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Posted On May - 23 - 2020

आपदा से मुकाबला

22 मई के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘अम्फान की कंपन’ पश्चिमी बंगाल तथा ओडिशा राज्यों में तूफान के कारण हुई बर्बादी का विश्लेषण करने वाला था। इस प्राकृतिक आपदा के चलते छह लाख से भी ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था। इसलिए, सोशल डिस्टेंसिंग के अभाव के कारण स्थिति और ज्यादा बदतर होने की संभावना है। अब उड़ीसा की तरह पश्चिमी बंगाल तथा समुद्र तट से लगते अन्य राज्यों को भी इस प्रकार के तूफानों के साथ रहकर जीना सीखना पड़ेगा। वहीं भवनों के निर्माण की प्रकृति में परिवर्तन करना पड़ेगा। सावधानी के तौर पर ऐसी परिस्थितियों का मुकाबला करने के लिए कुछ तैयारियां पहले ही करनी पड़ेंगी।
शामलाल कौशल, रोहतक

सतर्क रहें
लॉकडाउन के समय को देश के नागरिकों ने पूर्ण धैर्य व हिम्मत से साथ मिलकर पार किया है। लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। अब बाजारों में भीड़ उमड़ने लगी है। सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ने लगा है। ऐसा लगता है जैसे लोगों के मन से कोरोना का भय निकल गया है। वैसे यह एक अच्छा संकेत भी है, जो हमारी दृढ़ मानसिकता व सकारात्मक विचारों को दर्शाता है। लेकिन कहीं लापरवाही सभी के लिए खतरा न बन जाये। आम लोगों को मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए। लेकिन प्रशासन भी लापरवाही कर रहा है। कहीं कोई रोक-टोक नहीं है।
विनय मोहन, खारवन, जगाधरी

रोजगार मुहैया करायें
बिहार और उ.प्र. से ज्यादातर मजदूर रोजी-रोटी के खातिर बाहर जाते हैं। वजह साफ है कि यहां काम नहीं मिलता है। बिहार में कई फैक्टरियां सालों से बंद पड़ी हैं। कोरोना संकट खत्म होने के बाद उन मजदूरों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न होगा और फिर से पलायन को मजबूर होंगे। अतः बिहार सरकार अविलम्ब बन्द पड़े कारखानों को चालू कर रोजगार मुहैया करवाए ताकि श्रमिकों का पलायन भी रुक सके।
ज़फर अहमद, मधेपुरा, बिहार

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com


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