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हिमाचल में बढ़ी एमओ और पैरामेडिकल स्टाफ की सेवानिवृत्ति अवधि

Posted On March - 26 - 2020

शिमला, 25 मार्च (निस)
कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और मेडिकल कालेजों में उपलब्ध श्रमशक्ति को मजबूत करने की दृष्टि से उन चिकित्सा अधिकारियों, संकाय सदस्यों और पैरा-मेडिकल स्टाफ की सेवानिवृत्ति को स्थगित करने और इसे अगामी अवधि तक बढ़ाने का आदेश दिया है जो 30 जून, 2020 तक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह आदेश स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान में काम करने वाले सभी श्रेणियों के चिकित्सा अधिकारी, संकाय सदस्य और पैरामेडिकल स्टाफ पर लागू होगा जो 31 मार्च, 30 अप्रैल और 31 मई, 2020 तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
आज शिमला में अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य द्वारा जारी आदेशों के अनुसार जो चिकित्सा अधिकारी और पैरामेडिकल कर्मचारी 31 दिसंबर, 2017 से 29 फरवरी, 2020 की अवधि में सेवानिवृत्त हुए हैं, उनको भी अंतिम पद पर 1 अप्रैल, 2020 से आगामी आदेशों तक पुनर्रोजगार दिया जाएगा। इसके लिए उनकी लिखित सहमति, उपलब्धता और स्वस्थता को ध्यान में रखा जाएगा। वे जिले के संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी या मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्यों के कार्यालयों में अपनी ड्यूटी के बारे में रिपोर्ट करेंगे, जिन्हें आवश्यकता के आधार पर पुनर्रोजगार के आदेश जारी करने और अपने अधिकार क्षेत्र में स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात करने के लिए अधिकृत किया गया है।

लॉकडाउन : मुख्यमंत्री ने लिया स्थिति का जायजा
शिमला (निस) : देश के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश में भी 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार उचित और प्रभावी कदम उठा रही है। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने लॉकडाउन के कारण उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के लिए आज शिमला में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे कि राज्य के बाहर से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा न आए। उन्होंने कहा कि इसके लिए आपूर्ति लाइन के पूरक के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में राशन, दालों और खाद्य तेलों का पर्याप्त भंडार है और पर्याप्त मात्रा में दूध और ब्रेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो उपभोक्ताओं की सुविधा और अनावश्यक भीड़-भाड़ से बचाव के लिए दुग्ध संग्रह केंद्रों की स्थापना की जाएगी। जयराम ठाकुर ने निर्देश दिया कि पशुओं के चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि घुमंतू गद्दी और गुज्जरों और उनके झुंडों को प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए और उनकी सुरक्षा के लिए सभी निवारक उपाय किए जाएं। मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार एवं आर. डी. धीमान, पुलिस महानिदेशक एस.एस. मरडी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुंडू और सचिव जीएडी देवेश कुमार बैठक में शामिल हुए।


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