आवश्यकताओं को जानना ज़रूरी है। ज्यादातर पौधों को बहुत कम पानी की ज़रूरत पड़ती है। इसका सबसे सही तरीका है कि सुबह उठकर गार्डन में नज़र दौड़ायें और देखें कि क्या पौधों के पत्ते गिर रहे हैं? अगर ऐसा है तो उन्हें सिंचाई की ज़रूरत है। दूसरा गार्डन की मिट्टी को जांच लें। यह बहुत सख्त नहीं होनी चाहिये। नहीं तो पानी अच्छी तरह से पौधों की जड़ों तक नहीं पहुंच पाएगा।
मिट्टी की जांच कर लें
गार्डनिंग के लिये सबसे ज़रूरी है मिट्टी के सही प्रकार का होना। फिर यह भी देखना अहम है कि पौधे जहां रखें हैं या उगे हुए हैं वह जगह धूप वाली है या छायादार। हवा का बहाव कैसा है? मिट्टी नरम है या सख्त। यह सभी बातें तय करती है कि पौधे को कितना पानी चाहिये।
प्लांट इंडोर हैं तो
अगर इंडोर प्लांट्स हैं तो उनके ऊपर धूल से बचाने के लिये मिस्टिंग कराएं। इससे उन पर न तो मकड़ी के जाले लगेंगे और न ही उन्हें सूखे की परेशानी होगी। मिस्टिंग सुबह के वक्त पौधों के दोनों किनारों पर करें ताकी शाम तक यह सूख भी जाये। इसके लिये एक मिस्ट पंप आता है जिससे स्प्रे की जाती है, बाद में किसी मुलायम कपड़े से पौधों की पत्तियों को पोंछ दें।
घास न उगने दें
पौधे गार्डन में लगे हों या गमलों में वे खूबसूरत तभी नज़र आते हैं जब उनमें खरपतवार यानी वीड्स न हों। खरपतवार पौधों से न केवल उनका पोषण सोख लेते हैं बल्कि पौधों को नमी और धूप भी सही तरीके से नहीं मिल पाती, इसलिये सुबह -सुबह हाथ में उपकरण उठाएं और गमलों से घास निकालना शुरू कर दें।
मुरझाये फूलों को निकाल दें
जब पौधों पर फूल खिलते हैं तो गार्डन की खूबसूरती बढ़ जाती है लेकिन जब फूल मुरझाने लगते हैं तो यह खराब दिखते हैं, इसलिये स्पेंट फ्लॉवर यानी मुरझाये फूलों को उंगलियों की मदद से निकाल दें। फूलों की स्टेम की प्रूनिंग भी करें। इसके लिये किसी प्रूनर की मदद ले सकते हैं।
प्रूनिंग ज़रूरी
पौधों के लिये प्रूनिंग यानी कटाई-छंटाई इसके विकास में खास भूमिका निभाती है, लेकिन याद रहे कि उसके लिये यह सीज़न सही नहीं है। प्रूनिंग दिसंबर से जनवरी यानी पतझड़ के मौसम में की जाती है।
धूप और नमी का ख्याल रखें
कुछ गलतियां हम अक्सर करते हैं जब भी गार्डनिंग कर रहे होते हैं, लेकिन आप यह न करें गमले या पौधे लगाने से पहले सुनिश्चित कर लें कि उस जगह पर नमी पर्याप्त है और धूप भी आती रहे।
गार्डनिंग के नियम
* पौधों के बीच में ज़रूरी जगह छोड़ दें, इन्हें सांस लेने, विकास करने में दिक्कत न हो
* एक साथ सारी सबि्ज़यां न बोयें, 15 दिन के अंतराल पर अलग-अलग बीज बोयें
* जितनी ज़रूरत हो सब्जि़यां उतनी ही उगाएं।
* हरी पत्तेदार सबि्ज़यां हों या बीज वाली, इन्हें वक्त रहते काट कर रेफ्रिजरेटर में स्टोर कर लें।
* पत्ते, खरपतवार और सड़े हुए फूलों से खाद बना सकते हैं।


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