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Posted On May - 21 - 2020

नेपाल की ताल
पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री के विदेश दौरे से भारतीय विदेश नीति मजबूत हुई है। इसमें पड़ोसी देश नेपाल भी शामिल है। वर्ष 2016 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में भूकंप आया था उस समय भारत ने राहत सामग्री पहुंचा कर मदद की थी, जिसके बाद भारत-नेपाल के रिश्ते और मजबूत हुए। लेकिन हाल ही में भारत द्वारा लिपुलेख दर्रा सड़क मार्ग उद्घाटन को लेकर नेपाल ने कड़ी प्रतिक्रिया जतायी है। नेपाल मंत्रिमंडल ने जो नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया है उसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल क्षेत्र में दर्शाया गया है। भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है। जहां एक ओर पुरी दुनिया कोरोना वैश्विक महामारी से खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। वहीं नेपाल के आपसी विवादित रवैया से भारत-नेपाल मधुर संबंध पर बुरा असर दिखाई पड़ने लगा है।
नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी

सरकारों की नाकामी
कोरोना महामारी के चलते शहरों में मजदूरी कर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर रहे श्रमिक अब गांवों की तरफ पलायन करने को मजबूर हैं। लेकिन सरकार के पास गरीबों की समस्याओं का समाधान के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं है। राज्य सरकारों के आपस में समन्वय न बना पाने की कीमत मजदूरों को चुकानी पड़ रही है। इसे देश का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि श्रमिकों को लेकर अब राजनीति शुरू हो गयी है। पलायन कर अपने गांव गये श्रमिकों के सामने राशन-पानी, अनाज और रोजगार का संकट है, लेकिन सरकार आंकड़े दिखाकर जिम्मेदारी का पल्ला नहीं झाड़ सकती।
महेश कुमार, सिद्धमुख, राजस्थान

नब्ज पर हाथ
17 मई के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंक में जीतेंद्र अवस्थी की कहानी ‘पोंगापंथी’ राजनीतिक धरातल का मनोवैज्ञानिक, वैचारिक विश्लेषण करने वाली रही। सामाजिक परिवेश में मिलनसार, परोपकारी, ईमानदार, निष्ठावान कथानायक वर्मा व दूसरी ओर राजनीति के मंजे खिलाड़ी ठाकुर की खलनायक भूमिका विरोधाभास शैली का प्रतीकात्मक उदाहरण रहा।
अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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