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ममता सांसारिक प्रेम का शुद्ध रूप

Posted On May - 10 - 2020

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज
यदि हम अपने जीवन से उदाहरण लें तो सबसे ऊंची व अच्छी मिसाल मां और बच्चे के सांसारिक प्यार की ही है। एक मां का प्यार अपने बच्चे के लिए दिल से दिल की राह है। इसमें लालच का कोई स्थान नहीं है। एक मां अपने बच्चे के लिए सब कुछ न्योछावर कर देती है। जरूरत पड़ने पर वह अपने हिस्से का भोजन भी बच्चे को खिला देती है। खुद ठंड में रहकर बच्चे को सर्दी से बचाती है। बच्चे के लिए मां की कुर्बानियों व बलिदान का कोई अंत नहीं है। इस पवित्र रिश्ते में एक मां, अपने बच्चे के प्रेम के सिवाय, इस दुनिया के जितने भी लगाव व प्रेम हैं उनको छोड़ देती है। जब बच्चा उसकी बांहों में लेटा होता है, तो वह सब कुछ भूल जाती है और सिर्फ अपने बच्चे के प्यार में मगन रहती है। एक मां अपने बच्चे की इच्छाओं के आगे स्वयं को झुका लेती है। हम जानते हैं कि एक मां का अपने बच्चे के प्रति प्रेम नाजुक और हृदय स्पर्शी है। यह सांसारिक प्रेम का शुद्ध रूप है जो पूरी तरह स्वार्थ से रहित है।
इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि एक प्रभु का प्रेम अपने शिष्य के लिए हजारों माताओं के प्रेम से भी बढ़कर है। सर्वशक्तिमान पिता-परमेश्वर हम सभी को बहुत प्रेम करते हैं। वे हमसे किसी भी प्रकार की कोई आशा नहीं करते। वे केवल हमें देने के लिए ही आते हैं। वे हमेशा हमें अपने अंतर में जाकर उनसे जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। आज मदर्स डे के दिन यह प्रतिज्ञा करें कि हम अपनी मां के नि:स्वार्थ प्यार को न सिर्फ आज, बल्कि प्रतिदिन अपने दिलों में संजो कर रखेंगे। हम परम पिता परमात्मा का भी शुक्रिया अदा करें कि उन्होंने हमें मानव जीवन का सुनहरा अवसर प्रदान किया है। उनके अनगिनत आशीर्वाद व असीम प्रेम का शुक्रिया अदा करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम प्रेम से सदाचारी जीवन जीते हुए ध्यान-अभ्यास में समय दें और आध्यात्मिक मार्ग पर तेजी से बढ़ें।


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