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आरबीआई ने रेपो रेट में की कटौती, ईएमआई चुकाने में 3 महीने की और छूट

Posted On May - 22 - 2020
रिजर्व बैक के फैसलों से भयानक मंदी के संकेत : कांग्रेस

मुंबई, 22 मई (एजेंसी)
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कोरोना संकट के प्रभाव को कम करने के लिए प्रमुख उधारी दर (रेपो रेट) को 0.40 प्रतिशत घटा दिया। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अचानक हुई बैठक में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए रेपो दर में कटौती का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। इस कटौती के बाद रेपो दर घटकर 4 प्रतिशत हो गई है, जबकि रिवर्स रेपो दर 3.35 प्रतिशत हो गई है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली एमपीसी ने पिछली बार 27 मार्च को रेपो दर (जिस दर पर केंद्रीय बैंक बैंकों को उधार देता है) में 0.75 प्रतिशत की कमी करते हुए इसे 4.14 प्रतिशत कर दिया था।
आरबीआई ने कोरोना संकट के कारण कर्ज अदायगी पर ऋण स्थगन (मोराटोरियम) को 3 और महीनों के लिए अगस्त तक बढ़ा दिया है, जिससे कर्जदारों को राहत मिल सके। इससे पहले मार्च में केंद्रीय बैंक ने एक मार्च 2020 से 31 मई 2020 के बीच सभी सावधि ऋण के भुगतान पर तीन महीनों की मोहलत दी थी। इसके साथ ही इन तरह के सभी ऋणों की अदायगी को तीन महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया था। ऋण स्थगन के तहत लोगों से कर्ज के लिए उनके खातों से ईएमआई नहीं ली गई। रिजर्व बैंक की ताजा घोषणा के बाद 31 अगस्त को ऋण स्थगन की अवधि खत्म होने के बाद ही ईएमआई भुगतान शुरू होगा। यानी अब ईएमआई चुकाने में तीन महीने की छूट रहेगी।
रिजर्व बैक के फैसलों से भयानक मंदी के संकेत : कांग्रेस
कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में कमी किए जाने, विकास दर के नकारात्मक रहने का अनुमान लगाए जाने और कर्ज पर ब्याज के भुगतान में मोहलत तीन महीने बढ़ााए जाने के फैसलों से देश में भयानक मंदी के संकेत मिलते हैं। पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने एक बयान में कहा कि रेपो दर में कमी का फायदा आम लोगों को नहीं मिलेगा, क्योंकि कर्ज की मांग नहीं है। हां, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को सस्ता कर्ज लेने का फायदा हो सकता है। हमारे ऊपर इसका बड़ा दुष्प्रभाव रहेगा कि एफडी और बचत खाते पर ब्याज कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने पहली बार यह माना कि मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी विकास दर नकारात्मक रहेगी। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने कहा था कि भारत की विकास दर -5 प्रतिशत तक गिर सकती है। इसका मतलब यह कि देश में भयानक मंदी के संकेत हैं। वल्लभ के मुताबिक कर्ज पर ब्याज के भुगतान में मोहलत को तीन महीने बढ़ा दिया गया। इससे सरकार कथनी और करनी में एक विरोधाभास साबित होता है। एक तरफ तो सरकार 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज से कर्ज की खुराक दे रही है। दूसरी तरफ, इस कदम से यह संदेश दे रही है कि कर्ज की मांग नहीं है।

 


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