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समाज के व्यापक हितों के लिए नियमन

Posted On March - 24 - 2020

महामारी नियंत्रण कानून

अनूप भटनागर

समाज के व्यापक हितों के लिए नियमन

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के 150 से अधिक देशों में दहशत पैदा करने वाले कोरोना वायरस को अब महामारी घोषित कर दिया है। देश में स्वाइन फ्लू, डेंगू, प्लेग और हैजा जैसी बीमारियां फैलने पर देश के किसी न किसी राज्य के हिस्से में आमतौर पर महामारी बीमारी कानून के प्रावधान लागू किये जाते हैं। किसी भी महामारी को फैलने से रोकने या इसके प्रकोप को सीमित करने के लिए इस कानून में केन्द्र और राज्य सरकारों को विशेष अधिकार प्राप्त हैं।
कोविड-19 की महामारी के प्रकोप को देखते हुए कैबिनेट सचिव ने 11 मार्च को एक बैठक में यह निर्णय लिया कि राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को महामारी बीमारी कानून 1897 की धारा दो के प्रावधानों को लागू करना चाहिए। इससे स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी परामर्श लागू किये जा सकेंगे।
भारत में भी महामारी बीमारी कानून, 1897 है जो 123 साल पुराना है। यह कानून चार फरवरी, 1897 को लागू किया गया था। महामारी बीमारी कानून, 1897 संभवतः सबसे छोटा कानून है, जिसमें सिर्फ चार धाराएं ही हैं। महामारी वाली खतरनाक बीमारियों को फैलने से रोकने और इसकी बेहतर रोकथाम के लिए अंग्रेजी हुकूमत के दौरान यह कानून बनाया गया था। आज़ादी के बाद महामारी बीमारी कानून को एक नवंबर, 1956 को कुछ राज्यों को छोड़कर पूरे भारत में लागू कर दिया गया था। अलग-अलग राज्यों में महामारी की बीमारी से निपटने के लिए इस कानून को लागू करने के उद्देश्य से इसमें समय-समय पर संशोधन भी किये गये।
महामारी बीमारी कानून की धारा दो में खतरनाक महामारी वाली बीमारी से निपटने के लिए विशेष उपाय और नियम बनाने का अधिकार सरकार को प्रदान किया गया है। इस धारा के अंतर्गत किसी भी समय अगर सरकार इस बात से संतुष्ट होती है कि राज्य या उसके किसी हिस्से में किसी खतरनाक महामारी के फैलने या इसके प्रकोप का खतरा है या फैल गयी है और उसे लगता है कि उस समय प्रभावी कानून के सामान्य प्रावधान अपर्याप्त हैं तो वह सार्वजनिक सूचना के माध्यम से किसी भी व्यक्ति को ऐसे अस्थाई नियमों के इस्तेमाल के लिए अधिकृत कर सकती है, जो ऐसी बीमारी को फैलने से रोकथाम के लिए उसे जरूरी लगते हों।
इस धारा में यह भी प्रावधान है कि अधिकृत व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा इस पर किये जाने वाले खर्च, इसमें क्षतिपूर्ति भी शामिल है, के भुगतान के तरीके का निर्धारण किया जा सकेगा। इसी तरह, इस कानून में केन्द्र सरकार को भी विशेष अधिकार प्राप्त हैं। महामारी की भयावहता व अनियंत्रित स्थिति में केन्द्र सरकार रेल या यातायात के दूसरे साधनों से यात्रा कर रहे लोगों की जांच करने या जांच कराने का आदेश दे सकती है। जांच अधिकारी को अगर किसी व्यक्ति के संक्रमित होने का संदेह होता है तो वह उसे अलग किसी अस्पताल या अन्य स्थान पर रखने की व्यवस्था कर सकता है।
इसी तरह, सरकार देश के किसी भी बंदरगाह पर आने या जाने वाले किसी भी जहाज या नौका का निरीक्षण करने के लिए नियम बना सकती है और उसे हिरासत में भी रख सकती है। कानून की धारा तीन में प्रावधान है कि इस कानून के तहत बनाये गये किसी भी नियम या आदेश की अवहेलना दंडनीय है। भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दंडनीय अपराध किया है। इसी तरह कानून की धारा चार में प्रावधान है कि इसके अंतर्गत नेकनीयती के इरादे से की गयी कार्यवाही के संबंध में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या वाद दायर नहीं किया जा सकता है।
महाराष्ट्र के पुणे में 2009 में स्वाइन फ्लू फैलने के कारण महामारी बीमारी कानून की धारा दो में प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल किया गया था ताकि सरकारी अस्पतालों में इस बीमारी की जांच के केन्द्र खोले जा सकें। इसी तरह, 2015 में चंडीगढ़ में डेंगू और मलेरिया की बीमारी से निपटने के लिए इस कानून को लागू किया गया था। इस पर नियंत्रण के लिए तैनात अधिकारियों को इसका उल्लंघन करने वालों को पांच सौ रुपये का चालान करने के निर्देश दिये गये थे।
कोरोना के प्रकोप से देशवासियों को बचाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर प्रयत्नशील हैं। केन्द्र के निर्देश पर कई राज्यों में विदेश से लौटने वाले व्यक्तियों या उनके संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की जांच और उन्हें 14 दिन तक अलग रखने का अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है।
उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और निचली अदालतों में कोरोना की चुनौती से निपटने और न्यायालय कक्ष तथा अदालत परिसर में वकीलों और वादकारियों की भीड़ कम करने के लिए सक्षम प्राधिकारियों ने विशेष कदम उठाये हैं। कई राज्यों ने अपने यहां शिक्षण संस्थानों, शॉपिंग माल, रेस्तरां, स्वीमिंग पूल और जिम जैसे स्थानों को बंद करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, राज्यों ने स्थिति की गंभीरता से अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर भी प्रतिबंध लगाया है।


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