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सिखाएं इमोशनल इंटेलीजेंस भी

Posted On March - 15 - 2020

पेरेंटिंग

हरनीत
कोई व्यक्ति अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की भावनाओं को किस तरह से मैनेज करता है, इसे इमोशनल इंटेलीजेंस या ईक्यू कहते हैं। किसी भी बच्चे का इंटेलीजेंट होना अच्छा है लेकिन ध्यान इस बात का भी रखना है कि उसमें भावनात्मक बुद्धिमत्ता का भी विकास हो। वैसे हर कोई अपनी भावनात्मक बुद्धिमत्ता बढ़ा सकता है, खासकर बच्चों के मामले में यह आसान है।
सेल्फ अवेयरनेस
सेल्फ अवेयरनेस इस बात की तरफ इशारा करती है कि व्यक्ति अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचाने और उन्हें ध्यान में रखकर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करना सीखें। बच्चों को शुरुआत से ही इसे सिखाने की कोशिश करनी चाहिए।
सेल्फ रेगुलेशन
अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर खुद के व्यवहार में बदलाव लाना सेल्फ रेगुलेशन है।
मोटिवेशन
किसी भी काम को पूरे ध्यान और ऊर्जा के साथ करने के लिए ज़रूरी तत्व मोटिवेशन है। किसी भी टीम या समूह को लीड करते वक्त या महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाने में मोटिवेशन सबसे महत्वपूर्ण है।
सहानुभूति
अपनी चीजों में उलझे होने या मशगूल होने के बावजूद साथियों की परेशानियों को समझ कर उनके प्रति उचित व्यवहार करना सहानुभूति कहलाता है।
सोशल स्किल्स
जिन बच्चों में इमोशनल इंटेलीजेंस ज्यादा होती है वो अपने आसपास के लोगों को अपनी भावनाएं शेयर करने और उनसे बात करने में ज्यादा प्रभावी होते हैं। ऐसे में वो उनसे बेहतर संबंध स्थापित करते हैं, जिससे लोगों का उनके प्रति विश्वास बढ़ता है।
ऐसे कराएं अभ्यास
किसी भी अन्य प्रकार की ट्रेनिंग की तरह ही इमोशनल ट्रेनिंग भी बच्चों को शिक्षित करने का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इमोशनल ट्रेनिंग के अभ्यास से बच्चे अलग-अलग तरह की भावनाओं के बारे में गहरी समझ विकसित कर पाते हैं। वो ये भी समझ पाते हैं कि दूसरों की भावनाओं को आहत किए बिना किस तरह से किसी भी चीज़ पर प्रतिक्रिया देनी है।
तर्कसंगत सोच को बढ़ावा देना
बच्चों के सोचने के तरीके में बदलाव करते हुए उनकी तर्कसंगत सोचने की क्षमता को विकसित किया जा सकता है। इस तरह का व्यवहार बच्चों में समस्याओं को सुलझाने का एटीट्यूड विकसित करता है। भविष्य में आने वाली परेशानियों और समस्याओं को आसानी से हल कर सकने में वे सक्षम हो पाते हैं। अगर आपका बच्चा किसी पज़ल के आखिरी हिस्से को नहीं जोड़ पा रहा है तो उसे बताएं कि वो सही तरीके से दोबारा ध्यानपूर्वक उस पज़ल को सुलझाए।
बात करने के लिए बढ़ावा दें
हर प्रकार की बातचीत मायने रखती है! जब आप कुछ चीजों को लेकर अपने बच्चों से बात करते हैं तो आप उनके अंदर ऐसा गुण विकसित कर रहे होते हैं, जिससे कि वो लोगों के सामने अपने आइडिया शेयर कर सके।
सामाजिक मूल्यों की जानकारी दें
सामाजिक मूल्यों के बारे में बच्चों से बात करें, जिससे कि वो जिंदगी के असली मायने सीख सकें। बच्चों में सकारात्मक गुणों के विकास से आप दूसरों के प्रति उनके मन में आदर पैदा करते हैं। कुछ अन्य तत्वों के विकास से बच्चों के अंदर इमोशनल इंटेलीजेंस बढ़ती जाती है।
लोगों का आदर करना, उन्हें अहमियत देना सिखाएं।
सबसे अच्छा व्यवहार करना, अच्छे तरीके से बात करना भी सामाजिक मूल्यों में आता है। चीजों के प्रति ईमानदार बने रहना, भरोसेमंद बनना, मसलन किसी की खोई हुई चीज़ को वापस करना या ज़रूरतमंद की मदद करना।
भावनाएं शेयर करने के लिए प्रेरित करें
उन्हें अपने भावनात्मक पहलुओं के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करें। बच्चों की भावनाओं को समझ कर आप उनमें ये गुण विकसित करने लगते हैं कि कैसे दूसरों की भावनाएं हमारे लिए मायने रखती हैं, और हर चीज़ में हमें दखल नहीं देना चाहिए। ऐसे में आपके बच्चे ही दूसरों को भावनाओं को शेयर करने और उन्हें समझने में मदद करने लगते हैं।


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