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शहर की सैर

Posted On May - 16 - 2020

बाल कहानी

गोविंद भारद्वाज

शहर से दूर एक नदी बहती थी। उस नदी के आस-पास हरा-भरा छोटा-सा जंगल था। इस जंगल में हिंसक पशु नहीं थे,बल्कि सीधे-सादे प्राणी ही मिलजुल कर दोस्तों की तरह रहते थे। इस कारण शहर लोग यहां पिकनिक मनाने आते थे। उनके लिए खाने-पीने की चीजे भी लाते थे। इस कारण इस इलाके में चहल-पहल बनी रहती थी। हरियाली होने के कारण गाय, भेड़-बकरियां, बंदर, पेंग्विन, अनेक प्रकार के पंछी और नदी में रहने वाले जलचर बड़े आनंद के साथ जीवन बिताते थे। पिकनिक पर आने वाले लोग भी उनके साथ मस्ती करते थे। एक बार अचानक दुनियाभर में संक्रमण फैलाने वाली महामारी आ जाने के कारण लोगों का घरों से निकलना बंद हो गया। शहरों और गांवों की सड़के और गलियां बिल्कुल सूनी हो गयी। लगभग तीन-चार सप्ताह तक कोई भी आदमी उस नदी और जंगल की तरह नहीं आया था। इससे वहां रहने वाले पशु-पक्षियों में बेचैनी- सी बढ़ गयी थी। हरियल तोते ने उड़ते हुए एक चिड़िया से कहा, ‘गौरैया बहन आज कल अपना जंगल सूना-सूना सा लग रहा है।’ ‘सूना तो होगा ही पहले शहर के लोग पहले यहां घूमने-फिरने आते रहते थे,लेकिन उन्होंने पता नहीं अचानक क्यों आना छोड़ दिया इस तरफ।’ चिड़िया ने कहा। उनकी बातें सुनकर भूरी गाय वहां आ गयी। गौरैया तुरंत उसकी पीठ पर बैठ गयी। भूरी बोली,’कल ही मैं शाम को शहर से आई हूं। शहर में तो कर्फ्यू जैसा माहौल बना हुआ है। सबका घरों से निकलना बंद है।’ ‘भूरी बहन ये कर्फ्यू क्या होता है?’ हरियल तोते ने पूछा। वह बोली, ‘हरियल भाई ये एक व्यवस्था है जिसमें आदमी के घर से निकलने पर प्रतिबंध होता है।’ उनकी बातें सुनकर मीकू बंदर, पीगू सुअर भी वहां आ गये। ‘मैने सुना है कि इस महामारी से लाखों लोग दुनिया में मर चुके हैं। और कुछ का मानना है कि कोरोना नामक वायरस तो चमगादड़ों से फैलता है।’ पीगू ने बीच में कहा। ‘हां..हां..जैसे तुम्हारे कारण एक बार इसी शहर में स्वाइन फ्लू भी हुआ था।’ मीकू ने पीगू को छेड़ते हुए कहा। भूरी बोली,’देखो ये बात सही है कुछ बीमारियां पशु-पक्षियों से होती है और कुछ इंसानों की गलतियों होती है। बस हम सब को संभलकर रहना चाहिए। इस बीमारी में सोशल डिस्टेंस रखना बहुत जरूरी है। शहर भर के टीवी और समाचारों में डाॅक्टर्स यही सलाह दे रहे हैं। इसलिए लोगों ने घरों से निकलना छोड़ दिया है।’ ‘दीदी आदमी अपने ही घरों में बंदी बने हुए कैसे दिखते होंगे। क्यों ना हम ही उनके शहर जाकर उनके दर्शन कर आएं जो कभी हमें देखने आया करते थे।’ एक जंगली शिपी भेड़ ने भूरी से कहा। मीकू बोला, ‘हां शिपी ने सही कहा भूरी बहन। जैसे शहर के लोग पिकनिक मनाने हमारे यहां आते हैं वैसे हम सब मिलकर शहर घूमने चलते हैं।’ ‘अरे हां … भूरी और मीकू तो शहर के बारे में जानते भी हैं ये दोनों हम सब को शहर दिखा देंगे।’ डाॅगी ने कहा। ‘अरे डाॅगी तुम कहा थे इतनी देर।’ हरियल ने पूछा। डाॅगी ने कहा, ‘बस उस पेड़ के नीचे बैठा-बैठा तुम सब की बातें सुन रहा था।’
हरियल बोला, ‘ठीक है कल सुबह यहां से चलते हैं और शाम तक कुछ खासमखास गली-मोहल्ले के लोगों से मिल कर आ जाते हैं।’ ‘पक्का ..सब सुबह सब अपनी तैयारी के साथ यहीं से रवाना होंगे। और हां अपने खाने-पीने का सामान ज़रूर साथ में ले लेना।’ मीकू ने हंसते हुए कहा।
अगली सुबह सूरज निकलने से पहले सभी जंगल के निवासी शहर के लिए रवाना हो गये। सूरज की पहली किरण के साथ ही वे शहर में पहुंच गये। उन का शोर-गुल सुनकर शहर के आलीशान बंगलों में रहने वाले उनको देखने के लिए अपनी-अपनी खिड़कियों में आ गये। कुछ लोग अपनी बाॅलकॉनी से देखने लगे। ‘अरे रोहित देख आज अपने आज़ादनगर में जंगल के पशु-पक्षी आ गये हैं।’ रोहित की मम्मी ने कहा। ये बात सुनकर मीकू ने सुन ली वो बोला, ‘देखो मैं तुम्हारी तस्वीर खींचने के लिए एक कैमरा भी लाया हूं।’ हां मम्मी देखो उस बंदर के गले में कैमरा लटका हुआ है। चलो पापा फोटो खिंचवाते हैं।’ ‘बाहर मत जाना बेटा। ये जंगल के वासी इंसानों की खामोशी को समझ गये हैं शायद..इसलिए ये हम से मिलने आए हैं।’ रोहित के पापा ने कहा। भूरी बोली, ‘देखो आज़ादनगर के लोग कैसे अपने ही घरों में बंदी बने हुए हैं। ये सब कोराना महामारी के कारण हुआ है।’ ‘देखो कभी ये हमें देखने जंगल में आते थे और आज हम लोग इनको देखने इन के पास आए हैं।’ पेंग्विन ने कहा। ‘हां ऐसा लग रहा है जैसे शहर चिड़ियाघर हो..और प्रत्येक घर कोई पिंजरा या गुफा।’ डाॅगी ने कहा।
कुछ अपने सिर पर हैट लगाए झूमते मुस्कुराते शहर की बस्तियों में घूम रहे थे। आज उनको पकड़ने व भगाने वाला कोई नहीं था। सब लोग हाथ हिलाकर उनका अभिवादन कर रहे थे। भूरी और मीकू ने सबको खूब सैर करवायी। अब सब थक चुके थे। एक पार्क में पहुंचकर थोड़ी देर आराम किया और अपने साथ लायी चीजों को खाने लगे। थोड़ी देर बाद पीगू ने कहा, ‘चलो अब अपने ही जंगल में चलते हैं वरना हम को ये महामारी लग गयी तो… ।’ ‘हां भई अब हमें भी जंगल जाकर आइसोलेशन में रहना पडे़गा..और कुछ दिन तक सोशल डिस्टेंसिंग भी रखनी पड़ेगी।’ पेंग्विन ने तुरंत कहा। शहर की सैर कर सारे दोस्त वापस अपने ठिकाने पर आ गये।


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