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संसद सत्र बुलाए मोदी सरकार, केंद्र से की 11 मांगें

Posted On May - 23 - 2020

हरीश लखेड़ा/ट्रिन्यू
नयी दिल्ली, 22 मई
कोरोना को लेकर मोदी सरकार पर अब तक अकेले सियासी हमले कर रही कांग्रेस को अब छोटे-बड़े 22 दलों का भी साथ मिल गया है। कांग्रेस समेत इन 22 विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर कोरोना संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए संसद का सत्र बुलाने तथा संसदीय समितियों की कार्यवाही बहाल करने की मांग की है। कोरोना संकट पर कांग्रेस की पहल पर शुक्रवार को हुई इस वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक में सरकार के आर्थिक पैकेज को मायाजाल बताते हुए नये ठोस पैकेज की मांग की गई। इन दलों ने मोदी सरकार पर कोरोना संकट पर अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहने का आरोप लगाते हुए लॉकडाउन से बाहर निकलने का रास्ता बताने की भी मांग की। इन दलों ने 11 सूत्री मांगपत्र केंद्र सरकार के सामने रखा है। इसमें कांग्रेस की न्याय योजना पर अमल कर गरीबों को 6 माह तक 7500 रुपये देने की मांग की है। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार के आर्थिक पैकेज को क्रूर मजाक तक कह दिया।
बैठक में चक्रवाती तूफान अम्फान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। मोदी सरकार से कोरोना संकट पर विपक्षी दलों से बात करने तथा उनके सुझावों पर गंभीरता से अमल करने तथा राज्यों का बकाया पैसा तुरंत देने की मांग भी की गई।
कोरोना संकट पर मोदी सरकार को घेरने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने की कांग्रेस की रणनीति हालांकि पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई क्योंकि उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख विपक्षी दलों सपा और बसपा ने इस बैठक से किनारा कर लिया जबकि दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को बुलाया ही नहीं गया था। बैठक में शामिल कई दल ऐसे हैं जो वनमैन आर्मी हैं।
बैठक के बारे में जानकारी देते हुए कांग्रेस के मीडिया विभाग प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि आज की बैठक में शामिल दल देश के 60 से 70 फीसदी हिस्से पर शासन करते हैं, इसलिए केंद्र को इनकी मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। खास बात यह है कि इन दलों की 11 मांगों में अधिकतर वही हैं जो कांग्रेस करती रही है। इसमें गरीबों को 10 किलो अनाज, मनरेगा के कार्यदिवस 200 दिन करने, राज्यों को विशेष आर्थिक मदद देने, रबी की फसल के लिए एमएसपी देने, प्रवासी मजदूरों को घरों तक पहुंचाने का मुफ्त इंतजाम करने व विदेशों से अपने लोगों को लाने, श्रमिक विरोधी कानून न बनाने की भी मांग की गई। वीडियो कानफ्रेंसिंग बैठक की शुरूआत करते हुए सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि इस संकट में भी सभी शक्तियां पीएमओ तक सीमित हैं। सोनिया गांधी ने मोदी सरकार के 20 लाख करोड़ के पैकेज को नाकाफी बताया। इस मौके पर राहुल गांधी ने गरीबों के खातों में 7,500 रुपये डालने की मांग को दोहराया।
वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, टीएमसी प्रमुख पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, झारखंड के मुख्यमंत्री व जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत 22 दलों के कई नेता शामिल हुए।


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