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वीर सिपाही

Posted On March - 15 - 2020

बाल कहानी

ललित शौर्य
टीवी पर देशभक्ति की फ़िल्म चल रही थी। गोले-बारूद, गोलियों की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था। मम्मी-पापा, प्रिया और सावन चारों फ़िल्म देख रहे थे। सबके चेहरे पर अजीब सा रोमांच था। सावन तो ऐसे अनुशासन के साथ बैठकर देख रहा था, मानो वो स्वयं एक सिपाही हो। फ़िल्म में भारतीय सेना ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। दुश्मन सेना की कई सारी चौकियां तबाह कर दी थीं। दुश्मन सैनिक भागने लगे थे। ये सब देखकर प्रिया और सावन जोश से भर गए थे। सावन जोर-जोर से भारत माता की जय और वन्दे मातरम के नारे लगाने लगा था। ऐसा लग रहा था जैसे उसने लड़ाई जीत ली। वो ही पूरे युद्ध का नायक हो। प्रिया के चेहरे पर भी विजयी भाव थे।
‘क्या बात है सावन तुम तो बिल्कुल उत्साह और जोश से भरे हुए लग रहे हो।’, मम्मी ने पूछते हुए कहा।’ ‘जी। मुझे देशभक्ति की फिल्में देखना बहुत पसंद है। मैं भी सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहता हूं। मैं युद्ध लड़ना चाहता हूं।’, सावन पूरे जोश के साथ कड़कती हुई आवाज में बोला।
‘वाह मेरे वीर सिपाही।’, मां ने सावन का माथा चूमते हुए उसे गले लगाते हुए कहा।
‘बेटा सेना केवल युद्ध ही नहीं करती। उसके और भी बहुत सारे काम हैं।’, पापा ने सावन से कहा।
‘अच्छा, और कौन से काम करती है हमारी सेना।’, सावन ने उत्सुकता से पूछा।
‘हमारी बहादुर सेना बाढ़, बरसात, भूस्खलन, भूकम्प आदि प्राकृतिक आपदाओं के समय हम सबकी मदद करती है।’, पापा ने बताया।
‘जी, ठीक कहा आपने पापा। मैंने कई बार टीवी पर सेना को बचाव कार्य करते हुए भी देखा है। एक बार एक छोटा बच्चा बहुत गहरे गड्ढे में गिर गया था। उस समय भी हामरी सेना ही उसे बचाया था।’, सावन बोला।
‘वही तो मैं बताना चाह रहा था। सेना युद्ध के अलावा भी बहुत महत्वपूर्ण है।’, पापा ने कहा।
‘पापा मैं भी सेना में जाना चाहता हूं।’, सावन ने कहा। ‘अरे, वाह। ये तो बहुत अच्छी बात है।’, पापा ने सावन की पीठ थपथपाते हुए कहा।
‘पर कैसे? इसके लिए मुझे क्या करना होगा।’, सावन ने जिज्ञासा व्यक्त करते हुए कहा।
‘ बेटा, सेना के लिए सबसे पहले तुम्हें अपना शरीर ठीक करना होगा। सुबह-सुबह दौड़ लगानी होगी। पुशअप लगाने होंगे। साथ ही साथ पढ़ाई भी करनी होगी।’, पापा ने बताते हुए कहा।
‘ओह्ह, अच्छा। सेना में ऑफिसर कैसे बनते हैं?’ ,सावन ने फिर पूछा।
‘बेटा सेना में अधिकारी बनने के लिए कड़ी मेहनत और अनुशासन की आवश्यकता होती है। तुम बारहवीं के बाद एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर या ग्रेजुएशन के बाद सीडीएस की परीक्षा पास कर के ऑफिसर बन सकते हो।’, पापा ने बताया।
‘मैं बहुत मेहनत करूंगा। एक दिन सेना में अधिकारी बनूंगा। देश सेवा करूंगा।’, सावन ने सावधान की मुद्रा में खड़े होकर कहा।
सावन को देखकर प्रिया, मम्मी और पापा सभी मुस्कुराने लगे।
उधर प्रिया भी मम्मी के कान में कुछ फुसफुसा रही थी। पापा ने प्रिया के सर पर हाथ रखते हुए पूछा, ‘क्या कहना चाह रही हमारी गुड़िया रानी।’
‘पापा क्या लड़कियां भी सेना में जा सकती हैं।’, प्रिया ने धीरे से पूछा।
‘क्यों नहीं। आज बेटियां सेना में जाकर देश को गौरवान्वित कर रही हैं। पहले सेना में मेडिकल फील्ड के इतर बेटियां सेवा नहीं दे पाती थीं। लेकिन अब सेना ने अधिकांश क्षेत्रों में बेटियों के लिए दरवाजे खोल दिये हैं। आज बेटियां सेना के लीगल, इंजीनियरिंग, आर्डिनेंस, इंटेलीजेन्स और एयर ट्रैफिक सिग्नल जैसी महत्वपूर्ण स्ट्रीम में अपनी सेवाएं दे रही हैं।’, पापा ने बताया।
ये सुनते ही प्रिया ने कहा, ‘मैं भी सेना में ऑफिसर बनकर देश सेवा करूंगी।’
अब सावन और प्रिया दोनों ही कमरे में परेड करने लग गए। मम्मी और पापा दोनों को देखर बहुत खुश थे।


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