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शाकाहार की ओर बढ़ती दुनिया

Posted On May - 16 - 2020

सुमन बाजपेयी

कोरोना संकट के दौर ने देश दुनिया में सामाजिक जीवन को काफी हद तक प्रभावित किया है। खानपान और तौर-तरीकों से लेकर कार्यशैली बदली है। आने वाले समय में इन बदलावों का बड़ा असर पड़ने वाला है। हो सकता है कि इस दौरान हमारी बदली आदतें हमारे जीवन का स्थायी हिस्सा बन जाए। कोरोना ने न केवल हमारे जीने के ढंग में परिवर्तन कर दिया है, वरन हमारी फूड हैबिट्स में भी व्यापक रूप से बदलाव आया है। यही वजह है कि शाकाहार और मांसाहार के बाद इन दिनों एक नया शब्द काफी चलन में है-’वीगन’। इसे शुद्ध शाकाहार कहा जा सकता है। हां इस डाइट में केवल फल और सब्जियों का ही सेवन किया जाता है। इसमें दूध और दूध से बने उत्पाद भी नहीं होते। आज दुनिया भर में वीगन फूड का चलन बहुत अधिक बढ़ गया है, खासकर कोरोना संक्रमण की वजह से, जिसके फैलने की वजह जानवरों को खाना ही माना जा रहा है।
चीन से कोरोना फैलने के बाद अब शाकाहार को लेकर बहस तेज़ हो गई है। मांसाहार को लेकर शंकित लोग शाकाहार और वीगन फूड की ओर बढ़ रहे हैं। वैसे भी इस दौरान हेल्दी फूड खाने के लिए ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर इस वायरस से अपने को बचाया जा सके। ऑर्गेनिक और पर्यावरण के अनुकूल डाइट शामिल करने लोग इसे बढ़ावा देने में दिलचस्पी ले रहे हैं।
क्या है वीगन डाइट
वीगन डाइट में पौधे और पौधों से पैदा होने वाली चीजें खाई जाती हैं। यहां तक कि पशु से मिलने वाले खाद्य पदार्थों तक का सेवन नहीं किया जाता। फिर चाहे बात मांस की हो, दूध की हो या फिर अंडे की। इस डाइट के अनुसार, अगर आप अपने खान-पान से मांस, दूध और अंडे निकाल रहे हैं तो एक संतुलित भोजन के लिए खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज शामिल करना ज़रूरी है। साथ ही विटामिन, प्रोटीन,फाइबर पाने के लिए भी खाने में विविधता लाने की ज़रूरत होती है। इस फूड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। फाइबर अधिक होने के कारण इस आहार से पाचन तंत्र मजबूत रहता है। इसमें प्रोटीन और आयरन भरपूर मात्रा में होने के कारण ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। जिसके कारण थकावट महसूस नहीं होती, शरीर को मजबूती भी मिलती है। एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन और मिनरल भरपूर होने के कारण शरीर डिटॉक्स होता है,जिससे स्वस्थ रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
डॉ. नमितानादर, चीफ डाइटीशियन, नोएडा का कहना है कि सबसे बड़ी बात है कि यह डाइट वजन कम करने में बहुत सहायक होती है और इस समय जब हम घर में बैठे हुए हैं, वजन को नियंत्रित रखना अत्यंत आवश्यक है। इसमें कोई भी ऐसे खाद्य पदार्थ नहीं होते हैं,जिनसे वजन बढ़े। इसमें मौजूद प्लांट बेस्ड फूड्स फाइबर से भरपूर होते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से पेट जल्दी भर जाता है और दिन भर ज्यादा भूख भी नहीं लगती है। चूंकि इस समय बाजार में चीजों, खासकर विविध तरह की सब्जियों की कमी है और तरह-तरह के व्यंजन बनाना संभव नहीं हो पा रहा है, ऐसे में यह डाइट अच्छा विकल्प है जो वायरस से लड़ने में शरीर की मदद भी करती है। कोरोना के संक्रमण काल में शरीर का स्वस्थ रहना और उसे हर तरह के पोषक तत्वों का मिलना ज़रूरी हो जाने के कारण वीगन फूड का चलन ज़ोर पकड़ रहा है और इसे लोग अपनी जि़ंदगी में शामिल कर रहे हैं।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए हैं
इस समय सेहत को लेकर जिस तरह की शंकाओं और डर ने पूरी दुनिया को घेरा हुआ है, उसकी वजह से जंकफूड तो दूर की बात है, मांसाहार, सी-फूड को छोड़कर आम लोग तक वीगन फूड को अपना रहे हैं।
साबुत सब्जियां और अनाज का सेवन करना एक तरह की वीगन डायट ही है। इसमें फल, सब्ज़ी, अनाज, दालें, बीज और मेवे शामिल होते हैं। वहीं दूसरा प्रकार है-कच्ची वीगन डाइट, जिसमें तक़रीबन 48 डिग्री से कम तापमान पर सब्जियों, दालों को पका कर खाया जाता है।
डॉ. संध्या पांडे, चीफ क्लीनिकल न्यूट्रीशिनिस्ट, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम, के अनुसार सेहत और पोषण के प्रति सचेत होने के कारण लोगों के खाने-पीने की आदतों में बदलाव आ रहा है। वे अब सोचने लगे हैं कि वायरस से मुकाबला करने के लिए किस तरह अपनी इम्यूनिटी को बढ़ाएं, इसलिए ऐसे तत्वों को आहार में शामिल कर रहे हैं जिनमें हर प्रकार के पोषक तत्व हों और उनसे मोटापा भी न बढ़े। इस समय बहुत ज्यादा सक्रियता न होने की वजह से मोटापा बढ़ने का डर भी लोगों को संतुलित व पौष्टिक आहार लेने के लिये प्रेरित कर रहा है।
भय भी कारण
कोरोना का खौफ लोगों में इस कदर समाया हुआ है कि लोग अब मांसाहार छोड़कर शाकाहार अपना रहे हैं। हालत यह है कि जो लोग सप्ताह के सात दिन नॉनवेज खाते थे अब उन्हें भी हरी सब्जियां पसंद आ रही हैं।
डॉ. संध्या पांडे कहती हैं उन्हें इस बात का डर है कि कहीं मांसाहार का सेवन करने से वे संक्रमण का शिकार न हो जाएं। हालांकि डब्ल्यूएचओ ने यह साफ कहा है कि इस वायरस का स्त्रोत मांसाहार भोजन नहीं है। लेकिन लोगों को लगता है कि शाकाहार को अपना कर वायरस से बचा जा सकता है। मांसाहार के बुरे नतीजों को लेकर दुनिया चिंताग्रस्त और सावधान हुई है।
जब ब्रिटेन में कोरोना वायरस फैला तो घबराहट के रूप में रोटी, दूध और अंडे की अलमारियां खाली हो गईं। इस अचानक आए बदलाव और डर ने लोगों के मन को वैकल्पिक खाद्य विकल्पों को अपनाने की ओर अग्रसर किया और वेजीटेरियन फूड सुपर मार्केट में दिखने लगा।
ऐसा प्रतीत होता है शाकाहार का प्रचलन तेजी से बढ़ेगा। पूर्व में फैली कई महामारियों की तरह कोरोना मांसाहार की आदत की ही देन है, ऐसा बहुत से लोग मान रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि प्रकृति से की जाने वाली छेड़छाड़ करने का नतीजा है।
विश्वभर के डॉक्टर कोरोना के दौर में शाकाहारी भोजन को ही स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर विकल्प मान रहे हैं। तर्क यह है कि फल, सब्जी, विभिन्न प्रकार की दालें, बीज एवं दूध से बने पदार्थों आदि से मिलकर बना हुआ संतुलित आहार भोजन में कोई भी ज़हरीले तत्व नहीं पैदा करता एवं कोरोना के वायरस से लड़ने में सक्षम बनाता है। जब कोई जानवर मारा जाता है तो वह मृत-पदार्थ बनता है। यह बात सब्जी के साथ लागू नहीं होती। यदि किसी सब्जी को आधा काट दिया जाए और आधा काटकर ज़मीन में गाड़ दिया जाए तो वह पुनः सब्जी के पेड़ के रूप में उत्पन्न हो जाएगी। लेकिन यह बात किसी जानवर पर लागू नहीं होती है।
डब्ल्यूएचओ क्या कहता है
0 खाना बनाने से पहले हाथ धो लें।
0 टॉयलेट जाने के बाद हर बार हाथ साफ़ करें।
0 रसोई, गैस और बर्तन अच्छी तरह से धोएं और सेनिटाइज़ करें।
0 कच्चे भोजन को पके खाने से अलग रखें।
0 पॉल्ट्री उत्पाद, मीट, सी-फूड को खाने-पीने की चीज़ों से अलग रखें।
0 खाना अच्छी तरह से पकाएं ताकी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाएं।
0 तैयार खाना और कच्चे भोजन के बीच संपर्क न हो इसके लिए खाने-पीने की चीजों को डिब्बों में रखें।


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