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लॉकडाउन में शिक्षा

Posted On May - 9 - 2020

नॉलेज

देश व्यापी लॉकडाउन ने हमारी शिक्षा पद्वति को और बेहतर और विकसित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। इस कड़ी में ऑनलाइन एजुकेशन के क्षेत्र में अभी भी बहुत कुछ किये जाने की ज़रूरत है। अच्छी बात यह है कि यह पहल स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा संस्थानों में हो चुकी है। लॉकडाउन ने कैसे बदले हैं ऑनलाइन एजुकेशन के आयाम, बता रहे हैं हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेन्द्रगढ़ के उपकुलपति प्रो. रमेश चन्द्र कुहाड़ ….

कोरोना महामारी के बाद हुए लॉकडाउन के कारण भारत में मार्च 2020 से ही शिक्षण संस्थानों में प्रत्यक्ष अध्ययन-अध्यापन कार्य बंद है। ऐसे में सभी की चिंता है कि आखिर कैसे और कब हालात सामान्य होंगे और शिक्षण संस्थानाें में पढ़ाई-लिखाई कब शुरू होगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस दिशा में प्रयासरत है कि बच्चों की पढ़ाई पर लॉकडाउन का असर न हो। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय भी ऑनलाइन एजुकेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
ज्यादातर विश्वविद्यालय की बात करें तो हम यह कह सकते हैं कि शिक्षक नियमित रूप से ऑनलाइन माध्यम से बच्चों से जुड़े हुए हैं। उनके पाठ्यक्रम को पूरा कराया जा रहा है। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय देश का पहला विश्वविद्यालय है जहां इन्फ्लबिनेट के सहयोग से लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम शुरू हो चुका है। इसकी मदद से न सिर्फ विद्यार्थियों को उपयोगी अध्ययन सामग्री ऑनलाइन मिल रही है बल्कि वह शिक्षकों से संवाद कर अपनी शंकाओं का निदान भी पा रहे हैं। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षक ऑनलाइन लेक्चर भी रिकॉर्ड कर वेबसाइट के माध्यम से विद्यार्थियों को उपलब्ध करवा रहे हैं। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को ऑनलाइन लाइब्रेरी के माध्यम से किताबें भी उपलब्ध करा रहा है। स्पष्ट है कि हम अपने सभी संसाधनों और अपनी क्षमताओं का सदुपयोग सुनिश्चित कर रहे हैं ताकि विद्यार्थी कहीं भी रहे उसकी पढ़ाई बाधित न हो। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के मंत्र ‘भारत पढ़े ऑनलाइन’ के अधिकतम क्रियान्वयन के लिये देश का प्रत्येक शिक्षण संस्थान कार्य कर रहा है।

नयी तकनीक से रूबरू हो रहे हैं शिक्षक
शिक्षक इस दौर में नई तकनीक को समझकर स्वयं को तकनीक के अनुकूल बना रहे हैं। कैमरे का सामना कर विद्यार्थियों के लिए उपयोगी ऑनलाइन अध्ययन सामग्री तैयार कर रहे हैं और बदलते समय के अनुरूप तकनीक के बढ़ते महत्व को स्वीकार कर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
शिक्षा के बदलते स्वरूप के अनुसार शिक्षकों का यह स्वीकार्य व्यवहार अवश्य ही उत्तम परिणाम देगा। बदलाव का यह क्रम यहीं तक सीमित नहीं है, आज समय आ गया है कि पाठ्यक्रम निर्माण में भी मौजूदा बदलावों पर विचार करते हुए उसमें भी आवश्यक संशोधन किए जाएं। इस ओर हमें ज्यादा ध्यान देना है कि युवाओं के लिए विशिष्ट पाठ्यक्रम मासिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (मूक्स) तैयार हो और ऑनलाइन परीक्षा के लिए भी योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ा जाए। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसके विस्तार से न सिर्फ शिक्षा के अाधुनिक स्वरूप को उत्तम श्रेणी में ले जाया जा सकता है बल्कि ये ऑनलाइन या शिक्षा तकनीक का उपयोग रोज़गार के नए अवसरों के सृजन में भी मददगार होगा। शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्रियों का निर्माण प्रत्यक्ष शिक्षण में सहयोग-सामग्री के रूप में कर सकते हैं। साथ ही विद्यार्थियों और प्रशिक्षुओं के लिये ई-सामग्री का सृजन कर सकते हैं।

ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने की ज़रूरत
बीते वर्षों से विश्वविद्यालय के मध्य संसाधनों और ज्ञान की साझेदारी संभव हो सके, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं और लॉकडाउन के इस समय ने इस विषय में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को बल दिया है। ज्ञान-सामग्रियों की ऑनलाइन उपलब्धता इन प्रयासों में अत्यधिक सहायक होगी।
एक विश्वविद्यालय में निर्मित अच्छा व्याख्यान सभी के लिए उपलब्ध रहेगा। विज्ञान, समाज-विज्ञान व इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों में विशिष्ट विद्वानों के व्याख्यानों को भारतीय भाषाओं में अनूदित करवाकर ऑनलाइन माध्यमों से उपलब्ध करवाना, सुदूरवर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए नए अवसर की तरह होगा। यह अवसर भारतीय भाषाओं में विज्ञान और तकनीक के अध्ययन-अध्यापन को भी नई दिशा प्रदान करने में सहयोगी हो सकता है। भारतीय भाषाओं में उपलब्ध ऑनलाइन सामग्री नवाचार और प्रतिभाओं के विकास के लिए भी उपयोगी साबित होगी। यह बदलाव समय की मांग है और लॉकडाउन ने हमें इस दिशा में गंभीरता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।


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